रामनगर। घने जंगलों और हरी-भरी वादियों के बीच वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए देश-विदेश में मशहूर इस राष्ट्रीय उद्यान में बहुप्रतीक्षित अभियान की शुरुआत कर दी गई है। उत्तराखण्ड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने खुद रामनगर पहुंचकर इस बेहद महत्वपूर्ण सुरक्षा अभियान का विधिवत और भव्य आगाज किया। मानसून की आमद के साथ ही वन्यजीवों के शिकार और उनके रिहाइशी इलाकों की तरफ रुख करने की घटनाओं को रोकने के लिए इस बार प्रशासन ने पहले से भी ज्यादा सख्त तैयारी की है। वन मंत्री ने इस मौके पर विभाग के तमाम छोटे-बड़े अधिकारियों और जमीन पर काम करने वाले फ्रंटलाइन वन कर्मियों को संबोधित किया और साफ लफ्जों में कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस बड़े सुरक्षा चक्र की शुरुआत होने से अब शिकारी और असामाजिक तत्व पार्क की सीमा के आसपास फटकने की हिम्मत भी नहीं कर पाएंगे।
आने वाले दिनों में होने वाली मूसलाधार बारिश और खराब मौसम के मिजाज को देखते हुए कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को कई गुना ज्यादा चाक-चौबंद कर दिया गया है। बरसात के इस मौसम में जब नदियां अपने पूरे उफान पर होती हैं और पूरा जंगल पानी से लबालब भर जाता है, तब जंगली जानवरों के लिए अपनी जान बचाना और सुरक्षित ठिकानों को ढूंढना एक बेहद ही टेढ़ी खीर साबित होता है। भारी बारिश के चलते जब मैदानी और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है, तो बाघ, हाथी और तेंदुए जैसे बड़े वन्यजीव ऊंचे और सूखे स्थानों की तलाश में अक्सर जंगलों की सीमा को लांघकर पास में बसी इंसानी बस्तियों और गांवों का रुख करने लगते हैं। वन्यजीवों के इस अप्रत्याशित कदम की वजह से ग्रामीणों के बीच भारी दहशत फैल जाती है और देखते ही देखते मानव-वन्यजीव संघर्ष का एक नया और खतरनाक मोर्चा खुल जाता है। इसी बेहद गंभीर स्थिति से निपटने और वन्यजीवों को इंसानी हमलों के साथ-साथ शिकारियों से बचाने के लिए कॉर्बेट प्रशासन ने इस बार अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
पार्क के चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ने के लिए इस साल आधुनिक तकनीकों का एक बेहद तगड़ा और अभेद्य जाल बिछाया गया है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की बेहद संवेदनशील मानी जाने वाली दक्षिणी सीमा पर अत्याधुनिक ई-सर्विलांस टावर स्थापित किए गए हैं, जो हाई-टेक कैमरों से लैस हैं। इन विशालकाय टावरों के माध्यम से कंट्रोल रूम में बैठे विशेष रूप से प्रशिक्षित वन कर्मी चौबीसों घंटे बिना पलक झपकाए हर छोटी से छोटी हलचल पर अपनी डिजिटल नजर बनाए हुए हैं। इसके साथ ही पूरे राष्ट्रीय उद्यान के भीतर सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए एक सौ से भी अधिक रणनीतिक चौकियां और एण्टीपोचिंग कैंप पूरी तरह से सक्रिय कर दिए गए हैं। घने जंगलों के बीच बने ऊंचे वॉच टावर, पेड़ों पर छिपे स्वचालित कैमरा ट्रैप और फील्ड में तैनात कर्मचारियों के पास मौजूद जीपीएस आधारित आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम इस समय पूरी रफ्तार से काम कर रहे हैं। इस मजबूत तकनीकी नेटवर्क की वजह से अब जंगल के भीतर छिपे शिकारियों की हर चाल नाकाम होने वाली है।
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम रास्तों में गश्त करने के लिए केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि जमीन पर भी भारी-भरकम और विशेष टीमों को मुस्तैद किया गया है। घने झाड़-झंखाड़ और उफनते नालों को पार करने के लिए विभाग के जांबाज और प्रशिक्षित वन कर्मी दिन-रात अपनी जान हथेली पर रखकर पेट्रोलिंग कर रहे हैं। इन जांबाज वन कर्मियों की मदद के लिए कॉर्बेट के विशेष विभागीय हाथियों के दल को भी इस काम में लगाया गया है, जो उन दुर्गम इलाकों में भी आसानी से पहुंच जाते हैं जहां गाड़ियों का जाना नामुमकिन होता है। सिर्फ इतना ही नहीं, आसमान से हर हलचल पर पैनी नजर रखने के लिए खोजी ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो घने जंगलों के ऊपर मंडराते रहते हैं। जमीन पर तेजी से दौड़ने वाले आधुनिक ए.टी.वी. वाहनों और उफनती नदियों को पल भर में पार करने वाली शक्तिशाली मोटर बोट का एक बहुत बड़ा और विस्तृत नेटवर्क इस समय कॉर्बेट की वादियों में चौबीसों घंटे गश्त कर रहा है।

इस बड़े और बेहद खास अभियान के उद्घाटन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने वन्यजीवों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बेहद गर्व के साथ कहा कि उत्तराखण्ड राज्य की यह बेमिसाल और समृद्ध जैव विविधता और हमारे जंगलों में बसने वाले दुर्लभ वन्यजीव हमारी सबसे अनमोल वैश्विक धरोहर हैं। उन्होंने साफ किया कि इन बेजुबान जानवरों की जान की हिफाजत करना और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखना वर्तमान सरकार की सबसे बड़ी और सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मानसून के दौरान जब पूरा इलाका दलदल में बदल जाता है और चारों तरफ सांप-बिच्छुओं और जंगली जानवरों का खतरा मंडराता रहता है, उस बेहद विषम और जानलेवा परिस्थितियों में भी अपनी ड्यूटी पर डटे रहने वाले वन कर्मियों के अटूट समर्पण की उन्होंने खुले दिल से सराहना की। वन मंत्री के इन ऊर्जावान शब्दों को सुनकर वहां मौजूद तमाम कर्मचारियों का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंच गया।
इस पूरे कार्यक्रम की सबसे खास और बेहद रोमांचक बात यह रही कि अभियान की औपचारिक शुरुआत करने के बाद जब माननीय वन मंत्री जी ने खुद वन क्षेत्र का मुआयना करने के लिए घने जंगलों का भ्रमण किया, तो प्रकृति ने भी उनका स्वागत अनोखे अंदाज में किया। जंगल के भीतर जैसे ही उनका काफिला आगे बढ़ा, वैसे ही उन्हें साक्षात जंगल के राजा बाघ के बेहद करीब से दीदार हो गए। बाघ को अपने प्राकृतिक आवास में बेखौफ घूमते देखना किसी जादुई अहसास से कम नहीं था, और इसके तुरंत बाद ही उन्हें विशालकाय हाथियों का एक झुंड और सैकड़ों चंचल चीतलों का खूबसूरत झुंड भी कुलांचे भरते हुए दिखाई दिया। इन दुर्लभ और मनमोहक दृश्यों को अपनी आंखों के सामने देखकर वन मंत्री जी के चेहरे पर एक असीम संतुष्टि और बेहद गहरी प्रसन्नता के भाव साफ देखे जा सकते थे। उन्होंने कहा कि कॉर्बेट की यह असली खूबसूरती ही हमें इसे और अधिक सुरक्षित बनाने की प्रेरणा देती है।
रामनगर में आयोजित हुए इस बेहद ऐतिहासिक और गौरवशाली अवसर पर उत्तराखण्ड वन विभाग के कई आला अधिकारी और प्रमुख चेहरे भी पूरी मुस्तैदी के साथ कार्यक्रम स्थल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पहुंचे थे। इनमें मुख्य रूप से कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कुशल निदेशक डॉ. साकेत बड़ोला और ऊर्जावान उप निदेशक श्री राहुल मिश्रा शामिल रहे, जिन्होंने वन मंत्री को पार्क की सुरक्षा तैयारियों का पूरा खाका समझाया। इसके साथ ही वन्यजीवों के संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पार्क वार्डन श्री बिन्दर पाल और कॉर्बेट के सबसे मशहूर ढिकाला रेंज के तेजतर्रार वन क्षेत्राधिकारी श्री उमेश चन्द्र आर्या भी अपने पूरे स्टाफ के साथ वहां मुस्तैद दिखे। विभाग के इन तमाम बड़े अधिकारियों और सैकड़ों फ्रंटलाइन वन कर्मचारियों की एकजुट मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि इस बार का मानसून अभियान कॉर्बेट के इतिहास में सुरक्षा का एक नया और अभूतपूर्व अध्याय लिखने जा रहा है।





