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हरिद्वार में साहिबजादों की शहादत पर आधारित वीर बाल दिवस का गौरवपूर्ण आयोजन

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक ने साहिबजादों के अदम्य साहस और बलिदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वीर बाल दिवस केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि युवाओं को धर्म, सत्य और मानवता पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।

हरिद्वार। गोविंद घाट क्षेत्र में सिख समाज द्वारा आयोजित बलिदान दिवस के कार्यक्रम में वीरता, त्याग और आस्था का भाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। इस अवसर पर भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं हरिद्वार विधायक मदन कौशिक ने वीर बाल दिवस के ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वर्ष 26 दिसंबर को मनाया जाने वाला वीर बाल दिवस सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की अमर शहादत को सम्मान देने का प्रतीक है। विधायक मदन कौशिक ने कहा कि यह दिवस केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा में बसे उस अद्भुत साहस और बलिदान की स्मृति है, जिसने पूरे राष्ट्र को नैतिक शक्ति दी। उन्होंने कहा कि साहिबजादों की शहादत आज भी देश के युवाओं को धर्म, सत्य और मानवता के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देती है। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं ने पूरे मनोयोग से उनके विचारों को सुना और साहिबजादों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।

अपने संबोधन में विधायक मदन कौशिक ने सिख इतिहास की पृष्ठभूमि को सामने रखते हुए बताया कि सिख धर्म के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने वर्ष 1699 में बैसाखी के पावन अवसर पर खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि खालसा पंथ की स्थापना केवल एक धार्मिक घटना नहीं थी, बल्कि यह अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने का ऐतिहासिक संकल्प था। गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों पुत्र अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह भी खालसा पंथ का अभिन्न अंग थे। उस दौर में पंजाब क्षेत्र पर मुगलों का शासन था, जहां धार्मिक असहिष्णुता और दमन का वातावरण व्याप्त था। मदन कौशिक ने कहा कि खालसा पंथ ने समाज को आत्मसम्मान और समानता का संदेश दिया, जिसने आगे चलकर भारतीय इतिहास की दिशा बदल दी।

इतिहास के कठिन कालखंड का उल्लेख करते हुए विधायक मदन कौशिक ने बताया कि वर्ष 1705 में मुगलों ने गुरु गोबिंद सिंह जी को पकड़ने के लिए व्यापक प्रयास किए। लगातार बढ़ते खतरे के कारण गुरु गोबिंद सिंह जी को अपने परिवार से अलग होना पड़ा। इसी क्रम में उनकी पत्नी माता गुजरी देवी और उनके दो छोटे पुत्र साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह अपने विश्वासपात्र रसोइए गंगू के साथ एक गुप्त स्थान पर शरण लेने के लिए विवश हुए। उन्होंने कहा कि यह समय केवल परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे सिख समाज के लिए अत्यंत पीड़ादायक था। बावजूद इसके, माता गुजरी देवी और छोटे साहिबजादों ने अदम्य साहस का परिचय दिया और किसी भी परिस्थिति में अपने धर्म और सिद्धांतों से विचलित नहीं हुए।

कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी विकास तिवारी ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों को श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पुत्र साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के असाधारण साहस, धैर्य और सर्वाेच्च बलिदान के बारे में जागरूक करना है। विकास तिवारी ने कहा कि भारतीय इतिहास में साहिबजादों का योगदान अतुलनीय है, जिन्हें केवल सिख समाज ही नहीं, बल्कि पूरा देश गर्व के साथ स्मरण करता है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि किस प्रकार अल्पायु में इन वीर बालकों ने अत्याचारों के सामने झुकने से इनकार किया और मानवता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

इतिहास के उस दर्दनाक अध्याय को याद करते हुए वक्ताओं ने बताया कि मुगल शासनकाल के दौरान साहिबजादों को अमानवीय यातनाओं का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके, उन्होंने अपने धर्म और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अद्भुत साहस का परिचय दिया। मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार पर भीषण अत्याचार किए गए। उस समय सरहिंद के नवाब वजीर खान ने गुरु जी के दोनों छोटे साहिबजादों पर इस्लाम धर्म स्वीकार करने का दबाव बनाया। वक्ताओं ने कहा कि लालच और भय के तमाम प्रयासों के बावजूद साहिबजादे अपने निर्णय पर अडिग रहे और धर्म परिवर्तन से इनकार कर दिया। यही कारण है कि उनका बलिदान आज भी भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।

कार्यक्रम में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए यह भी कहा गया कि वीर बाल दिवस केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक है। साहिबजादों की शहादत यह सिखाती है कि सत्य और धर्म की रक्षा के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती। उनके बलिदान ने यह सिद्ध कर दिया कि नैतिक साहस और आत्मबल के सामने अत्याचार टिक नहीं सकता। वक्ताओं ने कहा कि आज जब समाज विभिन्न चुनौतियों से गुजर रहा है, तब साहिबजादों के आदर्श हमें सही दिशा दिखाते हैं। इस प्रकार के आयोजन समाज में राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत करने का कार्य करते हैं। गोविंद घाट में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक गरिमामय बना दिया। कार्यक्रम में पार्षद परमिंदर सिंह गिल, सरदार हरमोहन बबली, एडवोकेट राजकुमार गौरव वर्मा और मध्य हरिद्वार के महामंत्री हर्षित त्रिपाठी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने साहिबजादों की शहादत को नमन करते हुए कहा कि यह हमारा नैतिक कर्तव्य है कि हम अपने इतिहास को समझें और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी गौरवशाली गाथा पहुंचाएं। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति का भाव स्पष्ट रूप से झलकता रहा, जिसने वीर बाल दिवस के संदेश को और अधिक सशक्त बना दिया।

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