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राहुल गांधी का तीखा वार स्मार्ट सिटी मॉडल इंदौर भागीरथपुरा में पानी पीकर मौतों पर

इंदौर के भागीरथपुरा में जहरीले पानी से हुई मौतों को लेकर राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश सरकार पर तीखा हमला किया, पीड़ित परिवारों से मिले और उन्हें राहत राशि वितरित कर समर्थन का आश्वासन दिया।

इंदौर। जहरीले पानी से मौतों का मामला एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। भागीरथपुरा इलाके में इस त्रासदी के बाद कांग्रेस ने लगातार आक्रामक रुख अपनाया है। शनिवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी प्रभावित इलाके पहुंचे और पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने साफ शब्दों में मध्य प्रदेश सरकार पर हमला करते हुए कहा कि यह कैसी स्मार्ट सिटी है, जहां नागरिकों को पीने के लिए साफ पानी तक उपलब्ध नहीं है और लोग पानी पीने के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं। राहुल गांधी ने प्रशासन की गंभीर लापरवाही को उजागर करते हुए कहा कि यह सिर्फ इंदौर का मामला नहीं है, बल्कि यह बड़े पैमाने पर शहरों में मौजूद अर्बन मॉडल की विफलता का उदाहरण है। उनका यह दौरा न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इससे प्रभावित लोगों के लिए राहत और उम्मीद की किरण भी जगी।

सादगी और गंभीरता के साथ राहुल गांधी ने शनिवार को एयरपोर्ट से सीधे मुंबई हॉस्पिटल का रुख किया, जहां जहरीले पानी पीने से प्रभावित मरीज भर्ती थे। उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों से मुलाकात की, उनके स्वास्थ्य का हाल जाना और डॉक्टरों व अस्पताल कर्मचारियों से इलाज के प्रबंधन के बारे में चर्चा की। इसके बाद उन्होंने भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा किया। पुलिस सुरक्षा में घेरे गए इलाके में पहुंचे राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों से सीधा संवाद किया। कई मृतक परिवारों के सदस्यों ने उन्हें रोते हुए अपनी व्यथा और पीड़ा सुनाई। राहुल गांधी ने उन्हें सांत्वना दी और आश्वासन दिया कि उनकी लड़ाई लड़ने में कांग्रेस उनके साथ खड़ी रहेगी। उनका यह कदम न केवल जनभावनाओं से जुड़ाव को दर्शाता है, बल्कि मध्य प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का भी संदेश था।

पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने उनके लिए राहत राशि की व्यवस्था की। उन्होंने दो-तीन प्रभावित परिवारों के निवास पर जाकर उनसे बात की और उनकी मुश्किलें जानी। इसके बाद स्थानीय गार्डन में जमा हुए लोगों और परिजनों के साथ चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के साथ मिलकर पीड़ित परिवारों को एक-एक लाख रुपये के चेक वितरित किए। इस दौरान राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि जिन परिवारों में मौतें हुई हैं, वे डर और भय में जी रहे हैं, और उन्हें धमकाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ आर्थिक राहत नहीं है, बल्कि प्रभावित लोगों को न्याय दिलाने और उनकी आवाज को उठाने का प्रयास है। इस कदम ने प्रभावित परिवारों में उम्मीद की नई किरण जगाई।

राजनीतिक पटल पर राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल आर्थिक राहत का नहीं है, बल्कि सरकार की जिम्मेदारी और कार्यप्रणाली पर प्रश्न उठाने का है। उन्होंने कहा कि सभी लोग दूषित पानी के प्रभाव से प्रभावित हुए हैं। इंदौर में साफ पानी का अभाव लोगों की मौतों का मुख्य कारण बन रहा है। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि स्मार्ट सिटी के मॉडल का उद्देश्य नागरिकों को सुरक्षित और स्वच्छ जीवन प्रदान करना था, लेकिन वास्तविकता में लोग पीने के पानी के अभाव में अपनी जान गंवा रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई, उन्हें जिम्मेदारी लेनी चाहिए और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। विपक्ष ने सरकार को सख्त चेतावनी दी कि यह मामला नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पानी की टंकी की तरफ इशारा करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह टंकी इस संकट की जीवंत मिसाल है। यहां आज भी साफ पानी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि बांडेज़ जैसी अस्थायी व्यवस्था केवल कुछ समय के लिए राहत दे सकती है, लेकिन जब मीडिया का ध्यान हट जाएगा, तो वही दूषित पानी वापस लोगों के घरों और जीवन में चले आएगा। स्थानीय लोगों ने लगातार मांग की है कि इस मामले को सिस्टमैटिक तरीके से हल किया जाए और उन्हें स्थायी रूप से स्वच्छ पानी दिया जाए। राहुल गांधी ने कहा कि यह मांग गलत नहीं है और सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इसे पूरा करे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह यहां पीड़ितों के समर्थन में आए हैं और उनकी आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

राज्य सरकार द्वारा इस मुद्दे पर राजनीति करने के आरोपों को लेकर राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि यह राजनीति नहीं है। उन्होंने कहा कि वह विपक्ष के नेता हैं और यहां लोगों की मृत्यु हुई है। साफ पानी की कमी के कारण नागरिकों की जान जा रही है, और ऐसे में उनकी मदद करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार की पीड़ा पर ध्यान देना, उनकी आवाज को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना उनका जिम्मेदारी है। राहुल गांधी ने कहा कि वह यहां सिर्फ समर्थन देने और पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होने आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसे राजनीति बताना या कोई भी आरोप लगाना गलत है। उनकी प्राथमिकता पीड़ितों के अधिकार और जीवन की सुरक्षा है।

इस पूरे दौरे के दौरान राहुल गांधी ने प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया और जनता के सामने सरकार की जवाबदेही पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि साफ पानी न मिलने से जनजीवन प्रभावित हुआ है और इससे मौतों का संकट पैदा हुआ है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि स्मार्ट सिटी के मॉडल का उद्देश्य केवल बैंडवागन की छवि बनाना नहीं है, बल्कि नागरिकों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि वह दोषियों को चिन्हित करे और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाए। राहुल गांधी का यह दौरा न केवल पीड़ितों के लिए राहत का प्रतीक बना, बल्कि सरकार को गंभीर चेतावनी भी दी कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा और मूलभूत जरूरतों पर ध्यान दें।

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