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महापौर दीपक बाली ने चैती मेले में स्वदेशी हस्तशिल्प प्रदर्शनी और विशाल मुफ्त चिकित्सा शिविर का किया शानदार आगाज़

हस्तशिल्प की धमक और स्वदेशी का शंखनाद
काशीपुर। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जनपद की ऐतिहासिक और रूहानी सरज़मीं काशीपुर में आयोजित होने वाले सुप्रसिद्ध चैती मेले की रंगत उस समय अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच गई, जब नगर के प्रथम नागरिक और यशस्वी महापौर दीपक बाली ने पारंपरिक हस्तशिल्प प्रदर्शनी और जन-स्वास्थ्य हेतु समर्पित होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर का भव्य शुभारंभ किया। चैती मैदान के पंचायती प्रांगण में सजी इस प्रदर्शनी ने अपनी भव्यता से हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया, जहाँ 50 से अधिक विशिष्ट स्टालों के माध्यम से देवभूमि के सुदूरवर्ती जनपदों की कला और कौशल का जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है। महापौर दीपक बाली ने फीता काटकर जैसे ही इस मेले के वाणिज्यिक और सेवा क्षेत्र का द्वार खोला, वैसे ही चारों ओर उत्साह की एक नई लहर दौड़ गई। इस वर्ष का यह हस्तशिल्प बाजार मात्र एक व्यापारिक केंद्र नहीं है, बल्कि यह हमारे स्थानीय हुनरमंदों की उन उंगलियों का सम्मान है जो सदियों पुरानी विरासत को आधुनिकता के धागे में पिरोकर दुनिया के सामने पेश कर रही हैं, और महापौर ने इस पहल को प्रदेश की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने वाला एक क्रांतिकारी कदम करार दिया।

इस प्रदर्शनी की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि यहाँ उत्तराखंड के लगभग हर जिले से आए सूक्ष्म और लघु उद्यमियों ने अपने हुनर का प्रदर्शन किया है, जिसमें रूड़की से लेकर हरिद्वार और स्वयं काशीपुर के स्थानीय हस्तशिल्पियों की भागीदारी इस आयोजन को एक मिनी-उत्तराखंड का स्वरूप प्रदान कर रही है। महापौर दीपक बाली ने प्रत्येक स्टाल का बारीकी से निरीक्षण करते हुए बताया कि यहाँ हाथ से बुने हुए ऊनी वस्त्रों से लेकर नक्काशीदार जूतों और स्थानीय जड़ी-बूटियों से बने उत्पादों की एक विशाल श्रृंखला उपलब्ध है, जो हमारे प्रदेश की विविधता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि विगत कई वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है कि चैती मेले के दौरान इन समूहों को एक मंच दिया जाए, ताकि उनकी कला को न केवल पहचान मिले बल्कि उन्हें एक बड़ा बाजार भी उपलब्ध हो सके। यह प्रदर्शनी इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि अगर हमारे स्थानीय उत्पादों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो वे वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने का माद्दा रखते हैं, और आज महापौर की मौजूदगी ने इन छोटे उद्यमियों के मनोबल को एक नई ऊँचाई प्रदान की है।

अपने संबोधन के दौरान महापौर दीपक बाली ने देश के यशस्वी प्रधानमंत्री के ‘लोकल फॉर वोकल’ अभियान और प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजनरी नेतृत्व की जमकर सराहना की, जिन्होंने उत्तराखंड के उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उस विशेष अपील का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों में स्वागत हेतु केवल स्थानीय स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित ‘सुवेनियर’ या स्मृति चिन्हों का उपयोग करने का निर्देश दिया है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल सके। महापौर ने विश्वास जताया कि जिस तरह से मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसे ब्रांड उभर रहे हैं, वह दिन दूर नहीं जब उत्तराखंड का हर घर एक आत्मनिर्भर इकाई के रूप में विकसित होगा। यह प्रदर्शनी उसी सोच का एक हिस्सा है जहाँ हमारे उद्यमियों को अपनी मेहनत का सीधा लाभ मिल रहा है और वे एक श्रेष्ठ एवं मजबूत उत्तराखंड के निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं, जो वास्तव में एक गौरवशाली क्षण है।

होम्योपैथिक कैंप के संचालन और इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए वहां मौजूद विशेषज्ञों ने बताया कि चैती मेले की आपाधापी और खान-पान में बदलाव के कारण अक्सर श्रद्धालुओं को पेट संबंधी समस्याओं, गैस, एसिडिटी और त्वचा की एलर्जी का सामना करना पड़ता है, जिनके लिए यह कैंप एक संजीवनी की तरह काम करता है। गर्मी और उमस भरे वातावरण में स्किन की प्रॉब्लम और एसिडिटी के मरीजों की तादाद सबसे अधिक देखी जाती है, जिन्हें यहाँ न केवल दवाइयां दी जाती हैं बल्कि बचाव के तरीके भी समझाए जाते हैं। इस कैंप की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि यहाँ दिन और रात, यानी 24 घंटे डॉक्टर अपनी सेवाएं देने के लिए मुस्तैद रहते हैं, ताकि रात के समय आने वाले श्रद्धालुओं को भी स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या न हो। महापौर दीपक बाली ने स्वयं इस सेवा पद्धति की सराहना करते हुए कहा कि होम्योपैथी जैसी सरल और प्रभावी चिकित्सा पद्धति के माध्यम से जन-जन तक पहुँचना वास्तव में मानवता की सबसे बड़ी सेवा है, जो इस आयोजन को संपूर्ण बनाती है।

चिकित्सा शिविर के संचालक और वशिष्ठ परिवार के सदस्यों ने महापौर दीपक बाली के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करते हुए उन्हें एक ऐसा व्यक्तित्व बताया जो सेवा के कार्यों में सदैव तत्पर रहते हैं और एक पुकार पर हाजिर हो जाते हैं। कैंप के आयोजकों का कहना था कि मेयर साहब का सरल स्वभाव और हर छोटी-बड़ी संस्था को प्रोत्साहित करने की उनकी कार्यशैली ही उन्हें जनता के बीच इतना लोकप्रिय बनाती है, और पूरा परिवार एवं संगठन उनका तहे दिल से शुक्रगुजार है कि उन्होंने अपने व्यस्त समय में से पल निकालकर इस सेवा कार्य को आशीर्वाद दिया। इस मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं ने भी राहत की सांस ली कि उन्हें मेले के भीतर ही ऐसी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। सेवा का यह जज्बा न केवल वशिष्ठ परिवार की परंपरा को जीवित रखे हुए है, बल्कि यह उन तमाम लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है जो समाज में बदलाव लाना चाहते हैं और मानव कल्याण को ही अपना सर्वोपरि धर्म मानते हैं, जिससे चैती मेले की सार्थकता और बढ़ गई है।

कौमी एकता का गुलदस्ता और सौहार्द की मिसाल
चैती मेले के इस पावन प्रांगण में सेवा का यह कारवां उस समय भावनात्मक रूप से और भी गहरा हो गया जब जफर सैफी और उनके सहयोगियों ने इस कैंप के माध्यम से ‘कौमी एकता’ और हिंदुस्तान की साझा विरासत का एक ऐसा सजीव चित्रण पेश किया, जिसे देखकर हर कोई गदगद हो उठा। जफर सैफी ने बड़े गर्व के साथ बताया कि ईआरडीओ संगठन के बैनर तले चलने वाले इस 41 साला सफर की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के डॉक्टर कंधे से कंधा मिलाकर आर्थिक सहयोग भी देते हैं और अपना कीमती समय भी श्रद्धा भाव से समर्पित करते हैं। उन्होंने इसे ‘हिंदुस्तान की मोहब्बत का गुलदस्ता’ करार देते हुए कहा कि माता रानी हम सबको यहाँ बुलाती हैं और हम सब मिलकर उनके भक्तों की सेवा करते हैं, जहाँ धर्म और जाति की दीवारें पूरी तरह से ढह जाती हैं। आज के दौर में जहाँ देश के कुछ हिस्सों में दूरियां देखी जा रही हैं, वहीं काशीपुर का यह चैती मेला और यह मेडिकल कैंप आपसी प्रेम और सद्भाव की एक ऐसी मशाल जलाए हुए है जिसकी लौ पूरे देश को रोशनी दिखा रही है।

इस चिकित्सा शिविर में सौहार्द की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब यह पता चला कि आगामी १० दिनों तक चलने वाले इस सेवा यज्ञ में लगभग 12 मुस्लिम डॉक्टर भी दिन-रात अपनी ड्युटी देंगे, जो प्रदेश अध्यक्ष सुरेश राजपूत जी के कुशल दिशा-निर्देशों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। जफर सैफी ने जोर देकर कहा कि डॉक्टरी एक ऐसा पेशा है जहाँ मानवता सर्वोपरि होती है और एक मरीज की जान बचाना या उसका दर्द कम करना किसी भी मजहब से ऊपर होता है। मेला प्रबंधक और पंडा मनोज जी के साथ उनके आत्मीय संबंधों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यहाँ जितना स्नेह ज्ञान सिंह जी को मिलता है, उतना ही सम्मान डॉक्टर जफर सैफी को भी प्राप्त होता है, और यह परस्पर सम्मान ही काशीपुर की असली पहचान है। यह गुलदस्ता उन तमाम नफरती ताकतों को एक करारा जवाब है जो समाज को बांटना चाहती हैं, क्योंकि यहाँ डॉक्टर वशिष्ठ और डॉक्टर जाफरी एक ही लक्ष्य के लिए काम कर रहे हैं—और वह लक्ष्य है श्रद्धालुओं की सेवा और माता के दरबार में अपनी हाजिरी।

अंततः, महापौर दीपक बाली ने इस कौमी एकता की मिसाल को सलाम करते हुए कहा कि काशीपुर की यह महान भूमि हमेशा से ही सर्वधर्म समभाव की प्रतीक रही है और चैती मेला इस एकता का सबसे बड़ा महोत्सव है। उन्होंने सभी डॉक्टरों और सेवादारों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जब तक समाज में ऐसे निष्काम कर्मयोगी मौजूद हैं, तब तक हमारी गंगा-जमुनी तहजीब को कोई आंच नहीं आ सकती। मेले की चहल-पहल के बीच यह होम्योपैथिक कैंप और हस्तशिल्प प्रदर्शनी मिलकर एक ऐसे संतुलित समाज की तस्वीर पेश कर रहे हैं जहाँ आर्थिक प्रगति और मानवीय संवेदनाएं साथ-साथ चलती हैं। महापौर ने सभी से अपील की कि वे इस मेले का भरपूर आनंद लें, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दें और सेवा के इस महाकुंभ का हिस्सा बनें। इस उद्घाटन समारोह ने न केवल मेले को एक औपचारिक शुरुआत दी, बल्कि यह संदेश भी पूरी दुनिया को भेज दिया कि प्रेम, सेवा और स्वदेशी ही एक श्रेष्ठ भारत और समृद्ध उत्तराखंड के निर्माण की असली चाबी है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक मिसाल कायम करेगी।

इस ऐतिहासिक निःशुल्क होम्योपैथिक मेडिकल कैंप के उद्घाटन के गौरवशाली क्षणों में संगठन की पूरी शक्ति एक सूत्र में पिरोई नजर आई। कैंप की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप देने में व्यवस्थापक ज्ञान सिंह सैनी की कुशलता और प्रदेश अध्यक्ष सुरेश राजपूत के दूरदर्शी नेतृत्व का प्रभाव हर ओर स्पष्ट दिखाई दे रहा था। इस सेवा यज्ञ की सफलता सुनिश्चित करने के लिए जिला अध्यक्ष आरपी सैनी, महानगर अध्यक्ष अमित शर्मा और कोषाध्यक्ष राजेश बिश्नोई ने अपनी उपस्थिति से न केवल आयोजन की गरिमा बढ़ाई, बल्कि कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार भी किया। आरोग्य की इस पावन वेदी पर कैंप प्रभारी वैभव शर्मा और मीडिया प्रभारी जफर सैफी के साथ शमशाद अली, नावेद जाफरी, और सतीश अरोड़ा जैसे अनुभवी साथियों ने कंधे से कंधा मिलाकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इस ‘मोहब्बत के गुलदस्ते’ को और भी महकाने के लिए जिहाद रहमान, राहत अली, नासिर चौधरी, और मुकुल सक्सेना ने सेवा के आदर्श प्रस्तुत किए। वहीं राम सिंह पाल, नंदकिशोर सागर, सुंदर सिंह, लोकेश कंबोज, और बिलाल खान की सक्रियता यह बता रही थी कि मानवता के लिए धर्म और जाति की दीवारें मायने नहीं रखतीं।

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