काशीपुर। देश के मध्यमवर्गीय परिवारों और रसोई की जिम्मेदारी संभालने वाली गृहणियों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है, जो आने वाले दिनों में उनके घर के बजट को पूरी तरह से तहस-नहस कर सकती है। अभी हाल ही में व्यापारिक प्रतिष्ठानों और रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले 19 किलो के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में जिस तरह से लगभग ₹993 की रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, उसने पहले ही बाजार में खलबली मचा दी है। इस भारी उछाल के बाद अब सबसे बड़ा झटका आम आदमी की रसोई को लगने वाला है, क्योंकि सरकारी गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक अब घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी एक बड़ा इजाफा होने की पूरी संभावना बन गई है। सूत्रों का दावा है कि पेट्रोलियम मंत्रालय के भीतर इस बात को लेकर गहन मंथन चल रहा है कि घरेलू गैस की कीमतों को वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप कैसे समायोजित किया जाए, ताकि तेल कंपनियों पर पड़ रहे बोझ को कम किया जा सके।
मई महीने की शुरुआत से पहले ही जिस तरह कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में करीब एक हजार रुपये की वृद्धि ने छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी थी, उसका असर अब धीरे-धीरे आम उपभोक्ता की दहलीज तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। इतना ही नहीं, जो लोग 5 किलोग्राम वाले एफटीएल यानी फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं, उन्हें भी महंगाई का तगड़ा करंट लगा है क्योंकि इसके दामों में सीधे ₹261 की वृद्धि कर दी गई है। अब खबर यह है कि सरकार घरेलू रसोई गैस के दामों में भी ₹40 से लेकर ₹50 तक की बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है, जो सीधे तौर पर करोड़ों परिवारों की मासिक बचत पर डाका डालने जैसा होगा। अगले पांच से सात दिनों के भीतर इस नई दर के लागू होने की प्रबल आशंका जताई जा रही है, जिससे मिडिल क्लास और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए घर का खर्च चलाना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा, क्योंकि सिलेंडर के दाम पहले से ही ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर बने हुए हैं।
इस आसन्न महंगाई के पीछे जो सबसे बड़ा और कड़वा कारण बताया जा रहा है, वह है वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बेतहाशा वृद्धि, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संकट गहरा दिया है। अंतरराष्ट्रीय तनाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता के चलते कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसका सीधा और नकारात्मक प्रभाव घरेलू ईंधन की लागत पर पड़ रहा है। सरकारी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, तेल विपणन कंपनियों के लिए गैस की वास्तविक लागत और उसकी वर्तमान बिक्री कीमत के बीच का अंतर इतना ज्यादा बढ़ गया है कि उन्हें हर दिन करोड़ों रुपये का घाटा सहना पड़ रहा है। इसी वित्तीय असंतुलन और व्यापारिक घाटे को कम करने के लिए सरकार अब मजबूरन इस बढ़ोतरी का फैसला लेने की कगार पर है, ताकि पेट्रोलियम क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त होने से बचाया जा सके, भले ही इसका बोझ आम जनता के कंधों पर ही क्यों न आए।
हालांकि आम आदमी को थोड़ी राहत देने के लिए सरकार ने पिछले कुछ समय से घरेलू रसोई गैस की कीमतों को स्थिर रखने का हरसंभव प्रयास किया था और वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। लेकिन अब स्थितियां हाथ से निकलती दिख रही हैं और पेट्रोलियम मंत्रालय की अंतिम मुहर लगते ही किसी भी पल रसोई गैस महंगी होने का आधिकारिक ऐलान हो सकता है। यह खबर उन करोड़ों लोगों के लिए किसी झटके से कम नहीं है जो पहले ही खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं। अगर घरेलू सिलेंडर महंगा होता है, तो इसका असर केवल घर की रसोई तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे जुड़े तमाम छोटे उद्योग, टिफिन सेवाएं और यहां तक कि बच्चों के लिए चलने वाली मिड-डे मील योजनाएं भी सीधे तौर पर प्रभावित होंगी, जिससे समाज का हर तबका महंगाई की इस नई और मारक लहर की चपेट में आ जाएगा।
महंगाई की यह मार अब उस मोड़ पर पहुंच गई है जहां आम नागरिक अपने भविष्य और बचत को लेकर बेहद असुरक्षित महसूस करने लगा है, क्योंकि गैस सिलेंडर की कीमतों में होने वाली यह वृद्धि एक चेन रिएक्शन की तरह काम करेगी। जब खाना पकाना महंगा होगा, तो बाहर का खाना, हॉस्टल की मेस और रोजाना की खान-पान की सेवाएं अपनी कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हो जाएंगी, जिससे छात्रों और कामकाजी युवाओं की जेब पर भी अतिरिक्त भार पड़ेगा। सरकार के लिए यह स्थिति ‘एक तरफ कुआं और दूसरी तरफ खाई’ जैसी है, जहां उसे तेल कंपनियों के भारी नुकसान और आम जनता के बढ़ते गुस्से के बीच एक कठिन संतुलन बनाना है। फिलहाल, पूरे देश की निगाहें पेट्रोलियम मंत्रालय के अगले आदेश पर टिकी हैं, लेकिन कड़वी सच्चाई यही नजर आ रही है कि आने वाले हफ्ते में आपकी रसोई का खर्च ₹50 तक बढ़ने के लिए आपको मानसिक और आर्थिक रूप से तैयार रहना होगा।





