देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की अहम बैठक मंगलवार को सचिवालय में सम्पन्न हुई, जिसने प्रदेश की प्रशासनिक, औद्योगिक, शैक्षणिक और नीतिगत दिशा को लेकर कई महत्वपूर्ण संकेत दिए। सुबह 11 बजे आरंभ हुई यह बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली, जिसमें राज्य के विकास, जनकल्याण और आधारभूत ढांचे से जुड़े कुल आठ प्रस्तावों पर गहन चर्चा के बाद स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक के आरंभ में वातावरण गंभीर और भावुक रहा, जब महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के विमान दुर्घटना में निधन की सूचना पर शोक व्यक्त किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित समस्त मंत्रिमंडल सदस्यों ने इस दुखद घटना पर गहरी संवेदना प्रकट करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। इसके बाद कार्यसूची के अनुसार बैठक आगे बढ़ी, जिसमें विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ और राज्यहित में निर्णय लिए गए।
बैठक के दौरान सबसे पहले चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसके अंतर्गत स्वास्थ्य कार्यकर्ता और स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सेवा नियमावली 2026 को स्वीकृति प्रदान की गई। इस निर्णय को राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि इससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी। नई नियमावली के लागू होने से स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों की सेवा शर्तों में स्पष्टता आएगी, जिससे उनकी कार्यक्षमता और जवाबदेही में वृद्धि होने की संभावना है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह कदम अहम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि सुव्यवस्थित नियमों के तहत कार्यरत स्वास्थ्यकर्मी आम जनता को बेहतर सेवाएं दे पाएंगे, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, प्राथमिक उपचार और रोग नियंत्रण जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
राजस्व विभाग से संबंधित एक अन्य बड़े फैसले के तहत उत्तराखंड राज्य में परियोजनाओं के लिए भूमि की प्रति किए जाने की प्रक्रिया को लेकर आपसी समझौते के आधार पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। इस निर्णय के माध्यम से भूमि मालिकों और परियोजना एजेंसियों के बीच पारदर्शिता और सहमति को प्राथमिकता दी गई है, ताकि विकास कार्यों में अनावश्यक विवादों से बचा जा सके। सरकार का उद्देश्य है कि अधोसंरचना, औद्योगिक और सार्वजनिक हित की परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया सरल, समयबद्ध और विवादरहित हो। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और विकास कार्यों की गति तेज होगी। मंत्रिमंडल के इस निर्णय को प्रदेश में संतुलित विकास और भूमि स्वामियों के अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
औद्योगिक विकास को रफ्तार देने की दिशा में उधम सिंह नगर स्थित प्राग फॉर्म की 1354.14 एकड़ भूमि से जुड़े शासनादेश में संशोधन को भी मंत्रिमंडल ने हरी झंडी दी। इस संशोधन के तहत उक्त भूमि को औद्योगिक आस्थान के रूप में विकसित किए जाने के लिए सिडकुल को ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को और स्पष्ट किया गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से राज्य में नए उद्योग स्थापित होंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। उधम सिंह नगर पहले से ही औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिला माना जाता है और इस नई पहल से क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। निवेश को आकर्षित करने के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकास और औद्योगिक नीति को सुदृढ़ बनाने की दिशा में यह फैसला निर्णायक साबित हो सकता है।
जनजाति कल्याण विभाग से जुड़े प्रस्तावों पर भी मंत्रिमंडल ने गंभीरता से विचार किया और अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिलों देहरादून, चमोली, उधम सिंह नगर और पिथौरागढ़ में विभागीय योजनाओं के संचालन को और प्रभावी बनाने के लिए विभागीय ढांचे के पुनर्गठन को मंजूरी दी गई। इन जिलों में जनजातीय समुदायों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू करने के उद्देश्य से आवश्यक पदों के सृजन और पुनर्संरचना पर सहमति बनी। सरकार का मानना है कि मजबूत प्रशासनिक ढांचे के माध्यम से योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाया जा सकेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में इससे नई गति आएगी और जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा।
इसी क्रम में उत्तराखंड जनजाति कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (संशोधन) नियमावली, 2025 के प्रख्यापन को भी मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिली। विभागीय ढांचे में संशोधन को लेकर यह निर्णय अधिकारियों की पदोन्नति, नियुक्ति और सेवा शर्तों को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता लाई जाए, जिससे जनजातीय कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित हो सके। इस फैसले से विभागीय अधिकारियों में कार्य के प्रति नई ऊर्जा और जिम्मेदारी की भावना विकसित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड राज्य में गैर कृषिकारी उपयोग के लिए भूजल के निकास पर जल मूल्य और प्रभार की दरें लागू करने का निर्णय भी लिया। यह फैसला जल संरक्षण और सतत विकास की अवधारणा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। औद्योगिक, व्यावसायिक और अन्य गैर कृषि कार्यों में भूजल के अत्यधिक दोहन को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। निर्धारित दरों के लागू होने से जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित होगा और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस नीति से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलेगी।
ऊर्जा के क्षेत्र में नई संभावनाओं को खोलते हुए राज्य मंत्रिमंडल ने हरित हाइड्रोजन उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति 2026 के प्रख्यापन को मंजूरी प्रदान की। इस नीति के माध्यम से राज्य को स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की योजना है। हरित हाइड्रोजन को भविष्य की ऊर्जा के रूप में देखा जा रहा है और इसके उत्पादन से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिलेगी। सरकार का लक्ष्य है कि निवेशकों को आकर्षित कर इस क्षेत्र में नई परियोजनाएं स्थापित की जाएं, जिससे रोजगार सृजन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिले। नीति के लागू होने से उत्तराखंड को ऊर्जा नवाचार के मानचित्र पर एक नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी मंत्रिमंडल ने अहम निर्णय लेते हुए उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2023 में संशोधन को मंजूरी दी है, जिसके तहत जीआरडी उत्तराखंड नाम से एक नए विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ हुआ। सरकार का मानना है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इस कदम से छात्रों को राज्य के भीतर ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर उपलब्ध होंगे। नए विश्वविद्यालय की स्थापना से शैक्षणिक माहौल को मजबूती मिलेगी और शोध, नवाचार तथा कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही क्षेत्रीय विकास में भी शिक्षा संस्थानों की भूमिका को और सशक्त किया जा सकेगा।
अंततः रणनीतिक और नागरिक उड्डयन से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले पर भी मंत्रिमंडल ने सहमति जताई, जिसके तहत गौचर और चिल्यालीसौड़ हवाई पट्टी को भारतीय वायुसेना, रक्षा मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के बीच उच्च स्तरीय बैठकों में बनी सहमति के आधार पर संयुक्त रूप से नागरिक और सैनिक संचालन के लिए एडवांस लैंडिंग ग्राउंड लीज के माध्यम से रक्षा मंत्रालय को ट्रांसफर करने का निर्णय लिया गया। इस कदम से सीमावर्ती और आपदा संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित हवाई संपर्क सुनिश्चित होगा, साथ ही सुरक्षा और आपदा प्रबंधन क्षमताओं में भी वृद्धि होगी। सरकार का मानना है कि इन फैसलों के माध्यम से राज्य की सामरिक और विकासात्मक जरूरतों के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।





