काशीपुर। करीब नौ वर्ष पुराने विद्युत चोरी के एक चर्चित मामले में आखिरकार न्यायालय का फैसला सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में इस प्रकरण की चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने वाले इस मुकदमे में विशेष सत्र न्यायालय, ऊधम सिंह नगर (रुद्रपुर) ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों का सूक्ष्म परीक्षण करने के बाद राजीव कुमार शर्मा को विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 के आरोप से दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल नहीं हो सका, जिसके चलते आरोपी को संदेह का लाभ दिया गया। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वर्षों पुराने मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों की गुणवत्ता को लेकर लगातार चर्चा होती रही है।
मामले की शुरुआत 22 जनवरी 2017 को हुई थी, जब रिपोर्टर अंशुल मदान पुत्र विजय मदान के साथ विद्युत विभाग की टीम द्वारा जसपुर क्षेत्र में नियमित विद्युत जांच अभियान चलाया जा रहा था। जांच के दौरान विभाग का दावा था कि कुछ परिसरों में अवैध रूप से विद्युत लाइन का उपयोग करते हुए बिजली चोरी की जा रही है। इसी आधार पर विभाग ने सात व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए थाना जसपुर में विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 के अंतर्गत प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 20/2017 दर्ज कराई। इस मामले में जावेद, सलीम हुसैन, बृजकिशोर, राजीव कुमार शर्मा, अब्दुल कलाम, हनीस तथा अतीक अहमद के नाम शामिल किए गए। विभाग द्वारा आरोप लगाए जाने के बाद यह मामला न्यायालय पहुंचा और विधिक प्रक्रिया प्रारंभ हुई।
अदालती रिकॉर्ड के अनुसार मुकदमे की विवेचना पूरी होने के बाद संबंधित न्यायालय में आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया। इसके बाद मुकदमे के दौरान नामित सात आरोपियों में से छह व्यक्तियों ने विद्युत विभाग के साथ समझौता कर अपने प्रकरण का निस्तारण करा लिया। हालांकि राजीव कुमार शर्मा ने समझौते का रास्ता नहीं चुना और न्यायालय में मुकदमे का सामना करते हुए अपना पक्ष रखने का निर्णय लिया। इसके बाद पूरे मामले की सुनवाई विशेष सत्र परीक्षण संख्या 253/2017 के अंतर्गत विशेष सत्र न्यायालय, ऊधम सिंह नगर (रुद्रपुर) में हुई, जहां अभियोजन और बचाव पक्ष ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने विभागीय अधिकारियों के बयान तथा उपलब्ध दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। वहीं राजीव कुमार शर्मा की ओर से अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश (काशीपुर, उत्तराखण्ड) ने प्रभावी पैरवी करते हुए अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों पर सवाल उठाए और विधिक तर्कों के साथ अपना पक्ष रखा। न्यायालय ने केवल मौखिक दलीलों तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि उपलब्ध अभिलेखों, प्रस्तुत दस्तावेजों और समस्त साक्ष्यों का विस्तृत परीक्षण किया। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद अदालत ने यह परखा कि क्या अभियोजन पक्ष आरोपों को कानूनी कसौटी पर संदेह से परे सिद्ध कर पाया है अथवा नहीं।
लगभग नौ वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद 25 जुलाई 2026 को विशेष सत्र न्यायालय ने अपना निर्णय सुनाया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष राजीव कुमार शर्मा के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को पर्याप्त और निर्विवाद साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध करने में सफल नहीं रहा। इसी कारण न्यायालय ने भारतीय विधि के स्थापित सिद्धांत के अनुसार आरोपी को संदेह का लाभ प्रदान करते हुए विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 के आरोप से दोषमुक्त कर दिया। इस निर्णय के साथ वर्ष 2017 से चल रहा यह मुकदमा न्यायिक रूप से समाप्त हो गया।
इस निर्णय ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी आपराधिक मुकदमे में केवल आरोप पर्याप्त नहीं होते, बल्कि न्यायालय के समक्ष ऐसे ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक होता है जिनके आधार पर आरोप बिना किसी उचित संदेह के सिद्ध किए जा सकें। प्रस्तुत मामले में न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करने के बाद अपना फैसला सुनाया। दस्तावेज़ में इससे आगे कोई अतिरिक्त टिप्पणी, क्षतिपूर्ति, विभागीय प्रतिक्रिया या अन्य कानूनी निर्देश दर्ज नहीं हैं।





