spot_img
दुनिया में जो बदलाव आप देखना चाहते हैं, वह खुद बनिए. - महात्मा गांधी
Homeउत्तराखंडप्रॉपर्टी फ्रॉड से टूटे किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या ने हिलाया, उत्तराखंड...

प्रॉपर्टी फ्रॉड से टूटे किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या ने हिलाया, उत्तराखंड सरकार से सीबीआई जांच की मांग

हल्द्वानी होटल में गोली लगने से मौत के बाद पत्नी और बेटा घायल, वीडियो साक्ष्य मानने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और जमीन घोटाले की निष्पक्ष जांच को लेकर किसान संगठनों ने सरकार को अल्टीमेटम दिया।

काशीपुर। अलीगंज रोड क्षेत्र के ग्राम पैगा से जुड़े एक दर्दनाक घटनाक्रम ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया है। हल्द्वानी के गौलापार स्थित एक होटल में ठहरे काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह ने कथित प्रॉपर्टी फ्रॉड से मानसिक रूप से टूटकर खुद को गोली मार ली। यह घटना केवल एक आत्महत्या तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके साथ ही उनके पूरे परिवार का जीवन संकट में आ गया। जिस कमरे में यह भयावह घटना हुई, वहां उनकी पत्नी परदीप कौर और बेटा गुरसेज सिंह भी मौजूद थे, जिन्हें गोली के छर्रे लगने से गंभीर चोटें आईं। बताया गया कि शनिवार देर रात करीब ढाई बजे सुखवंत सिंह ने अपनी कनपटी पर गोली चला दी, जिससे मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। होटल में अचानक मची अफरा-तफरी के बीच घायल पत्नी और बेटे को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। यह घटना सामने आते ही क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया, क्योंकि मृतक के परिजन इसे केवल आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश और सिस्टम की विफलता का परिणाम बता रहे हैं।

हल्द्वानी के काठगोदाम थाना क्षेत्र में हुई इस घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन हरकत में आया। थानाध्यक्ष विमल मिश्रा ने बताया कि घायल परदीप कौर और गुरसेज सिंह को तुरंत सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां दोनों का इलाज चल रहा है। वहीं, मृतक सुखवंत सिंह के शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया गया। प्रारंभिक जांच में घटना के पीछे प्रॉपर्टी से जुड़ा विवाद सामने आया है। परिवार के अनुसार सुखवंत सिंह से करोड़ों रुपये लेकर गलत तरीके से जमीन का बैनामा किया गया था, जिससे वह लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। पुलिस द्वारा मामले की जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन परिजन और किसान संगठनों का कहना है कि यह केवल स्थानीय जांच का विषय नहीं, बल्कि इसमें बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश में जमीन घोटालों और किसानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जैसे ही सुखवंत सिंह का पार्थिव शरीर काशीपुर स्थित उनके घर पहुंचा, पूरे गांव और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। घर पर परिजनों के आंसुओं के साथ-साथ गुस्से और आक्रोश की भावनाएं भी साफ दिखाई दीं। उत्तराखंड (युवा)भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र जीतू सहित बड़ी संख्या में किसान नेता और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। मीडिया से बातचीत के दौरान जितेंद्र सिंह जितेंद्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुखवंत सिंह की यह शहादत बेकार नहीं जाने दी जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण में कई ऐसे लोग शामिल हैं, जो रसूखदार हैं और जिनकी पहुंच ऊंचे अधिकारियों तक है। उनका कहना था कि चाहे कोई भी कितना बड़ा अधिकारी क्यों न हो, यदि वह दोषी पाया जाता है तो उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सीधे तौर पर मांग की कि इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

परिवार के सदस्यों की पीड़ा शब्दों में बयान करना मुश्किल था। मृतक के पुत्र ने भी मीडिया के सामने भावुक लेकिन दृढ़ स्वर में कहा कि उनके पिता मरने से पहले जो चाहते थे, वही अब उनकी आखिरी इच्छा है। बेटे ने साफ कहा कि इस पूरे मामले में जिन अधिकारियों या अन्य लोगों की भूमिका सामने आए, उन सभी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। उसने यह भी कहा कि उनके पिता ने मरने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाला था, जिसमें उन्होंने अपने साथ हुए अन्याय का जिक्र किया था। परिवार की मांग है कि उस वीडियो को पुख्ता सबूत मानते हुए सभी संबंधित लोगों पर मुकदमा दर्ज किया जाए। परिजनों का कहना है कि यह केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे किसान समाज के सम्मान और अधिकारों का सवाल है, जिसे अब किसी भी कीमत पर दबने नहीं दिया जाएगा।

घटना के बाद किसान संगठनों ने इसे किसान की आहुति और सिस्टम से हार मानने की मजबूरी करार दिया। किसान यूनियन के नेताओं ने कहा कि सुखवंत सिंह वर्षों से अपनी जमीन और पैसों के लिए लड़ाई लड़ रहे थे, लेकिन हर स्तर पर उन्हें निराशा ही हाथ लगी। बताया गया कि करोड़ों रुपये लेकर गलत जमीन का बैनामा किया गया, जिससे न केवल आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि मानसिक यातना भी झेलनी पड़ी। नेताओं ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते प्रशासन ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया होता, तो शायद आज यह दिन नहीं देखना पड़ता। किसान यूनियन ने साफ कहा कि अब वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं। इसी के तहत तीन प्रमुख मांगें सामने रखी गई हैं, जिनमें वीडियो को साक्ष्य मानकर मुकदमा दर्ज करना, सीबीआई जांच कराना और ठगी गई पूरी रकम की वापसी सुनिश्चित करना शामिल है।

परिजनों और किसान संगठनों ने सरकार को एक निश्चित समय सीमा भी दी है। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे सुखवंत सिंह का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। यह चेतावनी भी दी गई कि पार्थिव शरीर को लेकर आईटीआई थाना काशीपुर तक जाया जाएगा और वहां विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरे मामले में न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने अन्य किसान संगठनों और ग्रामीणों से भी अपील की कि वे इस संघर्ष में शामिल हों और तय समय पर मौके पर पहुंचें। उनका कहना था कि यह लड़ाई केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे किसान समाज की है, जिसे एकजुट होकर लड़ना होगा। इस दौरान “जय हिंद” और “जय भारत” जैसे नारे भी गूंजे, जिनका जिक्र करते हुए नेताओं ने कहा कि सुखवंत सिंह ने मरते वक्त भी देश और सिस्टम से उम्मीद नहीं छोड़ी थी।

इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने काशीपुर निवासी किसान द्वारा हल्द्वानी में आत्महत्या किए जाने के इस गंभीर प्रकरण को अत्यंत संवेदनशीलता से लेते हुए कुमाऊँ आयुक्त दीपक रावत को मजिस्ट्रेट जांच के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस दुखद घटना से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर यदि लापरवाही या दोष सामने आता है, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस मामले को हल्के में न लेने का संकेत देते हुए प्रशासन को पूरी गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ से भी पूरे प्रकरण की विस्तृत जानकारी ली है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मामले की हर पहलू से जांच की जाए और किसी भी दोषी को बख्शा न जाए। मुख्यमंत्री ने दिवंगत किसान सुखवंत सिंह के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि सरकार इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि घायल पत्नी परदीप कौर और बेटे गुरसेज सिंह को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और परिवार को हर संभव सहायता दी जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना है और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश में किसानों की स्थिति, जमीन विवादों और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों और किसान संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे मामलों में किसानों का सिस्टम से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। सुखवंत सिंह की मौत को किसान समाज एक चेतावनी के रूप में देख रहा है, जो यह दर्शाती है कि कैसे एक साधारण किसान बड़े-बड़े प्रॉपर्टी फ्रॉड और ताकतवर लोगों के बीच पिस जाता है। अब सबकी नजरें सरकार और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में सचमुच निष्पक्ष कार्रवाई होगी या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। परिवार, किसान संगठन और आम जनता यही उम्मीद कर रही है कि सुखवंत सिंह की कुर्बानी से एक नई लकीर खिंचेगी और उन्हें वह न्याय मिलेगा, जिसकी मांग उन्होंने आखिरी सांस तक की थी।

संबंधित ख़बरें
शहर की भीड़भाड़ और बढ़ती बीमारियों के दौर में जब चिकित्सा जगत को नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश थी, उसी समय काशीपुर से उभरती एक संस्था ने अपनी गुणवत्ता, विशेषज्ञता और इंसानी सेहत के प्रति समर्पण की मिसाल कायम कर दी। एन.एच.-74, मुरादाबाद रोड पर स्थित “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” आज उस भरोसे का नाम बन चुका है, जिसने अपनी प्रतिबद्धता, सेवा और उन्नत चिकित्सा व्यवस्था के साथ लोगों के दिलों में एक अलग स्थान स्थापित किया है। इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ इलाज का आधार केवल दवा नहीं, बल्कि रोगी की पूरी जीवनशैली, उसकी भावनाओं और उसके व्यवहार तक को समझकर उपचार उपलब्ध कराया जाता है। संस्था के केंद्र में वर्षों से सेवा कर रहे डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा का अनुभव, उनकी अंतरराष्ट्रीय योग्यता और कार्य के प्रति उनका गहरा समर्पण उन्हें चिकित्सा जगत में एक विशिष्ट पहचान देता है। अपनी अलग सोच और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था के कारण यह संस्थान न केवल स्थानीय लोगों का विश्वास जीत रहा है, बल्कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले मरीज भी यहाँ भरोसे के साथ उपचार लेने पहुँचते हैं। सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि “होम्योपैथिक चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान” ने NABH Accreditation और ISO 9001:2008 व 9001:2015 प्रमाणपत्र हासिल कर यह साबित कर दिया है कि यहाँ इलाज पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के साथ किया जाता है। संस्थान की दीवारों पर सजे सैकड़ों प्रमाणपत्र, सम्मान और पुरस्कार इस बात के गवाह हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा ने उपचार को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा की जिम्मेदारी माना है। यही वजह है कि उन्हें भारतीय चिकित्सा रत्न जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी अलंकृत किया जा चुका है। रोगियों के प्रति संवेदनशीलता और आधुनिक तकनीकी समझ को मिलाकर जो उपचार मॉडल यहाँ तैयार हुआ है, वह लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। संस्थान के भीतर मौजूद विस्तृत कंसल्टेशन रूम, मेडिकल फाइलों की सुव्यवस्थित व्यवस्था और अत्याधुनिक निरीक्षण प्रणाली इस बात को स्पष्ट दिखाती है कि यहाँ मरीज को पूर्ण सम्मान और ध्यान के साथ सुना जाता है। पोस्टर में दर्शाए गए दृश्य—जहाँ डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा विभिन्न कार्यक्रमों में सम्मानित होते दिखाई देते हैं—उनकी निष्ठा और चिकित्सा जगत में उनकी मजबूत प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाते हैं। उनकी विदेशों में प्राप्त डिग्रियाँ—बीएचएमएस, एमडी (होम.), डी.आई.एच. होम (लंदन), एम.ए.एच.पी (यूके), डी.एच.एच.एल (यूके), पीएच.डी—स्पष्ट करती हैं कि वे केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिकित्सा अनुसंधान और उपचार के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। काशीपुर जैसे शहर में आधुनिक विचारों और उच्च गुणवत्ता वाले उपचार का ऐसा संयोजन मिलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। संस्था की ऊँची इमारत, सुगम पहुँच और प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित परिसर मरीजों को एक शांत, सकारात्मक और उपचार के अनुकूल माहौल प्रदान करता है। इसी माहौल में रोगियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली वैज्ञानिक होम्योपैथिक औषधियाँ उनके लंबे समय से चले आ रहे दर्द और समस्याओं को जड़ से ठीक करने की क्षमता रखती हैं। उपचार के दौरान रोगी को केवल दवा देना ही उद्देश्य नहीं होता, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य पुनर्स्थापन पर यहाँ विशेष ध्यान दिया जाता है। यही वह कारण है कि मरीज वर्षों बाद भी इस संस्थान को याद रखते हुए अपने परिवार और परिचितों को यहाँ भेजना पसंद करते हैं। समाज के विभिन्न समूहों से सम्मान प्राप्त करना, राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों द्वारा सराहना मिलना, और बड़े मंचों पर चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मानित होना—ये सभी तस्वीरें इस संस्था की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को और अधिक उजागर करती हैं। पोस्टर में दिखाई देने वाले पुरस्कार न केवल उपलब्धियों का प्रतीक हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि डॉ0 रजनीश कुमार शर्मा लगातार लोगों की सेहत सुधारने और चिकित्सा के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने में जुटे हुए हैं। उनका सरल स्वभाव, रोगियों के प्रति समर्पण और ईमानदारी के साथ सेवा का भाव उन्हें चिकित्सा जगत में एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व बनाता है। संपर्क के लिए उपलब्ध नंबर 9897618594, ईमेल drrajneeshhom@hotmail.com और आधिकारिक वेबसाइट www.cureme.org.in संस्थान की पारदर्शिता और सुविधा की नीति को मजबूत बनाते हैं। काशीपुर व आसपास के क्षेत्रों के लिए यह संस्थान विकसित और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बन चुका है जहाँ लोग बिना किसी डर, संदेह या हिचकिचाहट के पहुँचते हैं। बढ़ते रोगों और बदलती जीवनशैली के समय में इस प्रकार की संस्था का होना पूरा क्षेत्र के लिए बड़ी राहत और उपलब्धि है। आने वाले समय में भी यह संस्था चिकित्सा सेवा के नए आयाम स्थापित करती रहेगी, यही उम्मीद लोगों की जुबान पर साफ झलकती है।
स्वच्छ, सुंदर और विकसित काशीपुर के संकल्प संग गणतंत्र दिवस

लेटेस्ट

ख़ास ख़बरें

error: Content is protected !!