काशीपुर। देवभूमि की शांत वादियों में आज उस समय राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया जब कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने एक प्रेस नोट के माध्यम से वर्तमान भाजपा सरकार के चार वर्षों के कार्यकाल की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने बेहद आक्रामक तेवर अपनाते हुए कहा कि यह चार साल का समय विकास का नहीं, बल्कि प्रदेश की जनता के साथ किए गए छल और विश्वासघात का प्रतीक है। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने दो-टूक शब्दों में घोषणा की कि भाजपा सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल में केवल ‘झूठ का पुलिंदा’ पेश किया है, जहाँ विज्ञापनों में तो स्वर्ग दिखाया जा रहा है, किंतु धरातल पर आम जनमानस नारकीय जीवन जीने को विवश है। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार करते हुए कहा कि चाहे वह रोजगार का मुद्दा हो, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली हो, शिक्षा का गिरता स्तर हो या फिर प्रदेश का चरमराता हुआ वित्तीय प्रबंधन-हर मोर्चे पर यह सरकार पूरी तरह से विफल और अक्षम साबित हुई है। उनके अनुसार, सरकार ने न केवल अपनी प्राथमिकताओं को भुला दिया है, बल्कि वह अपनी विफलताओं के सवालों और जनता के प्रति अपनी जवाबदेही से बचने के लिए लगातार नए-नए पैंतरेबाजी और छलावे का सहारा ले रही है, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत शर्मनाक है।
सरकार की वित्तीय नीतियों और प्रबंधन पर उंगली उठाते हुए महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने विस्तार से बताया कि प्रदेश आज कर्ज के जाल में डूबता जा रहा है और वित्तीय कुप्रबंधन के कारण विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि जनता पर करों का बोझ बढ़ाकर सरकार अपनी फिजूलखर्ची में व्यस्त है, जबकि मध्यम वर्ग और गरीब जनता को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं में भारी कटौती की गई है। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने आरोप लगाया कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था आज पटरी से उतर चुकी है और सरकार के पास इसे सुधारने का न तो कोई विजन है और न ही कोई इच्छाशक्ति। उन्होंने जोर देकर कहा कि रोजगार की तलाश में भटकते युवाओं और बढ़ती बेरोजगारी की दर ने इस सरकार की उन तमाम घोषणाओं की पोल खोल दी है जो चुनाव से पहले बड़े-बड़े मंचों से की गई थीं। सरकार की नीतियां केवल चंद पूंजीपतियों और माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं, जबकि आम आदमी की रसोई से लेकर उसकी जेब तक पर डाका डाला जा रहा है। उन्होंने आगाह किया कि यदि इसी प्रकार का वित्तीय अनैतिकता का माहौल बना रहा, तो प्रदेश की आने वाली पीढ़ियों को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा, जिसके लिए सीधे तौर पर वर्तमान सत्ताधारी दल जिम्मेदार होगा।
पलायन की समस्या को प्रदेश के लिए एक नासूर बताते हुए महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने कहा कि पिछले चार वर्षों में इस गंभीर मुद्दे पर किसी भी प्रकार की ठोस नीति का न बनाना सरकार की सबसे बड़ी और अक्षम्य नाकामी है। उन्होंने अत्यंत भावुक और तल्ख अंदाज में कहा कि आज प्रदेश का स्वाभिमानी युवा अपनी ही धरती पर रोजगार न मिलने के कारण अन्य महानगरों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गया है। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी अब प्रदेश के काम नहीं आ रहा है, क्योंकि गांवों के बाद गांव खाली हो रहे हैं और ‘घोस्ट विलेज’ यानी भूतहा गांवों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है। सरकार ने पलायन रोकने के नाम पर केवल समितियां बनाईं और कागजों पर योजनाएं दौड़ाईं, लेकिन धरातल पर एक भी ऐसा उद्योग या रोजगार का साधन विकसित नहीं किया जिससे युवाओं को अपनी माटी में रुकने का संबल मिल सके। युवाओं की विवशता को भाजपा सरकार की नीतियों का परिणाम बताते हुए उन्होंने कहा कि जब तक नीति स्पष्ट नहीं होगी और स्थानीय संसाधनों का दोहन स्थानीय लोगों के हित में नहीं होगा, तब तक पलायन का यह अभिशाप प्रदेश को पीछे धकेलता रहेगा, और इसके लिए इतिहास कभी भी वर्तमान सत्ताधीशों को माफ नहीं करेगा।
शिक्षा और पुलिस महकमे की दुर्दशा पर प्रकाश डालते हुए महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने सरकार की मंशा पर गहरे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार बेरोजगारी कम करने के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षा विभाग और पुलिस महकमे में हजारों की संख्या में रिक्त पद धूल फांक रहे हैं। इन रिक्त पदों को न भरना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें बेरोजगार रखकर अपनी राजनीति चमकाना चाहती है। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने सवाल किया कि जब स्कूलों में शिक्षक नहीं होंगे और थानों में पर्याप्त पुलिस बल नहीं होगा, तो प्रदेश का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा? हजारों योग्य और शिक्षित युवा परीक्षाओं की तैयारी में अपनी उम्र गुजार रहे हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया या तो लटकी हुई है या फिर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। पुलिस महकमे में पदों के खाली होने से कानून व्यवस्था की स्थिति और भी भयावह हो गई है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि रिक्त पदों पर भर्ती न करना युवाओं के भविष्य के साथ किया जा रहा एक क्रूर मजाक है, और कांग्रेस इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी। सरकार को तुरंत इन पदों पर पारदर्शी तरीके से नियुक्तियां शुरू करनी चाहिए, अन्यथा युवाओं का आक्रोश इस सरकार के पतन का कारण बनेगा।
प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की जर्जर अवस्था पर प्रहार करते हुए महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने कहा कि आज सरकारी अस्पताल केवल ‘रेफरल केंद्र’ बनकर रह गए हैं, जहाँ बुनियादी सुविधाओं का भी नितांत अभाव है। ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से बदहाल हैं; कहीं डॉक्टर नहीं हैं, तो कहीं दवाइयों का टोटा है, और कहीं मशीनें खराब पड़ी हैं। मरीज जब उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचता है, तो उसे सीधे बड़े शहरों या निजी अस्पतालों के लिए रेफर कर दिया जाता है, जहाँ गरीब जनता का शोषण होता है। महानगर कांग्रेस जिला अध्यक्ष अलका पाल ने आरोप लगाया कि चार सालों में सरकार ने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए कोई निवेश नहीं किया, जिसके कारण आम जनता को छोटी-छोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ और सस्ती नहीं होंगी, तब तक विकास की बातें केवल खोखली साबित होंगी। सरकारी अस्पतालों की इस दयनीय स्थिति के लिए स्वास्थ्य मंत्री और पूरी सरकार जिम्मेदार है, जिन्होंने जनता की जान को जोखिम में डाल दिया है। सरकारी अस्पतालों का इस तरह से पंगु होना यह दर्शाता है कि भाजपा सरकार का ध्यान जनसेवा पर नहीं, बल्कि केवल सत्ता के सुख भोगने पर केंद्रित है।
कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने सरकार की विफलता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लचर कानून व्यवस्था के कारण अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं और बहन-बेटियां असुरक्षित महसूस कर रही हैं। भाजपा सरकार के पास इस बिगड़ती स्थिति को सुधारने का कोई भी कारगर उपाय या इच्छाशक्ति नजर नहीं आती। इसके साथ ही, उन्होंने भ्रष्टाचार और खनन माफियाओं के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अलका पाल ने कहा कि जिस तरह से खनन माफिया प्रदेश की नदियों और प्राकृतिक संसाधनों को लूट रहे हैं, उस पर सरकार की रहस्यमयी खामोशी कई बड़े सवाल पैदा करती है। यह खामोशी स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार की पोल खोल रही है और संकेत दे रही है कि सत्ता के उच्च पदों पर बैठे लोगों का इन माफियाओं को संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार आज शासन के हर स्तर पर व्याप्त हो चुका है और बिना रिश्वत के कोई भी काम होना नामुमकिन हो गया है। अंत में, उन्होंने मांग की कि सरकार अपनी चार साल की उपलब्धियों और विफलताओं पर एक ‘विस्तृत श्वेत-पत्र’ जारी करे और जनता को जवाब दे कि आखिर क्यों प्रदेश की स्थिति इतनी बदतर हो गई है।





