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महापौर दीपक बाली का भगीरथी प्रयास 25 वर्षों की अधूरी आस पूरी कर बना ननकाना साहिब चौक

मुख्यमंत्री की स्वीकृति और महापौर की दूरदर्शी पहल ने काशीपुर की धार्मिक विरासत को नया गौरव प्रदान किया। वर्षों से लंबित आस्था की मांग पूरी होने पर सिख समाज सहित पूरे शहर में उत्साह, सम्मान और कृतज्ञता की लहर दौड़ गई।

काशीपुर। उत्तराखंड के सीमांत जनपद ऊधमसिंह नगर के प्रमुख व्यावसायिक और ऐतिहासिक काशीपुर शहर की फिजाओं में इन दिनों एक अलग ही उत्साह, उल्लास और कृतज्ञता का माहौल साफ महसूस किया जा रहा है। इस पावन औद्योगिक नगरी की धरती पर सांप्रदायिक सौहार्द, धार्मिक श्रद्धा और विकास की एक ऐसी नई इबारत लिखी जा चुकी है, जिसकी गूंज आने वाले कई दशकों तक थमती हुई दिखाई नहीं देगी। नगर निगम के वर्तमान प्रथम नागरिक यानी यशस्वी महापौर दीपक बाली ने स्थानीय जनता की दशकों पुरानी धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए एक ऐसा ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कार्य कर दिखाया है, जिसने संपूर्ण सिख समाज के साथ-साथ हर सनातनी और आम नागरिक का दिल पूरी तरह से जीत लिया है। उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से विशेष रूप से व्यक्तिगत संवाद स्थापित करके, उनके समक्ष काशीपुर की ऐतिहासिकता का हवाला देते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील अनुरोध किया था। महापौर के इस भगीरथ प्रयास और अटूट समर्पण का ही सुखद परिणाम रहा कि मुख्यमंत्री ने बिना किसी देरी के उनके इस पावन और दूरदर्शी प्रस्ताव को अपनी त्वरित स्वीकृति प्रदान कर दी। इसके बाद ठीक विगत 5 जून के उस ऐतिहासिक और सुनहरे दिन, आधुनिक तकनीक के माध्यम से वर्चुअल रूप से एक भव्य और गरिमामय शिलान्यास समारोह का आयोजन संपन्न हुआ, जिसने काशीपुर के इतिहास में हमेशा-हमेशा के लिए एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया।

इस बेहद भव्य, दिव्य और गरिमामय वर्चुअल शिलान्यास समारोह के माध्यम से काशीपुर के एक अत्यंत व्यस्त और प्रमुख चौराहे को सिखों के परम पूजनीय, प्रथम गुरु, जगत गुरु साहिब श्री गुरु नानक देव जी के पावन और पवित्र जन्मस्थान ‘ननकाना साहिब’ के गौरवमयी नाम पर समर्पित कर दिया गया है। काशीपुर नगर निगम के मुखिया के रूप में महापौर दीपक बाली को अभी इस प्रतिष्ठित पद की कमान संभाले हुए और जनता की सेवा करते हुए मात्र लगभग डेढ़ वर्ष के आसपास का ही एक संक्षिप्त समय व्यतीत हुआ है। इतने कम और सीमित समय अंतराल के भीतर ही उन्होंने जनसेवा, ढांचागत विकास और धार्मिक आस्थाओं के सम्मान का जो अद्भुत और अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया है, उसने जनता के बीच उनकी लोकप्रियता को एक नए और सर्वोच्च शिखर पर पहुंचा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का स्पष्ट रूप से मानना है कि महापौर के रूप में उनका यह मौजूदा कार्यकाल काशीपुर के इतिहास के पन्नों में हमेशा-हमेशा के लिए स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किया जाएगा और सदियों तक याद रखा जाएगा। इस अद्वितीय कार्यकाल को अमर और अविस्मरणीय बनाने का जो सबसे बड़ा, मुख्य और ऐतिहासिक कारण उभरकर सामने आया है, वह निसंदेह यही ननकाना साहिब चौक का निर्माण और उसका ऐतिहासिक नामकरण ही है।

यह संपूर्ण घटनाक्रम और महापौर दीपक बाली का यह दूरदर्शी कदम केवल एक सामान्य विकास कार्य या महज एक चौराहे का नामकरण भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपे गहरे सामाजिक और राजनीतिक निहितार्थों को समझना भी बेहद आवश्यक है। यदि हम काशीपुर के पिछले ढाई दशकों के राजनीतिक इतिहास, सामाजिक समीकरणों और क्षेत्रीय सत्ता के गलियारों पर एक पैनी नजर डालें, तो यह बात अत्यधिक महत्वपूर्ण, विचारणीय और हैरान करने वाली नजर आती है। विगत वर्ष 2002 के समय से लेकर आने वाले आगामी वर्ष 2027 तक के लंबे कालखंड को देखा जाए, तो काशीपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार सिख समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले जनप्रतनिधि ही विधायक के रूप में चुनकर प्रदेश की विधानसभा में पहुंचते रहे हैं। लगभग पच्चीस वर्षों के इस बेहद लंबे और गौरवशाली समय तक सत्ता के शीर्ष पर सिख समाज का ही मजबूत राजनीतिक नेतृत्व काबिज रहने के बावजूद, समाज की इस अत्यंत गहरी और पवित्र आध्यात्मिक मांग को कभी पूरा नहीं किया जा सका था। स्थानीय प्रबुद्ध जनता और सिख समुदाय के जिम्मेदार लोगों का अब खुलकर और बेहद मुखरता के साथ यह कहना है कि जो पहला ऐतिहासिक और साहसिक कदम महापौर दीपक बाली ने ननकाना साहिब चौक की स्थापना के लिए उठाया है, वह पूरी तरह से अभूतपूर्व, अकल्पनीय और सर्वथा अतुलनीय है।

काशीपुर के चौक-चौराहों, गुरुद्वारों, सामाजिक बैठकों और आम जनमानस के बीच इस समय केवल इसी ऐतिहासिक निर्णय की जमकर सराहना हो रही है और लोग इसकी तुलना राष्ट्रीय स्तर के बड़े फैसलों से कर रहे हैं। आम जनमानस और सिख समुदाय के वरिष्ठ विचारकों का स्पष्ट तौर पर यह कहना है कि जिस तरीके से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-पाकिस्तान सीमा पर तमाम कूटनीतिक और भौगोलिक बाधाओं को पार करते हुए पाकिस्तान के भीतर स्थित पवित्र ननकाना साहिब कॉरिडोर का भव्य निर्माण करवाया था, उसने वैश्विक स्तर पर सिखों के मन, मान-सम्मान और स्वाभिमान को एक नई ऊंचाई और अभूतपूर्व वैश्विक पहचान प्रदान की थी। ठीक उसी वैश्विक सम्मान की तर्ज पर और उसी पावन भावना को आत्मसात करते हुए, काशीपुर के स्थानीय स्तर पर जनप्रिय महापौर दीपक बाली ने भी संपूर्ण ऊधम सिंह नगर जिले के भीतर सिख समाज को जो ऐतिहासिक पहचान, सम्मान और गौरव की सौगात दी है, उसे यह समाज और आने वाली पीढ़ियां कभी भी भुला नहीं पाएंगी। ऊधम सिंह नगर की धरती वैसे भी सिख संस्कृति और गुरुओं के प्रति अगाध श्रद्धा का एक बड़ा केंद्र रही है, और ऐसे में इस पावन भूमि पर ननकाना साहिब के नाम से चौक का स्थापित होना पूरे जिले के लिए एक महान आध्यात्मिक गौरव का विषय बन चुका है।

इस ऐतिहासिक और बड़े धार्मिक निर्णय के बाद से काशीपुर की स्थानीय राजनीति में भी एक बेहद दिलचस्प और गंभीर विमर्श छिड़ गया है, जिसने पुराने स्थापित राजनीतिक नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर कई बड़े और गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय सिख समुदाय के वरिष्ठ जनों, युवाओं और बुद्धिजीवियों का दर्द अब खुलेआम छलक रहा है, और उनका कहना है कि लगभग 25 सालों के एक लंबे और अखंड समय से सिख समाज का निरंतर प्रतिनिधित्व करते हुए जिस विधायक ने सत्ता का सुख भोगा, उसने कभी भी अपने इस पावन समाज की धार्मिक भावनाओं को समझने या उनके सम्मान के लिए धरातल पर ऐसा कोई ठोस प्रयास करने की जहमत तक नहीं उठाई। इतने लंबे समय तक समाज का नेतृत्व करने वालों की घोर उदासीनता के विपरीत, आज महज डेढ़ साल पहले मेयर पद की शपथ लेने वाले दीपक बाली ने जो युगांतरकारी और साहसिक कार्य कर दिखाया है, वह हर एक सिख भाई-बहन के लिए बेहद गौरवपूर्ण, सम्मानजनक और पूरी तरह से अतुलनीय साबित हो रहा है। मेयर के इस पावन और भगीरथ प्रयास ने समाज के भीतर वर्षों से दबी पड़ी उस आध्यात्मिक इच्छा को नया जीवन दे दिया है, जिसकी उम्मीद लोग लगभग छोड़ चुके थे।

इस बेहद हॉट, आकर्षक और ऐतिहासिक शिलांयस की खबर के बाद से पूरे काशीपुर शहर में महापौर दीपक बाली के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने वालों का तांता लगा हुआ है, और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा उनका जोरदार नागरिक अभिनंदन किया जा रहा है। गुरुद्वारों के मुख्य ग्रंथियों, प्रबंधकों और सिख समाज के प्रबुद्ध नेताओं ने संयुक्त रूप से बयान जारी करते हुए कहा है कि दीपक बाली ने न केवल एक चौराहे का नामकरण करवाया है, बल्कि उन्होंने काशीपुर की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की जड़ों को और अधिक मजबूत और अटूट बनाने का एक अत्यंत सराहनीय कार्य किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 5 जून को डिजिटल माध्यम से किए गए इस शिलान्यास के बाद अब धरातल पर निर्माण कार्य को बेहद तेजी से और भव्य स्वरूप में पूरा करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है, ताकि यह चौराहा भविष्य में न केवल एक मार्ग का केंद्र बिंदु रहे, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी गहरी आध्यात्मिक प्रेरणा, शांति और भव्य आकर्षण का एक अत्यंत प्रमुख और ऐतिहासिक स्थल बनकर पूरी दुनिया के सामने उभर सके।

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