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श्रीराम इंस्टीट्यूट में बी0एड0 छात्रों के लिए अनूठी फ्रेशर और फेयरवेल पार्टी आयोजित

अतीत की यादों और भविष्य की नई उम्मीदों का ऐतिहासिक महा-संगम; बी0एड0 के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वेश-भूषा, हुनर और बेमिसाल रचनात्मकता से बिखेरा जलवा, मंत्रमुग्ध हुआ पूरा श्रीराम इंस्टीट्यूट कैंपस।

काशीपुर। उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमैंट एण्ड टैक्नोलॉजी के शिक्षा विभाग से एक बेहद ही दिलकश और अभूतपूर्व खबर सामने आ रही है, जिसने समूचे परिसर को अपनी चकाचौंध से सराबोर कर दिया है। कॉलेज के प्रांगण में बीते दिन एक ऐसा अनूठा नजारा देखने को मिला, जिसकी गूंज अब हर तरफ सुनाई दे रही है। आमतौर पर शिक्षण संस्थानों में नए चेहरों के इस्तकबाल और पुराने साथियों की विदाई के कार्यक्रम अलग-अलग दिनों में पूरी औपचारिकता के साथ संपन्न किए जाते हैं, मगर इस बार संस्थान के शिक्षा विभाग ने लीक से हटकर एक बिल्कुल ही नया और क्रांतिकारी प्रयोग कर डाला। बी0एड0 विभाग के होनहार छात्राध्यापक एवं छात्राध्यापिकाओं ने अपनी अटूट ऊर्जा और बेमिसाल रचनात्मकता का परिचय देते हुए फ्रेशर पार्टी और फेयरवेल पार्टी का एक साथ, एक ही मंच पर ऐसा जादुई ताना-बाना बुना कि देखने वाले बस फटी आंखों से देखते ही रह गए। रंग-बिरंगी रोशनियों, मनमोहक धुनों और उत्साह के चरम पर पहुंचे युवाओं के कोलाहल के बीच आयोजित हुए इस दोहरे उत्सव ने कैंपस के इतिहास में सुनहरे अक्षरों से अपना नाम दर्ज करा लिया है, जिसकी हर तरफ जमकर तारीफ हो रही है।

इस बेहद भव्य और आकर्षक महा-उत्सव की शुरुआत सुबह से ही कॉलेज परिसर में दिखने वाले असीम उत्साह और चंचलता के साथ हो चुकी थी, जहाँ हर चेहरा एक अलग ही उमंग से दमक रहा था। इस विशेष दिन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे सभी छात्राध्यापक एवं छात्राध्यापिकाओं ने हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए पारंपरिक वेश-भूषा को धारण कर रखा था, जो महफिल में चार चांद लगा रहा था। जहां एक तरफ नए सत्र में कदम रखने वाले नौजवान छात्र रंगीन कुर्तों और पारंपरिक परिधानों में सजे-धजे अपनी नई यात्रा को लेकर बेहद रोमांचित नजर आ रहे थे, वहीं दूसरी तरफ अंतिम वर्ष की छात्राएं बेहद खूबसूरत और कलात्मक साड़ियों में अपनी विदाई की कशिश को समेटे हुए किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं। जैसे ही इन युवाओं ने एक-एक कर मंच की ओर रुख किया, वैसे ही समूचा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और इन छात्र-छात्राओं ने अपनी सुरीली आवाजों, थिरकते कदमों और दिल को छू लेने वाले नाटकों के जरिए समां बांध दिया, जिसने वहां मौजूद हर एक दर्शक को मंत्रमुग्ध होने पर मजबूर कर दिया।

उत्सव की इस हसीन कड़ियों को और अधिक रोचक तथा गतिशील बनाते हुए छात्र-छात्राओं ने पूर्व निर्धारित विशेष थीम के अंतर्गत मंच पर आकर अपना बेहद सलीकेदार परिचय देना शुरू किया, जो उनकी वाकपटुता को साफ तौर पर दर्शा रहा था। इसके तुरंत बाद शुरू हुआ प्रतिभा प्रदर्शन का दौर, जिसमें युवाओं ने अपनी आंतरिक कलात्मकता, तीक्ष्ण बुद्धि और श्रेष्ठ प्रदर्शन के दम पर उपस्थित जनसमूह को दांतों तले उंगली दबाने पर विवश कर दिया। कोई अपनी मधुर बांसुरी की तान से माहौल को आध्यात्मिक बना रहा था, तो कोई समकालीन सामाजिक मुद्दों पर दमदार अभिनय पेश कर समाज को आईना दिखा रहा था। श्रीराम कॉलेज के गौरवशाली इतिहास में यह बिल्कुल पहला और अत्यंत गौरवमयी अवसर था, जब विद्यार्थियों की एक टोली ने इतने बड़े पैमाने पर फ्रेशर एवं फेयरवेल जैसे विपरीत स्वभाव वाले आयोजनों को एक ही समय में बिना किसी त्रुटि के पूरी तरह से सफल और जीवंत बना दिया। इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने वाले हर व्यक्ति के चेहरे पर इस अनूठे प्रयोग की सफलता की चमक और इन भावी शिक्षकों के प्रति गहरा सम्मान साफ तौर पर देखा जा सकता था।

मंच पर चल रहे इस अद्भुत और यादगार घटनाक्रम के दौरान भावनाओं का एक ऐसा समंदर उमड़ रहा था, जिसने माहौल को कभी बेहद खुशनुमा तो कभी थोड़ा सा भावुक और संजीदा बना दिया था। कार्यक्रम के एक छोर पर जहां नए शिक्षा सत्र में दाखिला लेने वाले नवागंतुक छात्र-छात्राओं का पलक-पावड़े बिछाकर बेहद आत्मीयता और गर्मजोशी के साथ स्वागत किया जा रहा था, जिससे उनके चेहरों पर मुस्कान बिखर रही थी, वहीं ठीक दूसरी तरफ विदाई की कगार पर खड़े अंतिम वर्ष के सीनियर छात्र-छात्राओं की जुदाई के गम ने पूरी फिजा में एक अलग ही भावुक रंग घोल दिया था। यह मिलन और जुदाई का एक ऐसा अद्भुत कोलाज बन चुका था, जहां एक तरफ आने की खुशी की चहक थी, तो दूसरी तरफ जाने वाले साथियों की यादों की महक थी। सीनियर्स ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए जूनियर्स को कॉलेज की परंपराओं को आगे बढ़ाने का मंत्र दिया, जबकि जूनियर्स ने अपने सीनियर साथियों को उनकी भावी जिंदगी के सफर के लिए ढेरों दुआएं और खूबसूरत उपहार भेंट कर इस विदाई को हमेशा-विदाई के लिए यादगार बना दिया।

युवाओं के इस बेजोड़ और ऊर्जावान समागम के बीच दूरदर्शन और आधुनिक संचार तकनीक का बेहतरीन नजारा तब देखने को मिला जब संस्थान के मार्गदर्शक और अध्यक्ष श्री रविन्द्र कुमार ने सुदूर क्षेत्र में होने के बावजूद ऑनलाईन माध्यम से कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने डिजिटल स्क्रीन के जरिए प्रथम वर्ष के नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं को अपना स्नेहिल आशीर्वाद और भविष्य की शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए जीवन के मूल मंत्रों से अवगत कराया। अपने बेहद ओजस्वी और प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने जोर देकर कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, इसलिए छात्रों को जीवन में निरंतर कड़ा परिश्रम करने के लिए हमेशा खुद को तैयार रखना चाहिए। बदलते दौर का जिक्र करते हुए उन्होंने विशेष रूप से कहा कि वर्तमान समय AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का युग है, और एक कुशल शिक्षक बनने के लिए हमें इस आधुनिक टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करनी होगी ताकि हम इसका उपयोग पूरी समझदारी के साथ अपने और समाज के व्यापक हित में कर सकें। इसके साथ ही उन्होंने अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं की विदाई पर उन्हें सुनहरे भविष्य का आशीर्वाद दिया।

इसी ज्ञानमयी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए और विद्यार्थियों के भीतर नैतिक मूल्यों का संचार करने के उद्देश्य से संस्थान के मार्गदर्शक एवं प्राचार्य (डॉ0) एस0एस0 कुशवाहा मंच पर अवतरित हुए और उन्होंने बेहद सारगर्भित बातें कहीं। उन्होंने अपने संबोधन में बहुत ही खूबसूरती से समझाया कि एक संयमित, अनुशासित और मर्यादित जीवन ही वास्तव में सबसे श्रेष्ठ शिक्षा है, जिसे हर इंसान को आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने भावी राष्ट्र निर्माताओं यानी छात्राध्यापक एवं छात्राध्यापिकाओं को राष्ट्रहित में काम करने की सलाह देते हुए अपने उत्तम और बेदाग चरित्र का निर्माण करने के लिए गहराई से प्रेरित किया। प्राचार्य ने कहा कि एक शिक्षक का चरित्र ही समाज की दिशा तय करता है, इसलिए शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों का होना अनिवार्य है। उनके इन अनमोल और व्यावहारिक विचारों ने वहां मौजूद सभी छात्र-छात्राओं के दिलों को छू लिया, और युवाओं ने करतल ध्वनि से उनके विचारों का स्वागत करते हुए जीवन में इन आदर्शों को उतारने का दृढ़ संकल्प लिया, जिससे माहौल में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो गया।

जैसे-जैसे यह भव्य कार्यक्रम अपने अंतिम और सबसे ज्यादा प्रतीक्षित पड़ाव की ओर अग्रसर हुआ, वैसे ही सभागार में सस्पेंस और रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया क्योंकि अब बारी थी इस उत्सव के सर्वश्रेष्ठ सितारों की घोषणा करने की। जजों के कड़े इम्तिहान, बौद्धिक क्षमता और मंच पर उनके द्वारा किए गए सबसे श्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर आखिरकार विजेताओं के नामों का ऐलान कर दिया गया। नए सत्र के विद्यार्थियों में से अपनी अद्भुत प्रतिभा और आकर्षण के दम पर मिस्टर फ्रेशर का प्रतिष्ठित खिताब युवराज राणा के सिर सजा, जबकि अपनी शालीनता और बेहतरीन प्रस्तुति से मिस फ्रेशर बनने का गौरव शिप्रा उपाध्याय ने हासिल किया। इसी तरह सीनियर छात्रों में से अपने पूरे सत्र के शानदार सफर और अंतिम दिन के जलवे की बदौलत मिस्टर फेयरवेल के रूप में अभय राज को चुना गया, और अपनी अद्वितीय प्रतिभा व कलात्मक प्रदर्शन के बल पर मिस फेयरवेल का ताज अलबीरा अंसारी के नाम रहा। इन चारों विजेताओं को मंच पर मुख्य अतिथियों द्वारा ट्राफियां और सैश पहनाकर सम्मानित किया गया, जिससे उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

इस पूरे ऐतिहासिक और जादुई कार्यक्रम की सफलता के पीछे कॉलेज प्रबंधन और उसके समर्पित स्टाफ की कड़ी मेहनत और बेहतरीन तालमेल साफ तौर पर दिखाई दे रहा था, जिसने इस दोहरे आयोजन को मुकम्मल बनाया। इस बेहद खास और गरिमापूर्ण अवसर पर संस्थान के समस्त विभागों के सम्मानित विभागाध्यक्षगण, प्रबुद्ध प्राध्यापक वर्ग और गैर-शिक्षण स्टाफ के सभी सदस्य पूरी तरह से उपस्थित रहे और उन्होंने लगातार तालियां बजाकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। शिक्षकों ने अपने विद्यार्थियों की इस अनूठी और साहसी सोच की खुलकर सराहना की, जिसने कॉलेज प्रशासन का नाम पूरे क्षेत्र में ऊंचा कर दिया है। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक साथ मिलकर सामूहिक तस्वीरें खिंचवाईं और स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठाया। इस तरह श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमैंट एण्ड टैक्नोलॉजी का यह फ्रेशर और फेयरवेल का अनूठा महा-संगम खट्टी-मीठी यादों, प्रेरणादायक संदेशों और जीवन भर न भूलने वाले हसीन पलों को समेटे हुए पूरी भव्यता और आन-बान-शान के साथ संपन्न हो गया।

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