रामनगर। क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही जनसमस्याओं को लेकर संयुक्त संघर्ष समिति ने अब प्रशासन के सामने निर्णायक हस्तक्षेप की मांग उठाई है। समिति का एक प्रतिनिधिमंडल उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी तथा महिला एकता मंच की नेत्री सरस्वती जोशी के नेतृत्व में हल्द्वानी पहुंचा और जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल से उनके कार्यालय में मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने रामनगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी, आवश्यक चिकित्सा उपकरणों के अभाव, नजूल भूमि से जुड़े विरासतन नामांतरण की समस्या, यातायात व्यवस्था, पार्किंग संकट तथा सांस्कृतिक संस्था के चुनाव में हो रही देरी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे जिलाधिकारी के सामने रखे। समिति ने कहा कि इन समस्याओं का असर सीधे आम नागरिकों पर पड़ रहा है और लंबे समय से समाधान नहीं होने के कारण लोगों में असंतोष बढ़ रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से केवल आश्वासन नहीं, बल्कि संबंधित विभागों को स्पष्ट समयसीमा के साथ कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने प्रतिनिधिमंडल की ओर से उठाए गए सभी विषयों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस मुलाकात को क्षेत्र की समस्याओं को प्रशासनिक स्तर पर मजबूती से रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सबसे गंभीर मुद्दा रामनगर की स्वास्थ्य व्यवस्था का रहा, जिसे लेकर प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के सामने विस्तार से स्थिति रखी। रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय रामनगर और सामुदायिक केंद्र मालधन में स्वास्थ्य सुविधाओं की मौजूदा स्थिति को लेकर समिति ने चिंता जताई। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि क्षेत्र की आबादी और मरीजों की संख्या के अनुपात में चिकित्सा सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। अस्पतालों में मानकों के अनुरूप विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं होने से गंभीर मरीजों और जटिल बीमारियों से पीड़ित लोगों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है। पैरामेडिकल स्टाफ की कमी भी स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है। समिति ने सीटी स्कैन जैसी आवश्यक जांच सुविधा उपलब्ध कराने तथा आईसीयू की समस्या का समाधान किए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। प्रतिनिधियों ने बताया कि पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए रामनगर का अस्पताल महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है। यदि यहां आवश्यक चिकित्सकीय विशेषज्ञता, जांच सुविधाएं और आपातकालीन व्यवस्था मजबूत हो तो बड़ी संख्या में लोगों को बाहर जाने की मजबूरी से राहत मिल सकती है। समिति ने प्रशासन से स्वास्थ्य सेवाओं को केवल भवन और संसाधनों तक सीमित न रखकर डॉक्टरों, तकनीकी कर्मचारियों, जांच सुविधाओं और गंभीर मरीजों के उपचार की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से जुड़े मरीजों की परेशानी का उल्लेख करते हुए संयुक्त संघर्ष समिति ने सामुदायिक केंद्र मालधन की स्थिति को भी गंभीर विषय बताया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि मालधन सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन अपेक्षित सुविधाओं की कमी के चलते मरीजों को छोटी-बड़ी चिकित्सा जरूरतों के लिए भी रामनगर अथवा अन्य शहरों की ओर जाना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बार-बार बाहर जाकर इलाज कराना अतिरिक्त बोझ बन जाता है। समिति ने स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता के साथ पर्याप्त पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रतिनिधियों का कहना था कि किसी अस्पताल की प्रभावी व्यवस्था केवल भवन या नाम से नहीं बनती, बल्कि वहां प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक जांच उपकरण, आपातकालीन उपचार और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता भी जरूरी है। इसी क्रम में रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय रामनगर में सीटी स्कैन और आईसीयू जैसी सुविधाओं को लेकर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया। समिति ने कहा कि यदि गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल दूसरे शहर रेफर करना पड़े तो कई बार रास्ते की दूरी और समय उनकी परेशानी बढ़ा देता है। इसलिए रामनगर की स्वास्थ्य व्यवस्था को क्षेत्रीय जरूरतों के अनुरूप मजबूत किया जाना आवश्यक है।
इसी मुलाकात के दौरान नजूल भूमि पर बसे भवन स्वामियों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण समस्या भी जिलाधिकारी के सामने रखी गई। समिति ने बताया कि नजूल भूमि पर बने भवन के स्वामी की मृत्यु के बाद विरासतन नामांतरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाने से परिवारों को कई तरह की प्रशासनिक और वित्तीय परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नामांतरण नहीं होने के कारण भवन कर जमा करने में भी दिक्कत पैदा हो रही है, जिससे संबंधित परिवारों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रतिनिधिमंडल ने इस विषय को केवल राजस्व प्रक्रिया का मामला नहीं मानते हुए आम परिवारों की रोजमर्रा की परेशानी से जुड़ा मुद्दा बताया। समिति के अनुसार किसी व्यक्ति के निधन के बाद संपत्ति से संबंधित उत्तराधिकार की प्रक्रिया समय पर पूरी होना जरूरी है, ताकि परिवार के सदस्यों को भविष्य में दस्तावेजी और कर संबंधी अड़चनों का सामना न करना पड़े। प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी से ऐसे मामलों के समाधान के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश देने और लंबित नामांतरण मामलों की स्थिति की समीक्षा करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि वर्षों तक प्रक्रिया लंबित रहने से आम लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। समिति ने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालकर प्रभावित भवन स्वामियों को राहत दी जाएगी और विरासतन नामांतरण की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं खींचा जाएगा।
रामनगर की यातायात व्यवस्था का सवाल भी प्रतिनिधिमंडल की मांगों में प्रमुखता से शामिल रहा। समिति ने बताया कि क्षेत्र में बढ़ते यातायात दबाव के कारण लोगों को आए दिन जाम और आवागमन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से गर्जिया झूला पुल के आसपास यातायात व्यवस्था को लेकर लंबे समय से सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है। संयुक्त संघर्ष समिति ने सुझाव रखा कि कोसी नदी पर गर्जिया झूला पुल के पास एक नया पुल बनाया जाए और उसे रामनगर-पाटकोट मार्ग से जोड़ा जाए। प्रतिनिधिमंडल का मानना है कि वैकल्पिक संपर्क मार्ग विकसित होने से मुख्य यातायात पर दबाव कम किया जा सकता है और क्षेत्र में आवागमन की व्यवस्था अधिक सुचारु बनाई जा सकती है। पर्यटन सीजन और अन्य व्यस्त अवसरों पर रामनगर और आसपास के क्षेत्रों में वाहनों की संख्या बढ़ने से यातायात संबंधी चुनौती और गंभीर हो जाती है। समिति ने प्रशासन से इस प्रस्ताव को केवल स्थानीय मांग के रूप में न देखकर भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखते हुए गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। प्रतिनिधियों ने कहा कि सड़क और पुल जैसी आधारभूत सुविधाएं केवल वर्तमान समस्या का समाधान नहीं करतीं, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक, पर्यटन और सामाजिक विकास की दिशा भी तय करती हैं। ऐसे में वैकल्पिक मार्ग और पुल की संभावनाओं का तकनीकी एवं प्रशासनिक स्तर पर परीक्षण जरूरी है।
पार्किंग की कमी को भी समिति ने रामनगर की यातायात समस्या का महत्वपूर्ण कारण बताया। प्रतिनिधिमंडल ने रामनगर वन प्रभाग के कोसी रेंज कार्यालय के बाहर खाली पड़ी पूरी जमीन का उपयोग पार्किंग निर्माण के लिए किए जाने की मांग जिलाधिकारी के समक्ष रखी। समिति का कहना था कि शहर में वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ पार्किंग का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है और पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं होने के कारण वाहन सड़क किनारे खड़े किए जाते हैं। इसका सीधा असर यातायात की गति और सड़क सुरक्षा पर पड़ता है। यदि उपलब्ध सरकारी अथवा विभागीय भूमि का उचित नियोजन के साथ उपयोग किया जाए तो शहर के व्यस्त क्षेत्रों में पार्किंग का दबाव कम किया जा सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने कोसी रेंज कार्यालय के बाहर उपलब्ध खाली भूमि को इस दृष्टि से उपयोगी बताते हुए प्रशासन से स्थल का परीक्षण कराने का आग्रह किया। समिति के अनुसार पार्किंग व्यवस्था को मजबूत किए बिना यातायात सुधार के प्रयास अधूरे रहेंगे। शहर में आने वाले स्थानीय नागरिकों के साथ पर्यटकों के वाहनों की संख्या भी कई अवसरों पर काफी बढ़ जाती है। ऐसे में व्यवस्थित पार्किंग स्थल उपलब्ध होना आवश्यक है। प्रतिनिधियों ने प्रशासन से इस प्रस्ताव की व्यवहारिकता, भूमि की स्थिति और संबंधित विभागीय नियमों का परीक्षण कर आवश्यक निर्णय लेने की मांग की।
इसके अलावा प्रगतिशील सांस्कृतिक पर्वतीय समिति पैंठपडाव के चुनाव से संबंधित मामला भी प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुखता से उठाया। समिति ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि उपनिबंधक चिट फंड समिति हल्द्वानी द्वारा चुनाव की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब किए जाने के कारण संस्था से जुड़े लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिनिधियों का कहना था कि किसी भी पंजीकृत सामाजिक अथवा सांस्कृतिक संस्था की लोकतांत्रिक प्रक्रिया निर्धारित समय पर पूरी होना आवश्यक है। चुनाव में देरी होने से संस्था के संचालन और सदस्यों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा होती है। प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए संबंधित अधिकारी से स्थिति स्पष्ट कराने तथा नियमानुसार चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की। समिति ने जिलाधिकारी से आग्रह किया कि मामले को संबंधित विभाग के स्तर पर भेजकर अनावश्यक विलंब के कारणों की जानकारी ली जाए और यदि प्रक्रिया में कोई प्रशासनिक बाधा है तो उसे दूर कराया जाए। प्रतिनिधियों ने कहा कि सांस्कृतिक संस्थाएं स्थानीय समाज की पहचान और सामुदायिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए ऐसी संस्थाओं की आंतरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था लंबे समय तक बाधित नहीं रहनी चाहिए। समिति ने उम्मीद जताई कि जिलाधिकारी के हस्तक्षेप से यह मामला भी शीघ्र आगे बढ़ेगा और संस्था के सदस्यों को राहत मिलेगी।
प्रशासनिक कार्यालय में हुई इस मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने रामनगर क्षेत्र की समस्याओं को अलग-अलग विभागों से जोड़कर देखने के बजाय एक व्यापक जनहित के दृष्टिकोण से समाधान किए जाने की मांग रखी। प्रभात ध्यानी ने क्षेत्र की समस्याओं को जनता की रोजमर्रा की जरूरतों से जोड़ते हुए कहा कि स्वास्थ्य, यातायात, संपत्ति संबंधी दस्तावेज, पार्किंग और सामाजिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली जैसे विषय सीधे आम नागरिकों को प्रभावित करते हैं। महिला एकता मंच की नेत्री सरस्वती जोशी ने भी जनसमस्याओं के समयबद्ध समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के सामने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि समस्याओं को ज्ञापन तक सीमित रखने के बजाय संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करते हुए धरातल पर कार्रवाई जरूरी है। उप ग्राम प्रधान भगवती, पुष्पा, पूर्व अपर सचिव लोकायुक्त जे सी उप्रेती और प्रियांश सहित प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों ने भी विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखी। प्रतिनिधियों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि जिन मामलों में विभागीय स्तर पर निर्णय संभव है, उन पर शीघ्र कार्रवाई हो तथा जिन प्रस्तावों के लिए शासन स्तर की अनुमति आवश्यक है, उन्हें संबंधित स्तर तक भेजा जाए। इस दौरान क्षेत्र की समस्याओं को लेकर समिति की सक्रियता भी सामने आई।
मुलाकात के अंत में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों द्वारा रखे गए विभिन्न विषयों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से दिए गए निर्देशों के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि स्वास्थ्य सेवाओं, नजूल भूमि से जुड़े नामांतरण, यातायात व्यवस्था, पार्किंग और सांस्कृतिक संस्था के चुनाव जैसे मुद्दों पर जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है। संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने जिस व्यापक तरीके से समस्याओं को सामने रखा, उससे यह स्पष्ट है कि रामनगर क्षेत्र में कई ऐसे विषय हैं जिनका समाधान केवल अस्थायी कदमों से संभव नहीं होगा। इसके लिए विभागों के बीच समन्वय, नियमित निगरानी और निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई की जरूरत है। स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े सवालों में जहां मानव संसाधन और चिकित्सा उपकरणों की आवश्यकता है, वहीं यातायात संबंधी मांगों के लिए दीर्घकालिक आधारभूत योजना जरूरी होगी। नजूल भूमि के मामलों में प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाना होगा, जबकि सांस्कृतिक संस्था के चुनाव से जुड़ी समस्या के लिए संबंधित विभाग को समयबद्ध निर्णय लेना होगा। अब जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद यह देखना अहम होगा कि अधिकारियों की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है। प्रतिनिधिमंडल ने साफ संकेत दिया है कि जनता से जुड़े इन मुद्दों को लगातार उठाया जाता रहेगा और समाधान होने तक प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जाता रहेगा।





