काशीपुर। देवभूमि उत्तराखंड की शांत वादियों में उस समय राजनीतिक और सामाजिक उबाल आ गया, जब जसपुर के विधायक आदेश चौहान द्वारा वैश्य समाज के आराध्य और समाजवाद के प्रणेता महाराजा अग्रसेन को लेकर की गई अमर्यादित टिप्पणी ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया। काशीपुर में आज वैश्य समाज के प्रबुद्ध जनों और व्यापारियों ने एक अति आवश्यक आपातकालीन बैठक बुलाकर विधायक के उन विवादित अपशब्दों पर गहरा रोष व्यक्त किया, जिससे करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुँची है। बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को यह अधिकार नहीं है कि वह हमारे महापुरुषों, स्वतंत्रता सेनानियों या किसी महान विभूति के सम्मान के साथ खिलवाड़ करे। विधायक आदेश चौहान द्वारा जिस तरह से महाराजा अग्रसेन के व्यक्तित्व को कमजोर दिखाने का प्रयास किया गया, उसने न केवल अग्रवाल समाज बल्कि समूचे हिंदू समाज को उद्वेलित कर दिया है। समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर विधायक ने सार्वजनिक रूप से अपने कृत्य के लिए माफी नहीं मांगी, तो न केवल काशीपुर बल्कि पूरे उत्तराखंड में उनके विरुद्ध उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा और कानूनी कार्रवाई के लिए मोर्चा खोल दिया जाएगा।
बैठक में वक्ताओं ने महाराजा अग्रसेन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे केवल वैश्य समाज के पुरोधा नहीं थे, बल्कि वे विश्व के पहले ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने ‘एक ईंट और एक रुपया’ का नारा देकर सर्वसमाज को जोड़ने और आर्थिक समानता का संदेश दिया था। उन्होंने एक ऐसे राज्य की स्थापना की थी जहाँ अग्रोहा आने वाले हर व्यक्ति को समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जाता था, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग का हो। ऐसे महान समाज सुधारक और गरीब परवर विभूति के लिए हल्के शब्दों का प्रयोग करना विधायक की अज्ञानता और कुंठा को दर्शाता है। वक्ताओं ने आक्रोशित स्वर में कहा कि नेताओं को किसी भी महापुरुष, चाहे वे रानी लक्ष्मीबाई हों या महाराजा अग्रसेन, पर टिप्पणी करने से पहले उनका इतिहास पढ़ना चाहिए। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे इतिहास पुरुष को निशाना बनाया जा रहा है जिन्होंने समाज को बांटने के बजाय हमेशा सबको साथ लेकर चलने की सीख दी। काशीपुर के वैश्य समाज ने एकजुट होकर इस अपमान का बदला लेने की शपथ ली है और विधायक को अपनी मर्यादा में रहने की सख्त हिदायत दी है।
इस विवाद के पीछे राजनीतिक साजिशों की बू भी महसूस की जा रही है, जिसे लेकर बैठक में गंभीर चिंता व्यक्त की गई। चर्चा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि बुलंदशहर, नोएडा और गुड़गांव के बाद अब जसपुर और काशीपुर जैसे क्षेत्रों में भी तुष्टीकरण की राजनीति अपना पैर पसारने लगी है। बुद्धिजीवियों का मानना है कि हिंदू समाज को जातियों में बांटकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने का यह एक सुनियोजित प्रयास है। जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ‘बटोगे तो कटोगे’ का नारा देकर समूचे हिंदू समाज को एकजुट करने और राष्ट्रवाद की भावना को प्रबल करने का अथक प्रयास कर रहे हैं, वहीं कुछ क्षेत्रीय राजनेता अपनी संकीर्ण मानसिकता और ‘मुस्लिम राजनीति’ को साधने के चक्कर में हिंदू समाज की एकता में दरार पैदा कर रहे हैं। काशीपुर के अग्रवाल समाज ने इस चाल को समझते हुए आह्वान किया कि हमें बाहरी ताकतों और ऐसे नेताओं की बातों में आकर टुकड़ों में नहीं बंटना है, जो इतिहास का ज्ञान न होने के बावजूद समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।
बैठक के समापन पर वैश्य समाज के नेताओं ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए कहा कि महाराजा अग्रसेन के हम सभी वंशज आज अपने आराध्य के सम्मान की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध हैं। जसपुर विधायक आदेश चौहान द्वारा बोले गए अपशब्द केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि पूरे समाज की अस्मिता पर प्रहार है। इस अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में समाज ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर माफी नहीं मांगी गई, तो यह विरोध प्रदर्शन सड़कों पर उतरेगा और विधायक के पुतले दहन से लेकर उनके घेराव तक की रणनीति तैयार की जाएगी। काशीपुर के व्यापारियों और युवाओं ने भी इस मुहिम को अपना पूरा समर्थन दिया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि महापुरुषों के अपमान को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अंततः, बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि समाज की गरिमा सर्वोपरि है और राजनीति की आड़ में किसी भी विभूति के चरित्र हनन की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।





