रामनगर। शांत आसमान में पिछले अड़तालीस घंटों से मंडरा रहे एक अनजाने और भीमकाय ड्रोन ने समूचे तराई क्षेत्र की नींद उड़ाकर रख दी है। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के प्रवेश द्वार के रूप में विख्यात इस पर्यटन नगरी में दहशत का आलम यह है कि रात ढलते ही लोग छतों की ओर टकटकी लगाए किसी अनहोनी की आशंका से घिरे नजर आ रहे हैं। इस रहस्यमयी घटनाक्रम की शुरुआत दो रात पहले हुई थी, जब पहली बार स्थानीय निवासियों ने एक चमकती हुई विशालकाय वस्तु को बादलों की ओट में तेजी से गति करते देखा। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो यह कोई साधारण खिलौना या फोटोग्राफी के लिए इस्तेमाल होने वाला छोटा ड्रोन नहीं है, बल्कि इसकी बनावट और इसमें लगी लाइटें किसी अत्याधुनिक टोही उपकरण की ओर इशारा कर रही हैं। जैसे ही रात के दस बजते हैं, रामनगर के शांत वातावरण में इस यंत्र की मौजूदगी से एक अजीब सी सनसनी फैल जाती है, जिसने अब तक के तमाम सुरक्षा दावों और शांतिपूर्ण माहौल पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
अंधेरी रातों में गूंजती इस संदिग्ध ड्रोन की गड़गड़ाहट ने रामनगर के लखनपुर क्षेत्र के निवासियों को सबसे ज्यादा खौफजदा किया है, क्योंकि यह यंत्र बार-बार इसी क्षेत्र के ऊपर से गुजर रहा है। सूचनाओं के अनुसार, इस ड्रोन का उड़ान मार्ग बेहद सुनियोजित प्रतीत होता है, जो मैदानी इलाकों यानी काशीपुर की दिशा से उड़ान भरता है और लंबी दूरी तय करते हुए सीधे रामनगर के रिहायशी और संवेदनशील इलाकों तक अपनी पहुंच बनाता है। स्थानीय लोगों ने गौर किया है कि यह ड्रोन न केवल काफी ऊंचाई पर उड़ता है, बल्कि इसकी रेंज भी इतनी अधिक है कि यह मीलों का सफर पलक झपकते ही तय कर लेता है। शुरूआती दौर में कुछ लोगों ने इसे किसी शादी समारोह या मनोरंजन का साधन मानकर नजरअंदाज कर दिया था, लेकिन जब लगातार दूसरी रात भी ठीक उसी समय और उसी मार्ग पर इस विशालकाय यंत्र को देखा गया, तो शौकिया उड़ान की थ्योरी पूरी तरह खारिज हो गई और साजिश की आशंका ने जन्म ले लिया।
रहस्य की इस परत को और गहरा कर दिया है इस ड्रोन की बेजोड़ तकनीक और इसकी असामान्य दूरी तय करने की क्षमता ने, जो इसे आम ड्रोन की श्रेणी से मीलों दूर खड़ा करती है। रामनगर के सजग नागरिकों ने अपने मोबाइल कैमरों में इस रहस्यमयी घुसपैठिये की कई तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए हैं, जो अब सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर आग की तरह फैल रहे हैं। इन फुटेज में ड्रोन की गति और स्थिरता को देखकर सुरक्षा विशेषज्ञ भी हैरान हैं, क्योंकि काशीपुर से चलकर रामनगर तक आना और फिर उसी रास्ते वापस लौट जाना किसी साधारण रिमोट कंट्रोल की पहुंच से बाहर की बात लगती है। इंटरनेट पर वायरल हो रहे इन वीडियो के नीचे लोग तरह-तरह की अटकलें लगा रहे हैं-कोई इसे सीमा पार की साजिश बता रहा है, तो कोई इसे किसी प्रतिबंधित क्षेत्र की रेकी मान रहा है, जिससे आम जनमानस की सुरक्षा संबंधी चिंताएं अब सातवें आसमान पर पहुंच चुकी हैं।
जब इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ी, तो उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने इस मामले पर आधिकारिक रुख स्पष्ट करते हुए स्थिति की भयावहता को और स्पष्ट कर दिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में यह स्वीकार किया कि प्रशासन या किसी सरकारी एजेंसी द्वारा इस प्रकार के किसी भी ड्रोन का संचालन नहीं किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह उड़ान पूरी तरह अवैध और संदिग्ध है। गोपाल सिंह चौहान ने क्षेत्र की जनता को आश्वस्त करते हुए कहा कि मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और इस बात का पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आखिर इस गोपनीय उड़ान के पीछे किसका हाथ है और इसका असल मकसद क्या है। प्रशासन के इस खुलासे के बाद कि यह सरकारी ड्रोन नहीं है, रामनगर की गलियों में चर्चाओं का बाजार और भी गर्म हो गया है और लोग अब इसे किसी बड़ी आपराधिक या जासूसी गतिविधि से जोड़कर देख रहे हैं।
कानून व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी संभाल रहे रामनगर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार ने भी इस संदिग्ध ड्रोन के विषय में अपनी शुरुआती प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस के पास फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक सूचना या अनुमति संबंधी दस्तावेज मौजूद नहीं हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस मामले को सर्वाेच्च प्राथमिकता पर रखते हुए विस्तृत छानबीन शुरू कर दी है और क्षेत्र में गश्त बढ़ाने के साथ-साथ उन संभावित ठिकानों पर नजर रखी जा रही है जहां से इसे ऑपरेट किया जा सकता है। प्रभारी निरीक्षक सुशील कुमार के अनुसार, काशीपुर से रामनगर के बीच के पूरे रूट को खंगाला जा रहा है और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर ड्रोन के मॉडल और उसकी क्षमता का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि इस रहस्यमयी गतिविधि के स्रोत तक पहुंचा जा सके। पुलिस की इस सक्रियता के बावजूद, जब तक इस यंत्र की असलियत सामने नहीं आ जाती, तब तक पुलिस विभाग के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
वर्तमान में पूरी पर्यटन नगरी रामनगर एक अज्ञात भय के साये में जीने को मजबूर है और हर बीतते घंटे के साथ लोगों का सब्र जवाब दे रहा है, क्योंकि रात होते ही फिर से उसी ड्रोन के आने का डर सताने लगता है। लखनपुर से लेकर आसपास के गांवों तक, हर कोई बस इसी बात की प्रतीक्षा कर रहा है कि कब प्रशासन इस गुत्थी को सुलझाएगा और उस चेहरे को बेनकाब करेगा जो कानून की धज्जियां उड़ाते हुए रात के अंधेरे में आसमान पर कब्जा जमाए हुए है। यह घटना न केवल स्थानीय सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई है, बल्कि इससे पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों में भी चिंता है कि कहीं ऐसी संदिग्ध गतिविधियां बाहरी पर्यटकों के मन में असुरक्षा का भाव पैदा न कर दें। फिलहाल, रामनगर की जनता की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और पुलिस की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस श्आसमानी जासूसश् के पीछे छिपे असली सच से पर्दा उठाएगी और क्षेत्र में दोबारा शांति बहाल करेगी।





