उत्तराखंड। प्रदेश में मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण के बाद सामने आए आंकड़ों ने राजनीतिक दलों, संभावित प्रत्याशियों और चुनावी रणनीतिकारों के बीच नई हलचल पैदा कर दी है। राज्य निर्वाचन प्रक्रिया के तहत विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के प्रथम चरण के पूरा होने के बाद जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। राज्यभर में कुल 8,26,977 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जबकि संशोधित ड्राफ्ट सूची के अनुसार अब उत्तराखंड में कुल 71,33,785 मतदाता दर्ज किए गए हैं। इन आंकड़ों ने चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। निर्वाचन विभाग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता, शुद्धता और वास्तविक मतदाताओं को सूची में शामिल करने के उद्देश्य से की गई है। वहीं दूसरी ओर लगभग 19 लाख मतदाताओं के गणना फॉर्म में विभिन्न प्रकार की विसंगतियां सामने आने के बाद उन्हें नोटिस जारी करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। विभाग का मानना है कि आगामी दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची पहले से कहीं अधिक सटीक और त्रुटिरहित होगी। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार मतदाता सूची का यह संशोधन लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे वास्तविक पात्र मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित होगी और अपात्र अथवा दोहराए गए नामों को हटाने में सफलता मिलेगी।
राजधानी देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने ड्राफ्ट मतदाता सूची से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के पहले चरण की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में व्यापक सत्यापन अभियान चलाया गया, जिसके आधार पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया है। संशोधित सूची के अनुसार अब उत्तराखंड में कुल 71,33,785 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें 37,23,614 पुरुष मतदाता, 34,09,954 महिला मतदाता तथा 217 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग का उद्देश्य प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल करना और अपात्र अथवा दोहराव वाले नामों को हटाना है। इसी क्रम में लगभग 19 लाख गणना प्रपत्रों में विभिन्न प्रकार की त्रुटियां और विसंगतियां चिन्हित की गई हैं। इन मामलों में संबंधित मतदाताओं को नियमानुसार नोटिस जारी किए जाएंगे ताकि उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिल सके। निर्वाचन विभाग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी और पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है ताकि अंतिम मतदाता सूची पर किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो और प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया जा सके।
विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के बाद सबसे अधिक चर्चा उन मतदाताओं के नाम हटने को लेकर हो रही है, जिनकी संख्या इस बार अपेक्षा से कहीं अधिक सामने आई है। विभाग द्वारा जारी जिलेवार आंकड़ों के अनुसार देहरादून जिले में सर्वाधिक 1,86,008 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिससे यह जिला पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर है। इसके बाद ऊधमसिंह नगर में 1,77,673 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसी प्रकार हरिद्वार जिले में 1,30,203, नैनीताल में 71,810, अल्मोड़ा में 55,485, पौड़ी गढ़वाल में 51,359, टिहरी गढ़वाल में 43,625, पिथौरागढ़ में 27,436, चमोली में 23,436, उत्तरकाशी में 18,405, चंपावत में 17,718, बागेश्वर में 13,010 तथा रुद्रप्रयाग में 10,809 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इन आंकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक दलों ने भी अपने स्तर पर इन परिवर्तनों का अध्ययन प्रारंभ कर दिया है, क्योंकि मतदाता सूची में इतने बड़े पैमाने पर हुए बदलाव आगामी चुनावों की रणनीति पर सीधा प्रभाव डाल सकते हैं। निर्वाचन विभाग का कहना है कि जिन नामों को हटाया गया है, उनके पीछे निर्धारित नियमों के अनुरूप सत्यापन प्रक्रिया अपनाई गई है।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण के साथ-साथ निर्वाचन आयोग ने मतदान केंद्रों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे भविष्य में मतदाताओं को मतदान के दौरान अधिक सुविधा मिल सकेगी। निर्वाचन विभाग के अनुसार पहले उत्तराखंड में कुल 11,733 मतदान केंद्र संचालित किए जा रहे थे, जबकि अब उनकी संख्या बढ़ाकर 12,543 कर दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि बढ़ती आबादी, नए बसावट क्षेत्रों और मतदान केंद्रों तक मतदाताओं की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। अधिक मतदान केंद्र बनने से मतदाताओं को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और मतदान दिवस पर भीड़भाड़ में कमी आएगी। निर्वाचन विभाग का कहना है कि मतदान प्रक्रिया को अधिक सुगम, व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा। इसके साथ ही निर्वाचन अधिकारियों को भी मतदान प्रबंधन में सुविधा मिलेगी तथा सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मतदान केंद्रों की संख्या में यह वृद्धि भविष्य के चुनावों में मतदाता प्रतिशत बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है, क्योंकि मतदान स्थल जितना निकट होगा, मतदाता उतनी ही सहजता से अपने मताधिकार का प्रयोग कर पाएंगे।
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची अभी ड्राफ्ट स्वरूप में जारी की गई है और इसमें दावे एवं आपत्तियों के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि 14 जुलाई से 11 सितंबर तक संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे तथा इस अवधि में सभी दावों और आपत्तियों का विधिसम्मत निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम किसी कारणवश सूची में शामिल नहीं हो सके हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत फॉर्म-6 भरकर अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसी प्रकार यदि किसी मतदाता को किसी नाम को हटवाना है तो उसके लिए फॉर्म-7 उपलब्ध रहेगा, जबकि नाम, पता, आयु अथवा अन्य विवरणों में संशोधन कराने के लिए फॉर्म-8 भरना होगा। निर्वाचन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रस्तुत करें ताकि अंतिम मतदाता सूची तैयार होने से पहले सभी वास्तविक त्रुटियों का समाधान किया जा सके। अधिकारियों ने यह भी कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का सबसे महत्वपूर्ण आधार है और प्रत्येक पात्र नागरिक का सहयोग इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए आवश्यक है।
ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ ही उत्तराखंड में चुनावी गतिविधियों ने भी नई गति पकड़ ली है। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और संभावित उम्मीदवारों की नजर अब दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पर टिक गई है, क्योंकि अंतिम मतदाता सूची ही भविष्य के चुनावी समीकरणों का आधार बनेगी। निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी भी पात्र मतदाता को अधिकार से वंचित करना नहीं बल्कि मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन, प्रमाणिक और त्रुटिरहित बनाना है। विभाग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे अपनी प्रविष्टियों की जांच अवश्य करें और यदि किसी प्रकार की गलती या नाम छूटने की स्थिति सामने आती है तो निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से समय रहते आवेदन करें। चुनाव विशेषज्ञों का भी मानना है कि इतने बड़े स्तर पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को मजबूत करेगा, क्योंकि इससे केवल वास्तविक और पात्र मतदाता ही अंतिम सूची में शामिल रहेंगे। आगामी दिनों में नोटिसों के निस्तारण, दावों और आपत्तियों की सुनवाई तथा आवश्यक संशोधनों के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी, जिसके बाद उत्तराखंड की चुनावी तस्वीर और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएगी। फिलहाल राज्यभर में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची और उसमें दर्ज व्यापक बदलाव राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक सभी क्षेत्रों में चर्चा का प्रमुख विषय बने हुए हैं।





