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कार्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेंज में विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रकृति संरक्षण का महाअभियान शुरू

प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिये। हमारे भविष्य के लिये।" थीम के तहत वन अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मिलकर किया भारी पौधारोपण तथा 'एक पेड़ मां के नाम' और स्वच्छता पखवाड़ा को बनाया ऐतिहासिक सफल।

रामनगर। कार्बेट टाइगर रिजर्व के रामनगर (नैनीताल) क्षेत्र में आज विश्व पर्यावरण दिवस के पावन और ऐतिहासिक अवसर पर प्रकृति संरक्षण की एक बेहद अनूठी और प्रेरणादायक गाथा लिखी गई। ढेला रेंज के घने और सुरम्य जंगलों के बीच वन विभाग के आला अधिकारियों, समर्पित कर्मचारियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सीमावर्ती ग्रामीणों ने मिलकर पर्यावरण सुरक्षा का एक ऐसा अभूतपूर्व महाशंखनाद किया, जिसकी गूंज पूरे प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में सुनाई दे रही है। दिनांक 05 जून 2026 को आयोजित इस वृहद और गरिमामयी कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य न केवल वन क्षेत्र की हरियाली को बढ़ाना था, बल्कि मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को एक नई मजबूती प्रदान करना भी था। इस वर्ष संपूर्ण विश्व में गूंज रही विशेष थीम “प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिये। हमारे भविष्य के लिये।” को पूरी तरह आत्मसात करते हुए ढेला रेंज के अंतर्गत आने वाले विभिन्न संवेदनशील इलाकों और चौकियों में सघन पौधारोपण अभियान चलाया गया। इस महाअभियान के तहत केवल औपचारिक रूप से पौधे नहीं रोपे गए, बल्कि उनके दीर्घकालिक संरक्षण और संवर्धन की सामूहिक जिम्मेदारी भी तय की गई, जिसने इस सरकारी आयोजन को एक वास्तविक जन-आंदोलन में तब्दील कर दिया।

इस महाभियान की सबसे भावुक और समाज को झकझोर देने वाली तस्वीर तब सामने आई जब देशव्यापी अभियान “एक पेड मॉ के नाम” के तहत विभिन्न वन चौकियों में तैनात सुरक्षा स्टाफ और जांबाज कर्मचारियों ने अत्यंत श्रद्धा भाव के साथ पौधों को मिट्टी में रोपा। इस बेहद मार्मिक और भावनात्मक पहल ने वहां मौजूद हर एक व्यक्ति की आंखों को नम और दिल को गर्व से भर दिया, क्योंकि प्रत्येक पौधे को एक मां की ममता और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखा गया। ढेला रेंज के इस सुदूरवर्ती और चुनौतीपूर्ण परिवेश में तैनात वन कर्मियों ने संकल्प लिया कि वे इन नव-रोपित पौधों की देखभाल ठीक उसी तरह करेंगे जैसे एक मां अपने बच्चों का पालन-पोषण करती है। वन विभाग के इस कदम ने न केवल पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता को उजागर किया, बल्कि जंगलों की सुरक्षा में तैनात फ्रंटलाइन स्टाफ के मानवीय चेहरे को भी समाज के सामने पुरजोर तरीके से पेश किया। इस दौरान उपस्थित स्थानीय जनमानस को भी अपने जीवन के विशेष अवसरों पर अनिवार्य रूप से पौधारोपण करने हेतु गहराई से प्रेरित किया गया, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और समृद्ध सांसों का बैंक तैयार किया जा सके।

हरियाली की इस पावन त्रिवेणी को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे स्वच्छता पखवाड़ा के अंतर्गत ढेला रेंज कार्यालय के आस-पास के संपूर्ण परिसर और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पी०डब्लू०डी रोड के किनारों पर एक विशाल एवं सघन सफाई अभियान चलाया गया। इस स्वच्छता अभियान के दौरान वन विभाग की टीमों और ग्रामीणों ने मिलकर चिलचिलाती धूप की परवाह किए बिना झाड़ियों और रास्तों के किनारों से भारी मात्रा में फैला हुआ घातक प्लास्टिक कूड़ा-कचरा एकत्र किया। जंगलों और वन्यजीवों के स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके इस नॉन-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक कचरे को पूरी वैज्ञानिक पद्धति से ठिकाने लगाने के लिए तुरंत प्रसिद्ध पर्यावरण संस्था ‘वेस्ट वारियर्स’ को निस्तारण हेतु भेजा गया। यह कदम इसलिए भी बेहद क्रांतिकारी माना जा रहा है क्योंकि कार्बेट जैसे अति-संवेदनशील बाघ अभयारण्य के बफर और कोर जोनों में प्लास्टिक का जमा होना बेजुबान जानवरों के लिए जानलेवा साबित होता है। इस कचरा प्रबंधन अभियान के जरिए वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को पूरी तरह सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त बनाने का एक ठोस संदेश धरातल पर दिया गया।

इस ऐतिहासिक और पर्यावरण हितैषी महाआयोजन को सफल बनाने में ई०डी०सी० ग्राम ढेला और सावल्दे पूरब के जागरूक ग्रामीणों के साथ-साथ क्षेत्र के वरिष्ठ प्रशासनिक और सामाजिक चेहरों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराकर चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम की कमान मुख्य रूप से संभाल रहे ढेला के कुशल वन क्षेत्राधिकारी श्री भानु प्रकाश हर्बोला ने अपनी पूरी टीम के साथ धरातल पर मोर्चा संभाला और प्रत्येक गतिविधि का सूक्ष्म पर्यवेक्षण किया। उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हुए ढेला, रामनगर के बेहद लोकप्रिय क्षेत्र पंचायत सदस्य श्री सुनील नैनवाल ने स्थानीय युवाओं और जनता को इस मुहिम से जोड़ने में अपनी महत्वपूर्ण और प्रभावी भूमिका निभाई। वहीं वन विभाग के अनुभवी उपराजिक ढेला श्री ओमप्रकाश जोशी ने पौधारोपण के वैज्ञानिक तरीकों के बारे में वहां मौजूद लोगों को विस्तार से गाइड किया। इसके साथ ही सावल्दे पूरब के ई०डी०सी० अध्यक्ष श्री तारादत्त बेलवाल ने अपने गांव के सैकड़ों निवासियों को एकजुट कर इस अभियान में उनकी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की, जो सामुदायिक नेतृत्व की एक बेहतरीन और बेमिसाल नजीर बनकर उभरी।

ग्रामीण विकास और पंचायती राज व्यवस्था की मजबूती को प्रदर्शित करते हुए ढेला के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि श्री प्रताप रावत ने भी इस पूरे कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और ग्रामीणों का हौसला बढ़ाया। वन प्रबंधन और सुरक्षा की जमीनी कड़ियों को मजबूत करने वाले ढेला के वन दरोगा श्री नवीन चन्द्र पपनै ने अपनी देखरेख में संवेदनशील वन क्षेत्रों में पौधारोपण के गड्ढों और प्रजातियों का चयन करवाया ताकि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को अधिकतम लाभ मिल सके। इन सभी गणमान्य लीडर्स के साथ ढेला रेंज के समस्त निष्ठावान सरकारी कर्मचारी, ई०डी०सी० ग्राम ढेला और सावल्दे पूरब के अनगिनत प्रबुद्ध ग्रामीण, महिलाएं और नन्हे बच्चे पूरी शिद्दत के साथ इस महाअभियान के साक्षी और भागीदार बने। कार्बेट टाइगर रिजर्व के मीडिया सैल द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह अनूठी पहल आने वाले दिनों में जंगलों को और अधिक सघन बनाने तथा स्थानीय समुदायों में वनों के प्रति स्वामित्व की भावना पैदा करने में मील का पत्थर साबित होगी, जिससे भविष्य में जलवायु परिवर्तन के खतरों से प्रभावी ढंग से लड़ा जा सकेगा।

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