रामनगर। पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सैन्य अनुशासन और सांस्कृतिक उमंग का एक अनूठा संगम उस वक्त देखने को मिला, जब 79 यूके बटालियन एनसीसी सब यूनिट द्वारा सीनियर कैडेट्स के लिए एक भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस गौरवमयी कार्यक्रम का औपचारिक आगाज मुख्य अतिथि और महाविद्यालय के यशस्वी प्राचार्य प्रो.एम.सी.पाण्डे ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया, जिसके बाद पूरा परिसर देशभक्ति के नारों और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अपने संबोधन में प्राचार्य ने निवर्तमान कैडेट्स के तीन वर्षों के शानदार सफर की जमकर प्रशंसा की और उनके द्वारा एनसीसी की विभिन्न गतिविधियों सहित महाविद्यालय के हर छोटे-बड़े आयोजनों में दी गई सक्रिय भागीदारी को अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि एनसीसी केवल एक प्रशिक्षण नहीं बल्कि जीवन जीने की एक कला है, जिसे इन कैडेट्स ने बखूबी आत्मसात किया है। स्वागत भाषण की कमान कारपोरल आकाश रावत ने संभाली, जिन्होंने अपने शब्दों से अतिथियों का अभिनंदन किया और विदा हो रहे साथियों की यादों को ताजा किया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित चीफ प्रॉक्टर प्रो.एस.एस.मौर्या ने सीनियर कैडेट्स के जज्बे को सलाम करते हुए उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का मंत्र दिया और उनके उज्ज्वल एवं सफल जीवन की मंगलकामना की। विदाई की इस बेला को यादगार बनाने के लिए कैडेट्स ने एक से बढ़कर एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। कैडेट निकिता के ओजपूर्ण एकल नृत्य ने जहाँ समां बांध दिया, वहीं एस डब्ल्यू ग्रुप में अक्षिता, खुश्बू जीना, प्राची, ईशा, भूमिका और शीतल ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। दूसरी ओर, एसडी ग्रुप के जांबाज कैडेट्स अमित चौहान, राघव राज, आर्यन, कुलदीप और मनोज ने बॉलीवुड और पंजाबी गानों के शानदार मेसअप के साथ-साथ उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति पर आधारित सामूहिक नृत्य पेश कर देवभूमि की सोंधी खुशबू बिखेर दी। इन प्रस्तुतियों ने विदाई के गमगीन माहौल को उत्सव के उल्लास में बदल दिया और एकता एवं अनुशासन का एक जीवंत उदाहरण पेश किया।
सम्मान की कड़ी में मुख्य अतिथि प्रो.एम.सी.पाण्डे और विशिष्ट अतिथि प्रो.एस.एस.मौर्या ने समस्त सीनियर कैडेट्स को उनकी कर्तव्यनिष्ठा के लिए स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। 79 बटालियन के एएनओ लेफ्टिनेंट (डॉ.) देवकीनन्दन जोशी ने साल 2023-26 बैच के कैडेट्स की ईमानदारी और विभिन्न शिविरों में उनके द्वारा किए गए उत्कृष्ट प्रदर्शन की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने गर्व के साथ उल्लेख किया कि इन कैडेट्स ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाकर महाविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। डॉ. जोशी के अनुसार, इन युवाओं ने एनसीसी के मूल मंत्र ‘एकता और अनुशासन’ को अपने चरित्र में ढाल लिया है, जो भविष्य में उन्हें देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनाने में सहायक सिद्ध होगा। इस भावुक विदाई समारोह ने हर कैडेट की आंखों को नम कर दिया, लेकिन साथ ही उनके सीने में देश सेवा का एक नया जुनून भी भर दिया।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकों और गणमान्य हस्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। समारोह में प्रो.जे.एस.नेगी, प्रो.अनीता जोशी, डॉ.प्रमोद जोशी, डॉ.सुमन कुमार, डॉ.सिराज अहमद, लोतिका अमित, डॉ.नीमा राणा, डॉ.अनुराग श्रीवास्तव, डॉ.गुरप्रीत सिंह और डॉ.प्रकाश चन्द्र पालीवाल जैसे विद्वानों ने शिरकत कर कैडेट्स का उत्साहवर्धन किया। इसके साथ ही सीनियर अन्डर ऑफिसर विक्रम जलाल, पारूल, अन्डर ऑफिसर यशवन्त रावत, गुंजन डांगी और मुस्कान बिष्ट समेत बड़ी संख्या में जूनियर कैडेट्स भी अपने सीनियर साथियों को विदा करने के लिए मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम का कुशल और प्रभावी मंच संचालन कैडेट वैष्णवी और हर्षिता नैनवाल ने संयुक्त रूप से किया, जिन्होंने अपनी वाकपटुता से कार्यक्रम के प्रवाह को अंत तक बनाए रखा।
अंततः, यह विदाई समारोह केवल एक औपचारिक विदाई न रहकर पीएनजी महाविद्यालय के इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। एनसीसी की इस सब यूनिट ने साबित कर दिया कि वर्दी का सम्मान और टीम भावना किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है। विदा हो रहे कैडेट्स ने भरे मन से अपने कनिष्ठ साथियों को एनसीसी की मशाल सौंपी और महाविद्यालय के अनुशासन को सदैव बनाए रखने का संकल्प लिया। प्राचार्य और समस्त स्टाफ ने एक स्वर में यह विश्वास जताया कि यहाँ से प्रशिक्षित होकर निकलने वाले ये युवा देश के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सफलता का परचम लहराएंगे और अपने संस्थान का नाम रोशन करेंगे। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाया, जिससे पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत हो गया और विदाई की यह शाम एक सुखद अहसास के साथ संपन्न हुई।





