काशीपुर। देवभूमि की पावन धरा काशीपुर के शैक्षिक और सामाजिक गलियारों में इन दिनों एक नई और ओजस्वी किरण फूट रही है, जो न केवल मानवता की सेवा का पर्याय बन गई है, बल्कि अनाथ बच्चों के जीवन में आत्मविश्वास का नया संचार भी कर रही है। गुरुकुल फाउंडेशन ने अपनी दूरगामी सोच और संवेदनशीलता का परिचय देते हुए ‘विशेष बच्चों’ यानी अनाथ बच्चों के लिए एक ऐसी अनोखी और अनुकरणीय योजना का श्रीगणेश किया है, जो समाज की मुख्यधारा से कटे हुए इन मासूमों के लिए उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी। इस महायज्ञ में डी-बाली ग्रुप की विदुषी डायरेक्टर उर्वशी दत्त बाली ने अपनी कर्मठता और संकल्प शक्ति से मुख्य सूत्रधार की भूमिका निभाई है, जिनके अथक प्रयासों के बिना इस सपने का धरातल पर उतरना असंभव प्रतीत होता था। उनका यह जुनून और समर्पण ही है जिसने गुरुकुल के प्रांगण में एक ऐसी नई शुरुआत को जन्म दिया है, जहाँ स्नेह और शिक्षा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, जो निसंदेह समाज के वंचित वर्ग के लिए एक संजीवनी बूटी के समान सिद्ध होने वाला है।
इस क्रांतिकारी अभियान की रूपरेखा कुछ इस प्रकार तैयार की गई है कि महीने में एक विशेष दिन गुरुकुल स्कूल का द्वार इन अनाथ बच्चों के लिए पूरी आत्मीयता के साथ खोला जाएगा, जहाँ वे केवल अतिथि नहीं बल्कि गुरुकुल परिवार का अभिन्न हिस्सा बनकर अपनी पहचान बनाएंगे। यहाँ आने वाले बच्चे अन्य विद्यार्थियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर विभिन्न शैक्षणिक, मानसिक और रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे, जिससे उनके भीतर दबी हुई झिझक और हीनभावना का समूल नाश होगा और वे समाज के साथ तालमेल बैठाने की कला में निपुण हो सकेंगे। उर्वशी दत्त बाली का यह विजन केवल औपचारिक शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वे चाहती हैं कि इन मासूमों के भीतर वह आत्मविश्वास जागे कि वे भी किसी से कम नहीं हैं और पूरी दुनिया उनके स्वागत के लिए खड़ी है। नियमित रूप से आयोजित होने वाली ये गतिविधियाँ बच्चों के मानसिक क्षितिज को विस्तार देंगी और उन्हें यह अहसास कराएंगी कि पारिवारिक छत्रछाया न होने के बावजूद समाज का एक बड़ा हिस्सा उनकी उन्नति के लिए संकल्पबद्ध है।
कौशल विकास के इस आधुनिक युग में तकनीक और रचनात्मकता की महत्ता को समझते हुए इस कार्यक्रम के केंद्र में कंप्यूटर शिक्षा, ललित कला और पेंटिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों को रखा गया है, ताकि ये बच्चे समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें। स्किल-बेस्ड गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की छिपी हुई प्रतिभाओं को न केवल पहचाना जाएगा, बल्कि उन्हें तराशने के लिए एक सुसज्जित मंच भी प्रदान किया जाएगा, जहाँ उनकी छोटी-छोटी सफलताएं उनके गौरव का आधार बनेंगी। उर्वशी दत्त बाली के इस महान उद्देश्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सहयोग के हाथ आगे बढ़े हैं, जिसमें यूनाइटेड किंगडम की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशन से जुड़े विद्वान स्कॉलर और यश फाउंडेशन इंडिया के प्रोजेक्ट डायरेक्टर तेजस डोगरा की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। तेजस डोगरा के गहन अनुभव और वैश्विक मार्गदर्शन से इस अभियान को एक वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दिशा मिल रही है, जो बच्चों के सर्वांगीण विकास और उनके व्यक्तित्व निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी।
गुरुकुल फाउंडेशन के इस पुनीत कार्य को धरातल पर प्रभावी ढंग से क्रियान्वित करने का दायित्व प्रिंसिपल मीनल वडावर के साथ-साथ डायरेक्टर वसुधा कपूर और नीरज कपूर के कुशल कंधों पर है, जिनके कुशल नेतृत्व में यह पहल क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बनती जा रही है। इन शिक्षाविदों का मानना है कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि एक बच्चे को संवेदनशील इंसान बनाने की प्रक्रिया है, और यही कारण है कि इस पहल का एक विशेष पहलू गुरुकुल के उन नियमित छात्रों के लिए भी लाभप्रद है जो एक संपन्न और सशक्त पारिवारिक परिवेश से आते हैं। जब ये संपन्न घरों के छात्र उन बच्चों से मिलेंगे जिनके पास माता-पिता का साया नहीं है, तो उनमें करुणा, उत्तरदायित्व और सामाजिक बोध की गहरी समझ विकसित होगी, जो उन्हें भविष्य में एक बेहतर नागरिक बनाएगी। इस मिलन से एक ऐसा समरस समाज बनेगा जहाँ सहानुभूति के स्थान पर समानुभूति का भाव होगा और बच्चे एक-दूसरे की परिस्थितियों का सम्मान करना सीखेंगे, जो कि एक सुदृढ़ राष्ट्र निर्माण की पहली और अनिवार्य शर्त है।
उर्वशी दत्त बाली के दिन-रात के कड़े परिश्रम और समर्पण का ही यह सुखद परिणाम है कि आज यह पहल केवल कागजों तक सीमित न रहकर एक जीवंत आंदोलन का रूप ले चुकी है, जो मानवीय मूल्यों और सहयोग की नई परिभाषा लिख रही है। डी-बाली ग्रुप की डायरेक्टर का मानना है कि हर बच्चे के भीतर एक ईश्वर का अंश होता है और उसे केवल सही अवसर और स्नेह की आवश्यकता होती है, और यही कार्य गुरुकुल फाउंडेशन अपने इस अभियान के जरिए कर रहा है। समय-समय पर आयोजित होने वाली स्वस्थ प्रतियोगिताओं से इन बच्चों में उत्साह का संचार होगा और वे जीवन की चुनौतियों से लड़ने का जज्बा सीखेंगे, जो उन्हें एक आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी युवा के रूप में विकसित करेगा। कुल मिलाकर, काशीपुर की यह भूमि आज एक ऐसे परिवर्तन की साक्षी बन रही है जहाँ शिक्षा, सेवा और समर्पण के माध्यम से अनाथ बच्चों के अंधकारमय जीवन में खुशियों का उजाला फैलाया जा रहा है, और यह सार्थक कदम भविष्य में एक सशक्त और समावेशी समाज के निर्माण का आधार बनेगा।





