हरिद्वार। प्रेस क्लब हरिद्वार के गलियारों में चुनावी बिगुल की गूंज इस कदर प्रबल हो उठी है कि तीर्थनगरी का पूरा मीडिया जगत इस समय केवल और केवल चुनावी चर्चाओं के भंवर में डूबा हुआ नजर आ रहा है। बुधवार का शुभ सवेरा होते ही प्रेस क्लब के प्रांगण में एक ऐसी अभूतपूर्व गहमागहमी और रणनीतिक हलचलें देखने को मिलीं, जिसने यह साफ कर दिया कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रहरी अब स्वयं एक अत्यंत महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनने जा रहे हैं। वर्ष 2026 की नई कार्यकारिणी के गठन हेतु नामांकन पत्रों के वितरण की औपचारिक शुरुआत के साथ ही प्रेस क्लब परिसर किसी राजनीतिक अखाड़े की तरह जीवंत हो उठा। जैसे ही घड़ी की सुइयों ने सुबह के ठीक दस बजाए, प्रेस क्लब सभागार में पत्रकारों, संपादकों और विभिन्न मीडिया घरानों से जुड़े प्रतिनिधियों का एक विशाल और अनुशासित हुजूम उमड़ पड़ा। मुख्य चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग की अत्यंत पैनी नजरों और उनके द्वारा स्थापित सख्त नियमों के बीच नामांकन पत्र वितरण की यह प्रक्रिया शुरू हुई। प्रदीप गर्ग ने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता और निष्पक्षता ही इस चुनाव की मूल आत्मा है और इसी के अनुरूप हर एक कदम उठाया जा रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद पत्रकारों के बीच चुनावी गणित और भविष्य के नेतृत्व को लेकर होने वाली चर्चाओं ने माहौल को और भी अधिक ‘हॉट’ और आकर्षक बना दिया था।
चुनावी महासमर के इस पहले ही दिन सबसे अधिक आकर्षण, जिज्ञासा और रणनीतिक चर्चाओं का मुख्य केंद्र अध्यक्ष पद रहा, जिसके लिए दो अत्यंत कद्दावर और अनुभवी चेहरों ने अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर मुकाबले को सीधा और ‘अल्ट्रा’ रोमांचक बना दिया है। मुख्य चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग द्वारा मीडिया को साझा की गई आधिकारिक जानकारी और पुख्ता आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने एक बार फिर से चुनावी समर के चुनौतीपूर्ण अखाड़े में उतरने का साहसिक फैसला लेते हुए अपना नामांकन पत्र प्राप्त किया है। धर्मेंद्र चौधरी के दोबारा मैदान में आने को उनके पिछले कार्यकाल के दौरान क्लब के हित में किए गए विकास कार्यों, बुनियादी ढांचे में सुधार और सदस्यों के कल्याण हेतु उठाए गए कदमों पर जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा है। हालाँकि, उनकी इस चुनावी राह को अत्यधिक चुनौतीपूर्ण बनाने के उद्देश्य से प्रेस क्लब के पूर्व में यशस्वी महामंत्री रहे अश्वनी अरोरा ने भी अध्यक्ष पद के लिए अपना पर्चा खरीदकर यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है कि वह इस बार संगठन के भीतर एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन और वैचारिक बदलाव के पक्षधर हैं। मुख्य चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग ने इन दोनों दिग्गजों के नामांकन की पुष्टि करते हुए बताया कि अध्यक्ष पद की यह जंग अब केवल एक पद की सामान्य लड़ाई न रहकर हरिद्वार की पत्रकारिता में व्यक्तिगत प्रभाव, पेशेवर साख और सांगठनिक वर्चस्व की एक अत्यंत प्रतिष्ठित अग्निपरीक्षा में तब्दील हो चुकी है।
अध्यक्ष पद के ठीक बाद अगर किसी अन्य पद पर सबसे अधिक सरगर्मी, वैचारिक टकराव और ‘हॉट’ मुकाबला देखने को मिल रहा है, तो वह निस्संदेह महासचिव (महामंत्री) का पद है, जहाँ इस बार एक अत्यंत कड़ा और दिलचस्प त्रिकोणीय संघर्ष उभरकर सामने आया है। मुख्य चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग के कार्यालय से प्राप्त विस्तृत विवरणों के अनुसार, संगठन की रीढ़ माने जाने वाले इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद के लिए कुल तीन सशक्त और प्रभावशाली उम्मीदवारों ने अपनी गहरी रुचि दिखाते हुए नामांकन पत्र प्राप्त किए हैं। इनमें नवीन चौहान, सूर्यकांत बेलवाल और डॉक्टर हिमांशु द्विवेदी जैसे अनुभवी और शहर के चर्चित पत्रकारों के नाम शामिल हैं, जो अपनी विशिष्ट कार्यशैली और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा के लिए जाने जाते हैं। ये तीनों ही चेहरे हरिद्वार के पत्रकारिता जगत में लंबे समय से सक्रिय हैं और संगठन की बारीक से बारीक समस्याओं को गहराई से समझते हैं, यही कारण है कि इनके बीच होने वाली यह सीधी टक्कर इस चुनाव को अब तक का सबसे अनिश्चित और रोमांचक मुकाबला बनाने वाली साबित होगी। महासचिव का पद चूंकि क्लब के रोजमर्रा के कामकाज, वित्तीय प्रबंधन, सदस्यों के बीच आपसी समन्वय और सरकार के साथ संवाद का मुख्य केंद्र होता है, इसलिए मुख्य चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग भी इस पद की गरिमा और पारदर्शिता को लेकर विशेष रूप से सतर्क नजर आ रहे हैं। नामांकन प्रक्रिया के दौरान इन तीनों प्रत्याशियों के साथ मौजूद उनके समर्थकों के भारी उत्साह और ऊर्जा को देखकर यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि आने वाले मतदान के दिन वोटों का ध्रुवीकरण किसी भी दिशा में मुड़कर सबको चौंका सकता है।
कार्यकारिणी सदस्य के पदों के लिए मची अभूतपूर्व होड़ और जबरदस्त प्रतिस्पर्धा ने इस बार के प्रेस क्लब चुनाव को एक विशाल लोकतांत्रिक उत्सव और व्यापक सांगठनिक आंदोलन का जीवंत स्वरूप प्रदान कर दिया है। मुख्य चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग ने उन सभी 26 सदस्यों की आधिकारिक और विस्तृत सूची सार्वजनिक कर दी है जिन्होंने कार्यकारिणी के उपलब्ध 20 पदों पर अपनी निस्वार्थ सेवा देने और प्रेस क्लब को आधुनिकता की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के संकल्प के साथ नामांकन पत्र प्राप्त किए हैं। इन प्रत्याशियों की लंबी और गौरवशाली सूची में ठाकुर शैलेंद्र सिंह, संजीव शर्मा, कुमकुम शर्मा, सुदेश आर्य, जोगिंदर सिंह मावी, कुमार दुष्यंत, तनवीर अली, के के पालीवाल, डॉक्टर शिवा अग्रवाल, बालकृष्ण शास्त्री, देवेंद्र शर्मा, ललितेंद्र नाथ, विकास चौहान, अमित कुमार शर्मा, महेश पारीक, रोहित सिखोला, नरेश दीवान शैली, महताब आलम, शिव प्रकाश शिव, कुलभूषण शर्मा, आफताब खान, सूर्यकांत बेलवाल, संजय चौहान, बृजपाल सिंह, गोपाल कृष्ण पटवर और रूपेश वालिया के नाम प्रमुखता से शामिल किए गए हैं। मुख्य चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग ने बताया कि इतने बड़े पैमाने पर सदस्यों का चुनावी मैदान में उतरना इस बात का साक्षात प्रमाण है कि प्रेस क्लब का प्रत्येक सदस्य अब केवल मूकदर्शक बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि वे स्वयं निर्णय लेने वाली शीर्ष इकाई का एक सक्रिय और उत्तरदायी हिस्सा बनकर हरिद्वार के संपूर्ण मीडिया परिदृश्य में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए पूरी तरह से आतुर हैं।
नामांकन पत्र वितरण के इस पहले और अत्यंत सफल चरण के पूर्ण होने के बाद अब सबकी धड़कनें और जिज्ञासा भरी निगाहें अगले दिन की सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक औपचारिकताओं पर टिक गई हैं, जो अंततः यह तय करेंगी कि चुनावी रणभूमि में वास्तविक योद्धा के रूप में कौन डटा रहेगा। सहायक चुनाव अधिकारी डॉ मनोज सोही और लव कुमार शर्मा ने मुख्य चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आगामी कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए मीडिया को बताया कि गुरुवार का दिन नामांकन पत्र विधिवत रूप से जमा करने की अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया के लिए आरक्षित रखा गया है। निर्धारित समय सारणी के अनुसार, कल सुबह 11:00 बजे से लेकर दोपहर के ठीक 3:00 बजे तक उम्मीदवार अपने समस्त शैक्षिक और पेशेवर विवरणों के साथ भरे हुए नामांकन पत्रों को चुनाव समिति के समक्ष भौतिक रूप से जमा कर सकेंगे। इसके तुरंत बाद मुख्य चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग की अध्यक्षता में नामांकन पत्रों की अत्यंत सूक्ष्मता, गंभीरता और कानूनी मानदंडों के आधार पर जांच की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी उम्मीदवार पात्रता के नियमों और प्रेस क्लब के संविधान का अक्षरशः पालन कर रहे हैं। चुनाव समिति ने यह भी स्पष्ट किया है कि पारदर्शिता के मानकों के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा और यदि किसी नामांकन पत्र में तकनीकी त्रुटि पाई गई, तो उस पर प्रदीप गर्ग द्वारा अंतिम और बाध्यकारी निर्णय लिया जाएगा।
प्रेस क्लब हरिद्वार के इस ऐतिहासिक और ‘हॉट’ चुनाव को लेकर न केवल स्थानीय पत्रकारों के भीतर बल्कि समूचे उत्तराखंड के प्रबुद्ध नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों में भी एक जबरदस्त आकर्षण और चर्चा देखी जा रही है। प्रेस क्लब एक ऐसा सशक्त, जागरूक और प्रभावशाली मंच है जो समय-समय पर न केवल पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान का मुद्दा उठाता है, बल्कि जनहित की ज्वलंत समस्याओं को शासन-प्रशासन के गलियारों तक पहुँचाने में एक मजबूत सेतु का कार्य करता रहा है। मुख्य चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग के अनुसार, बुधवार को नामांकन के पहले ही दिन जिस तरह के अभूतपूर्व उत्साह के साथ वरिष्ठ पत्रकारों और विभिन्न पत्रकार यूनियनों के पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, उससे यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस बार का मतदान प्रतिशत अपने पुराने सभी कीर्तिमानों को ध्वस्त कर देगा। चुनावी मैदान में उतरे सभी प्रत्याशी अब अपने-अपने आकर्षक और दूरदर्शी घोषणापत्रों के साथ मतदाताओं को रिझाने और उनके मन को टटोलने की रणनीति पर दिन-रात काम कर रहे हैं। प्रदीप गर्ग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अनैतिक गतिविधि न हो और पत्रकारिता की मर्यादा बनी रहे। आने वाले 48 घंटे प्रेस क्लब की आंतरिक राजनीति के लिए सबसे अधिक उतार-चढ़ाव वाले और निर्णायक साबित होंगे, क्योंकि नामांकन जमा करने की प्रक्रिया के साथ ही गठबंधन की नई बिसात बिछना शुरू हो जाएगी।
अंतिम विश्लेषण के रूप में देखा जाए तो हरिद्वार के इस चुनावी महाकुंभ ने पत्रकारों के बीच एक नई चेतना, एकता और सांगठनिक मजबूती का संचार कर दिया है, जहाँ हर सदस्य अपने एक वोट की कीमत और जिम्मेदारी को बखूबी पहचान रहा है। मुख्य चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग के नेतृत्व में चल रही यह पूरी चुनाव प्रक्रिया अब अपने दूसरे और सबसे रोमांचक पड़ाव पर पहुँच चुकी है, जहाँ से प्रत्याशियों की अंतिम और वास्तविक तस्वीर उभरकर सबके सामने आएगी। हरिद्वार के हर चौराहे, प्रेस क्लब की कैंटीन और पत्रकारों की निजी बैठकों में अब केवल और केवल जीत के अंतर और हार के कारणों का गणित लगाया जा रहा है। क्या धर्मेंद्र चौधरी अपनी अध्यक्ष की कुर्सी को बरकरार रख पाएंगे, या फिर अश्वनी अरोरा का पुराना अनुभव और नई रणनीति उन्हें सत्ता के शीर्ष सिंहासन पर आसीन करेगी? इसी तरह महासचिव पद पर होने वाली त्रिकोणीय भिड़ंत क्या किसी नए समीकरण को जन्म देगी? मुख्य चुनाव अधिकारी प्रदीप गर्ग की देखरेख में होने वाली नामांकन पत्रों की जांच के बाद यह सस्पेंस और भी गहरा जाएगा। फिलहाल, पूरी मीडिया बिरादरी की सांसें थमी हुई हैं और हर किसी की नजर अब गुरुवार शाम को जारी होने वाली उस अंतिम सूची पर टिकी है, जो हरिद्वार प्रेस क्लब के इस ‘अल्ट्रा’ रोमांचक चुनावी नाटक के वास्तविक नायकों का नाम उजागर करेगी।





