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काशीपुर के पावन धाम में गूंजे वैदिक मंत्र केंद्र सरकार के स्वर्णिम बारह वर्ष पूरे होने पर महायज्ञ

चैती माता बाल सुंदरी देवी मंदिर में उमड़ा जनसैलाब जहां राष्ट्र सुरक्षा और नव-भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के महासंकल्प के साथ वक्ताओं ने गिने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारह वर्षों के ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय।

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के सफल 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज माता बाल सुंदरी देवी मंदिर में यज्ञ एवं हवन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर चैती माता बाल सुंदरी देवी मंदिर के पवित्र प्रांगण में एक वृहद यज्ञ एवं हवन अनुष्ठान का आयोजीत किया गया। उत्तराखंड के इस प्रसिद्ध और आस्था के प्रमुख केंद्र में आयोजित हुए इस आध्यात्मिक समागम में न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं ने बल्कि कई गणमान्य नागरिकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मंत्रों की गूंज और आहुतियों की सुगंध से पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति और ईश्वरीय चेतना से सराबोर हो उठा, जिसने वहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के भीतर देश सेवा की एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य देश की सीमाओं की सुरक्षा, आंतरिक सुदृढ़ता और जन-जन के जीवन में खुशहाली लाना था, जिसके लिए मां भगवती के चरणों में विशेष प्रार्थनाएं अर्पित की गईं।

पवित्र यज्ञशाला में आसीन विद्वान ब्राह्मणों और प्रकांड वैदिक आचार्यों के सानिध्य में पूर्ण विधि-विधान और शास्त्रों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार पूजा-अर्चना का शुभारंभ किया गया। देववाणी संस्कृत के दिव्य और ओजस्वी वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जब मुख्य यजमानों द्वारा अग्निदेव को आहुतियां प्रदान की जा रही थीं, तब साक्षात ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा ब्रह्मांड इस राष्ट्र कल्याण के महायज्ञ को अपना आशीर्वाद दे रहा हो। इस परम पावन वेला में उपस्थित जनसमूह ने समवेत स्वर में राष्ट्र की अनवरत उन्नति, अभूतपूर्व आर्थिक समृद्धि, आंतरिक व बाह्य सुरक्षा तथा देश के कोने-कोने में रहने वाले समस्त नागरिकों के रोगमुक्त, सुखी और समृद्ध जीवन की मंगलकामना की। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुए इस हवन में डाली गई प्रत्येक समिधा और दी गई प्रत्येक आहुति देश की एकता और अखंडता को और अधिक सुदृढ़ बनाने के संकल्प को प्रदर्शित कर रही थी। उपस्थित जनसमुूह ने मां चौती माता बाल सुंदरी देवी की दिव्य प्रतिमा के समक्ष शीश नवाकर देश को सभी प्रकार की आपदाओं और संकटों से सुरक्षित रखने की पुरजोर मन्नत मांगी।

धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति के पश्चात मंदिर परिसर में ही एक अत्यंत महत्वपूर्ण विचार-विमर्श और परिचर्चा सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने केंद्र सरकार के पिछले एक दशक से अधिक के कार्यकाल की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इस संगोष्ठी के दौरान उपस्थित प्रबुद्धजनों और नागरिकों के बीच केंद्र सरकार द्वारा पिछले १२ वर्षों की लंबी अवधि में क्रियान्वित किए गए विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यों और ऐतिहासिक योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि किस प्रकार देश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गरीब कल्याण की नीतियों को धरातल पर उतारा गया है, जिससे करोड़ों जीवन संवर गए हैं। इसके अतिरिक्त नारी शक्ति के उत्थान के लिए उठाए गए कदमों और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में आई क्रांतिकारी प्रगति को आधुनिक भारत की सबसे बड़ी सफलता के रूप में स्वीकार किया गया। बुनियादी ढांचे के मोर्चे पर हुए अभूतपूर्व बदलावों यानी आधारभूत संरचना के विकास ने देश के विकास की गति को कई गुना बढ़ा दिया है, जिसने वैश्विक स्तर पर भारत की एक नई और सुदृढ़ तस्वीर पेश की है।

देश के इस गौरवमयी बदलाव की गाथा को आगे बढ़ाते हुए परिचर्चा में डिजिटल भारत और आत्मनिर्भर भारत जैसे दूरगामी अभियानों की सफलता को देश की संप्रभुता से जोड़कर देखा गया। तकनीक के इस युग में डिजिटल भारत की क्रांति ने जहां भ्रष्टाचार पर करारी चोट करते हुए सरकारी सेवाओं को सीधे आम जनता के मोबाइल और घर तक पहुंचा दिया है, वहीं आत्मनिर्भर भारत के मंत्र ने देश के विनिर्माण और रक्षा क्षेत्र को एक नई आत्मनिर्भर पहचान प्रदान की है। राष्ट्रहित को सर्वाेपरि रखते हुए पिछले 12 वर्षों में लिए गए कई साहसिक और ऐतिहासिक निर्णयों का जिक्र करते हुए वक्ताओं ने कहा कि इन फैसले ने न केवल आंतरिक सुरक्षा को चाक-चौबंद किया है बल्कि देश की सीमाओं को भी पहले से कहीं अधिक अभेद्य और सुरक्षित बना दिया है। इन युगांतकारी सुधारों और कड़े नीतिगत निर्णयों के कारण आज भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है, जिससे वैश्विक पटल पर देश का मस्तक गर्व से ऊंचा हुआ है।

श्रद्धा और आस्था के इस भव्य समागम के अंतिम चरण में चौती माता बाल सुंदरी देवी के पावन चरणों में एक बार फिर सामूहिक रूप से शीश झुकाकर देश की अखंडता के लिए विशेष वंदना की गई। उपस्थित जनसैलाब ने माता रानी से प्रार्थना की कि भारतवर्ष निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे और देश में आंतरिक भाईचारा, सांस्कृतिक एकता तथा अखंडता की भावना हमेशा अक्षुण्ण बनी रहे। नागरिकों के व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में सुख, शांति, सौहार्द और अटूट समृद्धि का वास हो, इसके लिए मंदिर के गर्भगृह में विशेष आरती भी उतारी गई। कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक और प्रेरक क्षण वह था जब वहां मौजूद प्रत्येक माता, बहन, युवा और बुजुर्ग नागरिक ने देश के सर्वप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व की सराहना की। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे प्रधानमंत्री द्वारा देश के समक्ष रखे गए विकसित भारत के महान और विराट संकल्प को साकार करने में अपना पूरा योगदान देंगे और समाज व राष्ट्र के प्रति अपनी नागरिक जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगे।

इस महाआयोजन के समापन सत्र के दौरान उपस्थित जनसमुदाय की भावनाओं में देश के शीर्ष नेतृत्व के प्रति अगाध श्रद्धा और विश्वास साफ तौर पर झलक रहा था। समूचे देश की निरंतर प्रगति, आर्थिक उन्नति, सीमाओं की पुख्ता सुरक्षा और जन-जन के कल्याण की कामना के साथ-साथ विशेष रूप से प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु जीवन और उनके यशस्वी व सफल नेतृत्व के लिए प्रार्थनाएं की गईं। वक्ताओं ने अत्यंत गर्व के साथ इस बात का उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री के अद्वितीय और ओजस्वी नेतृत्व के कारण ही आज भारत ने विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ है, हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल की है और वैश्विक प्रतिष्ठा के सर्वथा नए आयाम स्थापित किए हैं। आज वैश्विक मंचों पर भारत की आवाज को अत्यंत गंभीरता और सम्मान के साथ सुना जाता है, जो उनके कुशल मार्गदर्शन का ही सीधा परिणाम है। उनके इसी युगांतकारी मार्गदर्शन में आज पूरा देश विकसित भारत के संकल्प को धरातल पर सच करने की दिशा में बिना रुके, बिना थके निरंतर आगे बढ़ रहा है और यह हवन कार्यक्रम इसी सामूहिक संकल्प की एक सशक्त और पवित्र अभिव्यक्ति बनकर उभरा है।

लोकतांत्रिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए इस अवसर पर देश के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में जनता की सेवा करने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं। उपस्थित जनसमूह और वक्ताओं ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि एक जननेता के रूप में लगातार इतने वर्षों तक देश की सेवा करना और जनता का अटूट विश्वास बनाए रखना अपने आप में एक अद्वितीय कीर्तिमान है। यह दीर्घकालिक कार्यकाल इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि देश की जनता उनकी नीतियों, उनकी दूरदर्शिता और उनके अडिग इरादों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। बधाई संदेशों के आदान-प्रदान के बीच पूरा माहौल उत्साह से भर गया और लोगों ने देश के इस प्रधान सेवक के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र के कल्याण और देशवासियों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया है।

भारतीय समाज में आए वैचारिक बदलाव को रेखांकित करते हुए वक्ताओं ने विशेष रूप से कहा कि मोदी के यह १२ वर्ष भारत के स्वाभिमान, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करने के रहे हैं। सदियों से चली आ रही हीनभावना को समाप्त कर देश की सामूहिक शक्ति ने अब एक नए आत्मविश्वास के साथ सांस लेना शुरू किया है। इस ऐतिहासिक कालखंड में न केवल देश की प्राचीन धरोहरों को सहेजा गया, बल्कि आधुनिक सोच के साथ भारत की सांस्कृतिक जड़ों को भी पुनर्जीवित किया गया। गुलामी के प्रतीकों और औपनिवेशिक मानसिकता को पीछे छोड़कर देश अब अपनी वास्तविक पहचान को गले लगा रहा है। इस वैचारिक क्रांति ने प्रत्येक नागरिक के मन में यह विश्वास जगाया है कि भारत किसी भी वैश्विक शक्ति से कम नहीं है और हमारी संस्कृति व परंपराएं दुनिया के लिए एक मार्गदर्शक का काम कर सकती हैं।

राष्ट्रीय नवनिर्माण और व्यवस्था परिवर्तन के बड़े मील के पत्थरों की चर्चा करते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि इसी कार्यकाल के दौरान देश में नई संसद का निर्माण हुआ, जिसने भारतीय लोकतंत्र को एक नया और आधुनिक घर दिया। इसके साथ ही, सदियों पुराने कानूनों को बदलकर तीन नए कानून लागू किए गए, जो दंडात्मक होने के बजाय न्याय केंद्रित हैं और आम नागरिक के अधिकारों की रक्षा करते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में युगांतकारी परिवर्तन लाते हुए नई शिक्षा नीति लागू की गई, जिसने रटने की प्रणाली को खत्म कर कौशल और समग्र विकास पर ध्यान केंद्रित किया। सबसे क्रांतिकारी बदलाव यह रहा कि मातृभाषाओं में मेडिकल व इंजीनियरिंग शिक्षा का मार्ग प्रशस्त हुआ, जिससे अब भाषा की बाधा के कारण किसी भी गरीब या ग्रामीण पृष्ठभूमि के मेधावी छात्र का सपना नहीं टूटेगा। इन सभी ऐतिहासिक कदमों के मिलने से ही आत्मनिर्भर भारत हर भारतीय का संकल्प बना और देश स्वावलंबन की राह पर तेजी से दौड़ पड़ा।

देश की संप्रभुता और सुरक्षा व्यवस्था को अक्षुण्ण रखने के संकल्प की सराहना करते हुए वक्ताओं ने गर्व से कहा कि इन १२ वर्षों में एक तरफ देश की सीमाएँ सुरक्षित हुईं और दुश्मनों को उनकी ही भाषा में करारा जवाब दिया गया। लंबे समय से लंबित और असंभव माने जाने वाले राजनीतिक निर्णयों को अमलीजामा पहनाते हुए कश्मीर से ३७० समाप्त हुई, जिसने घाटी को मुख्यधारा से जोड़कर विकास के नए द्वार खोले। करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र, भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ, जिसने देश के सांस्कृतिक गौरव को एक नई ऊंचाई दी। देश के आंतरिक हिस्सों को खोखला करने वाले नक्सलवाद का अंत हुआ और आतंकवाद पर नकेल कस हर आतंकी घटना का मुँहतोड़ जवाब दिया गया, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था अभेद्य बन गई। सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करने और कूटनीतिक मोर्चे पर आक्रामक नीति अपनाने के कारण आज देश का बच्चा-बच्चा खुद को सुरक्षित महसूस करता है।

इस महान राष्ट्रीय यात्रा के सबसे बड़े प्रभाव का आकलन करते हुए बुद्धिजीवियों ने निष्कर्ष निकाला कि देश की सामूहिक शक्ति ने आखिरकार हीनता के भाव से बाहर निकलकर अपनी विरासत, संस्कृति और सामर्थ्य पर गर्व करना सीखा है। लंबे समय तक वैश्विक मंचों पर उपेक्षित रहने वाला भारत अब अपनी बात पूरी दृढ़ता से रखता है। देशवासियों को सुरक्षित बनाना और उनके खोए हुए आत्मसम्मान व गौरव को लौटाना मोदी की सबसे बड़ी उपलब्धि है, जिसने 140 करोड़ भारतीयों को एक सूत्र में पिरो दिया है। आज का आम भारतीय चाहे वह देश में रह रहा हो या विदेशों में, अपनी पहचान को लेकर बेहद गौरवान्वित महसूस करता है। इस आत्मसम्मान की बहाली ने समाज के हर वर्ग में एक नई ऊर्जा और काम करने का जज्बा पैदा किया है, जो देश को एक महाशक्ति बनाने के लिए आवश्यक है।

विश्व पटल पर भारत की बदलती हुई मजबूत छवि पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने अंत में कहा कि आज नया भारत पूरे आत्मविश्वास के साथ विश्व के हर मंच पर अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। चाहे आर्थिक नीतियां हों, पर्यावरण के मुद्दे हों, डिजिटल क्रांति हो या फिर वैश्विक संकटों के समय मानवीय सहायता पहुंचाना, भारत आज एक मार्गदर्शक और संकटमोचक की भूमिका में नजर आता है। दुनिया एक सक्षम, सशक्त तथा नए भारत के उदय की साक्षी बन रही है, जिसे अब कोई भी अनदेखा नहीं कर सकता। चौती माता बाल सुंदरी देवी मंदिर में आयोजित यह पावन अनुष्ठान इसी नए भारत की चेतना और संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करने का एक ऐतिहासिक माध्यम बना, जहां हर उपस्थित नागरिक देश की इस अविराम विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बनने का संकल्प लेकर अपने घर लौटा।

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