काशीपुर। द्रोणा की पावन धरा पर समाज सेवा के क्षेत्र में एक नए स्वर्णिम अध्याय का सूत्रपात करते हुए श्री कायस्थ सभा द्वारा मानवता की मिसाल पेश की गई है। शहर की इस प्रतिष्ठित संस्था ने अपनी महत्वाकांक्षी “श्री चित्रगुप्त कन्यादान योजना” के माध्यम से एक निर्धन परिवार के घर खुशियों की शहनाई बजाकर यह सिद्ध कर दिया है कि यदि समाज एकजुट हो जाए तो अभाव की बेड़ियाँ किसी भी बेटी के अरमानों को नहीं रोक सकतीं। योजना के शुभारंभ के बाद प्राप्त हुए प्रथम आवेदन पर त्वरित संज्ञान लेते हुए संस्था ने न केवल विवाह का संपूर्ण प्रबंध किया, बल्कि एक पिता की भांति कन्या को विदा कर समाज के समक्ष संवेदनशीलता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर काशीपुर के गणमान्य नागरिकों ने साक्षी बनकर इस पुनीत कार्य की सराहना की और इसे क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण एवं सामाजिक समरसता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर करार दिया है।
देवभूमि उत्तराखंड के इस औद्योगिक नगर में जब श्री चित्रगुप्त कन्यादान योजना का बिगुल फूंका गया था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी यह योजना एक वास्तविक संबल बनकर किसी जरूरतमंद की चौखट तक पहुँच जाएगी। योजना के अंतर्गत प्राप्त पहले आवेदन की बारीकी से समीक्षा करने के लिए संस्था के संरक्षक अशोक कुमार सक्सेना के कुशल मार्गदर्शन में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने औपचारिकता से ऊपर उठकर संबंधित परिवार के निवास स्थान पर जाकर उनकी आर्थिक स्थिति और वास्तविक आवश्यकताओं का गहनता से सत्यापन किया। जब समिति इस निष्कर्ष पर पहुँची कि परिवार वास्तव में सहायता का पात्र है, तब कार्यकारिणी ने बिना किसी विलंब के अपनी स्वीकृति प्रदान की। विवाह के लिए न केवल सभा भवन को निःशुल्क उपलब्ध कराया गया, बल्कि आयोजन की भव्यता में कोई कमी न रहे, इसका भी पूर्ण ध्यान रखा गया।
नवदंपत्ति के सुखद भविष्य और उनके नए गृहस्थ जीवन की नींव को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से श्री कायस्थ सभा ने दरियादिली दिखाते हुए उपहारों की झड़ी लगा दी। संस्था की ओर से कन्या को ₹5100 की नकद धनराशि का चेक भेंट किया गया, ताकि तात्कालिक जरूरतों को पूरा किया जा सके। इसके अतिरिक्त, दानदाताओं और संस्था के उदार सहयोगियों के सौजन्य से गृहस्थी का समस्त आवश्यक सामान जैसे वॉशिंग मशीन, कूलर, सोफा सेट, शानदार डिनर सेट, प्रेस, वाटर कूलर, गैस चूल्हा, और रसोई के लिए जूसर-मिक्सर-ग्राइंडर, केसरोल एवं कुकर जैसी वस्तुएं प्रदान की गईं। इन उपहारों के पीछे की भावना केवल आर्थिक मदद देना नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि वह बेटी जब अपने नए घर की दहलीज पर कदम रखे, तो उसे किसी भी छोटी-बड़ी वस्तु के लिए अभाव का सामना न करना पड़े और उसका जीवन सुगमता से आगे बढ़ सके।

इस पुण्यमयी महायज्ञ में समाज के विभिन्न वर्गों और प्रबुद्ध नागरिकों ने आहुति देकर इसे सफल बनाया, जिसमें ए.के. माथुर, संजय सक्सेना, गीता सक्सेना, वीरेंद्र प्रकाश सक्सेना, अश्वनी भटनागर, बबीता सक्सेना, राहुल शर्मा, पवन बंसल और अमित कुमार गुप्ता जैसे प्रमुख समाजसेवियों का नाम अग्रणी रहा। इन व्यक्तित्वों ने न केवल आर्थिक सहयोग प्रदान किया, बल्कि विवाह की व्यवस्थाओं में भी सक्रिय भागीदारी निभाकर यह संदेश दिया कि सेवा ही परमो धर्म है। इनके निस्वार्थ योगदान की बदौलत ही प्रथम लाभार्थी कन्या का विवाह इतने गरिमामय ढंग से संपन्न हो सका। आयोजन के दौरान उपस्थित अतिथियों ने मुक्तकंठ से इन सहयोगियों के जज्बे को सलाम किया और कहा कि समाज में ऐसे दानवीरों की उपस्थिति ही मानवता की लौ को प्रज्वलित रखे हुए है, जिससे भविष्य में अन्य कन्याओं को भी लाभ मिलेगा।
विवाह की रस्मों के उपरांत भावुक क्षणों के बीच संस्था के अध्यक्ष अभिताभ सक्सेना एडवोकेट ने अपने संबोधन में सभी सहयोगियों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की और इस सफलता को टीम वर्क का परिणाम बताया। उन्होंने बड़े ही गर्व के साथ कहा कि आज हमारे लिए आत्मिक संतोष का दिन है क्योंकि हमने जिस उद्देश्य के साथ श्री चित्रगुप्त कन्यादान योजना की नींव रखी थी, उसका प्रत्यक्ष लाभ एक वास्तविक जरूरतमंद तक पहुँच गया है। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संस्था का लक्ष्य मात्र धन का वितरण करना नहीं है, बल्कि समाज में व्याप्त उस खाई को पाटना है जहाँ आर्थिक तंगी बेटियों के विवाह में बाधक बनती है। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि कोई भी योग्य कन्या केवल पैसों की कमी की वजह से विवाह से वंचित नहीं रहनी चाहिए। इस सफल क्रियान्वयन ने संस्था को भविष्य में और अधिक ऊर्जा के साथ काम करने का संबल प्रदान किया है।
योजना की पारदर्शिता और भविष्य की रूपरेखा पर प्रकाश डालते हुए संस्था के सचिव राजेश कुमार सक्सेना ने जानकारी दी कि आवेदन की प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रखा गया है। उन्होंने बताया कि जांच समिति द्वारा प्रत्येक मामले का व्यक्तिगत रूप से सत्यापन किया जाना योजना की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है, ताकि लाभ केवल उन्हीं तक पहुँचे जो वास्तव में इसके हकदार हैं। सचिव ने भविष्य की योजनाओं का खुलासा करते हुए कहा कि हमारा निरंतर प्रयास रहेगा कि आने वाले समय में हम अधिक से अधिक कन्याओं के हाथ पीले करने में मददगार साबित हों। उन्होंने समाज के हर वर्ग से अपील की कि वे धर्म, जाति और संप्रदाय से ऊपर उठकर इस मानवीय अभियान से जुड़ें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार अंशदान करें, ताकि यह कारवां कभी रुके नहीं और निरंतर सेवा पथ पर अग्रसर रहे।
अंत में, श्री कायस्थ सभा ने एक बार फिर आमजन से मार्मिक अपील की है कि वे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को पहचानें और अपने आसपास रहने वाले ऐसे परिवारों की पहचान करें जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। संस्था ने आग्रह किया है कि ऐसे जरूरतमंदों की जानकारी तत्काल श्री कायस्थ सभा, काशीपुर के पदाधिकारियों तक पहुँचाएं ताकि समय रहते उचित सहायता सुनिश्चित की जा सके। इस संपूर्ण गरिमामयी आयोजन और कन्या विदाई के समय संस्था संरक्षक मुकेश सक्सेना एडवोकेट, संजय सक्सेना, सुनीता सक्सेना, कविता सक्सेना, अपूर्व चित्रांश एडवोकेट और देवम सक्सेना सहित भारी संख्या में कायस्थ बंधु उपस्थित रहे। सभी की आँखों में एक संतोष था कि उन्होंने एक बेटी के घर को बसाने में अपना योगदान दिया है। यह आयोजन काशीपुर के इतिहास में एक ऐसी मिसाल बन गया है जो आने वाली पीढ़ियों को परोपकार की प्रेरणा देता रहेगा।





