काशीपुर। नगर में स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से नुक्कड़ नाटक मंडली के लोक कलाकारों ने लगातार दूसरे दिन भी सड़कों, गलियों और वार्डों में घूम-घूमकर अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से आम नागरिकों को साफ-सफाई का संदेश दिया। जैसे ही कलाकारों की टोली किसी क्षेत्र में पहुंची, वहां लोगों की भीड़ स्वतः उमड़ पड़ी। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, महिलाओं से लेकर युवाओं तक सभी वर्गों ने बड़े ध्यान से नुक्कड़ नाटक को देखा और कलाकारों की भावनात्मक अपील को गंभीरता से सुना। लोक कलाकारों ने अपने अभिनय, संवाद और गीतों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया कि स्वच्छ शहर केवल नगर निगम के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए जनता की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही आवश्यक है। सूखे और गीले कूड़े को अलग-अलग रखने, पॉलीथिन और प्लास्टिक के प्रयोग से बचने तथा कूड़ा केवल कूड़ा गाड़ी में ही डालने जैसे संदेशों को अत्यंत मार्मिक अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया।
सुबह होते ही नुक्कड़ नाटक मंडली की टीम सबसे पहले वार्ड संख्या एक में पहुंची, जहां स्थानीय पार्षद बीना नेगी के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सहायक नगर आयुक्त विनोद शाह, स्वास्थ्य एवं सफाई निरीक्षक मनोज बिष्ट, महापौर प्रतिनिधि चौ समरपाल सिंह, पार्षद मयंक मेहता सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इसके साथ ही स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। सूरज पटवाल, मोहन मिश्रा, माधो सिंह बिष्ट, बीना देवी, जूना देवी, पांडेय, शाकिर, नितेंद्र, विट्टू माटा, राधे श्याम, राजेंद्र रावत, जगमोहन सिंह कंडारी, शोभा बिष्ट, कमल मेहरा, शुर्मिला रावत, गीता बिष्ट, रेखा मिश्रा, अरविंद नेगी, संजय कर्मियाल, प्रकाश खनुलिया, नरेश सती, दयाल काहला, रोहित नेगी, शुभम बिष्ट, प्रकाश चंद्र नेगी जैसे अनेक लोगों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। कलाकारों ने यह स्पष्ट किया कि जब तक प्रत्येक नागरिक स्वयं जागरूक होकर स्वच्छता के नियमों का पालन नहीं करेगा, तब तक किसी भी शहर को साफ रखना संभव नहीं है।

दिन चढ़ने के साथ ही यह स्वच्छता अभियान वार्ड संख्या दो में पहुंचा, जहां सोनू की दुकान के पास नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। यहां भी स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। पार्षद संजय शर्मा, सोनू कुमार सिंह, राजकुमार, कमलेश जोशी, सरिता शर्मा, ममता पांडे, कमल सिंह, डॉक्टर पी के दास, राकेश पड़ोदिया, लालाजी, कैलाश जोशी, हिमांशु राजपूत, जगत रावत सहित कई नागरिकों ने कार्यक्रम को न केवल देखा, बल्कि कलाकारों की बातों से सहमति भी जताई। नाटक के माध्यम से यह बताया गया कि खुले में कूड़ा फेंकने से न केवल शहर की सुंदरता खराब होती है, बल्कि इससे गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। कलाकारों ने हास्य और व्यंग्य के माध्यम से लोगों को यह एहसास कराया कि थोड़ी सी लापरवाही पूरे समाज पर भारी पड़ सकती है।
इसके बाद नुक्कड़ नाटक मंडली ने नगर के अन्य हिस्सों का रुख किया। वार्ड नंबर 35 में स्टेडियम मोड़ पर प्रस्तुत किए गए नुक्कड़ नाटक को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। खेल मैदान के आसपास रहने वाले नागरिकों ने कलाकारों की प्रस्तुति को सराहा और स्वच्छता के संदेश को अपनाने का संकल्प लिया। इसी क्रम में वार्ड नंबर 34 की शिवनगर कॉलोनी में भी नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया, जहां महिलाओं और बच्चों की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। कलाकारों ने यह बताया कि घर से निकलने वाला कचरा यदि सही तरीके से अलग-अलग किया जाए, तो सफाई व्यवस्था कहीं अधिक सुचारु हो सकती है। लोगों ने इस संदेश को गंभीरता से लिया और नगर निगम के साथ सहयोग करने की बात कही।

शाम होते-होते स्वच्छता जागरूकता अभियान वार्ड नंबर 33 में मंडी के पास लगे ट्रांसफार्मर के नजदीक पहुंचा। यहां नुक्कड़ नाटक के दौरान बड़ी संख्या में व्यापारी, ग्राहक और राहगीर इकट्ठा हो गए। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से यह दर्शाया कि बाजार क्षेत्रों में कूड़ा फैलने से न केवल गंदगी बढ़ती है, बल्कि व्यापार पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मंडी क्षेत्र में मौजूद लोगों ने कलाकारों की बातों से सहमति जताई और अपने आसपास सफाई बनाए रखने का संकल्प लिया। इस दौरान यह भी बताया गया कि पॉलीथिन और प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण के लिए घातक है और इससे नालियां जाम होने की समस्या भी उत्पन्न होती है।
पूरे दिन चले इस अभियान में एक बात साफ दिखाई दी कि नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिया गया संदेश लोगों के दिल तक पहुंच रहा है। जहां भी कलाकार पहुंचे, वहां लोगों ने न केवल नाटक देखा, बल्कि सवाल पूछे और अपने अनुभव भी साझा किए। वार्ड पार्षदों ने भी इस पहल में सक्रिय भूमिका निभाई और कार्यक्रमों के आयोजन में भरपूर सहयोग दिया। उनका कहना था कि यदि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम लगातार चलते रहें, तो निश्चित रूप से शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार आएगा। नगर निगम के अधिकारियों ने भी इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि जनसहयोग के बिना किसी भी योजना को सफल बनाना संभव नहीं है।

नुक्कड़ नाटक मंडली के लोक कलाकारों ने यह स्पष्ट कर दिया कि स्वच्छता केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। उनके अभिनय में दर्द भी था, संदेश भी और समाधान भी। उन्होंने लोगों को यह समझाया कि यदि हर व्यक्ति अपने घर, गली और मोहल्ले को साफ रखने का संकल्प ले ले, तो काशीपुर को एक स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ शहर बनने से कोई नहीं रोक सकता। इस दो दिवसीय अभियान ने यह साबित कर दिया कि लोक कला आज भी जनमानस को जागरूक करने का सबसे प्रभावी माध्यम है और सही दिशा में किया गया प्रयास निश्चित रूप से सकारात्मक बदलाव ला सकता है।





