रामनगर। पी एन जी राजकीय स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय के प्रांगण में पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक चेतना की एक नई लहर देखने को मिल रही है, जहाँ गंगा स्वच्छता पखवाड़ा के तत्वावधान में युवाओं ने अपनी लेखनी के माध्यम से माँ गंगा की निर्मलता का संकल्प लिया है। श्स्वच्छता, मेरी जिम्मेदारीश् जैसे अत्यंत संवेदनशील और प्रासंगिक विषय पर आयोजित इस भव्य निबंध प्रतियोगिता ने न केवल विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता को निखारा, बल्कि उन्हें प्रकृति के प्रति अपनी नैतिक जवाबदेही का भी अहसास कराया। प्रतियोगिता के दौरान छात्र-छात्राओं का उत्साह देखते ही बनता था, जहाँ बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता और विचारों के माध्यम से गंगा नदी के ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और पारिस्थितिक महत्व पर गहरा प्रकाश डाला।
पी एन जी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामनगर के प्रशासन द्वारा क्रियान्वित की गई इस युगांतरकारी और विशेष पहल का सर्वोपरि एवं बुनियादी उद्देश्य युवा पीढ़ी के कोमल मानस पटल पर मां गंगा की अविरल धारा की पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के संस्कार अंकित करना है। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को न केवल जल संरक्षण की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया जा रहा है, बल्कि उन्हें पर्यावरण संतुलन के उस सूक्ष्म विज्ञान को समझने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है जो हमारे पारिस्थितिक तंत्र की आधारशिला है। इस व्यापक जन-जागरूकता अभियान का दूरगामी लक्ष्य एक ऐसे सचेत और ऊर्जावान छात्र समुदाय का निर्माण करना है, जो भविष्य के चुनौतीपूर्ण समय में समाज के लिए एक सजग, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ प्रहरी के रूप में अपनी ऐतिहासिक भूमिका का निर्वहन कर सकें। महाविद्यालय का यह अटूट विश्वास है कि जब ये विद्यार्थी गंगा की स्वच्छता को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करेंगे, तभी पर्यावरण संरक्षण का यह महती संकल्प एक वैश्विक और सफल जन-आंदोलन का रूप ले पाएगा।
इस बौद्धिक महाकुंभ के दौरान महाविद्यालय के गलियारों में बौद्धिक विमर्श का वातावरण बना रहा और प्रतिभागियों ने अपनी कलम की ताकत से यह सिद्ध किया कि युवाओं के विचार ही भविष्य की स्वच्छता का मार्ग प्रशस्त करेंगे। निबंधों के माध्यम से छात्रों ने वर्तमान समय में गंगा के अस्तित्व पर मंडराते संकटों और प्रदूषण की चुनौतियों का गहन विश्लेषण किया, साथ ही उनके समाधान के लिए श्स्वच्छता, मेरी जिम्मेदारीश् के सूत्र को जीवन में उतारने का आह्वान किया। प्रतियोगिता के समापन पर यह घोषणा की गई कि जिन मेधावी छात्रों ने अपने उत्कृष्ट विचारों और प्रभावी प्रस्तुतीकरण से निर्णायकों को प्रभावित किया है, उन्हें आगामी पुरस्कार वितरण समारोह के गौरवशाली अवसर पर विशेष रूप से सम्मानित और पुरस्कृत किया जाएगा। यह पुरस्कार केवल एक ट्रॉफी या प्रमाण पत्र नहीं होगा, बल्कि उन युवाओं के अटूट संकल्प का सम्मान होगा जिन्होंने पवित्र नदियों के संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने का प्रण लिया है, जिससे अन्य छात्रों को भी प्रेरणा मिल सकेगी।
महाविद्यालय की इस पुनीत मुहिम को और अधिक व्यापक और जन-केंद्रित बनाने के लिए परिसर में एक विशेष हस्ताक्षर अभियान का भी शुभारंभ किया गया है, जो आगामी 31 मार्च 2026 तक निरंतर अपनी सक्रियता बनाए रखेगा। इस अभियान के तहत महाविद्यालय परिवार का प्रत्येक सदस्य, शिक्षक और आगंतुक गंगा स्वच्छता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को हस्ताक्षरित दस्तावेज के रूप में दर्ज करा रहे हैं, जो इस पखवाड़े को केवल एक आयोजन तक सीमित न रखकर एक जीवंत आंदोलन में तब्दील कर रहा है। आयोजकों का मानना है कि हस्ताक्षर के माध्यम से किया गया संकल्प व्यक्ति के मन में जिम्मेदारी का भाव जगाता है, जो दीर्घकालिक सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होता है। 31 मार्च की समय सीमा यह सुनिश्चित करती है कि स्वच्छता का यह संदेश महाविद्यालय के हर कोने तक पहुंचे और प्रत्येक विद्यार्थी इस पवित्र नदी की स्वच्छता को अपने दैनिक जीवन का एक अनिवार्य संस्कार बना सके, जिससे देवभूमि की पहचान और अधिक उज्ज्वल हो।
इस महत्वपूर्ण गरिमामयी आयोजन की सफलता में महाविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षाविदों और प्रशासनिक अधिकारियों का मार्गदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा, जिनकी उपस्थिति ने छात्रों के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। कार्यक्रम के दौरान प्रभारी प्रचार्य प्रो एस एस मौर्य, डॉ योगेश कुमार, और विशेष रूप से नोडल अधिकारी डॉ नीमा राणा ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें निरंतर पर्यावरण संरक्षण की राह पर चलने के लिए प्रेरित किया। इनके साथ ही डॉ शिप्रा पंत, डॉ डी एन जोशी और डॉ मुरली धर कापड़ी जैसे प्रबुद्ध शिक्षकों ने भी अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई और गंगा की अविरलता पर अपने विचार साझा किए। वहीं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्री गोविन्द सिंह जंगपागी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही, जिन्होंने पूरे आयोजन को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इन सभी गणमान्य विभूतियों की उपस्थिति ने इस शैक्षणिक और सामाजिक आयोजन को एक उत्सव का स्वरूप दे दिया, जिससे परिसर का कोना-कोना स्वच्छता के संकल्प से गुंजायमान हो उठा।
भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए महाविद्यालय प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि ऐसे आयोजनों का सिलसिला केवल एक पखवाड़े तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले सत्रों में भी निरंतर जारी रखा जाएगा ताकि पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बनी रहे। निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से निकले बेहतरीन सुझावों को संकलित कर उन्हें स्थानीय प्रशासन और पर्यावरणविदों तक पहुंचाने की भी योजना है, ताकि युवाओं की आवाज को नीति-निर्माण में भी स्थान मिल सके। गंगा स्वच्छता पखवाड़ा के तहत चलाए जा रहे इन कार्यक्रमों ने यह साबित कर दिया है कि यदि शिक्षण संस्थान और युवा शक्ति मिलकर प्रयास करें, तो नदियों के संरक्षण और पर्यावरण की सुरक्षा का सपना हकीकत में बदला जा सकता है। महाविद्यालय परिसर में 31 मार्च 2026 तक चलने वाला यह हस्ताक्षर अभियान आने वाले समय में एक मिसाल बनेगा, जो समाज के अन्य वर्गों को भी अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करेगा और मां गंगा की निर्मलता को सदैव अक्षुण्ण बनाए रखेगा।





