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अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश व सिन्धू आकाश की पैरवी से खुली पीड़िता के न्याय की राह

अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश व सिन्धू आकाश की बेजोड़ कानूनी सूझबूझ से पलटा निचली अदालत का फैसला, घिनौने ब्लैकमेलिंग कांड में आरोपी रंजीत सिंह लाड़ी की बढ़ी मुश्किलें, बेबस पीड़िता के लिए जागी न्याय की उम्मीद।

काशीपुर। उत्तराखंड के जिला उधम सिंह नगर के अंतर्गत आने वाले काशीपुर क्षेत्र से एक ऐसा सनसनीखेज और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके के सामाजिक और प्रशासनिक हलकों में भारी खलबली मचा दी है। यह पूरा मामला एक बेबस और लाचार महिला के साथ हुए शारीरिक शोषण, भयावह ब्लैकमेलिंग और उसके बाद व्यवस्था के बंद दरवाजों से टकराकर न्याय पाने के संघर्ष की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तान बयां करता है। मिली जानकारी के अनुसार, रोडवेज बस अड्डे के समीप पटेलनगर में स्थित ‘दा अल्फा जिम’ के प्रोपराईटर रंजीत सिंह लाड़ी पुत्र धर्मपाल सिंह पर एक महिला ने अत्यंत गंभीर, घिनौने और रूह कांप देने वाले आरोप लगाए हैं । इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर समाज में महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली पर बहुत बड़े और तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। रंजीत सिंह लाड़ी पर आरोप है कि उसने न केवल पीड़िता की मर्यादा को तार-तार किया, बल्कि उसकी लाचारी का ऐसा फायदा उठाया जिससे किसी भी संवेदनशील इंसान की रूह कांप जाए । इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद काशीपुर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है और लोग आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं।

इस दिल दहला देने वाली घटना की शुरुआत तब हुई जब आरोपी रंजीत सिंह लाड़ी ने महिला को अपनी हवस का शिकार बनाया और उसके बाद हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए पीड़िता की कुछ अत्यंत अश्लील और आपत्तिजनक वीडियो क्लिप्स अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लीं । इन अश्लील वीडियो को सोशल मीडिया और इंटरनेट पर पूरी तरह से वायरल करने की लगातार धमकी देते हुए आरोपी ने पीड़िता को मानसिक और शारीरिक रूप से अपने शिकंजे में कस लिया । इस खौफनाक ब्लैकमेलिंग के जाल में फंसाकर आरोपी रंजीत सिंह लाड़ी उस लाचार महिला को भिन्न-भिन्न और अनजान स्थानों पर जबरन ले जाता रहा, जहां उसने डरा-धमकाकर बार-बार पीड़िता की अस्मत को बेरहमी से लूटा । हद तो तब हो गई जब इस लगातार हो रहे यौन शोषण के कारण पीड़िता गर्भवती हो गई और जब उसका गर्भ पूरे 3 माह का हो चुका था, तब भी आरोपी का दिल नहीं पसीजा । उस दरिंदे ने एक बार फिर उसकी उन्हीं अश्लील वीडियो को सार्वजनिक रूप से वायरल करने की बेहद खौफनाक और अंतिम धमकी दी, जिसके आगे घुटने टेकने पर मजबूर होकर पीड़िता को अपने 3 माह के मासूम भ्रूण का अवैध रूप से गर्भपात कराना पड़ गया ।

इस भयंकर प्रताड़ना और अत्याचार से पूरी तरह टूट चुकी पीड़िता ने जब हिम्मत जुटाई, तो उसने न्याय की आस में अपने संबंधित स्थानीय पुलिस थाने के चक्कर काटने शुरू किए और साथ ही विभाग के अन्य कई उच्चाधिकारियों को भी लिखित रूप में अपने प्रार्थना पत्र भेजे । लेकिन व्यवस्था की संवेदनहीनता का आलम तो देखिए कि इतनी बड़ी और गंभीर वारदात होने के बावजूद पुलिस प्रशासन द्वारा पीड़िता की कोई सुनवाई नहीं की गई और उसकी एफ०आई०आर० दर्ज करने से साफ इनकार कर दिया गया । पुलिस के इस निराशाजनक और बेहद उदासीन रवैये से पूरी तरह टूट चुकी पीड़िता ने हार नहीं मानी और अंततः न्याय के सबसे बड़े मंदिर यानी माननीय न्यायालय की शरण लेने का एक बड़ा फैसला किया । पीड़िता द्वारा इसके बाद माननीय न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट महोदय, काशीपुर की अदालत में एक प्रकीर्ण फौजदारी प्रार्थना पत्र संख्या- 413/2025 अंतर्गत धारा- 175 (3) दायर किया गया, ताकि अदालत के हस्तक्षेप से आरोपी के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा जा सके । परंतु दुर्भाग्य से विचारण न्यायालय ने भी इस मामले की गंभीरता को शायद ठीक से नहीं समझा और दिनांक- 20.01.2026 को एक अत्यंत निराशाजनक आदेश पारित करते हुए पीड़ित महिला का वह प्रार्थना पत्र पूरी तरह से खारिज कर दिया । अदालत ने अपने आदेश में यह अजीबोगरीब टिप्पणी की कि इस पूरे मामले में प्रथम दृष्टया कोई भी संज्ञेय अपराध कारित किया जाना प्रतीत नहीं होता है, जिसने पीड़िता को गहरे सदमे में डाल दिया ।

विचारण न्यायालय के इस अप्रत्याशित और हताश करने वाले आदेश से अत्यधिक क्षुब्ध होकर और न्याय की उम्मीद को जिंदा रखते हुए पीड़िता ने हार मानने के बजाय ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाया । महिला ने माननीय न्यायालय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, काशीपुर जिला उधम सिंह नगर की अदालत में एक महत्वपूर्ण आपराधिक पुनरीक्षण याचिका संख्या- 6/2026 दायर की । इस बेहद संवेदनशील और कानूनी रूप से पेचीदा हो चुके मामले में पीड़िता की ओर से क्षेत्र के अत्यंत विद्वान और वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश व सिन्धू आकाश (काशीपुर उत्तराखण्ड) के द्वारा बहुत ही मजबूती, लगन और आक्रामक तरीके से पैरवी की गई । यह पूरी कानूनी लड़ाई और पीड़िता को न्याय की दहलीज तक पहुंचाने का पूरा श्रेय पूरी तरह से अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश व सिन्धू आकाश को जाता है, जिन्होंने हारते हुए केस को अपनी कानूनी सूझबूझ से पलट दिया । दूसरी तरफ, कानूनी दांव-पेंचों का सहारा लेते हुए प्रत्यर्थी रंजीत सिंह लाड़ी की ओर से अधिवक्ता ने अदालत में उसका पक्ष रखा और आरोपों को खारिज कराने की पुरजोर कोशिश की । माननीय न्यायालय द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश काशीपुर द्वारा इस बेहद हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रावली पर मौजूद समस्त साक्ष्यों, सबूतों एवं संबंधित कानूनी अभिलेखों का बेहद बारीकी और गहराई से अवलोकन किया गया । इसके साथ ही अदालत ने पीड़िता और प्रत्यर्थी रंजीत सिंह लाड़ी के दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को बहुत ही धैर्यपूर्वक और विस्तार से सुना ।

इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान पीड़िता के विद्वान अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश ने अपनी पुनरीक्षण मीमों में लिए गए सभी पुख्ता और मजबूत आधारों को अदालत के समक्ष रखते हुए ऐसे अकाट्य तर्क दिए जिसने प्रतिपक्षी के दावों की धज्जियां उड़ा दीं । अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश व सिन्धू आकाश की इस बेजोड़ और बेहतरीन पैरवी के दम पर ही मामले का रुख पूरी तरह बदल गया । इन दमदार और न्यायसंगत तर्कों से पूरी तरह सहमत होते हुए पुनरीक्षण न्यायालय ने पीड़िता की पुनरीक्षण याचिका को सहर्ष स्वीकार कर लिया और विचारण न्यायालय द्वारा पूर्व में पारित किए गए दिनांक- 20.01.2026 के उस विवादित आदेश को पूरी तरह से निरस्त यानी खारिज कर दिया । इसके साथ ही माननीय ऊपरी अदालत ने एक ऐतिहासिक रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि पीड़िता के प्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा- 175(3) बी.एन.एस.एस., 2023 में दिए गए विधिक प्राविधानों के अनुसार अब यथा आवश्यक और सख्त कार्यवाही अमल में लाई जाए । अदालत ने निचली अदालत को इस पूरे मामले पर पुनः गहराई से विचार करने और विधिक रूप से एक नया व उचित आदेश पारित करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं, जिससे अब आरोपी रंजीत सिंह लाड़ी की मुश्किलें बेहद बढ़ने वाली हैं और पीड़िता के लिए न्याय की एक नई किरण जागी है । इस पूरे ऐतिहासिक आदेश और पीड़िता की इस बड़ी जीत के असली सूत्रधार सिर्फ और सिर्फ अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश व सिन्धू आकाश ही रहे हैं ।

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