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अमान उर्फ एमी की जमानत याचिका खारिज से काशीपुर में सुरक्षा और न्याय चर्चा का केंद्र

काशीपुर अदालत ने गंभीर हत्या मामले में आरोपी अमान उर्फ एमी की जमानत याचिका खारिज की, अभियोजन के सबूतों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

काशीपुर। अदालत से शुक्रवार को आया फैसला शहर ही नहीं, पूरे जनपद में चर्चा का विषय बन गया, जब प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश काशीपुर, जिला ऊधम सिंह नगर की अदालत ने एक चर्चित आपराधिक मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। थाना काशीपुर में दर्ज एफआईआर संख्या 374/2025 के अंतर्गत भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 103(1) सहपठित 3(5) तथा आयुध अधिनियम की धारा 3/25 में दर्ज इस मामले में आरोपी अमान उर्फ अमन उर्फ एमी पुत्र इदरीश अहमद, निवासी मोहल्ला विजयनगर, नई बस्ती, काशीपुर को गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन, बचाव और वादी पक्ष के अधिवक्ताओं की मौजूदगी ने पूरे वातावरण को बेहद संवेदनशील बना दिया। राज्य सरकार की ओर से मामले की मजबूती के साथ पैरवी की गई, वहीं बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दाेष बताते हुए उसे साजिश के तहत फंसाए जाने का दावा किया।

जमानत याचिका का विरोध करते हुए अभियोजन के ओर से जोरदार बहस करते हुये अधिवक्ता रतन काम्बोज ओर संजीव आकश ने अदालत के समक्ष मामले की गंभीरता को प्रमुखता से रखा। इस दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रतन सिंह कांबोज ने कहा कि 31 अगस्त 2025 की रात करीब 12 बजे आरोपी अमान उर्फ अमन उर्फ एमी ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर वादी मुकदमा हरप्रीत उर्फ हैप्पी के पिता जसवीर उर्फ टोनी की तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी। अभियोजन के अनुसार यह वारदात सुनियोजित थी और इसमें अवैध हथियार का इस्तेमाल किया गया। अभियोजन ने यह भी बताया कि आरोपी की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त एक अदद तमंचा 315 बोर और एक अदद खोखा कारतूस 315 बोर बरामद हुआ है। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट भी अभियोजन के पक्ष में है, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक की मृत्यु का कारण एंटी मॉर्टेम फायर आर्म इंजरी से अत्यधिक रक्तस्राव बताया गया है।

अदालत में वादी मुकदमा की ओर से अधिवक्ता श्री संजीव कुमार आकाश ने अभियोजन के तर्कों का समर्थन करते हुए कहा कि यह मामला न केवल हत्या जैसे जघन्य अपराध से जुड़ा है, बल्कि समाज में डर और असुरक्षा पैदा करने वाला भी है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो गवाहों पर दबाव पड़ सकता है और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने और अभियोजन पत्रों, सीसीटीवी फुटेज तथा एफएसएल रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी की भूमिका गंभीर प्रतीत होती है। आरोपों की प्रकृति और साक्ष्यों की मजबूती को देखते हुए अदालत ने जमानत देना उचित नहीं समझा और आरोपी अमान उर्फ अमन उर्फ एमी की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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