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विधायक के रसूख और फर्जीवाड़े के तिलिस्म को तोड़ेगा जिलाधिकारी उधमसिंहनगर

विधायक पुत्र के खौफनाक जमीन घोटाले की जिलाधिकारी की विशेष समिति करेगी 15 दिन में महा-पड़ताल जिससे कांप उठे भू-माफिया और सफेदपोशों के अवैध साम्राज्य की नींव अब गरीबों को मिलेगा उनका असली हक और न्याय

रूद्रपुर। उधमसिंहनगर के तहसील बाजपुर से एक ऐसा सनसनीखेज और रोंगटे खड़े कर देने वाला भूमि घोटाला सामने आया है जिसने समूचे प्रशासनिक तंत्र और राजनीतिक गलियारों में एक जबरदस्त भूचाल ला दिया है, जहाँ सत्ता के बेलगाम रसूख और शातिराना फर्जीवाड़े के नापाक गठजोड़ ने एक निर्दोष और गरीब जनजातीय परिवार की रातों की नींद और सुकून पूरी तरह से छीन लिया है। प्राप्त आधिकारिक विवरण के अनुसार, ग्राम सैमलपुरी की मूल निवासी नन्नी देवी (पत्नी स्व० तुला सिंह) और उनके साहस से लबरेज पुत्र संजू कुमार मंगल सिंह ने जिलाधिकारी कार्यालय की चौखट पर पहुँचकर एक अत्यंत विस्फोटक और चौंकाने वाला शिकायती पत्र प्रस्तुत किया है, जिसने भू-माफियाओं के उस काले साम्राज्य का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है जिसमें नियमों को सूली पर चढ़ाकर करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन को खुर्द-बुर्द करने का घिनौना प्रयास किया गया। इस विस्तृत शिकायत पत्र में कुल पांच प्रमुख बिन्दुओं के माध्यम से यह परत-दर-परत उजागर किया गया है कि किस प्रकार ग्राम सैमलपुरी की सरकारी खतौनी (फसली वर्ष 1413-1418) के खाता संख्या 20 के भीतर आने वाले खसरा नंबर 25/1 (रकबा 1.154 हेक्टेयर) और खसरा नंबर 26 (रकबा 0.379 हेक्टेयर) की वह जमीन, जो वास्तव में वर्ग 1-क के तहत इन असहाय पीड़ितों के नाम पर दर्ज थी, उसे बेहद शातिराना और आपराधिक तरीके से उनसे छीनने का एक गहरा कुचक्र रचा गया।

राजस्व विभाग के पवित्र अभिलेखों के साथ की गई इस महा-धोखाधड़ी की काली दास्तां साल 2010-11 के उस दौर में अपनी जड़ें जमाती है जब राजस्व वाद संख्या 22/3 (धारा 229बी ज०वि० एवं भू०सू०अधि०) के आवरण में एक सुनियोजित और डरावने षड्यंत्र के तहत ग्राम सैमलपुरी की कुल 1.274 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि को अतुल कुमार (पुत्र अरविन्द कुमार, निवासी गुलजारपुर) के नाम पर फर्जी दस्तावेजों और कूटरचित साक्ष्यों के आधार पर वर्ग 1-क में दर्ज करवा दिया गया। इस पूरे मामले का सबसे ज्यादा दहला देने वाला और कानून की धज्जियां उड़ाने वाला कड़वा सच यह है कि यह संपूर्ण भूमि बुक्सा अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में आती है, जिसका मालिकाना हक कानूनन किसी भी परिस्थिति में सामान्य जाति के व्यक्ति को हस्तांतरित किया जाना न केवल वर्जित है बल्कि पूरी तरह से गैर-कानूनी और असंभव है, फिर भी सत्ता के दबाव और प्रभाव के दम पर सरकारी कागजों में इस हिमालयी हेरफेर को अंजाम देकर सबको स्तब्ध कर दिया गया। पीड़ित परिवार ने सीधे तौर पर यह संगीन आरोप लगाया है कि इस समूचे गोरखधंधे के पीछे सत्ता की अंधी हनक और रसूखदार राजनीति काम कर रही है, क्योंकि विपक्षी अतुल कुमार के पिता अरविन्द कुमार न केवल क्षेत्र के एक अत्यंत प्रभावशाली और कद्दावर व्यक्ति हैं, बल्कि वे वर्तमान में गदरपुर विधानसभा क्षेत्र के माननीय विधायक भी हैं, जिनके भारी-भरकम प्रभाव के कारण सरकारी तंत्र के नियमों की खुलेआम बलि चढ़ा दी गई।

विवादों के इस सुलगते हुए अग्निपथ पर इन पीड़ितों की मुश्किलें और मानसिक यातनाएं तब और ज्यादा बढ़ गईं जब उन्होंने अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए एक लंबी और थकाऊ कानूनी जंग लड़ी और अंततः माननीय न्यायालय ने उनके पक्ष में एक न्यायोचित और ऐतिहासिक फैसला सुनाया, लेकिन सत्ता के अहंकार में डूबे विपक्षी खेमे ने न्यायालय के उस पवित्र आदेश को भी ठेंगे पर रखकर अपनी दबंगई का प्रदर्शन किया। नन्नी देवी और उनके पुत्र ने रोते हुए यह दर्दनाक आरोप लगाया है कि पूरी मुकदमेबाजी के दौरान उन्हें विपक्षी दल द्वारा निरंतर डराया-धमकाया गया, जान से मारने की धमकियां दी गईं और हर संभव तरीके से चुप कराने की कोशिश की गई, यहाँ तक कि कानूनी रूप से जीत हासिल करने के बावजूद इन बाहुबलियों ने उन्हें अपनी ही पैतृक जमीन की दहलीज पर कदम तक नहीं रखने दिया। आज भी यह पीड़ित परिवार अपनी ही विरासत और जमीन के टुकड़े के लिए दर-दर की ठोकरें खाने और न्याय की भीख मांगने को मजबूर है, जबकि रसूखदार व्यक्तियों द्वारा उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, इसी असहनीय पीड़ा के चलते उन्होंने जिला प्रशासन से इन प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई करने और अपनी पुश्तैनी जमीन को इन गिद्धों के चंगुल से छुड़ाने की मार्मिक अपील की है।

मामले की संवेदनशीलता और इसमें शामिल भारी अनियमितताओं को भांपते हुए, वर्तमान जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने इसे अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता पर लेते हुए एक अत्यंत शक्तिशाली और उच्च स्तरीय विशेष जांच समिति का गठन कर दोषियों की चारों तरफ से घेराबंदी शुरू कर दी है। इस सरकारी आदेश के तहत गठित की गई इस समिति में अपर जिलाधिकारी (वित्त/रा०), उधमसिंहनगर को अध्यक्ष के रूप में कमान सौंपी गई है, जबकि उपजिलाधिकारी बाजपुर को सदस्य सचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है, इसके साथ ही बन्दोबस्त अधिकारी (चकबन्दी) और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को विशेषज्ञ सदस्यों के रूप में इस जांच दल का हिस्सा बनाया गया है ताकि इस भूमि घोटाले की हर एक बारीक परत की पैनी और निष्पक्ष जांच की जा सके। जिलाधिकारी ने अपने कड़े और अडिग तेवर दिखाते हुए इस विशेष जांच दल को यह सख्त निर्देश जारी किया है कि वे पीड़ितों द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में उठाए गए सभी पांचों बिंदुओं की अत्यंत गहराई, सूक्ष्मता और बिना किसी भेदभाव के पड़ताल करें और किसी भी बाहरी या राजनीतिक दबाव में आए बिना मात्र 15 दिनों की निश्चित समय सीमा के भीतर अपनी सुस्पष्ट जांच आख्या, मंतव्य और कानूनी अभिमत जिलाधिकारी कार्यालय के पटल पर रखना सुनिश्चित करें।

प्रशासनिक गलियारों में जिलाधिकारी द्वारा शुरू की गई इस आक्रामक जांच की लहर ने उन तमाम सफेदपोश चेहरों और भ्रष्ट अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए हैं जो अब तक सरकारी तंत्र की आड़ में गरीबों और असहाय जनजातीय समाज की कीमती जमीनों को निगलने का काला कारोबार करते आ रहे थे। जिलाधिकारी कार्यालय उधमसिंहनगर द्वारा जारी पत्र संख्या / आ०अभि/अनु०-तृतीय/ 2026 के माध्यम से इस आदेश की प्रतिलिपि संबंधित अधिकारियों को तत्काल अनुपालन हेतु प्रेषित कर दी गई है और इस त्वरित कार्रवाई ने समूचे जनपद में यह स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार, भू-धोखाधड़ी और किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे के खिलाफ प्रशासन ‘जीरो टॉलरेंस’ की सख्त नीति पर कायम रहेगा। अब तहसील बाजपुर से लेकर राजधानी तक के लोगों की निगाहें उस 15 दिवसीय जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जो आने वाले समय में यह तय करेगी कि क्या नन्नी देवी को उनकी जमीन और सम्मान वापस मिल पाएगा या फिर सत्ता का विराट प्रभाव एक बार फिर न्याय की देवी के रास्ते में दीवार बनकर खड़ा हो जाएगा। हालांकि, जिलाधिकारी के इस निर्भीक और न्यायप्रिय रुख ने यह उम्मीद जगा दी है कि कानून की नजर में कोई भी विधायक या रसूखदार व्यक्ति संविधान से ऊपर नहीं है और इस जघन्य अपराध में शामिल हर एक चेहरे को उनके किए की सजा जरूर भुगतनी होगी।

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