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धामी की सियासी दस्तक से पिघली नाराजगी पांडे ने दिया भाजपा एकजुटता का संदेश

2027 की चुनावी रणभेरी से पहले भाजपा में चला मेल-मिलाप का महाअभियान, गदरपुर में धामी-पांडे की बंद कमरे की मुलाकात ने सियासी अटकलों को दी नई उड़ान, बगावती सुरों की नरमी ने बदले राजनीतिक समीकरण।

गदरपुर। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बिसात बिछाई जाने लगी है। इसी बीच सूबे की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के भीतर मचे अंतर्विरोध और अपनों की ही नाराजगी को दूर करने के लिए शीर्ष नेतृत्व ने अब पूरी ताकत झोंक दी है। इसी कड़ी में बीते दिन यानी 13 जून को प्रदेश की राजनीति में उस वक्त एक बड़ा भूचाल आ गया, जब सूबे के मुखिया मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अचानक उधमसिंह नगर जिले के गदरपुर क्षेत्र में पहुंचे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह दौरा सामान्य प्रशासनिक नहीं बल्कि विशुद्ध रूप से राजनीतिक मायनों से लबरेज था, क्योंकि वह सीधे भाजपा के सबसे मुखर और बागी तेवरों के लिए जाने जाने वाले विधायक अरविंद पांडे के निजी आवास पर दस्तक देने पहुंचे थे। इस हाई-प्रोफाइल आगमन ने न सिर्फ स्थानीय नेताओं को चौंकाया, बल्कि राजधानी देहरादून से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी।

इस अप्रत्याशित और बेहद संवेदनशील मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वरिष्ठ भाजपा विधायक अरविंद पांडे के बीच बंद कमरे में लगभग 45 मिनट तक गहन मंत्रणा हुई, जिसने राज्य की राजनीति के भविष्य के संकेत दे दिए हैं। बंद कमरे की इस गोपनीय गुफ्तगू के दौरान क्या खिचड़ी पकी, इसका आधिकारिक ब्योरा तो बाहर नहीं आया, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि इसमें सरकार और संगठन के बीच की दूरियों को पाटने पर गंभीर मंथन हुआ। पिछले लंबे समय से अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल दागकर सुर्खियां बटोरने वाले अरविंद पांडे के तेवर इस मैराथन बैठक के खत्म होते ही अचानक बदले-बदले नजर आने लगे। जो नेता कल तक अपनी ही पार्टी के लिए सिरदर्द बना हुआ था, उसके सुरों में आई यह अचानक नरमी इस बात का पुख्ता सबूत है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी राजनैतिक कुशलता और डैमेज कंट्रोल की नीति में पूरी तरह सफल रहे हैं।

अगर इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर नजर डालें, तो विधायक अरविंद पांडे पिछले काफी समय से अपनी ही सरकार और पार्टी संगठन के खिलाफ बेहद आक्रामक और मुखर रुख अख्तियार किए हुए थे। उनकी यह नाराजगी उस समय सार्वजनिक रूप से जगजाहिर हो गई थी, जब देहरादून में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भव्य कार्यक्रम के दौरान वह मंच या अगली कतारों में बैठने के बजाय जानबूझकर अन्य विधायकों के साथ पीछे की सीटों पर जाकर बैठ गए थे। अरविंद पांडे का यह मौन विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया की सुर्खियों में छा गया था, जिसने भाजपा आलाकमान को असहज कर दिया था। इसके तुरंत बाद ही सोशल मीडिया पर विधायक अरविंद पांडे के हस्ताक्षर वाला एक कथित पत्र वायरल हो गया, जो सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित था और जिसमें सरकार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिसने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था।

इस वायरल पत्र ने जैसे ही उत्तराखंड के सियासी गलियारों का तापमान बढ़ाया, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे हाथों-हाथ लिया और सरकार को चौतरफा घेरने की व्यूह रचना शुरू कर दी। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस संवेदनशील मुद्दे को लपकते हुए आनन-फानन में एक बड़ी प्रेस वार्ता बुलाई और भाजपा सरकार के भीतर चल रही जंग को जनता के सामने उजागर करने का पुरजोर प्रयास किया। गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया था कि जब सत्ताधारी दल के अपने ही वरिष्ठ विधायक सुरक्षित और संतुष्ट नहीं हैं, तो आम जनता का भला कैसे हो सकता है। हालांकि, चौतरफा घिरने के बाद खुद विधायक अरविंद पांडे ने सामने आकर उस विवादित पत्र को पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत करार दिया था। उन्होंने बकायदा बयान जारी कर कहा था कि कांग्रेस पार्टी उनकी और भारतीय जनता पार्टी की छवि को धूमिल करने के लिए इस तरह की घटिया और ओछी साजिशें रच रही है।

इसके बावजूद भाजपा संगठन ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए डैमेज कंट्रोल की कवायद को और तेज कर दिया, जिसके बाद पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने गदरपुर की ओर रुख करना शुरू कर दिया। हाल के दिनों में भाजपा के कद्दावर सांसद अनिल बलूनी, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और वर्तमान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट जैसी भारी-भरकम शख्सियतों ने एक-एक कर अरविंद पांडे के घर जाकर उनसे मुलाकात की थी। इन कद्दावर नेताओं की मान-मनौव्वल की कोशिशों के बाद अब खुद राज्य के कप्तान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गदरपुर में अरविंद पांडे के घर पहुंचना यह साफ करता है कि मामला कितना गंभीर था। हालांकि, इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुलाकात के ठीक बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया के तीखे सवालों से पूरी तरह दूरी बनाए रखी और इस बंद कमरे की बातचीत को लेकर कैमरे के सामने कोई भी टिप्पणी करने से साफ तौर पर परहेज किया।

वहीं दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की रवानगी के बाद मीडिया से मुखातिब हुए विधायक अरविंद पांडे के सुर और हाव-भाव पूरी तरह से बदले हुए और सकारात्मक नजर आ रहे थे। उन्होंने इस बेहद महत्वपूर्ण राजनैतिक दौरे को पूरी तरह से एक पारिवारिक और निजी कार्यक्रम बताते हुए नया मोड़ देने की कोशिश की और कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी केवल उनके घर पर जन्मे जुड़वा पौत्र और पौत्री को अपना स्नेहिल आशीर्वाद देने आए थे। अरविंद पांडे ने परिपक्वता दिखाते हुए आगे कहा कि लोकतांत्रिक राजनीति में विचारों के मतभेद होना एक आम बात है, लेकिन अंततः हम सभी भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे अनुशासित संगठन के समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता हैं। उन्होंने बेहद सधे हुए शब्दों में कहा कि हम सभी नेता और कार्यकर्ता इस संगठन की अमूल्य संपत्ति हैं और हमारा अंतिम लक्ष्य प्रदेश तथा देवभूमि की जनता के कल्याण के लिए मिलकर काम करना है।

अपने बदले हुए सुरों को और मजबूती देते हुए गदरपुर के विधायक अरविंद पांडे ने आगामी चुनावी समर को लेकर अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई और पार्टी के भीतर एकजुटता का बड़ा संदेश दिया। उन्होंने खुले दिल से घोषणा की कि वर्ष 2027 में होने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को एक बार फिर से प्रचंड और ऐतिहासिक बहुमत के साथ सत्ता में वापस लाने के लिए सभी कार्यकर्ता मतभेद भुलाकर एक जाजम पर काम करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की यह गदरपुर यात्रा महज एक अनौपचारिक या पारिवारिक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि आगामी चुनावी महासंग्राम को देखते हुए संगठन के भीतर बिखराव को रोकने और एकजुटता प्रदर्शित करने का एक सुनियोजित मास्टरस्ट्रोक था। अब समूचे उत्तराखंड की जनता और राजनीतिक पंडितों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मुलाकात के बाद अरविंद पांडे के बगावती तेवर हमेशा के लिए शांत हो जाएंगे या फिर यह शांति किसी बड़े सियासी तूफान के आने का पूर्व संकेत है।

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