काशीपुर। उत्तराखंड के शिक्षा जगत और खासतौर पर तराई के द्वार काशीपुर के लिए एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने क्षेत्र के शैक्षणिक परिदृश्य में एक नई ऊंचाइयों को छू लिया है। खोखराताल रोड पर स्थित प्रतिष्ठित सम्राट पृथ्वीराज चौहान ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने शिक्षा के क्षेत्र में एक और नया अध्याय जोड़ते हुए कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी में एम.फार्मा (M.Pharm) जैसे उच्च स्तरीय पाठ्यक्रम की शुरुआत कर दी है। यह नया सत्र फार्मास्यूटिक्स विषय के साथ शुरू किया गया है, जो कि संस्थान के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है। इस गौरवशाली उपलब्धि की घोषणा होते ही पूरे परिसर में उत्साह की लहर दौड़ गई है और इसे क्षेत्र के युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर माना जा रहा है। लंबे समय से इस क्षेत्र के छात्रों को उच्च शिक्षा और विशेष शोध कार्यों के लिए बड़े महानगरों की ओर पलायन करना पड़ता था, लेकिन अब इस नई मान्यता के बाद काशीपुर खुद फार्मेसी शिक्षा का एक बड़ा हब बनने की ओर अग्रसर हो गया है, जिससे स्थानीय प्रतिभाओं को अपने ही घर में विश्वस्तरीय शिक्षा प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
संस्थान की इस शानदार कामयाबी पर प्रकाश डालते हुए मैनेजिंग डायरेक्टर महेश सिंह चौहान ने बड़े गर्व के साथ साझा किया कि इस नए एम.फार्मा पाठ्यक्रम को शुरू करने के पीछे उनकी एक बहुत ही दूरदर्शी सोच और ठोस योजना रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य केवल एक नया कोर्स शुरू करना भर नहीं है, बल्कि फार्मेसी शिक्षा के मौजूदा स्तर को एक नई ऊंचाई पर ले जाना और छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है। महेश सिंह चौहान के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बढ़ते बदलावों को देखते हुए उच्च शिक्षित विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ी है और यह संस्थान अब उसी कमी को पूरा करने का काम करेगा। उनका मानना है कि शिक्षा में गुणवत्ता और आधुनिकता का समावेश ही छात्रों के सफल करियर की नींव रखता है, और इसी ध्येय को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने अथक प्रयासों के बाद इस प्रतिष्ठित पाठ्यक्रम को धरातल पर उतारने में सफलता हासिल की है।
शिक्षा के क्षेत्र में इस बड़ी क्रांति को लेकर संस्थान के चेयरमैन गोपाल सिंह चौहान ने बहुत ही सारगर्भित जानकारी देते हुए बताया कि इस कोर्स को लाने का वास्तविक ध्येय छात्रों को उन्नत शोध, अनुसंधान और करियर के ऐसे अवसर प्रदान करना है जो पहले उनके लिए सुलभ नहीं थे। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और उत्तराखंड शासन ने सम्राट पृथ्वीराज चौहान कॉलेज की शिक्षा गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक मानकों की बहुत ही बारीकी से जांच-परख की थी। कड़ी गुणवत्ता जांच के बाद ही एम.फार्मा कोर्स के लिए आधिकारिक मान्यता प्रदान की गई है, जो इस बात का सबूत है कि संस्थान के पास उच्चतम शैक्षणिक संसाधन मौजूद हैं। गोपाल सिंह चौहान ने यह भी रेखांकित किया कि अब काशीपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मेधावी छात्रों को एम.फार्मा की डिग्री लेने के लिए दिल्ली, चंडीगढ़ या अन्य दूरदराज के शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा, जिससे उनके समय और धन दोनों की भारी बचत होगी।
संस्थान के शैक्षणिक सफर को और विस्तार देते हुए निदेशक डॉ. कपिल कुमार ने बताया कि कॉलेज में डी.फार्मा और बी.फार्मा जैसे बुनियादी और स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम पहले से ही बहुत ही सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे थे, लेकिन एम.फार्मा की शुरुआत ने इस शैक्षणिक श्रृंखला को पूर्णता प्रदान कर दी है। उन्होंने शासन और नियामक संस्थाओं के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उत्तराखंड शासन और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा दी गई यह मान्यता संस्थान की साख पर मुहर लगाने जैसी है। डॉ. कपिल कुमार का मानना है कि यह कदम न केवल छात्रों के भविष्य को सशक्त बनाएगा बल्कि उन्हें शोध और विकास (R&D) के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। उनके अनुसार, किसी भी संस्थान की असली ताकत उसके छात्रों की सफलता में निहित होती है और एम.फार्मा के आने से अब यहाँ के छात्र दवा निर्माण और अनुसंधान के जटिल विषयों में विशेषज्ञता हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे।
अकादमिक सुविधाओं और शोध संसाधनों की बात करते हुए संस्थान के वाइस प्रिंसिपल डॉ. अमित सेन ने विस्तार से बताया कि कॉलेज प्रशासन ने इस उच्च स्तरीय कोर्स के लिए पहले से ही पुख्ता इंतजाम कर लिए थे। उन्होंने जानकारी दी कि परिसर में बेहद आधुनिक और अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित प्रयोगशालाएं (Labs) स्थापित की गई हैं, जहाँ छात्र अपने प्रयोग और शोध कार्य निर्बाध रूप से कर सकेंगे। इसके साथ ही कॉलेज में बहुत ही अनुभवी और कुशल फैकल्टी की एक पूरी टीम तैनात है जो छात्रों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं बल्कि व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करेगी। डॉ. अमित सेन के अनुसार, रिसर्च की ये बेहतर सुविधाएं आगामी समय में कॉलेज को एक उत्कृष्ट शोध केंद्र के रूप में स्थापित करेंगी। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक विकास को लेकर स्थानीय अभिभावकों और शिक्षाविदों में भी भारी जोश देखा जा रहा है, क्योंकि अब उनके बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण माहौल में उच्च शिक्षा उपलब्ध होगी।
सम्राट पृथ्वीराज चौहान कॉलेज की इस उपलब्धि पर शिक्षा विशेषज्ञों ने अपनी राय देते हुए कहा है कि इस तरह के विशेषज्ञता वाले पाठ्यक्रमों की शुरुआत से पूरे उत्तराखंड क्षेत्र में फार्मास्यूटिकल शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान को बहुत मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं के उत्पादन और उनकी गुणवत्ता नियंत्रण के क्षेत्र में एम.फार्मा के विशेषज्ञों की भारी मांग रहती है और यह संस्थान अब उस मांग की आपूर्ति का प्रमुख केंद्र बनेगा। जैसे ही एम.फार्मा कोर्स को हरी झंडी मिलने की खबर बी.फार्मा के छात्र-छात्राओं तक पहुंची, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने कैंपस में एक-दूसरे को बधाई देकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। छात्रों के बीच यह चर्चा आम है कि अब उन्हें अपनी मास्टर्स डिग्री के लिए कहीं बाहर जाने की चिंता नहीं सताएगी। कुल मिलाकर देखा जाए तो खोखराताल रोड स्थित इस कॉलेज ने एम.फार्मा की मान्यता हासिल कर न केवल अपनी शैक्षणिक श्रेष्ठता को साबित किया है, बल्कि पूरे जिले के लिए इसे गर्व और उल्लास का एक ऐतिहासिक अवसर बना दिया है।





