spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडश्री चैती मेले की रौनक बढ़ाने और व्यापारियों को उबारने हेतु महापौर...

श्री चैती मेले की रौनक बढ़ाने और व्यापारियों को उबारने हेतु महापौर की बड़ी पहल

बारिश और गैस किल्लत की मार झेल रहे व्यापारियों के आंसू पोंछने के लिए महापौर दीपक बाली ने जिलाधिकारी को लिखा पत्र और मेला अवधि बढ़ाकर चैती की ऐतिहासिक रौनक को सात दिन और बरकरार रखने की मांग की।

काशीपुर। देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक नगरी में आस्था और उल्लास के संगम के रूप में सुविख्यात श्री चैती मेला इस समय अपनी समयसीमा समाप्त होने के बावजूद एक नई चर्चा और उम्मीदों के केंद्र में आ गया है। इस ऐतिहासिक मेले की चमक को बरकरार रखने और यहां अपनी किस्मत आजमाने आए सैकड़ों छोटे-बड़े व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए नगर के प्रथम नागरिक यानी महापौर दीपक बाली ने एक बेहद सराहनीय और संवेदनशील पहल की है। उन्होंने जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारी जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर को एक औपचारिक पत्र प्रेषित कर इस मेले की समय अवधि को आगामी एक सप्ताह के लिए और विस्तार देने की पुरजोर सिफारिश की है। महापौर का यह कदम उन व्यापारियों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं माना जा रहा है, जो मेले के शुरुआती दौर में मौसम की बेरुखी और अन्य तकनीकी अड़चनों के कारण भारी आर्थिक बोझ तले दब गए थे। काशीपुर की जनता अब टकटकी लगाए प्रशासन के फैसले का इंतजार कर रही है ताकि इस मेले की रौनक कुछ और दिनों तक गलियों में बिखरी रहे।

विस्तृत विवरण के अनुसार, इस वर्ष श्री चैती मेला का आयोजन 19 मार्च से प्रारंभ होकर 17 अप्रैल 2026 तक निर्धारित किया गया था, लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था क्योंकि मेले के शुरुआती चार दिनों में आसमान से बरसी मूसलाधार बारिश ने आयोजकों और दुकानदारों के अरमानों पर पानी फेर दिया था। बारिश के कारण मेला परिसर में जलभराव और कीचड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जिससे न केवल श्रद्धालुओं की आवक कम हुई बल्कि मनोरंजन के बड़े साधन जैसे झूले और सर्कस भी पूरी तरह ठप पड़े रहे। इतना ही नहीं, मेले के मध्य काल में एलपीजी गैस की आपूर्ति और उससे जुड़ी कुछ तकनीकी पेचीदगियों ने भी आगंतुकों और स्थानीय निवासियों के उत्साह को काफी हद तक सीमित कर दिया था। इन तमाम विपरीत परिस्थितियों का सीधा असर मेले के आर्थिक ढांचे पर पड़ा है, जिसके चलते वहां अपनी दुकान सजाए बैठे व्यापारियों और झूला संचालकों को भारी वित्तीय क्षति का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी भरपाई सामान्य अवधि में होना लगभग असंभव प्रतीत हो रहा है।

महापौर दीपक बाली ने जमीनी हकीकत को समझते हुए अपने पत्र में इस बात पर विशेष बल दिया है कि वर्तमान समय में जब फसल कटाई का सीजन अपनी समाप्ति पर है, तो क्षेत्रीय किसान और नगर के आम नागरिक अब बड़ी तादाद में मेले का रुख कर रहे हैं। किसानों के पास अब थोड़ा अवकाश है और वे सपरिवार मेले का आनंद लेने के लिए उत्सुक हैं, ऐसे में यदि मेले का समापन अभी कर दिया जाता है, तो यह न केवल व्यापारियों के साथ अन्याय होगा बल्कि उन हजारों लोगों की खुशियों पर भी विराम लगा देगा जो मेले के अंतिम दिनों का लुत्फ उठाना चाहते हैं। पत्र में स्पष्ट रूप से आग्रह किया गया है कि मानवीय और आर्थिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए मेला अवधि को 18 अप्रैल से बढ़ाकर 24 अप्रैल 2026 तक सुनिश्चित किया जाए। महापौर का मानना है कि इन अतिरिक्त सात दिनों में होने वाली भीड़ से व्यापारियों के नुकसान की भरपाई हो सकेगी और मेले की भव्यता भी अक्षुण्ण बनी रहेगी।

एक और महत्वपूर्ण पहलू जिस पर दीपक बाली ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है, वह है आर्थिक राहत की घोषणा, जिसमें उन्होंने सुझाव दिया है कि इस विस्तारित एक सप्ताह की अवधि के लिए कार्यरत ठेकेदारों, स्टॉल स्वामियों और विभिन्न मनोरंजन एजेंसियों से किसी भी प्रकार का अतिरिक्त किराया या शुल्क न वसूला जाए। उनका यह प्रस्ताव व्यापारियों के प्रति उनकी सहानुभूति और नगर के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, क्योंकि अतिरिक्त शुल्क का बोझ अंततः आम जनता की जेब पर ही पड़ता है। अब सारा दारोमदार जिलाधिकारी और संबंधित प्रशासनिक अमले पर है कि वे इस जनहितैषी प्रस्ताव को कितनी गंभीरता से लेते हैं। यदि प्रशासन इस विस्तार को हरी झंडी दे देता है, तो निश्चित रूप से काशीपुर का वातावरण एक बार फिर जय माता दी के जयकारों और मेले की चकाचौंध से गुंजायमान हो उठेगा, जिससे पूरे क्षेत्र में सकारात्मकता का संचार होगा।

संबंधित ख़बरें
स्वच्छ, सुंदर और विकसित काशीपुर के संकल्प संग गणतंत्र दिवस

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!