काशीपुर/गढ़ीनेगी। उत्तराखंड के राजनैतिक गलियारों में इस वक्त निकाय चुनावों को लेकर सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच चुकी हैं, और इसी बीच गढ़ीनेगी नगर पंचायत के चुनावी रणक्षेत्र में एक बेहद दिलचस्प और ग्लैमरस मोड़ देखने को मिला है। स्थानीय स्तर पर हो रहे इस कांटे के मुकाबले में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है, जिससे विपक्षी खेमों में खलबली मच गई है। गुरुवार को इस शांत से दिखने वाले क्षेत्र की सड़कों पर उस वक्त जनसैलाब उमड़ पड़ा, जब फिल्म जगत के जाने-माने अभिनेता और काशीपुर नगर के प्रथम नागरिक खुद जनता के बीच वोट मांगने उतरे। इस हाई-प्रोफाइल चुनावी प्रचार ने गढ़ीनेगी के सियासी पारे को अचानक से सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है, और हर चौक-चौराहे पर अब सिर्फ इसी बात की चर्चा हो रही है। बीजेपी की इस आक्रामक रणनीति ने साफ कर दिया है कि वह इस छोटे समझे जाने वाले चुनाव को भी किसी भी कीमत पर हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
इस बेहद रोमांचक और भारी भीड़ वाले जनसंपर्क अभियान के दौरान भारतीय जनता पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार सचिन बाटला के पक्ष में माहौल बनाने के लिए हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय कलाकार किशोर भानुशाली और काशीपुर के तेजतर्रार महापौर दीपक बाली ने मोर्चा संभाला। दोनों ही दिग्गज नेताओं ने क्षेत्र के कोने-कोने में जाकर सघन दौरा किया और आम जनता से सीधा संवाद स्थापित करते हुए कमल के निशान पर बटन दबाने की पुरजोर वकालत की। जैसे ही इन बड़े चेहरों का काफिला गढ़ीनेगी की संकरी गलियों और मुख्य बाजारों से होकर गुजरा, स्थानीय निवासियों और खासकर युवाओं की भारी भीड़ उन्हें देखने और सुनने के लिए घरों से बाहर निकल आई। जगह-जगह पर दोनों ही अतिथियों का फूलों की विशाल मालाओं और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ बेहद गर्मजोशी से स्वागत सत्कार किया गया, जिससे पूरा माहौल पूरी तरह से चुनावी रंग में सराबोर नजर आया। नेताओं ने इस मौके पर गृहणियों, बुजुर्गों और पहली बार वोट डालने जा रहे युवाओं से मिलकर उनकी समस्याएं भी सुनीं।

अपनी खास अदाकारी और दिग्गज अभिनेता देव आनंद की याद दिलाने वाली विशिष्ट शैली के लिए मशहूर अभिनेता किशोर भानुशाली ने जनसंपर्क के दौरान लोगों का दिल जीत लिया। जिन्हें पूरी दुनिया प्यार से ष्जूनियर देवानंदष् के नाम से जानती है, उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि गढ़ीनेगी के चौतरफा विकास और आधुनिक सुविधाओं की बहाली के लिए सचिन बाटला जैसे युवा और कर्मठ प्रत्याशी का जीतना बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर क्षेत्र की जनता चाहती है कि सूबे और केंद्र की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी बाधा के उनके घरों तक पहुंचे, तो उन्हें एक मजबूत और संवेदनशील स्थानीय सरकार चुननी होगी। किशोर भानुशाली ने फिल्मी अंदाज के साथ-साथ बेहद संजीदगी से मतदाताओं से अपील की कि वे लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और मतदान के दिन सबसे पहले अपने मत का प्रयोग करें, क्योंकि एक-एक वोट ही इस क्षेत्र की तकदीर और तस्वीर तय करेगा।
इसी चुनावी अभियान को आगे बढ़ाते हुए काशीपुर के कुशल प्रशासक और महापौर दीपक बाली ने भी अपनी राजनैतिक कुशलता का परिचय देते हुए विभिन्न मलिन बस्तियों, मोहल्लों और ग्रामीण इलाकों में सघन जनसंपर्क किया। उन्होंने काशीपुर नगर निगम में अपने कार्यकाल के दौरान किए गए ऐतिहासिक विकास कार्यों का ब्योरा जनता के सामने रखते हुए कहा कि जिस तरह उन्होंने काशीपुर में सड़कों का जाल बिछाया, साफ-सफाई की व्यवस्था को सुदृढ़ किया, शुद्ध पेयजल और आधुनिक मार्ग प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त किया है, ठीक उसी तर्ज पर गढ़ीनेगी को भी एक आदर्श नगर पंचायत बनाया जाएगा। दीपक बाली ने स्थानीय लोगों को भरोसा दिलाया कि बीजेपी का एकमात्र उद्देश्य केवल सत्ता पाना नहीं बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सचिन बाटला की जीत वास्तव में गढ़ीनेगी के उज्ज्वल भविष्य की जीत होगी और इसके लिए जनता को विपक्षी दलों के भ्रामक प्रचार से दूर रहकर भारी बहुमत से बीजेपी को विजयी बनाना होगा।

प्रचार के इस महाभियान के दौरान केवल बड़े नेता ही सक्रिय नहीं दिखे, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और ऊर्जावान समर्थकों में भी एक अभूतपूर्व उत्साह और नया जोश देखने को मिला। पूरे क्षेत्र में भगवा झंडों की बहार आ गई और कार्यकर्ताओं ने पार्टी की नीतियों और प्रत्याशी के समर्थन में गगनभेदी नारे लगाकर आसमान गुंजा दिया। बीजेपी के जिला अध्यक्ष मनोज पाल और पूर्व विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल इस पूरे चुनावी चक्रव्यूह को सफल बनाने के लिए पर्दे के पीछे से दिन-रात एक किए हुए हैं और हर एक बूथ की रणनीति खुद तैयार कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, पार्टी के वरिष्ठ और कद्दावर नेता जसवीर सिंह सैनी ने नामांकन प्रक्रिया के पहले ही दिन से इस पूरे चुनाव की कमान अपने हाथों में संभाल रखी है और वे खुद हर एक चुनावी सभा और सांगठनिक बैठक की कमान संभाल रहे हैं। इसके साथ ही, बीजेपी जिला प्रकोष्ठ के ऊर्जावान संयोजक मुकेश चावला अपनी पूरी मंडली और रणनीतिकारों की टीम के साथ गढ़ीनेगी की हर एक चौखट पर दस्तक देकर कमल खिलाने के संकल्प के साथ चौबीसों घंटे जुटे हुए हैं।
इस बेहद आक्रामक, ग्लैमरस और सघन प्रचार अभियान ने गढ़ीनेगी नगर पंचायत के पूरे राजनैतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है और अब मुकाबला बेहद त्रिकोणीय और दिलचस्प मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि फिल्मी सितारों के आने और स्थानीय बड़े नेताओं की साख दांव पर होने के कारण आम मतदाताओं का झुकाव अब तेजी से तय होने लगा है। हालांकि, अंतिम फैसला तो मतदान के दिन जनता की उंगलियां ही ईवीएम मशीन पर दबाकर करेंगी, लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं है कि बीजेपी ने इस वक्त मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल कर ली है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प और कौतूहल से भरा होगा कि लगातार चल रहे इस ऐतिहासिक जनसंपर्क अभियान, बड़े चेहरों की जनसभाओं और कार्यकर्ताओं की इस कड़ी मेहनत का ऊंट किस करवट बैठता है और आने वाले परिणाम गढ़ीनेगी की राजनीति को किस नई दिशा में ले जाते हैं।

राजनैतिक समीक्षकों का मानना है कि गढ़ीनेगी नगर पंचायत का यह चुनाव केवल किसी एक उम्मीदवार की किस्मत का फैसला नहीं है, बल्कि यह आगामी समय में होने वाले बड़े चुनावों के लिए भी एक मजबूत जमीन तैयार कर रहा है। स्थानीय मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग इस बात को गहराई से महसूस कर रहा है कि यदि इस बार विकास की मुख्यधारा से जुड़ने में चूक हुई, तो क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं के मामले में कई साल पीछे धकेला जा सकता है। यही कारण है कि इस बार जातिगत और पारंपरिक बंधनों को तोड़कर विकास और सुशासन के नाम पर मतदान करने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। फिल्म स्टार किशोर भानुशाली की एक झलक पाने के लिए उमड़े जनसैलाब ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय जनता में इस समय व्यवस्था परिवर्तन को लेकर कितना भारी उत्साह है। युवाओं के बीच रोजगार और खेल मैदान की मांग और महिलाओं के बीच सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा इस वक्त सबसे ऊपर तैर रहा है, जिसे बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में प्रमुखता से शामिल किया है।
इस हाई-प्रोफाइल चुनाव प्रचार के बाद अब गढ़ीनेगी की पूरी फिजा बदली हुई नजर आ रही है और चुनावी चौपालों पर चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म हो चुका है। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में गढ़ीनेगी के भीतर ऐसा आक्रामक और व्यवस्थित चुनाव प्रचार पहले कभी नहीं देखा, जहां खुद फिल्म जगत और सरकार के बड़े नुमाइंदे एक-एक घर के दरवाजे पर दस्तक दे रहे हों। जनता अब बहुत समझदार हो चुकी है और वह भली-भांति जानती है कि खोखले दावों के बजाय धरातल पर काम करने वाली सरकार का साथ देने में ही क्षेत्र की भलाई है। सचिन बाटला के पक्ष में जिस तरह से पार्टी के शीर्ष रणनीतिकार और कार्यकर्ता दिन-रात पसीना बहा रहे हैं, उसने विपक्षी दलों की नींद उड़ा दी है और वे अब अपनी साख बचाने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाने को मजबूर हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि गढ़ीनेगी की प्रबुद्ध जनता विकास के इस महायज्ञ में अपनी आहुति किस प्रकार देती है।





