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काशीपुर नगर निगम में 77वें गणतंत्र दिवस पर शौर्य संविधान और शहीदों के सम्मान का भव्य संगम

नगर निगम प्रांगण में तिरंगे की शान, जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी, शहीदों और आंदोलनकारियों का सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की गूंज और संविधान के प्रति संकल्प ने काशीपुर में गणतंत्र दिवस को यादगार, प्रेरक और ऐतिहासिक बना दिया।

काशीपुर। देश के 77वें गणतंत्र दिवस का उत्सव इस वर्ष पूरे भारत में अभूतपूर्व उल्लास, गौरव और देशभक्ति के भाव के साथ मनाया गया। हर गली, हर चौराहा और हर सार्वजनिक स्थल तिरंगे की आभा से जगमगाता नजर आया। इसी ऐतिहासिक अवसर को और भी विशेष बनाते हुए राष्ट्रीय गीत ’वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने का गौरवपूर्ण संयोग भी सामने आया, जिसने स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को फिर से जीवंत कर दिया। इसी क्रम में काशीपुर नगर निगम द्वारा नगर निगम प्रांगण में भव्य ध्वजारोहण समारोह आयोजित किया गया, जिसमें जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों, राज्य आंदोलनकारियों, विद्यार्थियों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने सहभागिता की। इस आयोजन ने केवल एक औपचारिक कार्यक्रम का स्वरूप नहीं लिया, बल्कि यह देश की लोकतांत्रिक आत्मा, संविधान की गरिमा और बलिदानों की स्मृति को नमन करने का एक सशक्त मंच बनकर उभरा, जहां हर उपस्थित व्यक्ति के मन में राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध और समर्पण की भावना स्पष्ट रूप से झलकती दिखाई दी।

नगर निगम प्रांगण में आयोजित समारोह की गरिमामयी शुरुआत क्षेत्रीय विधायक त्रिलोक सिंह चीमा, काशीपुर महापौर दीपक बाली तथा ब्लॉक प्रमुख चन्द्रप्रभा द्वारा संयुक्त रूप से ध्वजारोहण कर की गई। जैसे ही तिरंगा शान से फहराया, पूरा वातावरण राष्ट्रगान की गूंज से भावविभोर हो उठा। उपस्थित नागरिकों ने अनुशासन और एकजुटता के साथ राष्ट्रगान में सहभागिता करते हुए अपने राष्ट्रप्रेम का परिचय दिया। इस दौरान संविधान में निहित मूल संकल्पोंकृन्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्वकृको स्मरण करते हुए लोकतांत्रिक आदर्शों को आत्मसात करने का संदेश दिया गया। सुबह लगभग 9रू30 बजे संपन्न हुए इस ध्वजारोहण कार्यक्रम में नगर निगम के अधिकारी, पार्षदगण, विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं तथा समाज के विविध वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हुए। आयोजन स्थल पर अनुशासन, गरिमा और देशभक्ति का ऐसा अद्भुत संगम दिखाई दिया, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि गणतंत्र दिवस केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि नागरिक चेतना को जागृत करने का पर्व है।

ध्वजारोहण के उपरांत नगर निगम सभागार में आयोजित सम्मान समारोह ने कार्यक्रम को भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की। इस अवसर पर उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारियों को सम्मानित किया गया, जिनके संघर्ष और बलिदान के बिना पृथक राज्य की कल्पना अधूरी रहती। समारोह के दौरान विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। देशभक्ति गीतों, समूह नृत्य और भावपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों ने स्वतंत्रता संग्राम, संविधान निर्माण और शहीदों की कुर्बानियों को मंच पर सजीव कर दिया। सभागार में बैठे लोगों की आंखों में गर्व और भावुकता का संगम स्पष्ट दिखाई दे रहा था। इन प्रस्तुतियों ने यह संदेश दिया कि नई पीढ़ी केवल आधुनिकता की ओर अग्रसर नहीं है, बल्कि वह देश के इतिहास, संघर्ष और मूल्यों से भी गहराई से जुड़ी हुई है।

महापौर दीपक बाली ने इस अवसर पर देश और प्रदेशवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन केवल उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि आत्ममंथन और नए संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने कहा कि 77 वर्षों की यह यात्रा भारत के अमृत काल का प्रतीक है, जो हमें भविष्य के लिए मजबूत, समावेशी और सशक्त भारत के निर्माण की प्रेरणा देती है। अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, संविधान निर्माताओं और वीर शहीदों को नमन करते हुए कहा कि उनके अद्वितीय बलिदानों के कारण ही आज हम एक स्वतंत्र, संप्रभु और लोकतांत्रिक राष्ट्र में सांस ले पा रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 26 जनवरी 1950 का दिन भारत के इतिहास में इसलिए स्वर्णिम है, क्योंकि इसी दिन देश को उसका संविधान प्राप्त हुआ, जिसने हर नागरिक को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध कराया।

अपने विस्तृत वक्तव्य में महापौर दीपक बाली ने शहादत की भावना को गहराई से शब्दों में पिरोया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उन अनगिनत बलिदानों को महसूस करने का प्रयास है, जिनके कारण आज हम स्वतंत्र वातावरण में जीवन जी पा रहे हैं। उन्होंने 15 अगस्त 1947 की आज़ादी और उसके बाद 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने को भारतीय लोकतंत्र की नींव का सबसे मजबूत क्षण बताया। उन्होंने कहा कि संविधान के रचयिताओं ने देश को ऐसा ढांचा दिया, जिसमें हर नागरिक को समान अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी मिली। उनके अनुसार शहीदों ने जिस लोकतांत्रिक भारत की कल्पना की थी, उसे जीवंत और सशक्त बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उनके शब्दों में इतिहास, भावनाएं और वर्तमान की जिम्मेदारियां एक साथ स्पष्ट रूप से झलक रही थीं।

इसी दौरान महापौर ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कार्यक्रम को और भी स्मरणीय बना दिया। उन्होंने शहीद पूरन सिंह भंडारी की स्मृति में नगर निगम सभागार में उपस्थित जनसमूह के समक्ष एक स्वागत द्वार और उनके निवास तक जाने वाली सड़क के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने जानकारी दी कि इस परियोजना पर लगभग 87 हजार रुपये की लागत आएगी तथा शीघ्र ही विज्ञापन प्रकाशन और निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर एक माह के भीतर निर्माण कार्य आरंभ किया जाएगा। शहीद की पत्नी श्रीमती लच्छी भंडारी और परिवार की उपस्थिति में की गई इस घोषणा को उपस्थित लोगों ने तालियों की गूंज के साथ सराहा। महापौर ने कहा कि यह कार्य केवल एक विकास परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर सपूत के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है।

इस अवसर पर नगर आयुक्त रविन्द्र सिंह बिष्ट ने भी मंच से देश और प्रदेशवासियों को 77वें गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संबोधन में भारतीय संविधान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1950 में लागू हुआ संविधान हर नागरिक को समान अधिकार प्रदान करता है, चाहे वह सीमा पर तैनात सैनिक हो या नगर की स्वच्छता व्यवस्था में जुटा कर्मचारी। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है, जब प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी ईमानदारी से निर्वहन करे। नगर निगम के कर्मचारियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में संवैधानिक चेतना को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं।

कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, कारगिल शहीदों और सैनिकों के परिजनों को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। सम्मान पाने वालों में श्रीमती राजदुलारी देवीकृस्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय चन्दन सिंह की पत्नी, श्रीमती भगवती देवीकृकारगिल शहीद स्वर्गीय पदमराम की पत्नी, सुमित नेगी-कारगिल शहीद स्वर्गीय अमित नेगी के भाई, श्रीमती विमला रावत-कारगिल शहीद स्वर्गीय रघुवीर सिंह की पत्नी, श्रीमती पुष्पा रावतकृकारगिल शहीद स्वर्गीय महीपाल सिंह की पत्नी तथा श्रीमती ज्योत्सना प्रजापति-द्रास सेक्टर में शहीद स्वर्गीय मुकेश प्रजापति की पत्नी शामिल रहीं। मंच से इन सभी परिवारों को नमन करते हुए आयोजकों ने कहा कि राष्ट्र उनकी कुर्बानियों का सदैव ऋणी रहेगा।

उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारियों को भी इस अवसर पर विशेष सम्मान से नवाजा गया। राज्य निर्माण के संघर्ष में योगदान देने वाले दीपक बाली, नीरज गुप्ता, संजीव सिंह, रवि शर्मा, वीरेन्द्र कुमार, संजय आर्य और शोभित शर्मा को लोकतंत्र की जीवंत मिसाल बताते हुए मंच पर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों का संघर्ष केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह सम्मान उन संघर्षों की याद दिलाने का माध्यम बना, जिनके बल पर उत्तराखंड को उसकी पहचान और आत्मसम्मान मिला।

पूर्व नगर निगम महापौर उषा चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि काशीपुर के लिए यह गर्व का विषय है कि गणतंत्र दिवस जैसे पावन अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले व्यक्तित्व एक मंच पर उपस्थित हैं। उन्होंने ब्लॉक प्रमुख चन्द्रप्रभा की उपस्थिति को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाती है। उन्होंने सभी नागरिकों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए यह संदेश दिया कि संविधान हमें केवल अधिकार नहीं देता, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का भी बोध कराता है।

कार्यक्रम के दौरान स्वागत गीत, देशभक्ति गीत, सूक्ष्म संबोधन और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को निरंतर ऊर्जावान बनाए रखा। इसी क्रम में एक साहित्यिक क्षण भी सामने आया, जब वरिष्ठ पत्रकार विनोद भगत द्वारा रचित पुस्तक दरख्ते सपने का विमोचन महापौर दीपक बाली द्वारा किया गया। पुस्तक विमोचन के अवसर पर वक्ताओं ने साहित्य की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता और सामाजिक चेतना के विकास में साहित्य का विशेष योगदान होता है। यह क्षण इस बात का प्रमाण बना कि राष्ट्र निर्माण केवल प्रशासनिक या राजनीतिक प्रयासों तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और साहित्यिक चेतना से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

समारोह के समापन अवसर पर मंच से वक्ताओं ने उपस्थित नागरिकों, छात्र-छात्राओं तथा मीडिया प्रतिनिधियों से विशेष आग्रह किया कि वे कार्यक्रम की समाप्ति के उपरांत भी अनुशासन और गरिमा बनाए रखें तथा संविधान के प्रति अपनी निष्ठा और जिम्मेदारी को व्यवहार में उतारें। इसी उद्देश्य से आयोजित हस्ताक्षर अभियान में अधिक से अधिक सहभागिता करने की अपील की गई, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति नागरिकों की प्रतिबद्धता को ठोस रूप दिया जा सके। वक्ताओं ने कहा कि यह पहल केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता, सहभागिता और उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। कार्यक्रम के दौरान यह स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि 77वां गणतंत्र दिवस मात्र उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण, कर्तव्यबोध और सेवा भावना को आत्मसात करने का प्रेरक संदेश देता है। इस आयोजन ने सभी को यह एहसास कराया कि संविधान के आदर्शों को अपनाकर ही सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण संभव है।

उल्लेखनीय है कि इस भव्य और गरिमामयी समारोह का संपूर्ण संचालन नगर निगम कार्यालय अधीक्षक विकास शर्मा द्वारा अत्यंत कुशलता और दक्षता के साथ किया गया। उनके प्रभावी समन्वय, सटीक समय-प्रबंधन और सुव्यवस्थित कार्यशैली के कारण कार्यक्रम की प्रत्येक गतिविधि सुचारू रूप से संपन्न होती चली गई। मंच संचालन से लेकर अतिथियों के सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की क्रमबद्धता और प्रशासनिक व्यवस्थाओं तक, हर पहलू में उनकी दक्षता स्पष्ट रूप से दिखाई दी। आयोजन से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगी संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर उन्होंने समारोह को अनुशासित और प्रभावशाली स्वरूप प्रदान किया। परिणामस्वरूप काशीपुर नगर निगम द्वारा आयोजित यह गणतंत्र दिवस समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि नागरिक चेतना को जागृत करने, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और राष्ट्रप्रेम की भावना को व्यापक स्तर पर सुदृढ़ करने वाला एक प्रेरक आयोजन बनकर सामने आया। इस आयोजन ने निश्चित रूप से नगर के सामाजिक और लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण और यादगार मील का पत्थर स्थापित किया।

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