spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडकैंचीधाम में सिपाहियों पर छेड़खानी का आरोप भड़का जनाक्रोश मेले से पहले...

कैंचीधाम में सिपाहियों पर छेड़खानी का आरोप भड़का जनाक्रोश मेले से पहले बवाल

स्थापना दिवस से ठीक पहले खाकी पर लगे गंभीर आरोपों ने श्रद्धालुओं, व्यापारियों और स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़का दिया। उग्र प्रदर्शन, चौकी घेराव और यातायात अव्यवस्था के बीच पुलिस प्रशासन कठघरे में खड़ा नजर आया।

नैनीताल। स्थापना दिवस जैसे बड़े आयोजन से ठीक पहले सामने आई इस घटना ने कैंचीधाम में पुलिस और जनता के बीच दूरी बढ़ा दी है, जिसने पूरी देवभूमि को झकझोर कर रख दिया है। आस्था और अध्यात्म के विश्व विख्यात केंद्र नैनीताल के पावन कैंचीधाम में सालाना उत्सव की तैयारियों के बीच एक ऐसा शर्मनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने खाकी को पूरी तरह दागदार कर दिया है। मेले की सुरक्षा और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए दूर-दराज से बुलाकर तैनात किए गए पुलिस के दो सिपाहियों पर ही एक स्थानीय होमस्टे संचालक की मासूम बेटी के साथ कथित तौर पर अश्लील हरकत और छेड़खानी करने का अत्यंत गंभीर आरोप लगा है। इस घिनौनी वारदात की भनक जैसे ही आसपास के पहाड़ी इलाके में फैली, वैसे ही शांत रहने वाले स्थानीय निवासियों का खून खौल उठा और समूचा क्षेत्र देखते ही देखते कुरुक्षेत्र के मैदान में तब्दील हो गया। अपनी मर्यादा खो चुके दोनों आरोपित सिपाहियों को उग्र जनता ने रंगे हाथों दबोच लिया और कानून हाथ में लेते हुए उनकी बीच सड़क पर लात-घूसों और थप्पड़ों से जमकर खातिरदारी कर डाली, जिसके बाद पूरी घाटी में तनाव का माहौल व्याप्त हो गया।

इस बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद आगामी 15 जून को आयोजित होने वाले ऐतिहासिक कैंचीधाम स्थापना दिवस मेले की भव्यता और पवित्रता पर अचानक काले बादलों का साया मंडराने लगा है। बाबा नीब करौरी महाराज के इस पावन धाम में जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं का रेला उमड़ने की उम्मीद जताई जा रही थी, वहां ऐन वक्त पर सुरक्षाकर्मियों की इस घटिया करतूत ने पूरे माहौल में जहर घोलने का काम किया है। पीड़ित युवती के चीखने-चिल्लाने पर जब स्थानीय लोग और आस-पास के व्यापारी मौके पर एकत्र हुए, तो उन्होंने दोनों रक्षकों को भक्षक के रूप में पाया, जिससे जनता का सब्र का बांध पूरी तरह टूट गया। उग्र भीड़ ने दोनों पुलिसकर्मियों को बंधक जैसी स्थिति में ले लिया और उनकी जमकर पिटाई करने के बाद घसीटते हुए स्थानीय पुलिस चौकी तक ले आए, जहां उन्होंने आरोपितों के खिलाफ तत्काल निलंबन और जेल भेजने की मांग को लेकर भारी हंगामा शुरू कर दिया।

गुस्साई जनता और आक्रोशित व्यापारियों ने न केवल आरोपित सिपाहियों की पिटाई की, बल्कि स्थानीय पुलिस चौकी का चारों तरफ से घेराव करते हुए उत्तराखंड पुलिस प्रशासन के खिलाफ गगनभेदी नारेबाजी और उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस बवाल के कारण कैंचीधाम बाजार और आसपास के संवेदनशील रास्तों पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया और हर तरफ भारी अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया। स्थानीय लोगों का गुस्सा सिर्फ इस शर्मनाक छेड़खानी की घटना तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि पिछले कुछ दिनों से पुलिस प्रशासन द्वारा कैंचीधाम क्षेत्र और पूरे नैनीताल जिले की सीमाओं पर लागू की गई दमनकारी यातायात व्यवस्था को लेकर भी उनका लावा फूट पड़ा। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि आस्था के इस पावन पर्व के नाम पर पुलिस ने स्थापना दिवस से तीन दिन पहले ही पूरे इलाके में अघोषित कर्फ्यू जैसा दमघोटू माहौल बना दिया है, जिससे न केवल आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है बल्कि स्थानीय व्यापार भी पूरी तरह चौपट होने की कगार पर पहुंच गया है।

व्यापारियों और ग्रामीणों ने बेहद तीखे लहजे में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन ने मेले के बहाने तीन दिन पहले ही जगह-जगह लोहे की भारी-भरकम बैरिकेटिंग खड़ी कर दी है और हर तरह के वाहनों के आवागमन को तानाशाही पूर्ण तरीके से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कैंचीधाम के इतिहास में आज से पहले कभी भी इस तरह की दमनकारी और दंडात्मक व्यवस्था देखने को नहीं मिली थी, जहां अपने ही घरों को जाने वाले लोगों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को इस तरह बेरहमी से रोका गया हो। इस मनमाने और अव्यवहारिक नियम-कायदों के लागू होने के कारण बाहर से आने वाले भोले-भाले श्रद्धालुओं, देश-विदेश के पर्यटकों और स्थानीय छोटे-बड़े दुकानदारों को भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस द्वारा सुरक्षा के नाम पर आम जनता को परेशान करने की इस नीति के खिलाफ लोगों का गुस्सा लंबे समय से सुलग रहा था, जिसे इस छेड़खानी कांड ने बारूद की तरह भड़काने का काम किया।

कैंचीधाम जैसे अति-संवेदनशील और देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक में लाखों श्रद्धालुओं के संभावित आगमन से ठीक पहले हुए इस भयंकर बवाल और कानून-व्यवस्था के संकट ने समूचे पुलिस महकमे और खूफिया तंत्र की कार्यप्रणाली पर बहुत बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। मामले की संवेदनशीलता और जनता के भारी जनाक्रोश को देखते हुए नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यानी एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने तत्काल इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की है और स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए खुद कमान संभाल ली है। एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने पूरे मामले की गंभीरता को भांपते हुए बिना किसी देरी के इस पूरे छेड़खानी कांड की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच के सख्त लिखित आदेश जारी कर दिए हैं। पुलिस कप्तान ने बेहद कड़े शब्दों में मीडिया और जनता को आश्वस्त करते हुए साफ कहा है कि यदि जांच में दोनों सिपाहियों पर लगे आरोप रत्ती भर भी सच पाए जाते हैं, तो खाकी की साख खराब करने वाले इन दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय बर्खास्तगी और कठोरतम कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

संबंधित ख़बरें
स्वच्छ, सुंदर और विकसित काशीपुर के संकल्प संग गणतंत्र दिवस

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!