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कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने बोर्ड परीक्षा में सफल छात्र छात्राओं को बधाई देते हुए दी शुभकामनाएं

उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में प्रतिभावान छात्र-छात्राओं की ऐतिहासिक जीत पर कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने दी शानदार बधाई और सुनहरे भविष्य के लिए विद्यार्थियों का बढ़ाया जबरदस्त हौसला।

काशीपुर। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के बहुप्रतीक्षित परिणामों की घोषणा के साथ ही पूरे प्रदेश में हर्षोल्लास का वातावरण व्याप्त हो गया है, जिसे लेकर काशीपुर महानगर की राजनीति में अपनी विशेष सक्रियता और जनसेवा के लिए पहचानी जाने वाली कांग्रेस महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने छात्र-छात्राओं की इस शानदार उपलब्धि पर अपनी गहरी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया है। परीक्षा परिणामों के आंकड़ों पर दृष्टि डालें तो इस वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले विद्यार्थियों ने अपनी मेहनत के दम पर सफलता का नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसमें कुल 92.10 प्रतिशत छात्र सफल घोषित किए गए हैं, जो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की सुदृढ़ता और विद्यार्थियों की एकाग्रता का प्रत्यक्ष प्रमाण बनकर उभरा है। वहीं दूसरी ओर इंटरमीडिएट की कठिन परीक्षा में भी छात्र-छात्राओं ने अपना लोहा मनवाया है और कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 85.11 दर्ज किया गया है, जो चुनौतियों के बावजूद उनकी निरंतरता और शिक्षकों के समर्पण को रेखांकित करता है। इस गौरवमयी अवसर पर कांग्रेस की कद्दावर नेत्री अलका पाल ने न केवल बच्चों को बधाई दी, बल्कि शिक्षा के गिरते स्तर पर चर्चा करने वालों को भी आंकड़ों के माध्यम से करारा जवाब दिया है।

सफलता की इस अद्भुत और ऐतिहासिक गाथा को लेकर काशीपुर में आयोजित एक अनौपचारिक चर्चा के दौरान महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और भौगोलिक रूप से विषम परिस्थितियों वाले राज्य में बच्चों द्वारा 92.10 प्रतिशत और 85.11 प्रतिशत की सफलता दर प्राप्त करना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह उनकी रातों की नींद और कड़ी तपस्या का प्रतिफल है जो आज सुनहरे भविष्य की राह प्रशस्त कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि आज की बेटियां हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं और बोर्ड परीक्षाओं के इन परिणामों ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि उन्हें समान अवसर और उचित वातावरण प्रदान किया जाए तो वे आसमान की ऊंचाइयों को छूने का सामर्थ्य रखती हैं। पाल ने इस उपलब्धि के लिए अभिभावकों के त्याग को भी नमन किया, क्योंकि एक बच्चे की सफलता के पीछे पूरे परिवार का अनुशासन और निरंतर सहयोग छिपा होता है, जो उसे प्रतिकूलताओं से लड़कर आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करता है।

महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने शिक्षा जगत में आए इस सकारात्मक बदलाव का स्वागत करते हुए स्पष्ट किया कि हाईस्कूल में 92.10 फीसदी और इंटर में 85.11 फीसदी का आंकड़ा यह दर्शाता है कि हमारे प्रदेश के युवा न केवल तकनीकी रूप से दक्ष हो रहे हैं, बल्कि वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के लिए भी खुद को पूरी तरह तैयार कर चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी की विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी प्राथमिकता हमेशा से ही शिक्षा का लोकतंत्रीकरण और अंतिम छोर पर खड़े छात्र तक गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन की सामग्री पहुँचाना रहा है, और आज जब परिणाम सामने आए हैं, तो हृदय गर्व से भर उठा है कि उत्तराखंड की प्रतिभा विश्व पटल पर छा जाने के लिए तैयार है। अलका पाल ने जोर देकर कहा कि इन अंकों से केवल एक मार्कशीट नहीं बनती, बल्कि राज्य के विकास की एक नई इबारत लिखी जाती है, जो आने वाले समय में उत्तराखंड को एक बौद्धिक केंद्र के रूप में स्थापित करने का कार्य करेगी।

छात्रों के उत्साहवर्धन की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए अलका पाल ने उन विद्यार्थियों का भी विशेष रूप से ध्यान रखने की अपील की जो किन्हीं कारणों से इस बार अपनी अपेक्षा के अनुरूप अंक प्राप्त नहीं कर सके या जिन्हें असफलता का सामना करना पड़ा है, क्योंकि एक परीक्षा का परिणाम किसी के जीवन की पूरी क्षमता का निर्धारण नहीं कर सकता। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से आग्रह किया कि वे असफल छात्रों को हतोत्साहित करने के बजाय उनका मनोबल बढ़ाएं और उन्हें यह विश्वास दिलाएं कि अगली बार वे और अधिक मजबूती के साथ वापसी कर सकते हैं, क्योंकि जीवन में गिरकर संभलने वाला ही असली बाजीगर कहलाता है। कांग्रेस की जुझारू नेत्री ने यह भी घोषणा की कि वे व्यक्तिगत रूप से और संगठन के माध्यम से मेधावी छात्रों को सम्मानित करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन करेंगी, ताकि आने वाली पीढ़ी को इससे प्रेरणा मिल सके और वे समाज सेवा के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दे सकें।

शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की मजबूती और छात्रवृत्ति जैसे विषयों पर चर्चा करते हुए महानगर अध्यक्ष अलका पाल ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह इस उच्च सफलता दर को देखते हुए उच्च शिक्षा के द्वार सभी के लिए खोल दे और ऐसे प्रावधान करे जिससे किसी भी होनहार बच्चे की पढ़ाई आर्थिक तंगी के कारण बीच में न छूटे। उन्होंने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा कि हाईस्कूल में 92.10 प्रतिशत का रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन यह संकेत है कि अब हमें माध्यमिक स्तर पर और अधिक निवेश करने की आवश्यकता है ताकि इंटरमीडिएट के 85.11 प्रतिशत के आंकड़े को भविष्य में और भी बेहतर बनाया जा सके। अलका पाल का मानना है कि उत्तराखंड की युवा शक्ति ही इस राज्य का असली धन है और इस धन को संवारने की जिम्मेदारी हम सभी की सामूहिक है, चाहे हम किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा से क्यों न जुड़े हों, क्योंकि बच्चों का भविष्य राजनीति से ऊपर है।

काशीपुर की गलियों से लेकर देवभूमि के ऊंचे पर्वतों तक आज शिक्षा की जो अलख जगी है, उसे लेकर अलका पाल ने अत्यंत भावुक शब्दों में अपनी खुशी का इजहार किया और कहा कि जब मैं इन बच्चों के मुस्कुराते चेहरों को देखती हूं, तो मुझे उस स्वर्णिम उत्तराखंड की तस्वीर साफ दिखाई देती है जिसका सपना हमारे पुरखों ने देखा था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महानगर अध्यक्ष के रूप में मेरा यह संकल्प है कि मैं शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा आवाज उठाती रहूंगी, ताकि आने वाले वर्षों में भी हम इसी तरह शानदार परिणामों का उत्सव मना सकें। अलका पाल ने समस्त प्रदेशवासियों, गुरुजनों और सफल अभ्यर्थियों को पुन: बधाई देते हुए उज्ज्वल कल की शुभकामनाएं दीं और छात्रों से आह्वान किया कि वे अपनी इस सफलता को केवल स्वयं तक सीमित न रखें, बल्कि समाज के कल्याण में भी अपनी बुद्धि और कौशल का उपयोग करें।

परीक्षा परिणामों के इस महाकुंभ में जहां आंकड़ों की बाजीगरी ने सबको चौंकाया है, वहीं अलका पाल जैसे जननेताओं का छात्रों के साथ खड़े होना यह विश्वास दिलाता है कि उत्तराखंड की युवा पौध सही दिशा में अग्रसर है और उनकी उपलब्धियां राज्य की प्रगति की धुरी बनेंगी। हाईस्कूल के 92.10 प्रतिशत और इंटरमीडिएट के 85.11 प्रतिशत उत्तीर्ण छात्रों का यह जत्था अब नए सपनों की उड़ान भरने के लिए तैयार है और पूरे प्रदेश की नजरें अब इनके भविष्य के फैसलों पर टिकी हुई हैं। अलका पाल ने अंत में संदेश दिया कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता और आज के इन परिणामों ने यह सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम से किसी भी ऊंचे लक्ष्य को प्राप्त करना संभव है, जिसे लेकर पूरा काशीपुर और उत्तराखंड आज गौरवान्वित महसूस कर रहा है। इस प्रकार उत्तराखंड बोर्ड की 2026 की परीक्षा के परिणामों ने राज्य की शैक्षिक गरिमा में चार चांद लगा दिए हैं और विद्यार्थियों की इस सामूहिक सफलता ने विकास के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं।

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