काशीपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर काशीपुर नगर निगम द्वारा आयोजित एक भव्य और अभूतपूर्व कार्यक्रम में शहर के प्रथम नागरिक यानी महापौर दीपक बाली ने स्थानीय ट्रेंचिंग ग्राउंड से एक ऐसी महामुहिम की शुरुआत की, जिसने आने वाले समय में शहर की सूरत और सीरत दोनों को बदलने का ठोस आश्वासन दिया है। करीब 15 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से स्थापित होने जा रहे अत्याधुनिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की रूपरेखा को जनता के सामने रखते हुए उन्होंने साफ किया कि यह परियोजना केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं बल्कि काशीपुर को कचरा मुक्त बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इस दौरान ट्रेंचिंग ग्राउंड के चारों तरफ सघन वृक्षारोपण अभियान चलाया गया, जिसमें केवल कागजी दावों के विपरीत धरातल पर सैकड़ों पौधे रोपे गए। महापौर ने देश के प्रधानमंत्री और उत्तराखंड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विशेष रूप से आभार प्रकट करते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व के सहयोग के बिना इतनी बड़ी विकास योजना को धरातल पर उतारना संभव नहीं था। इस प्लांट के आगामी चार से छह महीनों के भीतर पूरी तरह सक्रिय होने की उम्मीद जताई गई है, जो प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले गीले और सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण कर उसे उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित करने का काम करेगा।
इस महाभियान की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब देखने को मिली जब भीषण गर्मी और स्कूलों की ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बावजूद भारी संख्या में नौनिहाल, विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं (एनजीओ) के प्रतिनिधि और प्रबुद्ध नागरिक इस ऊबड़-खाबड़ ट्रेंचिंग ग्राउंड में पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाने पहुंच गए। जीडी गोयनका स्कूल के नन्हे-मुन्ने बच्चे हाथों में स्लोगन लिखी तख्तियां और प्लेकार्ड्स लेकर पूरे उत्साह के साथ पौधों को मिट्टी में रोपते नजर आए, जिसे देखकर वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया। स्कूल की शिक्षिकाओं और समन्वयकों ने बताया कि वे केवल पर्यावरण दिवस पर ही नहीं बल्कि ‘शनिजना’ जैसी पहलों के माध्यम से पूरे साल बच्चों को इस अभियान से जोड़े रखती हैं। उनका मानना है कि आज के ये बच्चे ही देश का भविष्य हैं और जब ये खुद जमीन पर उतरकर ठाकुरद्वारा, जसपुर और काशीपुर के आस-पास के क्षेत्रों में रैलियां निकालते हैं, तो समाज में एक गहरा संदेश जाता है। महापौर दीपक बाली ने बच्चों के इस जज्बे को सलाम करते हुए कहा कि नगर निगम का यह प्रयास तभी सफल हो सकता है जब नई पीढ़ी इस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर उठाए। ट्रेंचिंग ग्राउंड के आस-पास की खाली पड़ी भूमि पर सघन हरियाली विकसित करने का खाका खींचा गया है ताकि भविष्य में यह डंपिंग साइट एक सुंदर और स्वच्छ ऑक्सीजन जोन के रूप में विकसित हो सके, जहां बच्चे प्रकृति के करीब आकर सीख सकें।
इस कार्यक्रम के दौरान सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ पिछले पांच वर्षों से चल रहे सतत आंदोलन पर भी व्यापक चर्चा हुई, जिसमें वक्ताओं ने आम जनता से अपनी आदतों में क्रांतिकारी बदलाव लाने की पुरजोर अपील की। काशीपुर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए नगर निगम और स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की सराहना करते हुए महापौर ने कहा कि यदि हम पूरी तरह से प्लास्टिक का उपयोग बंद नहीं कर पा रहे हैं, तो कम से कम इसके इस्तेमाल को न्यूनतम स्तर पर लाना होगा। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नालियों और सड़कों पर फेंकी जाने वाली प्लास्टिक की बोतलें और थैलियां कभी नष्ट नहीं होतीं, जिससे न केवल जलभराव की गंभीर समस्या पैदा होती है बल्कि आवारा पशु और गाएं भी इन्हें खाकर असमय मौत का ग्रास बन जाती हैं। इस मानवीय और पर्यावरणीय संकट से उबरने के लिए शहर में ‘फोर-बिन’ यानी चार अलग-अलग रंगों के डस्टबिन की व्यवस्था को लागू किया जा रहा है, ताकि कचरे को उसके उद्गम स्थल यानी घरों पर ही अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जा सके। जनप्रतिनिधियों ने जनता को जागरूक करते हुए कहा कि प्लास्टिक कचरे को इधर-उधर फेंकने के बजाय उसे एक जगह एकत्रित कर सीधे नगर निगम की कचरा कलेक्शन गाड़ियों को सौंपना चाहिए, जिससे उसका शत-प्रतिशत पुनर्चक्रण सुनिश्चित किया जा सके।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को रेखांकित करते हुए कार्यक्रम में मौजूद वरिष्ठ वक्ताओं ने उपस्थित जनसमुदाय को याद दिलाया कि वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत वर्ष 1972 में स्वीडन के स्टॉकहोम सम्मेलन से हुई थी, जिसके बाद वर्ष 1973 से हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई। वर्तमान परिदृश्य में सॉलिड वेस्ट और लेगेसी वेस्ट जैसी चुनौतियां वैश्विक संकट बन चुकी हैं, जिनका सामना करने के लिए काशीपुर नगर निगम ने अपनी कमर कस ली है। महापौर दीपक बाली ने इस लड़ाई में स्थानीय मीडिया के अभूतपूर्व और सकारात्मक बदलाव की खुलकर प्रशंसा की और उन्हें लोकतंत्र का सच्चा चौथा स्तंभ बताया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों से काशीपुर के मीडिया बंधुओं ने केवल नगर निगम की कमियों को उजागर करने का ही काम नहीं किया, बल्कि जनता को उसकी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सचेत करने का एक बड़ा आंदोलन छेड़ दिया है। मीडिया द्वारा दिखाई जा रही खबरों और ग्राउंड रिपोर्टों से न केवल नगर निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और दिन-रात काम करने वाले पर्यावरण मित्रों का हौसला दोगुना हुआ है, बल्कि आम जनता में भी व्यवस्था के प्रति एक नया विश्वास जगा है। जहां कमियां दिखाई जाती हैं, वहां प्रशासन को सुधार का मौका मिलता है, और जहां जनसहभागिता की अपील होती है, वहां पूरा शहर एक सूत्र में बंध जाता है।

स्थानीय शासन व्यवस्था को मजबूत करने और जनता की समस्याओं को चौबीस घंटे सुनने वाले पार्षदों की भूमिका की सराहना करते हुए महापौर ने कहा कि वार्ड स्तर पर कोई भी आंदोलन जनप्रतिनिधियों के बिना अधूरा है। चूंकि जनता अपने पार्षदों को भारी मतों से जिताकर भेजती है, इसलिए उनकी हर बात का स्थानीय निवासियों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। कार्यक्रम में मौजूद पार्षदों से यह आह्वान किया गया कि वे अपने-अपने वार्डों में सुबह की सैर के दौरान या बैठकों में लोगों को कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक करें और उन्हें सीधे इस मुहिम से जोड़ें। इसके साथ ही डिजिटल युग का सही उपयोग करते हुए काशीपुर की ही रहने वाली प्रसिद्ध ब्लॉगर करिश्मा ने भी इस अभियान में अपनी स्वेच्छा से आहुति देने का फैसला किया है। करिश्मा ने महापौर से संपर्क कर यह इच्छा जताई कि वे अपने प्रकृति-आधारित व्लॉग्स और सोशल मीडिया रील्स के माध्यम से नगर निगम के स्वच्छता अभियान को जन-जन तक पहुंचाएंगी, जिसकी सराहना करते हुए महापौर ने उनका विशेष धन्यवाद किया। इसी क्रम में हिंदू वाहिनी के प्रमुख पदाधिकारी आनंद तिवारी भी अपने समर्थकों के साथ कार्यक्रम में पहुंचे और उन्होंने समाज के हर वर्ग को इस पुनीत कार्य में तन-मन-धन से सहयोग करने का संकल्प दिलाया।
कचरा प्रबंधन की पूरी कड़ियों को समझाते हुए महापौर दीपक बाली ने एक बेहद सरल लेकिन अचूक सिद्धांत जनता के सामने रखा कि घर का कचरा केवल घर के डस्टबिन में जाना चाहिए, वहां से वह नगर निगम की कूड़ा कलेक्शन गाड़ी में बैठना चाहिए और वहां से सीधे ट्रेंचिंग ग्राउंड के निस्तारण प्लांट तक पहुंचना चाहिए। इस पूरी श्रृंखला के बीच कचरे के लिए शहर में और कोई दूसरी जगह हो ही नहीं सकती। उन्होंने पूरी ईमानदारी से स्वीकार किया कि नगर निगम अपनी 100 प्रतिशत जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यदि कहीं गाड़ियों के पहुंचने में कोई मामूली कमी रह गई है, तो बहुत जल्द शुरू होने वाले आधुनिक कंट्रोल रूम के माध्यम से हर घर तक प्रतिदिन गाड़ी पहुंचना सुनिश्चित कर दिया जाएगा। लेकिन उन्होंने यह भी दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि बिना जनसहभागिता के दुनिया का कोई भी नगर निगम किसी भी शहर को साफ नहीं रख सकता। काशीपुर के सम्मानित नागरिकों में अब यह बदलाव दिखने लगा है कि लोग सड़कों, पार्कों या खाली भूखंडों में कचरा फेंकने वालों को खुद टोकने लगे हैं और उनसे विनम्रतापूर्वक आग्रह कर रहे हैं कि कचरे को केवल गाड़ियों में ही डालें, भले ही इसके लिए उन्हें कुछ घंटे इंतजार क्यों न करना पड़े।
नगर निगम की भविष्य की दूरगामी योजनाओं का खुलासा करते हुए महापौर ने बताया कि शहर के विभिन्न 40 वार्डों में से प्रत्येक वार्ड से कम से कम एक ऐसा ऊर्जावान और समर्पित व्यक्ति आगे आना चाहिए जो अपने क्षेत्र के गीले कचरे के प्रसंस्करण और उसकी खाद बनाने की जिम्मेदारी ले सके। इस दिशा में अनुज मल्होत्रा और ईश्वर भाई साहब जैसे जागरूक नागरिकों ने खुद आगे बढ़कर अपनी सोसायटियों से गीले कचरे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण की शुरुआत करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे देखकर पूरा प्रशासनिक अमला गदगद है। नगर निगम इन सभी कॉलोनियों को तकनीकी और ढांचागत सहायता प्रदान करेगा ताकि कचरे का बोझ ट्रेंचिंग ग्राउंड तक पहुंचे ही नहीं। इसके अतिरिक्त, शहर में बेतरतीब पड़े रहने वाले कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन (सीएंडडी) यानी भवन निर्माण के मलबे के कुशल प्रबंधन के लिए लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत वाले एक विशेष प्लांट का विस्तृत प्रस्ताव (डीपीआर) तैयार कर राज्य शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जा चुका है। शहर को ‘थ्री-स्टार गार्बेज फ्री’ बनाने का जो केंद्रीय लक्ष्य मिला है, महापौर ने उसे पहले ही दिन से अपने जीवन का मुख्य ध्येय मान लिया है और वे काशीपुर में स्वच्छता को एक सामान्य प्रशासनिक कार्य से ऊपर उठाकर एक जन-क्रांति का रूप देने की जिद पर अड़े हुए हैं।
बरसों से ट्रेंचिंग ग्राउंड में जमा हो चुके ‘लेगेसी वेस्ट’ यानी कचरे के पहाड़ों को हटाने के लिए पिछले तीन महीनों से युद्धस्तर पर काम चल रहा है, जिसके तहत कचरे को छांटकर उसमें से निकलने वाले रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) को विभिन्न फैक्ट्रियों के बॉयलरों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल के लिए लगातार भेजा जा रहा है। यही नहीं, इस कचरे से निकलने वाले इनर्ट मटेरियल से टाइल्स और इंटरलॉकिंग ब्लॉक्स बनाने की नवीन संभावनाओं पर भी गंभीर शोध और काम चल रहा है। इसके साथ ही, शहर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के आधुनिकीकरण पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जिससे प्रतिदिन लाखों लीटर गंदे नालों का पानी पूरी तरह साफ और पारदर्शी होकर बाहर निकल रहा है। नगर निगम की वरिष्ठ अधिकारी ज्योति मैम के कुशल निर्देशन में इन एसटीपी का संचालन इतनी बारीकी से किया जा रहा है कि अब इसी शोधित जल का उपयोग शहर के पार्कों, सड़कों की धुलाई और डिवाइडर पर लगे पौधों की सिंचाई के लिए टैंकरों के माध्यम से किया जा रहा है। इससे भूजल के अंधाधुंध दोहन पर पूरी तरह रोक लगाने में बड़ी सफलता मिली है, जो गिरते जलस्तर की समस्या से जूझ रहे काशीपुर के लिए एक संजीवनी की तरह है।

इस जल संरक्षण नीति को एक अभूतपूर्व औद्योगिक क्रांति में बदलते हुए नगर निगम ने केंद्र सरकार के ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत 119 करोड़ रुपये का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट तैयार कर शासन को भेजा है, जो प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इस योजना के अंतर्गत एसटीपी से निकलने वाले शोधित औद्योगिक-ग्रेड पानी को काशीपुर की बड़ी पेपर इंडस्ट्रीज (जैसे सिद्धार्थ, नैनी और पशुपति लेमिनेट्स) को व्यावसायिक दरों पर बेचा जाएगा, जिन्होंने इस पर अपनी लिखित सहमति दे दी है। ज्ञात हो कि काशीपुर पूरे भारत में पेपर उत्पादन के मामले में दूसरे स्थान पर आता है और इन फैक्ट्रियों को प्रतिदिन लाखों लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जो अभी तक जमीन से निकाला जाता है। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से न केवल भूजल का दोहन रुकेगा बल्कि उद्योगों का उत्पादन भी निर्बाध रूप से चलता रहेगा और नगर निगम को भारी मुनाफा भी होगा। इसके अलावा शहर के विभिन्न वार्डों में स्थित लगभग 40 पार्कों के जीर्णोद्धार और उनके सुंदरीकरण के लिए 11 करोड़ रुपये की एक और योजना अंतिम चरण में है। कार्यक्रम के अंत में नगर आयुक्त और महापौर के नेतृत्व में उपस्थित सभी अधिकारियों, मुक्ता सिंह जैसी वरिष्ठ शिक्षाविदों, पार्षदों और पर्यावरण मित्रों ने भारत माता की जय और नगर निगम जिंदाबाद के गगनभेदी नारों के बीच पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक शपथ ली और यह संकल्प दोहराया कि काशीपुर को पूरे देश में स्वच्छता के शिखर पर पहुंचाकर ही दम लेंगे।
इस ऐतिहासिक महाभियान की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि काशीपुर के इस पर्यावरण उत्सव में प्रशासनिक अमले से लेकर शहर के दिग्गज राजनेताओं, पार्षदों और प्रबुद्ध नागरिकों का एक विराट हुजूम उमड़ पड़ा। कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराने वालों में सहायक नगर आयुक्त शालिनी नेगी, कार्यालय अधीक्षक विनोद लाल, विकास शर्मा, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर अमरजीत सिंह साहनी और सफाई निरीक्षक मनोज बिष्ट जैसे वरिष्ठ अधिकारियों ने अग्रिम पंक्ति में रहकर कमान संभाली।
वहीं, जनभागीदारी को नया आयाम देते हुए पार्षद वैशाली गुप्ता, संदीप मोनू, संजय शर्मा, सीमा सागर, सुरेश सैनी, रवि प्रजापति, देव प्रजापति, ममता कुमारी, प्रिंस बाली, बीना नेगी, अब्दुल कादिर, अनीता कांबोज, मनोज जग्गा, विजय बॉबी, अशोक सैनी और पुष्कर बिष्ट ने अपने-अपने वार्डों के संकल्प के साथ इस आंदोलन को धार दी। इस पुनीत कार्य में राजनीतिक और सामाजिक चेतना का तड़का लगाते हुए भाजपा नेता ईश्वर चंद्र गुप्ता, राजीव अरोरा, राजीव परनामी, प्रख्यात शिक्षाविद मुक्ता सिंह, पंडित अभिषेक शर्मा, आनंद तिवारी, नमन अरोड़ा और चौधरी समरपाल सिंह जैसे कद्दावर व्यक्तित्वों ने अपनी मौजूदगी से कार्यकर्ताओं का जोश दोगुना कर दिया। तकनीकी पक्ष को मजबूती देने के लिए पेयजल अवर अभियंता ज्योति रावत, प्रियंका अग्रवाल, सुनील टंडन, नितिन गोले, अवर अभियन्ता श्री राजू, जगदीश यादव और सफाई नायक राजेश कुमार भी धरातल पर डटे रहे।
इसके साथ ही, नई पीढ़ी के भीतर प्रकृति प्रेम जगाने के संकल्प के साथ जीडी गोयंका पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य मधुमिता बनर्जी के नेतृत्व में करीब दो दर्जन ऊर्जावान बच्चे और शिक्षिकाएं भाव्या पांडे, सुशांत विजय, मनोज शर्मा, गौरव गुप्ता, शिवानी शर्मा, शालिनी शर्मा, नेहा चौहान, शालिनी गुप्ता तथा गुरु नानक गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य ने भी इस महायज्ञ में अपनी आहुति दी। करिश्मा, मनप्रीत, जगमोहन बंटी और नगर निगम के दर्जनों जांबाज पर्यावरण मित्रों की सामूहिक हुंकार ने इस पूरे आयोजन को काशीपुर के इतिहास का सबसे बड़ा और सफल पर्यावरण आंदोलन बना दिया।





