रामनगर। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण वाले देश के एकमात्र और सबसे प्रतिष्ठित आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवा निर्माता उपक्रम, इंडियन मेडिसिंस फार्मास्यूटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईएमपीसीएल) मोहान के निजीकरण के खिलाफ जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस बेहद मुनाफे वाले और ऐतिहासिक कारखाने को कौड़ियों के भाव किसी निजी कंपनी को सौंपने की केंद्र सरकार की कथित योजना के खिलाफ राज्य आंदोलनकारियों ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। उपजिलाधिकारी (एसडीएम) कार्यालय के बाहर हुआ यह प्रदर्शन महज एक विरोध नहीं, बल्कि उत्तराखंड के स्वाभिमान, रोजगार और अस्मिता को बचाने की एक बड़ी जन-क्रांति का रूप लेता दिखाई दे रहा है, जिसने स्थानीय प्रशासन से लेकर शासन तक को हिलाकर रख दिया है।
दोपहर के ठीक उस वक्त जब सूरज की किरणें तीखी हो रही थीं, ठीक उसी समय राज्य सेनानी आंदोलनकारी मंच के बैनर तले दर्जनों आंदोलनकारी पूरी तैयारी और भारी गुस्से के साथ एसडीएम दफ्तर के बाहर जमा होने शुरू हो गए। मंच के मुख्य संयोजक चंद्रशेखर जोशी की ओजस्वी अगुवाई में देखते ही देखते वहां सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा और पूरा परिसर श्सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण करना बंद करोश् तथा श्आईएमपीसीएल मोहान का निजीकरण रद्द करोश् जैसे गगनभेदी नारों से गूंज उठा। इस दौरान वहां का माहौल बेहद तनावपूर्ण और गरमागरम हो गया क्योंकि एसडीएम अपनी सीट पर मौजूद नहीं थे, जिससे प्रदर्शनकारियों का गुस्सा और ज्यादा भड़क गया। हालांकि, स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए प्रशासनिक अधिकारी कुंती रत्नाकर तुरंत मोर्चे पर आईं और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को शांत कराने की कोशिश की, जिसके बाद आंदोलनकारियों ने उनके माध्यम से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को संबोधित एक बेहद कड़ा और चेतावनी भरा ज्ञापन सौंपा।
इस आक्रोशित जनसभा को पूरी आक्रामकता के साथ संबोधित करते हुए प्रखर राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे बाण चलाए और कहा कि आईएमपीसीएल मोहान कोई घाटे में चलने वाली सफेद हाथी नहीं है, बल्कि यह सरकार को हर साल करोड़ों का भारी-भरकम मुनाफा कमाकर देने वाली एक दुधारू गाय है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्तमान समय में इस बड़ी फैक्ट्री के भीतर 200 से अधिक स्थाई कर्मचारी और लगभग 300 से ज्यादा अस्थाई मजदूर पूरी निष्ठा के साथ दिन-रात काम कर रहे हैं, जिनकी आजीविका पूरी तरह इसी कारखाने पर टिकी हुई है। इतना ही नहीं, इस कारखाने की जड़ें इलाके के दर्जनों गांवों से जुड़ी हुई हैं, जहां के सैकड़ों गरीब किसान और स्थानीय लोग कंपनी को जड़ी-बूटियां तथा अन्य कच्चा माल सप्लाई करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। अगर इस चमचमाती और कमाऊ फैक्ट्री को किसी पूंजीपति के हाथों में कौड़ियों के भाव बेच दिया गया, तो इन तमाम अधिकारियों, कर्मचारियों, मजदूरों और सीधे तौर पर जुड़े अन्नदाताओं के सामने रोजी-रोटी का ऐसा भयानक संकट खड़ा हो जाएगा जिससे उबरना नामुमकिन होगा।

पहाड़ की इस गंभीर और संवेदनशील स्थिति पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए एक अन्य वरिष्ठ आंदोलनकारी पुष्कर दुर्गापाल ने कहा कि हमारा प्यारा उत्तराखंड पहले से ही भयंकर बेरोजगारी और इसके कारण होने वाले अनियंत्रित पलायन की दोहरी मार बुरी तरह झेल रहा है। आज स्थिति यह हो चुकी है कि रोजगार के अभाव में पहाड़ के सैकड़ों गांव खाली होकर श्भूतहा गांवोंश् में तब्दील हो चुके हैं और ऐसे आत्मघाती समय में भारत सरकार द्वारा अपने ही एक फायदे वाले उपक्रम को निजी हाथों में सौंपना उत्तराखंड की भोली-भाली जनता और यहां के मेहनतकश किसानों की पीठ में सीधे तौर पर छुरा घोंपने जैसा घिनौना कृत्य है। उन्होंने साफ शब्दों में सरकार को चेताया कि व्यापक जनहित और राष्ट्रहित की दुहाई देने वाली सरकार को तुरंत अपनी इस विनाशकारी नीति को वापस लेना होगा और अल्मोड़ा जनपद की इस धरोहर के निजीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगानी होगी, अन्यथा यह शांत दिखने वाला पहाड़ आने वाले दिनों में एक ऐसे उग्र आंदोलन का गवाह बनेगा जिसे संभालना किसी भी सरकार के बूते की बात नहीं होगी।
प्रदर्शन में न केवल आंदोलनकारी बल्कि समाज के हर तबके के लोग और विभिन्न जनसंगठनों के प्रतिनिधि भी अपनी पूरी ताकत के साथ शामिल हुए, जिससे इस आंदोलन को एक नया और बड़ा आयाम मिल गया है। इस विरोध प्रदर्शन की अग्रिम पंक्ति में राज्य सेनानी मंच के संयोजक चंद्रशेखर जोशी, जुझारू नेता प्रभात ध्यानी, अनिल अग्रवाल खुलासा, पुष्कर दुर्गापाल, इंद्र सिंह मनराल, हाफिज सईद अहमद, योगेश सती, रईस अहमद, नईम चौधरी और चिकित्सा जगत से जुड़े डॉ निशांत पपनै जैसे नामी चेहरे मौजूद थे। इनके साथ ही मजदूरों की आवाज बुलंद करने वाले इंकलाबी मजदूर केंद्र के तेजतर्रार प्रतिनिधि रोहित रूहेला, महिलाओं के हक के लिए लड़ने वाली प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की जुझारू नेत्री तुलसी छिम्बाल और युवाओं की कमान संभालने वाले प्रगतिशील छात्र संगठन के रवि सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने इस पूरे प्रदर्शन में अपनी मौजूदगी से जान फूंक दी। सभी ने एक सुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से यह पुरजोर मांग की है कि उत्तराखंड के भविष्य और आईएमपीसीएल मोहान कारखाने को बचाने के लिए इस काले निजीकरण प्रस्ताव को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया जाए।





