रामनगर। पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित भारत बौद्धिक राष्ट्रीय परीक्षा 2025-26 में विद्यार्थियों ने उत्साह और लगन के साथ भाग लिया। विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान उत्तराखण्ड द्वारा स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के छात्रों के लिए आयोजित इस परीक्षा में छात्र-छात्राओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और विविध शैक्षणिक क्षेत्रों की गहराई को समझने का अवसर पाया। परीक्षा प्रभारी डॉ. शरद भट्ट ने बताया कि कुल 213 विद्यार्थियों ने इस परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था, जिसमें से 124 छात्र-छात्राओं ने 31 जनवरी को रामनगर महाविद्यालय में निर्धारित परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। परीक्षा सुबह 10 बजे शुरू होकर दोपहर 12 बजे तक चली। विद्यार्थियों ने बताया कि परीक्षा में कला, विज्ञान और वाणिज्य से संबंधित विषयों पर आधारित बहुविकल्पीय और विस्तृत उत्तरात्मक प्रश्न पूछे गए, जिससे उनके ज्ञान और समझ का स्तर परखा गया।
डॉ. शरद भट्ट ने विस्तार से बताया कि परीक्षा का प्रथम भाग बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित था, जिसमें कुल 180 प्रश्न थे और विद्यार्थियों को 80 प्रश्नों के उत्तर देने थे। उन्होंने कहा कि यह प्रश्न भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और विद्या के व्यापक आयामों को समेटे हुए थे, जिससे छात्रों की बौद्धिक क्षमता का मूल्यांकन किया जा सका। द्वितीय भाग में विस्तृत उत्तरात्मक प्रश्न थे, जिसमें से एक 20 अंकों का प्रश्न उत्तर देने हेतु छात्रों को चुनना था। इस प्रकार की परीक्षा छात्रों के सोचने, विश्लेषण करने और ज्ञान को आत्मसात् करने की क्षमता को बढ़ाने के लिए उत्कृष्ट रही। विद्यार्थियों ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताओं के आयोजन से उन्हें भारतीय संस्कृति, परंपरा और ज्ञान से परिचित होने का अवसर मिलता है और भविष्य में अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने में मदद मिलती है।
परीक्षा के आयोजन के पीछे महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर एमसी. पाण्डे का नेतृत्व था, जिन्होंने इसे व्यवस्थित और सफल बनाने के लिए विशेष समिति का गठन किया। इस समिति के संयोजक डॉ. मूलचंद्र शुक्ल थे, जबकि परीक्षा प्रभारी डॉ. शरद भट्ट, डॉ. नीमा राणा, डॉ. सुभाष पोखरियाल, डॉ. मनोज नैनवाल और डॉ. हेमचंद्र भट्ट जैसे वरिष्ठ शिक्षक परीक्षा संचालन और मूल्यांकन कार्य में शामिल थे। समिति ने परीक्षा के प्रत्येक पहलू को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संचालित किया, जिससे प्रतिभागियों का विश्वास बढ़ा और परीक्षा सुचारु रूप से सम्पन्न हुई। समिति की कार्यप्रणाली और व्यवस्था की सराहना करते हुए कई छात्रों ने कहा कि इस प्रकार का आयोजन उनके लिए सीखने और अपने ज्ञान को परखने का अनूठा अवसर है।
डॉ. सुभाष पोखरियाल ने बताया कि परीक्षा के तुरंत बाद प्रतिभागियों को प्रतिभागिता प्रमाणपत्र प्रदान कर दिया गया, जिससे छात्रों में उत्साह और आत्मविश्वास बना। उन्होंने कहा कि इस प्रमाणपत्र का उद्देश्य छात्रों को प्रोत्साहित करना और उनकी बौद्धिक क्षमता को मान्यता देना है। डॉ. मूलचंद्र शुक्ल ने बताया कि परीक्षा परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन और परीक्षण के बाद घोषित किए जाएंगे, जिसमें प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान और सांत्वना पुरस्कार विजेताओं को प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि परिणामों की घोषणा कुछ ही दिनों में की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों को उनके प्रयासों का उचित सम्मान और मान्यता मिल सके।
विद्यार्थियों ने इस परीक्षा के बारे में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि परीक्षा में पूछे गए प्रश्न न केवल ज्ञानवर्धक थे, बल्कि उन्होंने भारतीय संस्कृति, परंपरा और बौद्धिक दृष्टिकोण को समझने का अवसर भी प्रदान किया। उन्होंने बताया कि बहुविकल्पीय और विस्तृत उत्तरात्मक प्रश्नों ने उनके सोचने और विश्लेषण करने की क्षमता को विकसित किया। कई छात्रों ने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ लगातार आयोजित की जानी चाहिए, ताकि छात्र भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित हो सकें और उन्हें आत्मसात कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यह अनुभव उन्हें अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं और अकादमिक प्रयासों में सफलता प्राप्त करने में मदद करेगा।
महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. दीपक खाती ने सभी प्रतिभागियों को परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन और अच्छे अंक अर्जित करने के लिए शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों में बौद्धिक और सांस्कृतिक समझ को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। डॉ. खाती ने यह भी बताया कि महाविद्यालय की यह पहल छात्रों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें उन्हें केवल विषयगत ज्ञान ही नहीं मिलता, बल्कि उनके व्यक्तित्व, सोचने-समझने की क्षमता और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी मेहनत और लगन से परीक्षा में श्रेष्ठ प्रदर्शन करें।
विद्यार्थियों ने इस परीक्षा में भाग लेकर न केवल अपने ज्ञान का परीक्षण किया, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के बीच के संतुलन को समझने का अवसर भी प्राप्त किया। डॉ. शरद भट्ट ने बताया कि परीक्षा के दौरान छात्रों ने अनुशासन और उत्साह के साथ हिस्सा लिया, जिससे परीक्षा का माहौल सकारात्मक और प्रेरणादायक बना। छात्रों ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताएँ उनकी बौद्धिक क्षमता को निखारने के साथ-साथ उन्हें आत्मविश्वास और प्रतियोगी भावना प्रदान करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा के प्रश्नों ने उनकी सोच को चुनौती दी और उनके ज्ञान को और गहरा किया।
डॉ. मूलचंद्र शुक्ल ने बताया कि परीक्षा के प्रत्येक चरण को पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संचालित किया गया। उन्होंने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि या पक्षपात की संभावना को समाप्त करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए। परीक्षा में पूछे गए बहुविकल्पीय और विस्तृत उत्तरात्मक प्रश्न छात्रों की ज्ञानवृद्धि के लिए डिज़ाइन किए गए थे। डॉ. शुक्ल ने यह भी कहा कि इस तरह की राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ छात्रों को अन्य प्रतियोगियों के साथ अपनी योग्यता और बौद्धिक क्षमता का मूल्यांकन करने का अवसर प्रदान करती हैं।

डॉ. नीमा राणा ने बताया कि परीक्षा का आयोजन अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से हुआ और सभी आवश्यक तैयारी समय रहते की गई। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों की संख्या और उनके उत्साह को देखते हुए यह स्पष्ट है कि छात्रों में भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। डॉ. राणा ने यह भी कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताओं से छात्रों में सीखने की लगन और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है, जिससे वे अन्य शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
डॉ. सुभाष पोखरियाल ने परीक्षा के परिणामों और पुरस्कारों की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर परिणाम मूल्यांकन के बाद घोषित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान और सांत्वना पुरस्कार विजेताओं का चयन किया जाएगा। डॉ. पोखरियाल ने यह भी कहा कि परिणामों की घोषणा के बाद विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा और उन्हें प्रमाणपत्र और पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे धैर्य रखें और अपनी मेहनत और लगन को जारी रखें।
डॉ. मनोज नैनवाल ने कहा कि परीक्षा में छात्रों ने अनुशासन और उत्साह के साथ भाग लिया। उन्होंने बताया कि परीक्षा के दौरान छात्रों ने सभी निर्देशों का पालन किया और परीक्षा केन्द्र का माहौल सकारात्मक बना रहा। डॉ. नैनवाल ने यह भी कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ छात्रों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इसमें उन्हें केवल विषयगत ज्ञान ही नहीं, बल्कि सोचने, समझने और विश्लेषण करने की क्षमता भी विकसित होती है।
डॉ. हेमचंद्र भट्ट ने कहा कि परीक्षा में विद्यार्थियों की भागीदारी और उत्साह देखकर यह स्पष्ट है कि भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा के प्रति छात्रों में गहरी रुचि और लगन है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ छात्रों को न केवल ज्ञानवर्धन का अवसर देती हैं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और नेतृत्व कौशल विकसित करने में भी मदद करती हैं। डॉ. भट्ट ने यह भी कहा कि महाविद्यालय इस दिशा में लगातार प्रयासरत रहेगा और भविष्य में और भी प्रतियोगिताओं का आयोजन करेगा।
डॉ. शरद भट्ट ने विद्यार्थियों से कहा कि इस परीक्षा का उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना नहीं था, बल्कि उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और बौद्धिक दृष्टिकोण को समझने और आत्मसात करने का अवसर प्रदान करना था। उन्होंने कहा कि परीक्षा के बहुविकल्पीय और विस्तृत उत्तरात्मक प्रश्नों ने छात्रों की सोच और विश्लेषण क्षमता को चुनौती दी। विद्यार्थियों ने इस अवसर का पूरा लाभ उठाया और परीक्षा के दौरान उत्साहपूर्वक भाग लिया।
डॉ. मूलचंद्र शुक्ल ने कहा कि इस परीक्षा के आयोजन से छात्रों में सीखने और ज्ञानवर्धन की भावना को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में शामिल प्रश्न छात्रों के ज्ञान और समझ के स्तर को परखने के लिए डिज़ाइन किए गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा में छात्रों की भागीदारी और उत्साह देखकर यह स्पष्ट होता है कि वे भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व को समझते हैं।
डॉ. दीपक खाती ने सभी छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ उनके बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय की यह पहल छात्रों को न केवल ज्ञान प्राप्त करने का अवसर देती है, बल्कि उनके आत्मविश्वास, सोचने और विश्लेषण करने की क्षमता को भी विकसित करती है। डॉ. खाती ने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने प्रयासों में निरंतरता बनाए रखें और भविष्य में भी इस प्रकार की प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहें।
कुल मिलाकर रामनगर महाविद्यालय में आयोजित भारत बौद्धिक राष्ट्रीय परीक्षा ने छात्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और आधुनिक शिक्षा के मिश्रण को समझने का अद्वितीय अवसर प्रदान किया। छात्रों ने अपनी प्रतिभा और उत्साह के साथ परीक्षा में भाग लेकर इसे सफल बनाया। महाविद्यालय की समिति और प्राचार्य के मार्गदर्शन में यह परीक्षा पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ सम्पन्न हुई। प्रतियोगिता के परिणाम राष्ट्रीय स्तर पर मूल्यांकन के बाद घोषित किए जाएंगे और विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ छात्रों के बौद्धिक विकास और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।





