नैनीताल। उत्तराखंड में लगातार सक्रिय बने हुए मानसून और नैनीताल जिले में लगातार जारी भारी बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन ने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर अहम निर्णय लिया है। मौसम विभाग की ओर से 2 सितंबर, बुधवार को जिले में भारी से बहुत भारी वर्षा के साथ आकाशीय बिजली गिरने और तेज से अति तेज बारिश की चेतावनी जारी किए जाने के बाद प्रशासन ने जिले के सभी कक्षा 1 से 12 तक के विद्यालयों में एक दिन का अवकाश घोषित कर दिया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की ओर से जारी आदेश के अनुसार यह निर्णय सरकारी, अशासकीय, अर्द्धसरकारी और निजी विद्यालयों पर लागू होगा। इसके साथ ही जिले में संचालित सभी आंगनबाड़ी केंद्र भी बुधवार को बंद रहेंगे। प्रशासन ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है, जब लगातार वर्षा के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, मलबा गिरने, सड़कें बाधित होने, जलभराव तथा नदी-नालों और बरसाती गधेरों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि प्रतिकूल मौसम में बच्चों को विद्यालय आने-जाने के लिए मजबूर करना अनावश्यक जोखिम पैदा कर सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए एहतियाती कदम उठाते हुए शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का फैसला किया गया है।
जिले में मौसम की मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने केवल विद्यार्थियों को ही राहत नहीं दी है, बल्कि आदेश के तहत विद्यालयों के प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षक और कार्यालय स्टाफ को भी अवकाश प्रदान किया गया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट किया है कि मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट और वर्षा की गंभीर संभावना को देखते हुए यह निर्णय पूरी तरह सुरक्षा के दृष्टिकोण से लिया गया है। पहाड़ी इलाकों में बारिश के दौरान सड़क मार्गों पर मलबा आने, चट्टानें खिसकने और रास्तों के अचानक अवरुद्ध होने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। कई स्थानों पर बरसाती नाले और रपटे भी अचानक उफान पर आ जाते हैं, जिससे आवागमन बेहद जोखिमपूर्ण हो जाता है। ऐसे हालात में छोटे बच्चों और स्कूली विद्यार्थियों की आवाजाही को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी हो जाती है। हालांकि नैनीताल शहर में संचालित ऐसे आवासीय विद्यालय, जहां विद्यार्थियों के रहने और पढ़ाई की व्यवस्था एक ही परिसर में उपलब्ध है, इस आदेश के दायरे से बाहर रखे गए हैं। प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों और विभागों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि मौसम की चुनौती के बीच किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो और बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।
बारिश की मार का असर अब जिले के सड़क नेटवर्क पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक नैनीताल जिले में कुल 25 सड़क मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिनमें पांच राज्य मार्ग और 20 ग्रामीण मार्ग शामिल बताए गए हैं। लगातार बारिश के कारण कई मार्गों पर मलबा आने, जलभराव और अन्य अवरोधों के चलते यातायात प्रभावित हुआ है। प्रभावित मार्गों में गर्जिया-बेतालघाट-खैरना, रामनगर-भंडारपानी, धानाचूली-खनस्यूं, रानीबाग-खुटानी-पदमपुरी, हैड़ाखान-सिमलिया बेंड, मंगोली-थापला, फतेहपुर-भाखड़ा चौराहा, रातीघाट-बुधलाकोट, भुजियाघाट-सूर्यागांव, खनस्यूं-रिखाकोट और स्यूड़ा-ककोड़-हरीशताल समेत कई महत्वपूर्ण सड़कें शामिल हैं। इन मार्गों के बाधित होने से ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन पर असर पड़ रहा है तथा स्थानीय लोगों को भी आवाजाही में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि संबंधित विभागों की टीमें स्थिति को सामान्य बनाने के लिए लगातार सक्रिय हैं। सड़क मार्गों से मलबा हटाने और यातायात बहाल करने के लिए आवश्यक मशीनरी को मौके पर लगाया गया है। प्रशासन की कोशिश है कि मौसम में सुधार आते ही प्रभावित मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर खोला जाए और जहां भी रास्ते बाधित हैं, वहां राहत एवं बचाव कार्यों में किसी तरह की देरी न हो।
इधर, संभावित आपदा की परिस्थितियों को देखते हुए नैनीताल जिला प्रशासन ने अपनी निगरानी और तैयारियों को भी तेज कर दिया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कहा है कि प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और मौसम से संबंधित प्रत्येक स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। विशेष रूप से मैदानी क्षेत्रों में संभावित जलभराव और बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर कर्मचारियों की तैनाती की गई है। संवेदनशील इलाकों में प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है, ताकि किसी भी अप्रिय परिस्थिति में तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया जा सके। बारिश के दौरान नदी, नाले, गधेरे और बरसाती रपटे सबसे अधिक खतरनाक हो सकते हैं, क्योंकि इनमें पानी का बहाव अचानक तेज हो जाता है। इसी वजह से जिला प्रशासन ने आम लोगों से खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से पूरी तरह बचने की अपील की है। प्रशासन ने विशेष रूप से लोगों को नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों के नजदीक नहीं जाने तथा बरसाती रपटों को पार करने का प्रयास नहीं करने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि मौसम की चुनौती के बीच सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है और नागरिकों का सहयोग संभावित जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।
मौसम विभाग की चेतावनी और जिले में लगातार बिगड़ते हालात के बीच प्रशासन द्वारा स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने का निर्णय एहतियाती व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है। पहाड़ी जिलों में बारिश के दौरान मौसम का स्वरूप तेजी से बदल सकता है और कुछ ही समय में सामान्य स्थिति गंभीर चुनौती में बदल सकती है। ऐसे में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार का जोखिम उठाना प्रशासन के लिए उचित नहीं है। इसी कारण 2 सितंबर, बुधवार को कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी और निजी विद्यालयों तथा सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश रहेगा। आदेश में विद्यालयों के प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षक और कार्यालय कर्मचारियों को भी छुट्टी देने की व्यवस्था की गई है। दूसरी ओर आवासीय व्यवस्था वाले उन विद्यालयों को अलग रखा गया है, जहां विद्यार्थियों की पढ़ाई और रहने की सुविधा एक ही परिसर में उपलब्ध है। प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि आदेश का अनुपालन हर स्तर पर सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही आम नागरिकों से भी मौसम की गंभीरता को समझते हुए सतर्क रहने, बच्चों को अनावश्यक रूप से बाहर न भेजने और संवेदनशील स्थानों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है। जिला प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकना और प्रतिकूल मौसम के दौरान जनसुरक्षा को मजबूत बनाए रखना है।





