रामनगर। पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के परिसर में ज्ञान और शोध की एक नई इबारत लिखी गई। महाविद्यालय के भूगोल विभाग के विख्यात एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.सिराज अहमद द्वारा रचित महत्वपूर्ण पुस्तक ‘नगरीय भूगोल’ का भव्य विमोचन समारोह आयोजित किया गया, जिसने कुमाऊं के बौद्धिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। इस गरिमामय अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.एम.सी.पाण्डे ने अपने कर-कमलों से पुस्तक का अनावरण किया और इसे वर्तमान दौर के बढ़ते शहरीकरण को समझने के लिए एक मील का पत्थर करार दिया। विमोचन के दौरान महाविद्यालय का वातावरण हर्ष और उल्लास से भर गया, जहाँ शिक्षाविदों ने एक स्वर में इस बात पर जोर दिया कि शैक्षणिक शोध और लेखन ही किसी भी संस्थान की वास्तविक पूंजी होती है। डॉ.सिराज अहमद की इस विशेष उपलब्धि ने न केवल रामनगर बल्कि पूरे उत्तराखंड के शिक्षा जगत को गौरवान्वित किया है, जिससे आने वाले समय में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नगरीय विकास की जटिलताओं को समझने में अभूतपूर्व सहायता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस ऐतिहासिक विमोचन कार्यक्रम के उपरांत प्राचार्य प्रो.एम.सी.पाण्डे ने डॉ.सिराज अहमद के अथक प्रयासों की जमकर सराहना की और उन्हें इस उत्कृष्ट साहित्यिक एवं वैज्ञानिक कार्य के लिए हार्दिक बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं प्रेषित कीं। प्राचार्य के साथ-साथ महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकों, विद्वानों और शिक्षणेत्तर कार्मिकों ने भी डॉ.सिराज अहमद को उनकी इस अकादमिक सफलता पर फूल-मालाओं और बधाई संदेशों से सराबोर कर दिया। महाविद्यालय परिवार के भीतर यह साझा खुशी का विषय बन गया है कि उनके बीच का एक समर्पित शिक्षक अंतरराष्ट्रीय स्तर के ज्वलंत मुद्दों पर अपनी कलम चला रहा है। सभी सहयोगियों ने एक मत से माना कि इस प्रकार के शोध कार्य न केवल लेखक के व्यक्तिगत कद को बढ़ाते हैं, बल्कि संस्थान की साख को भी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती प्रदान करते हैं। बधाई देने वालों का ताँता लगा रहा, जिसमें हर किसी ने डॉ.सिराज अहमद की लेखन शैली और विषयों की गहराई में जाकर सूक्ष्म विश्लेषण करने की क्षमता की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
अपनी इस विशेष कृति के बारे में विस्तार से जानकारी साझा करते हुए भूगोल विभाग के कर्मठ प्रभारी डॉ.सिराज अहमद ने बताया कि ‘नगरीय भूगोल’ नामक यह पुस्तक डी.एस.बी. परिसर, कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के भूगोल विभाग के प्रतिष्ठित एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.मोहन लाल के कुशल और अनुभवी संयोजन में पूर्ण की गई है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि इस पुस्तक को तैयार करने में डॉ.मोहन लाल का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, जिससे विषयवस्तु को एक व्यापक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण मिल सका है। इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें आधुनिक नगरीय विकास के विभिन्न सूक्ष्म और वृहद आयामों पर अत्यंत विस्तार और बारीकी के साथ चर्चा की गई है। डॉ.सिराज अहमद के अनुसार, यह पुस्तक केवल सिद्धांतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वर्तमान समय में तेजी से बदलते शहरों के ढांचे और उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव का एक जीवंत दस्तावेज है, जिसे कुमाऊं विश्वविद्यालय के उच्च शैक्षणिक मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
लेखकद्वय डॉ.सिराज अहमद और डॉ.मोहन लाल ने इस पुस्तक के माध्यम से नगरीय जीवन के उन अनछुए पहलुओं को भी उजागर किया है, जो अक्सर विकास की चकाचौंध में पीछे छूट जाते हैं। पुस्तक के पन्नों में नगरीय विकास की वर्तमान समस्याओं और भविष्य की भीषण चुनौतियों को न केवल सम्मिलित किया गया है, बल्कि उनके वैज्ञानिक और व्यवहारिक निवारण के मार्ग भी सुझाए गए हैं। बढ़ती आबादी, सिमटते संसाधन, प्रदूषण और अनियंत्रित निर्माण जैसे गंभीर विषयों पर लेखकों ने अपनी पैनी दृष्टि डाली है और प्रशासन से लेकर आम नागरिकों तक के लिए समाधान प्रस्तुत किए हैं। डॉ.सिराज अहमद ने विश्वास जताया कि यह पुस्तक नगरीय भूगोल के विद्यार्थियों के लिए एक अनिवार्य संदर्भ ग्रंथ साबित होगी और नीति निर्धारकों को भी शहरी नियोजन की दिशा में बेहतर निर्णय लेने के लिए प्रेरित करेगी। समस्याओं के साथ-साथ उनके समाधान को भी शामिल करना इस पुस्तक को अन्य समकालीन पुस्तकों से अलग और अधिक उपयोगी बनाता है, जो इसकी सबसे बड़ी यूएसपी (USP) बनकर उभरी है।
रामनगर के पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हुआ यह पुस्तक विमोचन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कुमाऊं के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी उच्च स्तर का शोध कार्य अपनी पूरी सक्रियता के साथ जारी है। डॉ.सिराज अहमद की यह सफलता उन युवा शोधार्थियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो भूगोल और समाज विज्ञान के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। समारोह के समापन पर प्राचार्य प्रो.एम.सी.पाण्डे ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक इसी प्रकार के उच्च कोटि के लेखन कार्यों में संलग्न रहेंगे, जिससे ज्ञान का प्रकाश सतत फैलता रहे। इस कार्यक्रम ने महाविद्यालय की अकादमिक ऊर्जा को एक नई दिशा दी है, जहाँ अब ‘नगरीय भूगोल’ के सिद्धांतों पर नई बहस और शोध की संभावनाओं ने जन्म ले लिया है। कुल मिलाकर, डॉ.सिराज अहमद और डॉ.मोहन लाल की यह संयुक्त कोशिश शिक्षा के क्षेत्र में एक नई ज्योति जलाने में सफल रही है, जिसकी धमक पूरे प्रदेश के बौद्धिक गलियारों में साफ़ सुनाई दे रही है।





