नई दिल्ली। आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में खानपान की आदतें जिस तरह बदल रही हैं, वह धीरे-धीरे लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रही हैं। बाहर का तला-भुना, अत्यधिक वसायुक्त और स्वाद बढ़ाने वाले तत्वों से भरपूर जंक फूड अब केवल शौक नहीं, बल्कि कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में शरीर में होने वाली छोटी-मोटी समस्याओं को भी लोग अक्सर हल्के में ले लेते हैं और यह मान लेते हैं कि पेट में जलन, भारीपन या गैस जैसी शिकायतें बस जंक फूड खाने का सामान्य परिणाम हैं। डॉ0 शानू मसीह ‘सहर’ के अनुसार यही सोच कई बार गंभीर बीमारियों की नींव रख देती है, क्योंकि शरीर लंबे समय तक चेतावनी देता रहता है, लेकिन जब तक हम सतर्क होते हैं, तब तक नुकसान काफी बढ़ चुका होता है। हाल के वर्षों में फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़े हैं और इसका सबसे बड़ा कारण गलत खानपान और लापरवाह जीवनशैली मानी जा रही है।
हाल ही में सामने आए एक मामले का उल्लेख करते हुए डॉ0 शानू मसीह ‘सहर’ बताती हैं कि 35 वर्षीय एक महिला लगातार पेट के भारीपन, एसिडिटी और कमजोरी की शिकायत से जूझ रही थी। उसने इन लक्षणों को सामान्य समझते हुए लंबे समय तक अनदेखा किया और यह सोचती रही कि यह सब जंक फूड अधिक खाने का नतीजा है, जो अपने आप ठीक हो जाएगा। लेकिन जब तक उसने चिकित्सकीय जांच कराई, तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी थी। जांच में पता चला कि महिला फैटी लिवर से पीड़ित है और लिवर का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है। डॉ0 शानू मसीह ‘सहर’ के मुताबिक यह उदाहरण इस बात का प्रमाण है कि शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि फैटी लिवर धीरे-धीरे बढ़ता है और शुरुआती दौर में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं।
डॉ0 शानू मसीह ‘सहर’ बताती हैं कि लिवर को शरीर का इंजन कहा जाता है, क्योंकि यह पाचन, विषैले तत्वों को बाहर निकालने और ऊर्जा के संतुलन में अहम भूमिका निभाता है। जब हम लंबे समय तक अत्यधिक फैट, चीनी और प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं, तो यह अतिरिक्त वसा लिवर में जमा होने लगती है। शुरुआत में शरीर इसे सहन कर लेता है, लेकिन समय के साथ यही जमा फैट फैटी लिवर का रूप ले लेता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआती चरण में फैटी लिवर के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। डॉ0 शानू मसीह ‘सहर’ के अनुसार कई मामलों में जब तक व्यक्ति को गंभीर तकलीफ महसूस होती है, तब तक लिवर लगभग 70 प्रतिशत तक डैमेज हो चुका होता है, जिससे इलाज की प्रक्रिया भी कठिन हो जाती है।

फैटी लिवर के शुरुआती संकेतों पर प्रकाश डालते हुए डॉ0 शानू मसीह ‘सहर’ बताती हैं कि अक्सर लोग पेट फूलने, एसिडिटी, पेट में भारीपन, अत्यधिक थकान और कमजोरी जैसी समस्याओं को मामूली समझ लेते हैं। कुछ लोगों को भोजन पचने में भी दिक्कत होने लगती है, लेकिन वे इसे गैस या बदहजमी मानकर टाल देते हैं। धीरे-धीरे ये लक्षण लगातार बने रहते हैं और शरीर की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। डॉ0 शानू मसीह ‘सहर’ का कहना है कि यदि इन संकेतों को समय रहते गंभीरता से लिया जाए और जांच कराई जाए, तो लिवर को होने वाले बड़े नुकसान से बचा जा सकता है। समस्या तब खतरनाक बनती है, जब लोग स्वयं ही कारण तय कर लेते हैं और चिकित्सकीय सलाह लेने से बचते हैं।
फैटी लिवर और लिवर कैंसर के बीच संबंध को लेकर डॉ0 शानू मसीह ‘सहर’ गंभीर चेतावनी देते हैं। उनके अनुसार जब फैटी लिवर का समय पर उपचार नहीं होता, तो लिवर में सूजन बढ़ने लगती है और कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं। यही सूजन आगे चलकर लिवर सिरोसिस का रूप ले लेती है, जिसमें लिवर के ऊतकों पर घाव बन जाते हैं और वह सिकुड़ने लगता है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर लिवर कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉ0 शानू मसीह ‘सहर’ बताती हैं कि कई मरीजों में शुरुआत फैटी लिवर से होती है, लेकिन लापरवाही के कारण वही स्थिति जानलेवा बीमारी में बदल जाती है, जिसका इलाज बेहद जटिल और महंगा होता है।
बचाव के उपायों पर बात करते हुए डॉ0 शानू मसीह ‘सहर’ साफ शब्दों में कहती हैं कि फैटी लिवर से बचना संभव है, बशर्ते जीवनशैली में समय रहते बदलाव किए जाएं। सबसे पहले चीनी और मैदा से बने खाद्य पदार्थों का सेवन कम या बंद करना जरूरी है, क्योंकि यही तत्व लिवर में फैट जमा होने का मुख्य कारण बनते हैं। इसके साथ-साथ रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना या हल्का व्यायाम करना शरीर के मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखता है। शराब का सेवन लिवर के लिए सबसे घातक साबित होता है, इसलिए इससे पूरी तरह दूरी बनाए रखना आवश्यक है। डॉ0 शानू मसीह ‘सहर’ के अनुसार वजन और शरीर के संतुलन पर ध्यान देना भी फैटी लिवर से बचाव का अहम हिस्सा है।
अंत में डॉ0 शानू मसीह ‘सहर’ यह स्पष्ट करते हैं कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी जानकारी को केवल सामान्य जागरूकता के रूप में लेना चाहिए। हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है और लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए किसी भी दवा, उपचार या घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य है। फैटी लिवर जैसी बीमारी चुपचाप शरीर को नुकसान पहुंचाती है और जब तक स्पष्ट लक्षण सामने आते हैं, तब तक स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि लोग अपने खानपान, दिनचर्या और शरीर के संकेतों पर ध्यान दें और समय-समय पर जांच कराते रहें। डॉ0 शानू मसीह ‘सहर’ के अनुसार जागरूकता और सावधानी ही लिवर को स्वस्थ रखने का सबसे मजबूत आधार है।





