काशीपुर। नगर निगम सभागार में शुक्रवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने शहर की स्थानीय सरकार और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कार्यप्रणाली को नई दिशा देने का संकेत दिया। आमतौर पर पार्षद अपने-अपने वार्डों की समस्याओं को लेकर अलग-अलग विभागों के कार्यालयों के चक्कर लगाते रहे हैं और कई बार महीनों तक समाधान का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग दिखाई दी। महापौर दीपक बाली की पहल पर जनता से सीधे जुड़े विभागों के अधिकारियों को एक ही छत के नीचे बुलाया गया, जहां वार्डों के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने खुलकर अपने क्षेत्रों की समस्याएं रखीं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि अधिकारियों ने केवल शिकायतें सुनने तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि प्रत्येक विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए समाधान की समय-सीमा भी स्पष्ट रूप से बताई। काशीपुर के नगर निगम के इतिहास में इस प्रकार का समन्वित संवाद पहली बार देखने को मिला, जिसने मौजूद पार्षदों को भी आश्चर्यचकित कर दिया। बैठक के दौरान यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि यदि सभी विभाग एक मंच पर बैठकर जनहित के विषयों पर चर्चा करें तो समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया तेज और अधिक प्रभावी हो सकती है। यही कारण रहा कि बैठक का पूरा माहौल केवल औपचारिकता तक सीमित न रहकर सीधे जनसरोकारों पर केंद्रित दिखाई दिया और उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने इसे प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
बैठक की अध्यक्षता स्वयं महापौर दीपक बाली ने की, जबकि उनके साथ मुख्य नगर आयुक्त रविंद्र सिंह बिष्ट भी पूरे समय मौजूद रहे। नगर निगम सभागार में आयोजित इस समन्वय बैठक का उद्देश्य केवल शिकायतें सुनना नहीं बल्कि प्रत्येक विभाग को उसके दायित्वों के प्रति प्रत्यक्ष रूप से जवाबदेह बनाना था। लंबे समय से वार्डों के पार्षद अपने क्षेत्रों में व्याप्त नागरिक सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों को महापौर के समक्ष रखते आ रहे थे। इन्हीं लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए महापौर ने यह व्यवस्था बनाई कि संबंधित विभागों के अधिकारी स्वयं पार्षदों की बात सुनें और उसी समय समाधान की दिशा स्पष्ट करें। बैठक में जैसे ही पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं का उल्लेख किया, संबंधित अधिकारियों ने बारी-बारी से उन विषयों पर अपनी प्रतिक्रिया दी और यह भी बताया कि कौन-सी समस्या कितने समय में दूर की जा सकती है। जिन मामलों में तकनीकी या प्रशासनिक प्रक्रिया अपेक्षाकृत लंबी थी, वहां भी अधिकारियों ने संभावित समयावधि बताकर पार्षदों को भरोसा दिलाया कि मामले लंबित नहीं रहने दिए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया ने बैठक को सामान्य समीक्षा बैठक से अलग बना दिया, क्योंकि पहली बार विभागों को सीधे निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रश्नों का जवाब देना पड़ा और समाधान की समय-सीमा भी सार्वजनिक रूप से निर्धारित करनी पड़ी।
बैठक में सबसे अधिक चर्चा विद्युत व्यवस्था से जुड़े विषयों पर हुई। अलग-अलग वार्डों का प्रतिनिधित्व कर रहे पार्षदों ने बिजली आपूर्ति, जर्जर अधोसंरचना और सुरक्षा से जुड़े अनेक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। कई स्थानों पर ट्रांसफार्मरों की क्षमता कम होने के कारण लोगों को बिजली की समस्या झेलनी पड़ रही है, इसलिए ट्रांसफार्मरों का लोड बढ़ाने और जहां आवश्यकता हो वहां नए ट्रांसफार्मर स्थापित करने की मांग रखी गई। इसके साथ ही नालियों और सड़कों के बीच खड़े बिजली के खंभों को हटाने, जर्जर हो चुके विद्युत पोलों को बदलने, नई कॉलोनियों तथा जरूरत वाले क्षेत्रों में नए खंभे लगाकर विद्युत लाइनें बिछाने और सड़कों पर नीचे झूल रही बिजली की तारों को सुरक्षित ऊंचाई पर व्यवस्थित करने की मांग भी प्रमुखता से सामने आई। इन सभी विषयों को विद्युत विभाग की ओर से उपस्थित महक मिश्रा तथा दीपचंद पांडे ने गंभीरता से सुना। उन्होंने प्रत्येक बिंदु पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया और कई मामलों में समय-सीमा भी निर्धारित की। बैठक में मौजूद पार्षदों ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि पहली बार विभागीय अधिकारी केवल औपचारिक जवाब देने के बजाय समाधान की दिशा और निर्धारित समय के साथ अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते दिखाई दिए।
जनहित से जुड़े अन्य विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई और कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। पार्षद संजय शर्मा ने अपने वार्ड की बिजली और अतिक्रमण संबंधी समस्याओं के अलावा वर्षा ऋतु में बढ़ रहे सांप तथा अन्य जहरीले जीव-जंतुओं के खतरे का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में ऐसी घटनाएं बढ़ जाती हैं, इसलिए काशीपुर में ही आवश्यक वैक्सीन और जीवनरक्षक इंजेक्शनों की पर्याप्त व्यवस्था रहनी चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को बाहर न जाना पड़े। इस पर एलडी भट्ट राजकीय चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर एसके दीक्षित ने स्पष्ट किया कि अस्पताल में आवश्यक दवाइयों और उपचार की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि किसी व्यक्ति को सांप काटने अथवा इस प्रकार की कोई अन्य आपात स्थिति सामने आती है तो उसके उपचार के लिए जरूरी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध हैं और मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी। इस जवाब के बाद बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षा जताई कि भविष्य में भी इस प्रकार की आपात परिस्थितियों के लिए तैयारियां मजबूत रखी जाएं ताकि नागरिकों को समय पर उपचार मिल सके और किसी प्रकार की असुविधा न हो।
बैठक के दौरान अनेक वार्डों का प्रतिनिधित्व करने वाले पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को क्रमवार रखा। इनमें अनिल कुमार, कुलदीप शर्मा, बीना नेगी, दीपा पाठक, पुष्कर बिष्ट, सतीश कुमार, वैशाली गुप्ता, घनश्याम सैनी, प्रिंस बाली, अब्दुल कादिर, मोहम्मद अर्शी, मयंक मेहता, पार्षद पति सादिक हुसैन तथा नेता प्रतिपक्ष एवं पार्षद रासिद फारुकी प्रमुख रूप से शामिल रहे। सभी जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने वार्डों की समस्याओं को विस्तार से रखा और अपेक्षा व्यक्त की कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका समाधान कराया जाएगा। अधिकांश पार्षदों ने महापौर दीपक बाली द्वारा आयोजित इस समन्वय बैठक को अत्यंत सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि यदि इसी प्रकार सभी विभाग नियमित रूप से जनप्रतिनिधियों के साथ बैठकर चर्चा करें तो नागरिकों की परेशानियां काफी हद तक कम हो सकती हैं। पार्षद पति सादिक हुसैन ने सुझाव दिया कि इस तरह की बैठक केवल एक बार आयोजित करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रत्येक माह नियमित रूप से आयोजित की जानी चाहिए ताकि पुराने मामलों की समीक्षा भी हो सके और नई समस्याओं का भी समय पर समाधान सुनिश्चित किया जा सके। बैठक के दौरान यह भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी कि संवाद और जवाबदेही की यह व्यवस्था भविष्य में भी निरंतर जारी रहनी चाहिए।
समापन के दौरान महापौर दीपक बाली ने सभी विभागीय अधिकारियों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि बैठक में जिन-जिन समस्याओं का उल्लेख किया गया है, उनका समाधान निर्धारित समय के भीतर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी कारणवश कोई विभाग किसी समस्या का समाधान स्वयं नहीं कर सकता तो वह यह अवश्य बताए कि उसका निस्तारण किस स्तर पर संभव है, ताकि नगर निगम उस विषय को उच्च स्तर पर उठाकर आवश्यक कार्रवाई करा सके। बैठक में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि सिंचाई विभाग की ओर से कोई अधिकारी उपस्थित नहीं हुआ, जिसे महापौर ने गंभीर विषय मानते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की। बैठक में संदीप वर्मा (एआरटीओ), जल संस्थान के अधिकारी नरेंद्र कुमार रिखाडी, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से विपिन चंद्र पाठक, राजकीय चिकित्सालय से मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर एस के दीक्षित एवं डॉक्टर अजयवीर सिंह, शिक्षा विभाग से अजय शंकर कौशिक सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन अधीक्षक अनिरुद्ध गौड ने किया। इस अवसर पर सहायक नगर आयुक्त विनोद लाल, कार्यालय अधीक्षक विकास शर्मा, मेयर प्रतिनिधि चौधरी समरपाल सिंह, जसवीर सिंह सैनी, मुकेश चावला, प्रकाश नेगी सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे। बैठक के अंत में यह संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि यदि विभागीय समन्वय, समयबद्ध जवाबदेही और जनप्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद की यही व्यवस्था आगे भी कायम रहती है तो काशीपुर में नागरिक समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और तेज हो सकती है।





