काशीपुर। कानून-व्यवस्था और सामाजिक सरोकारों को लेकर हाल ही में पुलिस प्रशासन की सक्रियता साफ तौर पर दिखाई दी, जब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के दौरे के बाद नशे के खिलाफ ठोस कार्रवाई सामने आई। शहर में लंबे समय से नशेड़ियों की बढ़ती गतिविधियों को लेकर आम लोगों में असंतोष था और इसका सीधा असर सामाजिक माहौल पर पड़ रहा था। एसएसपी के काशीपुर आगमन के साथ ही पुलिस महकमा हरकत में नजर आया। दौरे के तुरंत बाद पुलिस ने अभियान चलाकर सार्वजनिक स्थानों पर नशा करने वाले सात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की। इस कार्रवाई को स्थानीय लोग प्रशासन की गंभीरता के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि लंबे समय से उठ रही मांग अब जमीन पर उतरती दिखाई दी है और इससे यह संदेश गया है कि शिकायतों को केवल सुना ही नहीं गया, बल्कि उन पर अमल भी किया जा रहा है।
दरअसल, बीते दिनों काशीपुर में आयोजित सीएलजी बैठक के दौरान नागरिकों ने खुलकर अपनी समस्याएं सामने रखी थीं। बैठक में मौजूद लोगों ने नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को शहर की शांति और युवाओं के भविष्य के लिए बड़ा खतरा बताया था। स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने एक सुर में नशेड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। उनका कहना था कि सार्वजनिक स्थलों पर नशा करने वाले न केवल माहौल खराब करते हैं, बल्कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर भी असर डालते हैं। इसी बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने लोगों को आश्वस्त किया था कि पुलिस उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेगी और जल्द ठोस कदम उठाए जाएंगे। बैठक के बाद जो कार्रवाई हुई, उसने नागरिकों के भरोसे को और मजबूत किया है।
सीएलजी बैठक में उठी मांगों का असर तब स्पष्ट रूप से नजर आया, जब पुलिस ने काशीपुर के विभिन्न इलाकों में सघन चेकिंग और निगरानी अभियान शुरू किया। इस दौरान सार्वजनिक स्थानों पर नशा करते हुए सात लोगों को पकड़ा गया। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ 81 पुलिस एक्ट के तहत चालान की कार्रवाई की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि सुधारात्मक उद्देश्य से भी उठाया गया है। पकड़े गए नशेड़ियों को मौके पर समझाइश दी गई और उनके परिजनों को बुलाकर उन्हें सुपुर्द किया गया, ताकि परिवार भी इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी समझे और उन्हें सही मार्ग पर लाने का प्रयास करे। इस प्रक्रिया के जरिए पुलिस ने समाज और परिवार की संयुक्त भूमिका को भी रेखांकित किया है।

इस कार्रवाई के बाद शहर में यह चर्चा का विषय बन गया है कि पुलिस अब नशे के मामलों में केवल औपचारिकता नहीं निभा रही, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि पहले ऐसी शिकायतें अक्सर अनसुनी रह जाती थीं, लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है। कई नागरिकों ने कहा कि सार्वजनिक स्थलों पर नशा करने वालों के कारण शाम के समय परिवार के साथ बाहर निकलना मुश्किल हो जाता था। अब पुलिस की सक्रियता से उम्मीद जगी है कि माहौल में सुधार आएगा। खासतौर पर अभिभावकों ने इस कदम का स्वागत किया है, क्योंकि नशे की गिरफ्त में फंसते युवा परिवार और समाज दोनों के लिए चिंता का कारण बन चुके हैं।
पुलिस प्रशासन की इस पहल को लेकर अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। उनका स्पष्ट संदेश है कि नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस का मानना है कि नशा केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक बुराई है, जिसे जड़ से खत्म करने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं। इसी सोच के तहत 81 पुलिस एक्ट में की गई कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता और काउंसलिंग पर भी जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि केवल चालान करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि समाज और परिवार को भी साथ लेकर चलना होगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद काशीपुर में यह संदेश गया है कि वरिष्ठ अधिकारियों के दौरे केवल औपचारिक नहीं होते, बल्कि उनके निर्देशों का सीधा असर जमीनी कार्रवाई में दिखाई देता है। एसएसपी अजय गणपति के दौरे के बाद हुई यह कार्रवाई इसका उदाहरण मानी जा रही है। सीएलजी बैठक में उठे मुद्दों पर तुरंत अमल होने से लोगों का विश्वास पुलिस प्रशासन में और मजबूत हुआ है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस कदम की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में नशे के खिलाफ अभियान और तेज होगा। अंततः काशीपुर में हुई यह कार्रवाई न केवल सात नशेड़ियों के चालान तक सीमित है, बल्कि यह एक व्यापक संदेश के रूप में देखी जा रही है। यह संकेत है कि पुलिस और समाज मिलकर यदि ठान लें, तो नशे जैसी गंभीर समस्या पर अंकुश लगाया जा सकता है। नागरिकों की मांग, पुलिस की तत्परता और प्रशासन की इच्छाशक्ति ने मिलकर यह साबित किया है कि संवाद और कार्रवाई का यह मॉडल प्रभावी हो सकता है। अब देखना यह है कि इस अभियान की निरंतरता बनी रहती है या नहीं, क्योंकि स्थायी बदलाव के लिए लगातार प्रयास ही सबसे बड़ा हथियार साबित होते हैं।





