अयोध्या। सनातन संस्कृति के सबसे बड़े केंद्र और पावन नगरी अयोध्या से इस वक्त एक ऐसी सनसनीखेज और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे देश के धार्मिक और सियासी हलकों में एक बड़ा भूचाल ला दिया है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन जन्मस्थली पर बन रहे भव्य मंदिर की देखरेख करने वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक सोमवार को संपन्न हुई, जिसमें लिए गए फैसलों ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। इस बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल बैठक के तुरंत बाद मीडिया के सामने आए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने बेहद भारी मन और गंभीर लहजे में एक ऐसी घोषणा की, जिसने राम भक्तों के दिलों को तार-तार कर दिया। कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी के बेहद संगीन मामले से आहत होकर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और एक अन्य वरिष्ठ ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से जो त्यागपत्र दिया था, उसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया है। कोषाध्यक्ष ने अत्यंत भावुक होते हुए कहा कि राम मंदिर परिसर के भीतर हुई इस ऐतिहासिक चढ़ावा चोरी की घटना से ट्रस्ट का प्रत्येक सदस्य भीतर तक पूरी तरह टूट चुका है और सभी के मन में इस कुकृत्य को लेकर भारी आक्रोश और गहरा दुख व्याप्त है।
अयोध्या के ऐतिहासिक और बेहद प्रतिष्ठित मणिराम दास छावनी के पवित्र परिसर में आयोजित की गई इस अति-संवेदनशील बैठक में कई ऐसे कड़े और अप्रत्याशित मोड़ देखने को मिले, जिसकी उम्मीद शायद किसी को नहीं थी। बैठक के दौरान खुद कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने अत्यंत निष्पक्षता और साहस का परिचय देते हुए सार्वजनिक रूप से इस कड़वे सच को स्वीकार किया कि वर्तमान मंदिर ट्रस्ट की संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रबंधन में वाकई कुछ बहुत बड़ी और अक्षम्य खामियां मौजूद थीं, जिसका फायदा उपद्रवियों ने उठाया। चढ़ावा चोरी के इस बेहद संगीन और घिनौने मामले को लेकर बंद कमरे में हुई इस गहन चर्चा में सभी सदस्यों ने एक सुर में कहा कि इस आपराधिक कृत्य के कारण दुनिया भर में फैले हुए करोड़ों राम भक्तों की अटूट आस्था और उनकी पवित्र धार्मिक भावनाओं को बहुत गहरी ठेस पहुँची है, जिसकी भरपाई कर पाना नामुमकिन है। बेहद तनावपूर्ण और गंभीर माहौल में आयोजित हुई यह पूरी बैठक पूज्य महंत नृत्य गोपाल दास की गरिमामयी अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें भविष्य की सुरक्षा को लेकर कई कड़े फैसले लिए गए। बैठक की शुरुआत करते हुए कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने सभी उपस्थित सदस्यों के सामने वर्तमान संकट से जुड़े एजेंडे को अत्यंत तार्किक ढंग से पेश किया, जिस पर कई घंटों तक मैराथन मंथन चलता रहा।
इस बेहद गोपनीय और निर्णायक बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें देश के कई बड़े संत और प्रशासनिक अधिकारी एक साथ माथापच्ची करने के लिए एकजुट हुए थे। मणिराम दास छावनी के भीतर साक्षात मौजूद रहने वाले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सम्मानित सदस्यों में विश्व तीर्थ प्रसनाचार्य, स्वामी परमानंद गिरी, जगद्गुरु बासुदेवानंद सरस्वती, कृष्ण मोहन, और महंत दिनेंद्र दास जैसी शीर्ष धार्मिक विभूतियां शामिल थीं, जिन्होंने इस मुद्दे पर अपने तीखे विचार रखे। इसके अलावा शासन-प्रशासन के स्तर पर पदेन सदस्य के रूप में अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी स्वयं बैठक में मुस्तैद रहे, जबकि विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के वरिष्ठ नेता दिनेश चंद्र और महंत कमल नयन दास भी इस ऐतिहासिक विमर्श में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पहुँचे। वहीं दूसरी तरफ, इस बैठक को वैधानिक और सर्वसमावेशी बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा भी लिया गया, जिसके तहत वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए ट्रस्ट के मुख्य संयोजक के परासन, पदेन सदस्य एवं प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद, केंद्रीय सचिव प्रशांत लोखंडे और मंदिर निर्माण समिति के अत्यंत प्रतिष्ठित अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी सीधे दिल्ली और लखनऊ से जुड़े रहे और हर फैसले पर अपनी सहमति दी।
राम मंदिर की गरिमा और पवित्रता से जुड़े इस अत्यंत संवेदनशील चोरी के मामले पर बोलते हुए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने बैठक के समापन के तुरंत बाद देश के प्रमुख मीडिया घरानों से बेहद संजीदगी के साथ बात की। उन्होंने इस बात का एक बहुत बड़ा खुलासा किया कि ट्रस्ट की यह अति-महत्वपूर्ण बैठक मूल रूप से आगामी 11 जुलाई के लिए निर्धारित की गई थी, लेकिन देशव्यापी आक्रोश और मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे जितनी जल्दी हो सके आयोजित करना अनिवार्य हो गया था। इसी अपरिहार्य कारणवश, सभी संबंधित सदस्यों को आनन-फानन में दी गई विशेष सूचना और आमंत्रण के आधार पर, इस बैठक को आज ही के दिन यानी 6 जुलाई को ही आयोजित करने का एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया गया। स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने भरे गले से मीडिया के सामने यह स्वीकार किया कि इस पावन धाम में हुई चोरी की इस अप्रत्याशित घटना से हम सभी बेहद आहत, लज्जित और दुखी हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि चोरी की गई राशि या सामग्री कितनी बड़ी थी या कितनी छोटी थी, यह हमारे लिए पूरी तरह से एक गौण और महत्वहीन बात है; मुख्य चिंता और आत्मग्लानि की बात तो यह है कि रामलला के दरबार में ऐसा असुरक्षित माहौल आखिर बनने ही कैसे दिया गया।

कोषाध्यक्ष ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आज सच्चाई पूरी तरह से हमारे सामने नग्न रूप में खड़ी है और उस कड़वे सच पर बिना किसी लीपापोती के विचार करना और कड़े कदम उठाना ही हमारा सबसे पहला और परम कर्तव्य है। उन्होंने बेहद साफगोई से बताया कि इसी आत्ममंथन की वजह से अपनी पूर्व निर्धारित तारीख से कई दिन पहले ही हम सब आज अत्यंत गहरे चिंतन, आत्मग्लानि और गहरे दुख के साये में एक साथ एकजुट हुए हैं, क्योंकि मौजूदा हालात ने मंदिर की साख के सामने एक बेहद गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। इसी नैतिक जिम्मेदारी और अंतरात्मा की आवाज को सुनते हुए हमारे कर्मठ महासचिव चंपत राय और माननीय ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने बैठक की शुरुआत में ही अपने-अपने पदों से इस्तीफ़ा सौंप दिया था। उन्होंने बताया कि इतने वर्षों से महासचिव के तौर पर रात-दिन एक करके काम कर रहे चंपत राय इस पूरे घटनाक्रम से भीतर तक इतने ज्यादा आहत थे कि उन्हें आत्मग्लानि महसूस हो रही थी। चंपत राय का स्पष्ट मानना था कि जब तक इस पूरे मामले में न्याय पूरी तरह से नहीं हो जाता, यानी असली दोषियों को बेनकाब करके पकड़ा नहीं जाता और उन्हें कानून के तहत उचित सज़ा नहीं मिलती, तब तक उनका इस उच्च पद पर बने रहना किसी भी तरह से नैतिक रूप से ठीक नहीं है।
इसी उच्च नैतिक भावना और त्याग की भावना से पूरी तरह प्रेरित होकर उन्होंने बिना किसी संकोच के अपना इस्तीफा ट्रस्ट के सामने रख दिया, जो कि एक ऐसा संवेदनशील मामला नहीं था जिसे हम आपसी प्रभाव में आकर बस आसानी से स्वीकार या अस्वीकार कर देते। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने भावुक मन से कहा कि एक बार जब चंपत राय और अनिल मिश्रा जैसे समर्पित व्यक्तित्वों ने अपनी अंतरात्मा की पुकार पर इस्तीफ़ा सौंप दिया, तो उसे स्वीकार करने या न करने का फ़ैसला वास्तव में हमारे व्यावहारिक हाथ में भी नहीं रह गया था, क्योंकि उनके संकल्प के आगे हमें बस उसे स्वीकार करना ही था। फलस्वरूप, गहरे दुख के साथ ट्रस्ट ने सामूहिक रूप से उनके इस्तीफे को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी, लेकिन उस विदाई के क्षण में हम सभी ने चंपत राय द्वारा पिछले कई वर्षों में राम मंदिर के भव्य निर्माण के लिए दी गई अतुलनीय और ऐतिहासिक सेवाओं को न सिर्फ खुले दिल से माना बल्कि उसकी भूरि-भूरि सराहना भी की। उन्होंने सचमुच एक बहुत बड़े और विशाल दिल का परिचय देते हुए यह आत्मघाती फैसला खुद लिया है, क्योंकि उन्होंने अपने जीवन के इतने स्वर्णिम साल सिर्फ और सिर्फ प्रभु राम के भव्य मंदिर को साकार करने के लिए पूरी तरह समर्पित कर दिए हैं।
इस बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक फेरबदल के बाद अयोध्या से आ रही खबरों के मुताबिक, अब इस अति-महत्वपूर्ण पद की भारी ज़िम्मेदारी कृष्ण मोहन को सौंपी गई है, जो इस समय यहां अंतरिम जनरल सेक्रेटरी यानी अंतरिम महासचिव के तौर पर मंच पर विराजमान हैं। मीडिया और सोशल मीडिया पर लगातार लगाए जा रहे उन आरोपों पर भी कोषाध्यक्ष ने खुलकर अपनी बात रखी, जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि मंदिर में चढ़ाए गए कई अन्य बेहतरीन और बेशकीमती चढ़ावे तथा श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई अनमोल चीज़ें भी बिना किसी सुराग के रहस्यमयी तरीके से गायब हो चुकी हैं। इन तमाम तरह की अफवाहों और गंभीर आरोपों का पूरी तरह से खंडन करने के लिए स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज स्वयं मीडिया के सामने उन सभी बहुमूल्य चीज़ों का पूरा रिकॉर्ड रखने वाला एक विशाल और प्रामाणिक सरकारी रजिस्टर लेकर आए थे। उन्होंने बेहद आक्रामक और पारदर्शी अंदाज में कहा कि हम जनता के सामने उन सभी चीज़ों का एक-एक विवरण पेश करेंगे जिनके बारे में पिछले कुछ दिनों से लगातार तीखे सवाल उठाए जा रहे हैं, और हम आज ये सब कुछ पूरी तरह से आपके सामने प्रत्यक्ष रूप से दिखाने जा रहे हैं ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। इसके अलावा, उन्होंने पूरे देश को आश्वस्त करते हुए साफ तौर पर बताना चाहा कि ट्रस्ट के पास ऐसी कुल 2800 अत्यंत कीमती चीज़ों की सूची वाला एक सुरक्षित रजिस्टर मौजूद है और वे सभी वस्तुएं पूरी तरह से सुरक्षित और महफूज स्थान पर रखी हुई हैं।
राम मंदिर की साख को दोबारा बहाल करने और भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए ट्रस्ट अब पूरी तरह से कमर कस चुका है, जिसके तहत आगामी 22 तारीख को एक और बहुत बड़ी और निर्णायक बैठक बुलाई गई है। कोषाध्यक्ष ने देश को भरोसा दिलाते हुए कहा कि ट्रस्ट ऐसे बेहतरीन, पारदर्शी और अभेद्य काम को सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और हमने इस विशेष मकसद के लिए सुरक्षा ऑडिट और खास अधिकारियों को नियुक्त करने के वास्ते एक बेहद प्रभावी और छोटी सी उच्च-स्तरीय कमेटी का गठन भी कर दिया है। हम इसी तरह पूरी पारदर्शिता के साथ काम को लगातार आगे बढ़ाएंगे और अपनी अगली रणनीति तय करने के लिए 22 तारीख को फिर से एक बार अयोध्या की पावन धरती पर मिल रहे हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि तब तक इस पूरे घोटाले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) की अंतिम और बेहद विस्तृत रिपोर्ट भी हमें पूरी तरह से मिल जाएगी, जिससे पूरी साजिश का पर्दाफाश हो सकेगा। हम उस जांच रिपोर्ट पर बिंदुवार चर्चा करने और राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त ट्रस्टी नियुक्त करने के वास्ते ही 22 तारीख को दोबारा मिल रहे हैं। हम दुनिया के सामने बेहद साफ़ तौर पर कहना चाहते हैं कि चोरी तो आख़िरकार चोरी होती है और चूंकि एसआईटी अभी इस पूरे संवेदनशील मामले की गहराई से जांच कर रही है, इसलिए यह पूरी तरह से स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भी नैतिक ज़िम्मेदारी बनती है। हम भी एक सुर में सरकार से यह ज़ोरदार मांग करते हैं कि इस पवित्र धाम को कलंकित करने वाले असली दोषियों को पाताल से भी ढूंढकर पकड़ा जाए और उन्हें ऐसी सख्त सजा दी जाए जो एक मिसाल बने।





