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नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या का विपक्ष पर तीखा प्रहार

विपक्षी गठबंधन की महिला विरोधी सोच का हुआ पर्दाफाश, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने ललकारा कि मातृशक्ति अब संसद और विधानसभा की दहलीज पर देगी करारा जवाब और छीनेगी अपना संवैधानिक हक।

काशीपुर। उत्तराखंड के जनपद उधमसिंह नगर स्थित काशीपुर में भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय में राजनीतिक सरगर्मियां उस वक्त अपने चरम पर पहुंच गईं, जब प्रदेश की सशक्त महिला चेहरा और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विपक्षी खेमे पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम करार देते हुए विपक्षी गठबंधन यानी इंडी अलायंस की जमकर घेराबंदी की। रेखा आर्या ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि जब इस विधेयक पर मतदान की बारी आई, तब एनडीए के तमाम साथियों ने तो अपना संपूर्ण समर्थन पक्ष में दिया, लेकिन विपक्षी गठबंधन ने अपनी दोहरी मानसिकता का परिचय देते हुए इसके विरोध में खड़े होने का काम किया। मंत्री ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि यह पूरा परिदृश्य देश की आधी आबादी ने अपनी आंखों से देखा है और अब विपक्ष का वह असली चेहरा बेनकाब हो चुका है, जो महिलाओं को सिर्फ एक वोट बैंक समझता रहा है। उनके अनुसार, यह विपक्षी दलों की वही पुरानी मानसिकता है जो महिलाओं को नीति निर्माता की भूमिका में नहीं देखना चाहती और नहीं चाहती कि देश की बेटियां विधानसभा या लोकसभा की दहलीज पार कर निर्णय लेने वाली कुर्सियों पर आसीन हों।

प्रेस वार्ता के दौरान कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या का अंदाज काफी आक्रामक और तार्किक नजर आया, जब उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए कहा कि वह आज जिस मुकाम पर हैं, वहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया है और वह किसी आरक्षण के माध्यम से राजनीति के इस शीर्ष पद तक नहीं पहुंची हैं। उन्होंने राजनीति की कड़वी सच्चाई को उजागर करते हुए कहा कि आज के दौर में भी किसी भी राजनीतिक दल के लिए एक महिला को चुनावी मैदान में उतारना और उसे टिकट देना एक बहुत बड़ी चुनौती माना जाता है, जबकि पुरुषों को टिकट देना बेहद सहज और आसान प्रक्रिया मान ली जाती है। रेखा आर्या ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता की सराहना करते हुए कहा कि मोदी जी समाज की इसी पुरातन और संकुचित वैचारिक सोच को जड़ से उखाड़ने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन विपक्ष को इस क्रांतिकारी बदलाव से गहरी चोट पहुंची है। विपक्ष को डर है कि अगर सामान्य पृष्ठभूमि की महिलाएं सदन में पहुंच गईं, तो उनकी वर्षों पुरानी सियासी जमींदारी और उनके परिवारों का वर्चस्व खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने विपक्षी दलों पर कटाक्ष किया कि उनके यहां केवल परिवार की कुछ चुनिंदा महिलाएं ही सदन का चेहरा बनी रहती हैं, जबकि आम कार्यकर्ताओं को वे कभी आगे नहीं आने देना चाहते।

विपक्ष के भीतर व्याप्त अंतर्विरोधों पर प्रहार करते हुए रेखा आर्या ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल कभी नहीं चाहते थे कि महिलाओं के लिए आरक्षण जैसी कोई ठोस व्यवस्था धरातल पर लागू हो पाए। उन्होंने इस बात पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया कि जिस आरक्षण को वर्ष 2029 से प्रभावी होना था और जिसके माध्यम से लोकसभा व विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या में ऐतिहासिक वृद्धि सुनिश्चित की गई थी, उसे बाधित करने के लिए विपक्ष ने हर संभव चाल चली। मंत्री ने तर्क दिया कि यदि परिसीमन की प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ती, तो आज भारत की लगभग 140 करोड़ की विशाल आबादी को एक संतुलित और सटीक नेतृत्व प्राप्त होता, जिसमें महिलाओं की समानुपातिक भागीदारी सुनिश्चित होती। रेखा आर्या ने इसे लोकतंत्र के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताया और कहा कि विपक्षी दलों ने महिला नेतृत्व की राह में कांटे बिछाकर यह सिद्ध कर दिया है कि वे स्त्री शक्ति के उत्थान के घोर विरोधी हैं। उन्होंने इस प्रेस वार्ता के माध्यम से देश और प्रदेश की महिलाओं का आह्वान किया कि वे विपक्ष के इस असली और महिला विरोधी चरित्र को पहचानें, जो उन्हें केवल हाशिए पर रखना चाहता है।

आगामी चुनावों की रणनीतिक तैयारियों का जिक्र करते हुए कैबिनेट मंत्री ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि आने वाला समय यानी वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव विपक्षी दलों के लिए राजनीतिक अंत का कारण बनेंगे। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राज्य और केंद्र स्तर पर महिला आरक्षण का विरोध किया है, अब देश की मातृशक्ति उन्हें सदन से बाहर रखने का संकल्प लेगी। रेखा आर्या ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी जिस तरह से विकास और महिला सशक्तिकरण का विरोध कर रही है, वह दिन दूर नहीं जब यह दल पूरी तरह से राजनीतिक मानचित्र से विलोपित हो जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो दल महिला विरोधी विचारधारा को पोषण देते हैं, उन्हें भविष्य में लोकसभा या विधानसभा की चौखट तक पहुंचने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि महिलाएं अब केवल मतदाता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक निर्णायक शक्ति और निर्माता के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं और वे उन शक्तियों को करारा जवाब देंगी जिन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के मार्ग में अवरोध उत्पन्न करने का कुत्सित प्रयास किया है।

विपक्ष की ‘मजबूरी की राजनीति’ पर प्रहार करते हुए रेखा आर्या ने कहा कि वर्ष 2023 में जब यह अधिनियम सदन के पटल पर रखा गया था, तब 2024 के आम चुनाव सिर पर थे और इसी चुनावी हार के डर से विपक्षी दलों ने बेमन से इसका समर्थन करने का नाटक किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विपक्ष को वास्तव में इस बिल के प्रावधानों से इतनी ही आपत्ति थी, तो उन्होंने उस समय अपना असली रुख क्यों नहीं दिखाया? असल में, वे नहीं चाहते थे कि जनता के बीच उनकी छवि महिला विरोधी बने, लेकिन जैसे ही चुनाव बीते, उन्होंने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। रेखा आर्या ने तीखे शब्दों में कहा कि विपक्ष ने इस बिल को रोकने के लिए उत्तर भारत बनाम दक्षिण भारत का खेल खेलने की कोशिश की और यहां तक कि धार्मिक आधार पर आरक्षण की मांग उठाकर तुष्टीकरण की राजनीति को हवा दी। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि जब इस ऐतिहासिक सुधार को धरातल पर क्रियान्वित करने का समय आया, तब इन दलों ने अपने हाथ पीछे खींच लिए, जो कि भारतीय संसदीय इतिहास की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में से एक है।

परिसीमन और महिला प्रतिनिधित्व के तकनीकी पहलुओं को समझाते हुए कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया एक व्यवस्थित संवैधानिक ढांचे के तहत होनी थी, जिसके लिए परिसीमन आयोग का गठन किया जाना था। परिसीमन आयोग अपनी विस्तृत रिपोर्ट लोकसभा में प्रस्तुत करता, जहां क्षेत्र विस्तार और सीटों के आवंटन पर खुली चर्चा होती और लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय लिया जाता। लेकिन विपक्ष ने प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही उसकी जड़ें काटने का काम किया है, जिससे उनकी मंशा साफ झलकती है कि वे महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से दूर रखना चाहते हैं। रेखा आर्या ने प्रधानमंत्री मोदी के सेवा काल का लेखा-जोखा पेश करते हुए कहा कि 2014 के बाद से ही केंद्र सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए एक चरणबद्ध अभियान चलाया है। पहले उन्हें लाभार्थी के रूप में उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय, जनधन खाते और सब्सिडी के माध्यम से बुनियादी सुविधाएं प्रदान की गईं, ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके। अब सरकार उन्हें लाभार्थी से ऊपर उठाकर नीति निर्माता बनाने की ओर अग्रसर है, लेकिन विपक्षी दल इस प्रगतिशील सोच के सबसे बड़े दुश्मन बनकर उभरे हैं।

भाजपा की रीति-नीति और एनडीए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मंत्री रेखा आर्या ने अंत में विश्वास व्यक्त किया कि चाहे विपक्षी दल कितनी ही बाधाएं क्यों न उत्पन्न कर लें, भारतीय जनता पार्टी महिलाओं को एक-तिहाई प्रतिनिधित्व देने के अपने संकल्प से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि यह कानून लागू होने के बाद न केवल राष्ट्रीय दलों बल्कि क्षेत्रीय दलों के लिए भी यह अनिवार्य हो जाता कि वे अपनी सीटों का 33 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं के लिए सुरक्षित रखें, जिससे राजनीति में धनबल और बाहुबल का प्रभाव कम होता और योग्यता को स्थान मिलता। उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि वे केवल प्रतीकात्मक राजनीति में विश्वास रखते हैं और डरते हैं कि कहीं सामान्य पृष्ठभूमि की महिलाएं उनकी पार्टी के बड़े नेताओं के वर्चस्व को चुनौती न दे दें। रेखा आर्या ने समापन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सक्षम मार्गदर्शन में यह नारी शक्ति वंदन अधिनियम अंततः अपना वास्तविक और साकार रूप लेगा। आने वाले समय में देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं की गूंज और अधिक सशक्त होगी, जो भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को सिद्ध करेगी।

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