काशीपुर। बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता और उपभोक्ता सशक्तिकरण को लेकर उठते सवालों के बीच स्मार्ट मीटर को लेकर फैली शंकाओं पर विराम लगाने का प्रयास उस समय स्पष्ट रूप से सामने आया, जब आवास विकास क्षेत्र में जागरूकता से जुड़ा विशेष आयोजन किया गया। “स्मार्ट मीटर पखवाड़ा” के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन के मन में बने भ्रम, आशंकाओं और गलतफहमियों को दूर करना था, जो नई तकनीक के आगमन के साथ स्वाभाविक रूप से जन्म ले लेती हैं। कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि स्मार्ट मीटर किसी भी तरह से बिजली की खपत को बढ़ाने का साधन नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ता को अपने उपयोग पर नियंत्रण देने वाली आधुनिक व्यवस्था है। आयोजन स्थल पर मौजूद वक्ताओं ने बताया कि स्मार्ट मीटर के माध्यम से उपभोक्ता यह जान सकता है कि वह कितनी बिजली खर्च कर रहा है, किस समय अधिक खपत हो रही है और किस तरह अपने बजट के अनुसार उपयोग को संतुलित किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से 9 फरवरी से 23 फरवरी तक चलाए गए इस पखवाड़े के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में शिविर लगाए गए, ताकि लोगों को सीधे संवाद के माध्यम से सही जानकारी मिल सके और फैलाई जा रही भ्रांतियों का तथ्यात्मक खंडन हो सके।
इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें दीपक बाली स्वयं उपस्थित रहे और उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा कर स्मार्ट मीटर को लेकर भरोसा मजबूत करने की कोशिश की। उन्होंने मंच से कहा कि काशीपुर में स्मार्ट मीटर लगाए जाने की शुरुआत उन्होंने अपने ही घर से की थी और बीते छह से सात महीनों में उन्हें किसी भी तरह की असुविधा या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। महापौर ने यह भी स्पष्ट किया कि मोबाइल ऐप के जरिए उपभोक्ता अपने बिजली उपभोग की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकता है, जिससे अनावश्यक खर्च पर स्वतः अंकुश लग जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब एलपीजी गैस सिलेंडर या कंप्यूटर जैसी तकनीकें आई थीं, तब भी लोगों के मन में डर और संदेह था, लेकिन समय के साथ वही सुविधाएं जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गईं। उसी तरह स्मार्ट मीटर भी आने वाले समय में बिजली व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने का मजबूत माध्यम सिद्ध होगा। उनके इन शब्दों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच सकारात्मक माहौल बनाया और तकनीक को अपनाने का संदेश दिया।
स्मार्ट मीटर को लेकर उठने वाले सबसे बड़े सवाल—क्या इससे बिजली का बिल बढ़ जाएगा—पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों और वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत अपने आप नहीं बढ़ती, बल्कि यह उपभोक्ता को सचेत बनाता है। जब व्यक्ति को हर समय अपने उपभोग का आंकड़ा दिखाई देता है, तो वह अनावश्यक उपकरणों के इस्तेमाल से बचता है और ऊर्जा संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाता है। इसी क्रम में यह भी बताया गया कि स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन का मकसद “ट्रांसपेरेंसी और कंट्रोल” देना है, न कि उपभोक्ता पर अतिरिक्त बोझ डालना। महापौर दीपक बाली ने व्यंग्यात्मक अंदाज में यह भी कहा कि स्मार्ट मीटर उन लोगों को खतरनाक लगते हैं, जो जुगाड़ या अवैध तरीकों से बिजली इस्तेमाल करने के आदी हैं, क्योंकि इस तकनीक में किसी भी तरह की “चीटिंग” की गुंजाइश नहीं रहती। पूरा डेटा उपभोक्ता के हाथ में होता है और वही अपने खर्च का मालिक बनता है। इस स्पष्ट बयान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच तालियां बटोरीं और संदेश को और अधिक प्रभावी बना दिया।
समापन समारोह के दौरान यह भी बताया गया कि यदि किसी उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर को लेकर कोई शंका, तकनीकी दिक्कत या शिकायत होती है, तो वह सीधे विभागीय डेस्क पर संपर्क कर सकता है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि यदि जांच में किसी मीटर में तकनीकी खामी पाई जाती है, तो उसे बिना किसी शुल्क के बदला जाएगा। साथ ही, मीटर की गति या रीडिंग को लेकर संदेह होने पर “चेक मीटर” लगाकर परीक्षण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यक्रम में मौजूद विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता व अजीत यादव और अधिशासी अभियंता बाजपुर विवेक कांडपाल ने जानकारी दी कि शुरुआती दौर में जो शिकायतें सामने आई थीं, वे अधिकतर सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन से जुड़ी तकनीकी वजहों से थीं, जिन्हें अब दूर कर दिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीते कुछ महीनों में स्मार्ट मीटर को लेकर कोई बड़ी या गंभीर शिकायत सामने नहीं आई है, जो इस व्यवस्था की विश्वसनीयता को दर्शाता है।
कार्यक्रम के दौरान आंकड़ों के माध्यम से भी स्थिति स्पष्ट की गई। बताया गया कि नगर निगम क्षेत्र में लगभग 56 हजार स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से करीब 35 हजार मीटर काशीपुर डिवीजन में पहले ही लगाए जा चुके हैं। इस प्रगति को अधिकारियों ने संतोषजनक बताया और कहा कि शेष कार्य भी तय समयसीमा में पूरा किया जाएगा। पखवाड़े के दौरान काशीपुर, बाजपुर और जसपुर डिवीजन में आयोजित जागरूकता शिविरों को लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिला, जिससे यह संकेत मिला कि सही जानकारी मिलने पर लोग तकनीक को अपनाने के लिए तैयार हैं। महापौर दीपक बाली ने इसे सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि जब जनता स्वयं जागरूक होती है, तब किसी भी योजना की सफलता सुनिश्चित हो जाती है।
बिजली उपभोग से आगे बढ़कर महापौर ने सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैसे बिजली के उपयोग में पारदर्शिता जरूरी है, वैसे ही स्वच्छता और कर भुगतान भी प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। इसी क्रम में उन्होंने घोषणा की कि होली के बाद नगर निगम द्वारा प्रत्येक घर तक दो डस्टबिन उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जाएगा, ताकि सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग रखने की आदत को बढ़ावा मिल सके। उनका कहना था कि विकास केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं होता, बल्कि तकनीक, स्वच्छता और नागरिक जिम्मेदारी—तीनों के संतुलन से ही शहर आगे बढ़ता है। कार्यक्रम के अंत में पार्षद पुष्कर बिष्ट, योग विशेषज्ञ डॉ आशीष शर्मा सहित उपस्थित नागरिकों और अधिकारियों का आभार व्यक्त किया गया। समापन के दौरान महापौर ने यह संदेश दोहराया कि बदलते समय के साथ तकनीक को अपनाना ही विकास का मार्ग है और स्मार्ट मीटर उसी दिशा में उठाया गया एक ठोस और जरूरी कदम है, जो आने वाले वर्षों में बिजली व्यवस्था की तस्वीर बदल देगा।
कार्यक्रम के दौरान यह बात भी उभरकर सामने आई कि स्मार्ट मीटर केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि उपभोक्ता व्यवहार में सुधार का माध्यम बन सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि जब उपभोक्ता को अपने बिजली उपयोग की वास्तविक जानकारी रियल टाइम में मिलती है, तो वह अनावश्यक उपकरण बंद करने, पीक आवर्स में खपत कम करने और ऊर्जा बचत जैसे कदम स्वाभाविक रूप से अपनाने लगता है। इससे न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बिजली बिल में संतुलन आता है, बल्कि सामूहिक रूप से ऊर्जा संसाधनों पर दबाव भी कम होता है। वक्ताओं ने यह भी कहा कि स्मार्ट मीटर भविष्य की स्मार्ट सिटी अवधारणा की बुनियाद हैं, जहां डेटा आधारित निर्णय लेकर बिजली आपूर्ति को और बेहतर बनाया जा सकता है। कार्यक्रम में मौजूद नागरिकों ने सवाल-जवाब के दौरान खुलकर अपनी जिज्ञासाएं रखीं, जिनका अधिकारियों ने मौके पर ही समाधान किया। कई लोगों ने स्वीकार किया कि पहले वे सोशल मीडिया या अफवाहों के कारण स्मार्ट मीटर को लेकर आशंकित थे, लेकिन प्रत्यक्ष संवाद के बाद उनका नजरिया बदला है। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि जागरूकता और संवाद के जरिए ही किसी भी नई व्यवस्था को सफल बनाया जा सकता है और काशीपुर में हुआ यह कार्यक्रम उसी दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में देखा जा रहा है।





