लखनऊ। उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी और सियासी गलियारों में सोमवार को उस समय हलचल बेहद तेज हो गई, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में राज्य मंत्रिमंडल की एक बेहद संवेदनशील और व्यापक असर डालने वाली बैठक संपन्न हुई। इस हाई-प्रोफाइल बैठक के भीतर सूबे की तकदीर और तस्वीर को बदलने वाले करीब दो दर्जन से अधिक ऐसे क्रांतिकारी प्रस्तावों पर गहन मंथन किया गया, जो आने वाले समय में राज्य के विकास की नई पटकथा लिखने जा रहे हैं। कैबिनेट के एजेंडे में शिक्षा के आधुनिकीकरण, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे, बड़े पैमाने पर रोजगार के सृजन, चमचमाते नगरीय विकास, उन्नत कृषि तकनीकों और चुस्त-दुरुस्त प्रशासनिक सुधारों से जुड़े हुए कई बड़े और चौंकाने वाले विषय शामिल रहे, जिन पर मंत्रियों के बीच लंबी चर्चा हुई। सत्ता के शीर्ष सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन तमाम फैसलों को केवल सरकारी फाइलों को आगे बढ़ाने की एक सामान्य प्रक्रिया नहीं माना जा रहा है, बल्कि इन्हें सूबे के समग्र विकास और आम आदमी के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने की दिशा में उठाया गया अब तक का सबसे बड़ा और जनहितैषी कदम माना जा रहा है।
इस बेहद अहम कैबिनेट बैठक के भीतर जिस सबसे संवेदनशील और मानवीय पहलू से जुड़े प्रस्ताव पर मुहर लगाने की तैयारी की गई, वह सीधे तौर पर दिन-रात सुरक्षा व्यवस्था में मुस्तैद रहने वाले हजारों होमगार्ड स्वयंसेवकों के चेहरों पर बड़ी मुस्कान लाने वाला साबित हुआ है। लंबे समय से अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे होमगार्ड संगठन की बेहद पुरानी और जायज मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने उनके लिए पांच लाख रुपये तक की शानदार कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के दूरगामी प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। इस अभूतपूर्व और बड़े फैसले के धरातल पर उतरते ही उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में तैनात हजारों जांबाज होमगार्ड जवानों और उनके आश्रित परिवारों को किसी भी अचानक आई गंभीर बीमारी, आकस्मिक दुर्घटना या बड़े मेडिकल इमरजेंसी के वक्त भारी-भरकम आर्थिक तबाही से सीधे तौर पर मुक्ति मिल जाएगी। सरकार का यह कदम साफ तौर पर यह दर्शाता है कि वह अंतिम पायदान पर खड़े सुरक्षाकर्मियों को एक मजबूत सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
खेल के मैदानों में पसीना बहाकर वैश्विक स्तर पर भारत का तिरंगा ऊंचा करने वाले होनहार और प्रतिभावान खिलाड़ियों के सुनहरे भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी इस कैबिनेट बैठक में एक बेहद क्रांतिकारी और बड़ा फैसला लिया गया। राज्य सरकार ने खेल संस्कृति को जमीनी स्तर पर बेहद मजबूत और आकर्षक बनाने के इरादे से विभिन्न सरकारी विभागों के भीतर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमक बिखेरने वाले पदक विजेता खिलाड़ियों को सीधे सरकारी नौकरी में शामिल करने यानी सीधी भर्ती का एक बेहद शानदार अवसर प्रदान करने वाले प्रस्ताव को अपनी मंजूरी की ओर आगे बढ़ा दिया है। इस साहसिक कदम के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वह दूरदर्शी सोच काम कर रही है जिसके तहत वे चाहते हैं कि देश के लिए मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को भविष्य में रोजी-रोटी के लिए दर-दर न भटकना पड़े और उन्हें समाज में एक अत्यंत सम्मानजनक और सुरक्षित रोजगार हासिल हो सके। जानकारों का मानना है कि सरकार के इस बड़े ऐलान के बाद सूबे के गांवों और कस्बों में छिपी हुई नई खेल प्रतिभाओं को एक नया और बेहद मजबूत प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे आने वाले दिनों में खेलों के प्रति युवाओं का आकर्षण कई गुना बढ़ जाएगा।
सूबे की युवा शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने और उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा बिजनेस तथा टेक्नोलॉजी हब बनाने के इरादे से नई स्टार्टअप नीति-2026 को कैबिनेट के पटल पर एक प्रमुख एजेंडे के तौर पर पेश किया गया, जिसने आर्थिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस नई और बेहद आधुनिक नीति के मसौदे में नए जमाने के उद्यमियों और स्टार्टअप इकाइयों को बाजार में मजबूती से पैर जमाने के लिए भारी-भरकम सरकारी सब्सिडी, शुरुआती वित्तीय सहायता, टैक्स के मोर्चे पर बड़ी रियायतें तथा कई अन्य आकर्षक और लुभावने प्रोत्साहन दिए जाने का एक बेहद मजबूत और स्पष्ट प्रावधान शामिल किया गया है। सरकार की इस नीति का मूल लक्ष्य बहुत साफ है कि वह सूबे के पढ़े-लिखे और प्रतिभावान युवाओं को महज नौकरी की तलाश में भटकने वाला एक बेबस बेरोजगार नहीं, बल्कि दूसरों को बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाला एक बेहद सफल और सक्षम उद्यमी बनाना चाहती है। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का साफ तौर पर कहना है कि यह नई और आधुनिक नीति उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य में नवाचार, अत्याधुनिक तकनीक और नए विचारों पर आधारित उद्योगों को एक ऐसी तेज रफ्तार देगी जिसकी कल्पना पहले कभी नहीं की गई थी।
संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समय के अनुकूल बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के शीर्ष पदों पर बैठे पदाधिकारियों के संदर्भ में भी एक बेहद गरिमापूर्ण निर्णय लिया है। कैबिनेट के समक्ष आयोग के माननीय अध्यक्ष एवं सम्मानित सदस्यों की सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन की दरों में एक बड़ा और समयानुकूल संशोधन करने से जुड़ा हुआ एक बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया, जिसमें उनकी मौजूदा पेंशन राशि को बढ़ाने का एक स्पष्ट प्रावधान शामिल किया गया है। राज्य सरकार का यह दृढ़ मानना है कि सूबे की सबसे बड़ी भर्ती और प्रशासनिक परीक्षाओं का संचालन करने वाली इन अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं के शीर्ष पदाधिकारियों के सेवा लाभों और मिलने वाली सुविधाओं में वक्त के साथ बदलाव करना बेहद आवश्यक है। ऐसा करने से न केवल व्यवस्था के भीतर एक बेहतर संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी, बल्कि यह पूरी प्रशासनिक मशीनरी को और अधिक प्रभावी, निष्पक्ष और पूरी तरह से जवाबदेह बनाने की दिशा में भी एक बड़ा और कारगर कदम साबित होगा।
सामाजिक सुरक्षा और पंथनिरपेक्षता के सिद्धांतों को और अधिक व्यापक रूप देते हुए सोमवार को आयोजित हुई इस कैबिनेट बैठक में मदरसा शिक्षा परिषद के अंतर्गत आने वाले तमाम अनुदानित अरबी-फारसी मदरसों में अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों के हक में भी एक बेहद भावुक और बड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया गया। इस नए और महत्वपूर्ण प्रस्ताव के जरिए सरकार ने यह व्यवस्था सुनिश्चित की है कि यदि किसी मदरसा शिक्षक की सेवा अवधि के दौरान किसी कारणवश असामयिक या अचानक मृत्यु हो जाती है, तो उनके बेहद संकटग्रस्त परिजनों को बिना किसी प्रशासनिक हीलाहवाली के तुरंत बड़ी ग्रेच्युटी की राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। इस बड़े मानवीय निर्णय के जरिए मदरसा शिक्षकों और उनके आश्रित परिवारों को एक बेहद मजबूत और जरूरी सामाजिक सुरक्षा का अतिरिक्त लाभ हासिल होगा, जिसकी मांग लंबे समय से की जा रही थी। सरकार के इस कदम को शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले सभी वर्गों के प्रति एक समान और बेहद संवेदनशील नजरिए के रूप में देखा जा रहा है, जिससे शिक्षकों के भीतर अपने भविष्य को लेकर एक बड़ा भरोसा पैदा हुआ है।
ग्रामीण अंचलों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालन और कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान से बचाने के लिए भी इस कैबिनेट बैठक में एक बेहद अनूठी और जीवनदायिनी योजना के खाके को मंजूरी की ओर बढ़ाया गया है। ग्रामीण इलाकों की आर्थिक तरक्की को एक नया और मजबूत आधार देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना की एक बेहद व्यापक और विस्तृत कार्ययोजना को कैबिनेट के समक्ष अंतिम विचार के लिए प्रस्तुत किया गया। इस योजना का मुख्य और एकमात्र उद्देश्य सूबे के लाखों गरीब और सीमांत पशुपालकों को एक ऐसा मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच प्रदान करना है ताकि किसी भयानक बीमारी, महामारी या अचानक आई किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में यदि उनके मवेशियों या दुधारू पशुओं की असमय मौत हो जाती है, तो उन्हें किसी भी तरह के बड़े आर्थिक नुकसान का सामना न करना पड़े। कृषि और पशुपालन पर पूरी तरह निर्भर रहने वाली उत्तर प्रदेश की विशाल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मंदी के दौर से उबारने और किसानों की आय को दोगुनी करने के प्रयासों में यह बीमा योजना आने वाले दिनों में एक बेहद मील का पत्थर साबित होने जा रही है।
उत्तर प्रदेश के युवाओं को उनके अपने ही जिलों में उच्च शिक्षा और आधुनिक तकनीकी ज्ञान के विश्वस्तरीय अवसर उपलब्ध कराने के इरादे से शिक्षा के क्षेत्र में भी तीन नए विशाल विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े हुए प्रस्तावों को इस कैबिनेट बैठक में एक साथ हरी झंडी दिखाई गई है। सरकार ने राज्य के शैक्षणिक ढांचे का विस्तार करते हुए कानपुर के बिल्हौर क्षेत्र में महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय की स्थापना, दिल्ली से सटे गाजियाबाद जिले में अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय तथा फतेहपुर जनपद के भीतर ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय की स्थापना को कानूनी और प्रशासनिक मंजूरी देने का एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक प्रस्ताव कैबिनेट के पटल पर रखा। इन तीनों उच्च स्तरीय और आधुनिक विश्वविद्यालयों के धरातल पर शुरू होने से न केवल उत्तर प्रदेश के हजारों छात्र-छात्राओं को अपने घर के पास ही उच्च शिक्षा के बिल्कुल नए और आधुनिक विषय मिलेंगे, बल्कि इन संबंधित क्षेत्रों के भीतर बड़े पैमाने पर शैक्षणिक विकास, शोध कार्यों और स्थानीय रोजगार को एक अभूतपूर्व और नई ऊर्जा हासिल होगी।
सूबे के बड़े महानगरों को स्मार्ट सिटी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की बुनियादी सुविधाओं से लैस करने के अभियान के तहत इस कैबिनेट बैठक में नगरीय विकास से जुड़े कई बेहद अनूठे और वित्तीय मोर्चे पर आत्मनिर्भर बनाने वाले प्रस्तावों पर भी मंत्रियों के बीच गंभीर चर्चा हुई। सरकार ने बड़े शहरों की तरक्की को एक नई और तेज रफ्तार देने के लिए गोरखपुर और मुरादाबाद जैसे तेजी से उभरते हुए नगर निगमों के लिए बाजार से पैसा जुटाने की खातिर म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने की मंजूरी का एक बेहद आधुनिक और बड़ा प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखा। इस नई वित्तीय व्यवस्था के लागू होने से इन दोनों प्रमुख नगर निकायों के पास अपनी आंतरिक आधारभूत संरचनाओं, जैसे आधुनिक सड़कों के चौड़ीकरण, विश्वस्तरीय जल निकासी प्रणालियों, साफ और शुद्ध पेयजल की घर-घर आपूर्ति और अन्य तमाम सार्वजनिक सुविधाओं के कायाकल्प के लिए भारी-भरकम अतिरिक्त वित्तीय संसाधन बहुत ही आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। सरकार का यह साफ मानना है कि म्यूनिसिपल बॉन्ड के जरिए शहरों का विकास अब सरकारी बजट के भरोसे नहीं रुकेगा और नागरिक सुविधाओं में तेजी आएगी।
वैश्विक पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से उभरती हुई और करोड़ों हिंदुओं की आस्था के सबसे बड़े केंद्र धार्मिक नगरी वाराणसी में चल रही विकास परियोजनाओं को और अधिक गति देने के लिए भी सोमवार की कैबिनेट बैठक में एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा भूमि आवंटन का फैसला लिया गया। वाराणसी शहर के भीतर लगातार बढ़ने वाले ट्रैफिक जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने और पर्यटकों को एक बेहद रोमांचक और आधुनिक सफर का अहसास कराने के लिए प्रस्तावित की गई रोपवे पायलट परियोजना के लिए आवश्यक और बेशकीमती भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने अपनी प्रशासनिक सहमति दे दी है। इस फैसले के तहत परियोजना के निर्माण के लिए जो भी जरूरी जमीन होगी, उसे पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत वाराणसी विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित करने की कार्रवाई को बेहद तेज गति से आगे बढ़ाया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी रोपवे परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद न केवल प्राचीन शहर वाराणसी की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से सुगम और जाममुक्त हो जाएगी, बल्कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय छोटे व्यापारियों और गाइडों की कमाई में भी भारी उछाल आएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े केंद्र गोरखपुर में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ तथा आम आदमी के लिए सुलभ बनाने के इरादे से स्वास्थ्य क्षेत्र का एक बेहद बड़ा प्रस्ताव भी इस कैबिनेट बैठक के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल रहा। सरकार ने गोरखपुर के भीतर एक अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस 100 बेड वाले नए अस्पताल के निर्माण के लिए आवश्यक सरकारी भूमि को तुरंत उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर अपनी अंतिम मुहर लगाने की दिशा में कदम बढ़ाए। इसके साथ ही, ग्रामीण इलाकों की सूरत बदलने और बीमारियों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत पंचायती राज विभाग की नई संचालन एवं अनुरक्षण नीति को भी कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया गया। इस नीति का मुख्य लक्ष्य उत्तर प्रदेश के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में बनाई गई स्वच्छता संबंधी तमाम सामुदायिक सुविधाओं और शौचालयों को अधिक प्रभावी, साफ-सुथरा और लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखना है, जिससे गांवों में रहने वाले लोगों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।
सरकारी कामकाज के तौर-तरीकों को बेहद पारदर्शी, तेज और लालफीताशाही से पूरी तरह मुक्त करने के इरादे से इस कैबिनेट बैठक के भीतर कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक नियमावलियों में बड़े और कड़े संशोधनों के प्रस्तावों को भी पूरी प्राथमिकता के साथ शामिल किया गया था। प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा सुधार करने के लिए उत्तर प्रदेश अधीनस्थ (सहकारी समितियां एवं पंचायत) लेखा परीक्षा सेवा की प्रथम संशोधन नियमावली तथा उत्तर प्रदेश परिवीक्षा अधिकारी राजपत्रित सेवा नियमावली-2026 में समय के अनुकूल कई बड़े बदलावों के प्रस्तावों को कैबिनेट के समक्ष रखा गया। इसके अलावा, राज्य के लाखों कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए वेतन समिति-2016 की महत्वपूर्ण सिफारिशों पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित की गई उच्च स्तरीय समिति की तमाम अनुशंसाओं और रिपोर्ट को भी कैबिनेट की मंजूरी दिलाने का एक बेहद बड़ा प्रस्ताव पटल पर रखा गया, जिससे सरकारी कर्मचारियों के भीतर अपनी मांगों को लेकर एक सकारात्मक संदेश गया है।
सोमवार को संपन्न हुई इस मैराथन कैबिनेट बैठक के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक मामलों के बड़े विशेषज्ञों का साफ तौर पर मानना है कि कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किए गए ये तमाम दो दर्जन प्रस्ताव केवल सामान्य प्रशासनिक या रूटीन सरकारी निर्णय मात्र नहीं हैं। वास्तव में ये तमाम फैसले उत्तर प्रदेश के भीतर आने वाले कई दशकों के दीर्घकालिक, मजबूत और चौतरफा विकास की एक बेहद ठोस बुनियाद तैयार करने वाले ऐतिहासिक और युगांतरकारी कदम साबित होने जा रहे हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल, स्टार्टअप, ग्रामीण विकास, शहरी आधारभूत संरचना और प्रशासनिक सुधारों जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में लिए जा रहे इन तमाम कड़े और लोक-कल्याणकारी निर्णयों का सीधा और वास्तविक लाभ सूबे के लाखों-करोड़ों आम नागरिकों, युवाओं, किसानों और कर्मचारियों तक बेहद पारदर्शी तरीके से पहुंचेगा।
उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार लगातार धरातल पर एक ऐसी सुदृढ़ और व्यापक सोच वाली नीतियों पर काम कर रही है, जिनसे राज्य के भीतर बड़े पैमाने पर देश-विदेश का भारी पूंजी निवेश आ सके, सूबे के लाखों बेरोजगार युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार सम्मानजनक रोजगार के नए अवसर मिल सकें, अन्नदाता किसानों और गरीब पशुपालकों को हर मौसम में पूरी आर्थिक सुरक्षा हासिल हो सके तथा सूबे के अंतिम छोर पर बैठे आम नागरिक को भी बिना किसी भेदभाव के उच्च स्तरीय स्वास्थ्य और शिक्षा की तमाम बुनियादी सुविधाएं बहुत ही आसानी से मिल सकें। सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित हुई यह महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक भी इसी व्यापक, समावेशी और दीर्घकालिक विकास की दूरगामी दृष्टि का एक बेहद सशक्त और बड़ा हिस्सा मानी जा रही है, जिसने विपक्षी खेमे में भी हलचल मचा दी है। इस ऐतिहासिक बैठक के संपन्न होने के बाद अब पूरे प्रदेश की जनता, प्रशासनिक अमले, उद्योग जगत और युवाओं की पैनी निगाहें सरकार द्वारा बहुत जल्द जारी होने वाले इन तमाम फैसलों के आधिकारिक शासनादेशों और उन्हें धरातल पर उतारने की समयबद्ध रूपरेखा पर पूरी तरह से टिकी हुई हैं।





