रामनगर। उत्तराखंड की शांत वादियों में एक बड़े राजनीतिक भूचाल की आहट सुनाई देने लगी है, जहाँ राज्य की अस्मिता, स्वाभिमान और शहीदों के अधूरे सपनों को धरातल पर उतारने के लिए ‘मिशन उत्तराखंड 2027’ ने अपनी कमर कस ली है। देवभूमि के राजनैतिक इतिहास में एक नए और निर्णायक अध्याय की पटकथा लिखने के उद्देश्य से आगामी 26 मार्च 2026, बृहस्पतिवार को अल्मोड़ा के सुप्रसिद्ध शिखर होटल में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय विचार-विमर्श बैठक आहूत की गई है। इस महामंथन में न केवल राज्य की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों का जमावड़ा होगा, बल्कि प्रबुद्ध बुद्धिजीवियों, जुझारू जन संगठनों और जमीन से जुड़े सक्रिय कार्यकर्ताओं का एक ऐसा साझा मोर्चा तैयार किया जा रहा है, जो आने वाले समय में प्रदेश की सत्ता के स्थापित समीकरणों को पूरी तरह से ध्वस्त करने का सामर्थ्य रखता है। ‘मिशन उत्तराखंड 2027’ कोर कमेटी के कद्दावर स्तंभ और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के जुझारू प्रधान महासचिव प्रभात ध्यानी ने इस ऐतिहासिक आयोजन की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए स्पष्ट किया कि यह बैठक केवल औपचारिक चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के सुनहरे भविष्य और उसकी खोई हुई पहचान को वापस पाने के लिए लिया गया एक क्रांतिकारी संकल्प है। अल्मोड़ा की यह सभा आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों में एक ऐसे सशक्त राजनीतिक विकल्प की मजबूत नींव रखेगी, जो दिल्ली के इशारों पर नहीं बल्कि पहाड़ की भावनाओं के अनुरूप संचालित होगा।
पृथक राज्य निर्माण के 25 गौरवशाली वर्ष बीत जाने के पश्चात भी उत्तराखंड की वर्तमान दुर्दशा पर गहरा शोक और आक्रोश व्यक्त करते हुए प्रभात ध्यानी ने प्रदेश की वर्तमान और पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने अत्यंत कड़े और तार्किक शब्दों में रेखांकित किया कि जिन वीर शहीदों ने अपने प्राणों की आहुति देकर और माताओं-बहनों ने सड़कों पर लाठियां खाकर इस राज्य की अवधारणा को अपने लहू से सींचा था, उनकी महान अपेक्षाएं और राज्य गठन का वास्तविक औचित्य आज भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। सत्ता के गलियारों में बारी-बारी से बैठने वाली भाजपा और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों ने उत्तराखंड को विकास के नाम पर केवल छला है और पूरे प्रदेश को भू-माफियाओं, खनन माफियाओं और बाहरी ठेकेदारों के चंगुल में गिरवी रख दिया है। प्रभात ध्यानी का मानना है कि इन दोनों ही राष्ट्रीय दलों के लिए उत्तराखंड मात्र एक चुनावी प्रयोगशाला और संसाधनों को लूटने का केंद्र बनकर रह गया है, जबकि यहाँ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और आम जनमानस की मूलभूत पीड़ा से इनका कोई वास्ता नहीं रहा है। ‘मिशन उत्तराखंड 2027’ का परम लक्ष्य इसी सड़ी-गली व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन लाना है, जहाँ राज्य की बागडोर अंततः उन्हीं हाथों में हो जो यहाँ की माटी, पानी और जंगलों के प्रति वास्तव में जवाबदेह हों।
क्षेत्रीय ताकतों की अपरिहार्य एकजुटता पर विशेष बल देते हुए प्रभात ध्यानी ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए कहा कि कांग्रेस और भाजपा जैसी पार्टियां कभी भी दिल से पृथक उत्तराखंड राज्य निर्माण की पक्षधर नहीं रही हैं। यही ऐतिहासिक सत्य है कि राज्य प्राप्ति के बाद इन दलों ने शहीदों के सपनों को हाशिए पर धकेल कर केवल अपनी तिजोरियां भरने और दिल्ली के आलाकमान को खुश करने का काम किया है। आज उत्तराखंड का शिक्षित युवा दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है, पहाड़ के गांव के गांव खाली होकर ‘घोस्ट विलेज’ में तब्दील हो रहे हैं और हमारी बेशकीमती जल-जंगल-जमीन पर बाहरी पूंजीपतियों का कब्जा होता जा रहा है। इसी विकट परिस्थिति को भांपते हुए ‘मिशन उत्तराखंड 2027’ के तहत उन तमाम क्षेत्रीय दलों, सामाजिक-राजनीतिक संगठनों और सक्रिय बुद्धिजीवियों को एक झंडे के नीचे लाने की गंभीर कोशिश की जा रही है, जो उत्तराखंड को विनाश की कगार से बचाने का जज्बा रखते हैं। राज्य की जनता अब इन राष्ट्रीय दलों के सुनहरे और झूठे वादों के मायाजाल से ऊब चुकी है और एक ऐसे आंदोलनकारी मोर्चे की राह देख रही है, जो मुजफ्फरनगर कांड और खटीमा-मसूरी के शहीदों के सपनों को हकीकत में बदल सके।
आगामी 26 मार्च को अल्मोड़ा की धरती पर होने वाली इस ऐतिहासिक बैठक की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के साथ-साथ उत्तराखंड लोक वाहिनी, भारत की लोक जिम्मेदार पार्टी, राष्ट्रीय रीजनल पार्टी और स्वाभिमान मोर्चा जैसे प्रभावशाली और समर्पित संगठनों ने अपनी पूर्ण आधिकारिक सहमति प्रदान कर दी है। प्रभात ध्यानी ने जानकारी दी कि जन भावनाओं की पुकार को सुनते हुए इस मिशन को एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप दिया जा रहा है, जिसमें पूर्व सैनिक संगठनों के गौरवशाली प्रतिनिधि, राज्य आंदोलन की मशाल जलाने वाले सेनानी और विभिन्न जन संघर्षों से जुड़े बुद्धिजीवियों को विशेष रूप से निमंत्रित किया गया है। शिखर होटल की यह बैठक एक ऐसे विस्तृत ‘विजन डॉक्यूमेंट’ की आधारशिला रखेगी, जो अगले दशक के लिए उत्तराखंड की दिशा और दशा निर्धारित करेगा। प्रबुद्ध वर्ग का यह समागम इस जटिल विषय पर मंथन करेगा कि कैसे एक सामूहिक और ईमानदार नेतृत्व के माध्यम से उन तमाम माफिया ताकतों को सत्ता की दहलीज से बाहर खदेड़ा जाए, जिन्होंने देवभूमि की पवित्रता और यहाँ के नैसर्गिक संसाधनों का बेरहमी से दोहन किया है।
मिशन की भविष्यगामी रणनीति के बारे में प्रभात ध्यानी ने आगे विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि ‘मिशन उत्तराखंड 2027’ का मुख्य स्तंभ सीधा जन-संवाद और पूर्ण जवाबदेही होगा। बैठक में जुटने वाले सभी दल और विचारधाराएं एक ‘साझा न्यूनतम कार्यक्रम’ (Common Minimum Programme) के मसौदे पर गहन चर्चा करेंगे, जो मुख्य रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं, स्थायी रोजगार सृजन, पलायन पर पूर्ण विराम और स्थानीय जल-जंगल-जमीन पर मूल निवासियों के अधिकार जैसे अत्यंत संवेदनशील मुद्दों पर केंद्रित होगा। उत्तराखंड के स्वाभिमान को सत्ता के लालच में गिरवी रखने वाली ताकतों के खिलाफ यह एक निर्णायक और धर्मयुद्ध जैसी लड़ाई की शुरुआत है। अब क्षेत्रीय शक्तियां रक्षात्मक मुद्रा का त्याग कर आक्रामक भूमिका में नजर आएंगी और गांव-गांव, कस्बे-कस्बे जाकर जनता को यह अहसास कराएंगी कि उनका भविष्य अब उन्हीं के हाथों में सुरक्षित है जिन्होंने इस राज्य के लिए सड़क से लेकर जेल तक संघर्ष किया है। शहीदों की आत्मा को वास्तविक शांति तभी प्राप्त होगी जब उत्तराखंड का सर्वांगीण विकास उसकी अपनी शर्तों, अपनी संस्कृति और अपनी परंपराओं के आधार पर होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि यदि यह प्रस्तावित गठबंधन धरातल पर अपनी सांगठनिक पकड़ को मजबूत करने में कामयाब रहता है, तो वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तराखंड के राजनैतिक मानचित्र पर एक युगांतरकारी परिवर्तन ला सकता है। प्रभात ध्यानी और उनकी कोर कमेटी जिस प्रकार से सुदूरवर्ती गांवों में जाकर जनमत तैयार कर रही है, उससे सत्ताधारी खेमों और मुख्य विपक्षी दल की रातों की नींद उड़ना स्वाभाविक है। अल्मोड़ा की इस बैठक में लिए जाने वाले कड़े और दूरगामी निर्णय आगामी महीनों में पूरे उत्तराखंड में एक ऐसी राजनैतिक लहर पैदा करेंगे, जो जनता को भाजपा-कांग्रेस के “एक ही सिक्के के दो पहलू” वाले खेल से मुक्ति दिलाकर एक ठोस और भरोसेमंद क्षेत्रीय विकल्प प्रदान करेगी। भ्रष्टाचार मुक्त शासन और माफिया राज के पूर्ण खात्मे का जो सुनहरा सपना उत्तराखंड की सवा करोड़ जनता देख रही है, उसे हकीकत में बदलने का जिम्मा अब इन समर्पित आंदोलनकारी ताकतों ने अपने मजबूत कंधों पर उठा लिया है। 26 मार्च का दिन उत्तराखंड की राजनीति में एक अमिट ‘मील का पत्थर’ साबित होने जा रहा है, जहाँ शिखर होटल की बैठक से बदलाव की वह नई इबारत लिखी जाएगी, जिसका सीधा और प्रचंड असर आने वाले विधानसभा चुनावों के नतीजों पर पड़ना निश्चित है।
इस महाबैठक के एजेंडे में उत्तराखंड के ‘मूल निवास’ और ‘सख्त भू-कानून’ जैसे ज्वलंत मुद्दों को भी प्राथमिकता दी गई है, जिन्हें राष्ट्रीय दलों ने हमेशा ठंडे बस्ते में डालने का काम किया है। प्रभात ध्यानी ने जोर देकर कहा कि मिशन 2027 केवल कुर्सी हासिल करने का जरिया नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व को बचाने का एक पवित्र महायज्ञ है। बैठक में शामिल होने वाले सक्रिय कार्यकर्ताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी कि वे प्रत्येक विकासखंड और तहसील स्तर पर जाकर ‘मिशन उत्तराखंड’ की इकाईयों का गठन करें और लोगों को यह समझाएं कि क्यों अब क्षेत्रीय दलों का एकजुट होना अनिवार्य हो गया है। अल्मोड़ा की यह सभा एक तरह से उत्तराखंड की दूसरी क्रांति का आगाज़ होगी, जो सत्ता के केंद्रीकरण को तोड़कर शासन को गांव की चौपाल तक ले जाने का काम करेगी। बुद्धिजीवियों की भागीदारी यह सुनिश्चित करेगी कि मिशन के पास न केवल जोश हो, बल्कि एक ऐसा ठोस तकनीकी और आर्थिक रोडमैप भी हो जो राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करे।
अल्मोड़ा की ऐतिहासिक महत्ता को देखते हुए इस स्थान का चयन भी बेहद रणनीतिक माना जा रहा है, क्योंकि यह शहर हमेशा से ही उत्तराखंड की वैचारिक और राजनैतिक चेतना का केंद्र रहा है। शिखर होटल में होने वाली इस बैठक के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं और विभिन्न जिलों से प्रतिनिधियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। प्रभात ध्यानी ने अंत में यह आह्वान किया कि जो भी व्यक्ति या संगठन उत्तराखंड की भलाई चाहता है और भाजपा-कांग्रेस की जनविरोधी नीतियों से त्रस्त है, उसके लिए ‘मिशन उत्तराखंड 2027’ के द्वार सदैव खुले हैं। यह गठबंधन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हर उस पहाड़ी का है जो अपनी आंखों में खुशहाल उत्तराखंड का सपना लिए बैठा है। 26 मार्च की शाम जब इस बैठक का निष्कर्ष सामने आएगा, तो वह प्रदेश की सत्तासीन ताकतों के लिए एक बड़ी चेतावनी होगा कि अब पहाड़ की जवानी और पहाड़ का पानी, दोनों ही राज्य के काम आएंगे और लूट-खसोट की राजनीति का अंत समय अब निकट आ चुका है। शहीदों की पुकार और जनता की ललकार अब एक होकर मिशन 2027 के रूप में गूंजने को तैयार है।





