रामनगर। अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी और सहयोगी संगठनों ने प्रदेशव्यापी जन संवाद की बड़ी पहल शुरू करने का ऐलान किया है। 9 अगस्त से खटीमा के शहीद स्थल से शुरू होने वाली यह जन संवाद यात्रा पहले चरण में जनपद उधम सिंह नगर की सभी नौ विधानसभा सीटों से होकर गुजरेगी। तीन दिनों तक चलने वाले इस अभियान के दौरान राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, जन आंदोलनों से जुड़े कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, अधिवक्ताओं, पत्रकारों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से सीधा संवाद स्थापित करने की योजना है। यात्रा का उद्देश्य केवल राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि उत्तराखंड से जुड़े उन मूलभूत सवालों को केंद्र में लाना बताया गया है, जिनका असर आम आदमी के जीवन, रोजगार और भविष्य पर पड़ रहा है। खटीमा शहीद स्थल से यात्रा की शुरुआत किए जाने को भी राजनीतिक और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि उत्तराखंड के राज्य आंदोलन में खटीमा का शहीद स्थल संघर्ष, बलिदान और राज्य निर्माण की आकांक्षाओं का प्रमुख प्रतीक रहा है। यात्रा के आयोजकों का कहना है कि इसी ऐतिहासिक स्थल से जनता के बीच पहुंचकर राज्य की मौजूदा परिस्थितियों पर खुला संवाद शुरू किया जाएगा और लोगों से उनकी समस्याओं, अपेक्षाओं तथा भविष्य की दिशा को लेकर विचार-विमर्श किया जाएगा।
जन संवाद यात्रा की तैयारियों के संबंध में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष और राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी तथा समाजवादी लोकमंच के गिरीश चंद्र आर्य ने संयुक्त बयान जारी कर केंद्र की मोदी सरकार और उत्तराखंड की धामी सरकार पर तीखे राजनीतिक आरोप लगाए हैं। दोनों नेताओं ने दावा किया कि केंद्र और राज्य की सरकारें जनता की बुनियादी समस्याओं का समाधान करने में अपेक्षित रूप से सफल नहीं रही हैं और अपनी नीतिगत कमियों तथा कथित विफलताओं से लोगों का ध्यान हटाने के लिए धर्म, जाति और क्षेत्रवाद जैसे मुद्दों को राजनीतिक बहस का केंद्र बनाया जा रहा है। प्रभात ध्यानी का आरोप है कि इस तरह की राजनीति समाज के विभिन्न वर्गों के बीच दूरी बढ़ाने और लोगों को आपस में उलझाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जन संवाद यात्रा के दौरान इन मुद्दों को सीधे जनता के सामने रखा जाएगा और यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि आम नागरिक आज किन परिस्थितियों से गुजर रहा है। आयोजकों के अनुसार यात्रा का स्वरूप किसी एक दल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें उन सभी लोगों को साथ जोड़ने का प्रयास होगा जो उत्तराखंड के मूल सवालों पर अपनी बात रखना चाहते हैं और राज्य के भविष्य को लेकर गंभीर चिंतन करते हैं।
प्रभात ध्यानी ने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन की भावना केवल अलग राज्य प्राप्त करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे पहाड़ और प्रदेश के आम लोगों के जीवन में बेहतर बदलाव, रोजगार के अवसर, शिक्षा की मजबूती, पलायन पर रोक, स्थानीय संसाधनों पर जनता का अधिकार और सम्मानजनक जीवन की अपेक्षा भी जुड़ी थी। उनके अनुसार आज भी राज्य के सामने वही अनेक सवाल अलग-अलग रूपों में मौजूद हैं, जिन्हें लेकर जनता ने आंदोलन के दौरान संघर्ष किया था। जन संवाद यात्रा के माध्यम से रोजी-रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा, रोजगार, पलायन और राज्य की मूल अवधारणा जैसे विषयों पर आम नागरिकों से बातचीत की जाएगी। उनका कहना है कि इन सवालों को राजनीतिक भाषणों के बजाय जनता की भागीदारी के साथ समझने की जरूरत है। यात्रा के आयोजक यह भी मानते हैं कि लोकतंत्र में जनता की भूमिका केवल चुनाव के समय मतदान करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। सरकारों की नीतियों, योजनाओं और फैसलों पर लगातार सवाल करना तथा जनहित के मुद्दों पर संवाद कायम रखना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी सोच के साथ यात्रा को जन संगठनों और आम लोगों के बीच संवाद का माध्यम बनाने की तैयारी की गई है।
आयोजकों ने बताया कि इस अभियान में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ सामाजिक और राजनीतिक संगठनों, जन संगठनों, बुद्धिजीवियों, अधिवक्ताओं, पत्रकारों तथा समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों को भी आमंत्रित किया गया है। प्रभात ध्यानी के मुताबिक उत्तराखंड जैसे राज्य में स्थानीय परिस्थितियों और क्षेत्रीय समस्याओं को समझने के लिए अलग-अलग वर्गों की आवाज को एक मंच पर सुनना जरूरी है। उनका कहना है कि प्रदेश के विकास की दिशा पर चर्चा केवल राजनीतिक दलों के कार्यालयों या सत्ता के गलियारों में नहीं होनी चाहिए, बल्कि गांवों, कस्बों, बाजारों, मजदूर बस्तियों, युवाओं, किसानों, महिलाओं और आम नागरिकों के बीच भी होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से जन संवाद यात्रा के दौरान स्थानीय स्तर पर लोगों से उनकी समस्याएं सुनने और उनके सुझाव दर्ज करने का प्रयास किया जाएगा। यात्रा में शामिल होने वाले संगठनों और व्यक्तियों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवों को सामने लाने की कोशिश होगी। आयोजकों का दावा है कि यह पहल भविष्य में प्रदेश के व्यापक जन मुद्दों को लेकर एक साझा विमर्श तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
यात्रा में प्रदेश और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्रों से जुड़े कई प्रमुख लोग भी भागीदारी करेंगे। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक पीसी तिवारी, भारत की लोक जिम्मेदार पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व अपर सचिव लोकायुक्त जीवन चंद्र उप्रेती, वरिष्ठ पत्रकार चारु तिवारी, राष्ट्रीय हित जन समर्थन पार्टी के उम्मेद सिंह नेगी, आरपी सिंह, मजदूर नेता मुकुल तथा उच्च न्यायालय नैनीताल के अधिवक्ता डीके जोशी सहित अनेक लोगों के इस अभियान में शामिल होने की जानकारी दी गई है। अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े इन लोगों की मौजूदगी से आयोजक यात्रा को व्यापक जन सरोकारों से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी राज्य की समस्याओं को एक ही नजरिये से नहीं समझा जा सकता और इसके लिए राजनीतिक, सामाजिक, श्रमिक, कानूनी तथा पत्रकारिता से जुड़े लोगों की भागीदारी जरूरी है। यात्रा में इन वर्गों के प्रतिनिधियों द्वारा अपने-अपने अनुभव और विचार साझा किए जाने की संभावना है। इससे स्थानीय मुद्दों को व्यापक प्रदेश स्तरीय संदर्भ में रखने का अवसर मिलेगा। आयोजकों के मुताबिक यात्रा के दौरान जनता के सवालों को प्राथमिकता दी जाएगी और स्थानीय लोगों को अपनी बात सीधे रखने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम की निर्धारित रूपरेखा के अनुसार 9 अगस्त को अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर जन संवाद यात्रा खटीमा शहीद स्थल से प्रारंभ होगी। खटीमा से निकलने के बाद यात्रा नानकमत्ता पहुंचेगी, जहां स्थानीय लोगों और जन संगठनों से जुड़े व्यक्तियों के साथ संवाद किए जाने की योजना है। खटीमा से शुरुआत का चयन आयोजकों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह स्थल उत्तराखंड राज्य आंदोलन के बलिदान और संघर्ष की स्मृति से जुड़ा हुआ है। अगस्त क्रांति दिवस पर इसी स्थान से प्रदेशव्यापी संवाद अभियान की शुरुआत करने के पीछे आयोजकों की मंशा राज्य आंदोलन की मूल भावना को वर्तमान जन समस्याओं के साथ जोड़ने की बताई जा रही है। यात्रा के दौरान स्थानीय परिस्थितियों को समझने और क्षेत्र की जनता की प्राथमिक समस्याओं को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। नानकमत्ता में संवाद के बाद अभियान अगले दिन की यात्रा के लिए आगे बढ़ेगा। आयोजकों ने लोगों से इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने और अपनी समस्याओं तथा सुझावों को खुलकर रखने की अपील की है।
दूसरे दिन यानी 10 अगस्त को जन संवाद यात्रा सितारगंज और किच्छा होते हुए रुद्रपुर पहुंचेगी। इस चरण में औद्योगिक क्षेत्र, रोजगार, स्थानीय संसाधन, श्रमिकों से जुड़े प्रश्न, शिक्षा और शहरी सुविधाओं सहित विभिन्न विषयों पर लोगों से चर्चा किए जाने की योजना है। सितारगंज और किच्छा से होते हुए रुद्रपुर तक का क्षेत्र आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यहां रोजगार और श्रमिक हितों से जुड़े सवाल भी जन संवाद का हिस्सा बन सकते हैं। यात्रा के आयोजकों का कहना है कि किसी भी क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए वहां रहने वाले लोगों से सीधे बातचीत करना जरूरी है। इसी दृष्टिकोण के तहत स्थानीय लोगों को अपनी समस्याएं और अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया है। रुद्रपुर पहुंचने के बाद भी विभिन्न जन संगठनों और सामाजिक समूहों के साथ संवाद की प्रक्रिया जारी रहने की बात कही गई है। आयोजकों के अनुसार यात्रा का मकसद किसी एक मुद्दे को राजनीतिक रूप से उछालना नहीं, बल्कि जनता की रोजमर्रा की समस्याओं को व्यापक राजनीतिक विमर्श से जोड़ना है।
तीसरे और अंतिम दिन 11 अगस्त को यात्रा गदरपुर, बाजपुर और काशीपुर होते हुए जसपुर पहुंचेगी, जहां उधम सिंह नगर में जन संवाद यात्रा के पहले चरण का समापन किया जाएगा। इस मार्ग में कृषि, श्रमिक, व्यापार, शिक्षा, रोजगार, पलायन और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को प्रमुखता देने की बात कही गई है। गदरपुर और बाजपुर जैसे क्षेत्रों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि से जुड़े सवाल महत्वपूर्ण हैं, जबकि काशीपुर और जसपुर में रोजगार, उद्योग, शिक्षा और शहरी सुविधाओं से संबंधित विषयों पर लोगों की राय सामने आ सकती है। आयोजकों का कहना है कि तीन दिनों की इस यात्रा के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों से प्राप्त अनुभवों को एकत्रित कर प्रदेश स्तर पर व्यापक जन संवाद को आगे बढ़ाया जाएगा। पहले चरण का समापन जसपुर में होने के बाद यात्रा के अगले चरणों को लेकर भी संगठन स्तर पर योजना तैयार की जाएगी। फिलहाल उधम सिंह नगर के नौ विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने वाली यह पहल क्षेत्रीय समस्याओं को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास मानी जा रही है।
प्रभात ध्यानी ने प्रदेश के लोगों से अपील की है कि वे जन संवाद यात्रा में केवल दर्शक के रूप में शामिल न हों, बल्कि अपने क्षेत्र की समस्याओं और सुझावों के साथ सक्रिय भागीदारी करें। उनका कहना है कि उत्तराखंड के भविष्य को लेकर जनता की राय को सामने लाना इस अभियान की प्रमुख प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि रोजी-रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे किसी एक राजनीतिक दल अथवा संगठन के नहीं, बल्कि पूरे समाज के सवाल हैं। पलायन और राज्य की अवधारणा से जुड़े विषय भी उत्तराखंड के भविष्य से सीधे जुड़े हुए हैं। आयोजकों का मानना है कि इन मुद्दों पर व्यापक संवाद के बिना प्रदेश की वास्तविक समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। इसी कारण विभिन्न विचारधाराओं और सामाजिक पृष्ठभूमियों से जुड़े लोगों को अभियान में आमंत्रित किया गया है। उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी और सहयोगी संगठनों की यह यात्रा आने वाले दिनों में कितना व्यापक राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव पैदा करती है, यह तो समय बताएगा, लेकिन अगस्त क्रांति दिवस पर खटीमा शहीद स्थल से इसकी शुरुआत ने इसे राजनीतिक रूप से खासा महत्वपूर्ण बना दिया है।
जन संवाद यात्रा को लेकर जारी संयुक्त बयान में प्रभात ध्यानी और गिरीश चंद्र आर्य ने कहा कि जनता के वास्तविक मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि सरकारों की नीतियों और फैसलों पर जनता के बीच खुली चर्चा होनी चाहिए तथा लोकतंत्र में आम नागरिक की भागीदारी को मजबूत किया जाना जरूरी है। यात्रा के दौरान सरकारों की कथित नीतिगत विफलताओं पर सवाल उठाने के साथ-साथ वैकल्पिक राजनीतिक और सामाजिक सोच पर भी चर्चा किए जाने की संभावना है। आयोजकों का प्रयास है कि अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय जन संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक-दूसरे से जोड़कर साझा मुद्दों पर संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। खटीमा से शुरू होकर नानकमत्ता, सितारगंज, किच्छा, रुद्रपुर, गदरपुर, बाजपुर, काशीपुर और जसपुर तक पहुंचने वाली यह यात्रा पहले चरण में उधम सिंह नगर की पूरी राजनीतिक तस्वीर को जनता के नजरिए से समझने का प्रयास करेगी। इसके बाद प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के जन संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है। फिलहाल अगस्त क्रांति के अवसर पर शुरू होने वाली यह यात्रा सरकारों के सामने जन सवालों को मजबूती से रखने और जनता को उन मुद्दों पर एकजुट करने के उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने जा रही है।





