काशीपुर। औद्योगिक नगरी कि पुलिस की जांबाजी और तकनीकी महारत ने एक बार फिर देवभूमि उत्तराखंड में खाकी का परचम लहराते हुए उन सैकड़ों मायूस चेहरों पर सुनहरी मुस्कान बिखेर दी है, जिन्होंने अपने महंगे और कीमती मोबाइल फोन खोने के बाद दोबारा मिलने की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। पिछले लंबे समय से काशीपुर और आसपास के इलाकों में मोबाइल गुमशुदगी की बढ़ती शिकायतों ने आम जनता के साथ-साथ पुलिस प्रशासन की भी नींद उड़ा रखी थी। लेकिन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के कड़े तेवरों और पुलिस अधीक्षक काशीपुर के कुशल रणनीतिक मार्गदर्शन में कोतवाली पुलिस ने एक ऐसा श्महा-अभियानश् छेड़ा, जिसकी गूँज अब पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। प्रभारी निरीक्षक कोतवाली काशीपुर के कुशल नेतृत्व में सीईआईआर पोर्टल (संचार साथी) का जिस तरह से अचूक और घातक इस्तेमाल किया गया, उसने न केवल खोए हुए फोन बरामद किए बल्कि तकनीक के जरिए अपराधियों और लापरवाही बरतने वालों के बीच एक कड़ा संदेश भी प्रसारित किया है। पुलिस की इस विशेष टीम ने रात-दिन एक कर डिजिटल सिग्नल्स का पीछा किया और अंततः उन लोगों की अमानत उनके हाथों में सौंपी, जिनके लिए उनका मोबाइल मात्र एक उपकरण नहीं बल्कि उनकी भावनाओं और मेहनत की कमाई का हिस्सा था।
इस पूरे सनसनीखेज रिकवरी ऑपरेशन के पेचीदा पहलुओं और धरातलीय चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करते हुए प्रभारी निरीक्षक हरेन्द्र चौधरी ने प्रेस वार्ता के दौरान खुलासा किया कि मोबाइल बरामदगी का यह सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम रोमांचक नहीं था। पुलिस टीम के सूक्ष्म विश्लेषण में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि अधिकांश मोबाइल फोन काशीपुर क्षेत्र में लगने वाले साप्ताहिक बाजारों की भारी भीड़भाड़ का फायदा उठाकर गायब किए गए थे। इन बाजारों में उमड़ने वाले जनसैलाब का लाभ उठाकर शातिर जेबकतरे और चोर सक्रिय थे, जो पलक झपकते ही लोगों की जेबों से कीमती हैंडसेट साफ कर रहे थे। प्रभारी निरीक्षक हरेन्द्र चौधरी ने यह भी बताया कि जब इन मोबाइलों को सर्विलांस पर लगाया गया, तो इनकी लोकेशन उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जनपदों जैसे मुरादाबाद और रामपुर में सबसे ज्यादा सक्रिय पाई गई। जैसे ही यह महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगा, काशीपुर पुलिस ने बिना एक पल गंवाए सरहदीय जनपदों के पुलिस थानों से तालमेल बिठाया और एक संयुक्त घेराबंदी शुरू की, जिससे रिकवरी की राह में आने वाली बाधाएं दूर होती चली गईं।
आंकड़ों के आईने में अगर पुलिस की इस ऐतिहासिक सफलता को देखा जाए, तो पिछले 6 महीनों का रिकॉर्ड (अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 तक) वाकई में दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर देता है। प्रभारी निरीक्षक हरेन्द्र चौधरी और उनकी समर्पित सीईआईआर पोर्टल टीम ने लगातार निगरानी और तकनीकी सूझबूझ के बल पर कुल 200 से अधिक मोबाइल फोन बरामद करने में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। बाजार में इन बरामद किए गए स्मार्टफोन्स की अनुमानित कीमत करीब 30 लाख रुपये आंकी गई है, जो कि काशीपुर पुलिस के अब तक के सबसे बड़े रिकवरी अभियानों में से एक माना जा रहा है। यह सफलता केवल एक या दो राज्यों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पुलिस की इस विशेष टीम ने दिल्ली के व्यस्ततम बाजारों से लेकर राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों और हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों तक अपनी पहुँच बनाई। बिहार के सुदूर अंचलों और उत्तर प्रदेश के बागपत, इटावा, नोएडा, पीलीभीत, अयोध्या तथा कानपुर जैसे बड़े शहरों से एक-एक कर मोबाइल ढूंढ निकालना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन टीम के अटूट संकल्प ने हर मुश्किल को बौना साबित कर दिया।
उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी जिलों में भी पुलिस की इस टीम ने अपनी सक्रियता का लोहा मनवाया है। टीम ने नैनीताल की ठंडी वादियों, चम्पावत के दुर्गम पहाड़ों और पौड़ी गढ़वाल की ऊंचाइयों तक अपने कदम बढ़ाए ताकि पीड़ित जनता की अमानत को सुरक्षित वापस लाया जा सके। इस महा-अभियान के दौरान उधम सिंह नगर जिले के कोने-कोने में सघन सर्च ऑपरेशन चलाए गए, जिसमें पड़ोसी राज्यों की पुलिस का भी अत्यंत सराहनीय और पेशेवर सहयोग प्राप्त हुआ। सीईआईआर पोर्टल की टीम ने पोर्टल पर दर्ज होने वाली हर एक शिकायत को सर्वाेच्च प्राथमिकता पर रखा और लगातार श्रियल-टाइम मॉनिटरिंगश् के जरिए यह पक्का किया कि कोई भी गुमशुदा मोबाइल पुलिस की रडार से बाहर न जा पाए। प्रभारी निरीक्षक हरेन्द्र चौधरी ने इस पूरी कामयाबी का श्रेय अपनी टीम की दिन-रात की मेहनत और अन्य राज्यों के पुलिस बलों के साथ स्थापित किए गए बेहतरीन तालमेल को दिया है, जो वास्तव में काबिले तारीफ है।
जब कोतवाली परिसर में इन मोबाइल स्वामियों को बुलाकर उनके खोए हुए फोन ससम्मान वापस किए गए, तो वहां का माहौल अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण हो गया। कई बुजुर्गों और युवाओं की आँखों में खुशी के आँसू साफ देखे जा सकते थे, क्योंकि उनमें से कई लोगों ने उन फोन को खरीदने के लिए अपनी जमा-पूंजी लगा दी थी। पुलिस कार्यालय में मोबाइल पाकर लोग प्रभारी निरीक्षक हरेन्द्र चौधरी और उनकी पूरी टीम का आभार प्रकट करते नहीं थक रहे थे। जनता के बीच पुलिस की इस श्सॉफ्ट पावरश् और मानवीय चेहरे की जमकर प्रशंसा हो रही है, क्योंकि पुलिस ने न केवल मोबाइल बरामद किए बल्कि आम नागरिक का वो भरोसा भी जीत लिया जो कहीं न कहीं खो गया था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी टीम के इस श्स्माइल प्रोजेक्टश् की सराहना की है और इसे आधुनिक पुलिसिंग का एक बेहतरीन उदाहरण करार दिया है।
यह विशाल बरामदगी अभियान अपराधियों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि अब तकनीक के इस युग में कानून के लंबे हाथों से बच निकलना नामुमकिन है। प्रभारी निरीक्षक हरेन्द्र चौधरी के नेतृत्व वाली इस टीम ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि पुलिस बल आधुनिक संसाधनों और अटूट इच्छाशक्ति का संगम बना ले, तो अपराधी चाहे कितनी भी दूरी पर क्यों न छिपा हो, उसे ढूंढ निकालना अब सिर्फ समय की बात है। काशीपुर पुलिस की इस शानदार श्डिजिटल स्ट्राइकश् ने सोशल मीडिया पर भी काफी सुर्खियां बटोरी हैं, जहाँ लोग पुलिस के इस सराहनीय कार्य को श्रियल लाइफ हीरोजश् की उपाधि दे रहे हैं। अंततः, 30 लाख रुपये की यह रिकवरी केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह उन 200 परिवारों की खुशी है जिन्हें काशीपुर पुलिस ने होली-दीवाली जैसा उपहार समय से पहले दे दिया है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि जनता की सुरक्षा और उनकी संपत्ति की हिफाजत ही उनका अंतिम धर्म है, जिसे वे हर हाल में निभाते रहेंगे।





