काशीपुर। कांग्रेस की प्रस्तावित रैली में काशीपुर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के उत्साह की गर्माहट साफ दिखने लगी है, क्योंकि 14 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली कांग्रेस में एक नया जोश भर दिया है। स्थानीय स्तर पर इस महा जुटान को लेकर तैयारियों की रफ्तार लगातार तेज हो रही है और शहर में चर्चा का केंद्र इसी रैली को माना जा रहा है। कांग्रेस के कई जिम्मेदार पदाधिकारी और कार्यकर्ता पिछले कुछ दिनों से लोगों से संपर्कों को मजबूत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर काशीपुर इकाई ने इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने का दावा किया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा के निरीक्षण के बाद से संगठन जिस तरह सक्रिय दिखाई दे रहा है, उससे यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस काशीपुर से भारी संख्या में वाहन और समर्थकों के साथ दिल्ली पहुँच कर अपनी मौजूदगी मजबूत तरीके से दर्ज कराने की तैयारी में है।
स्थानीय बोर्ड सभा में आयोजित बड़ी बैठक के दौरान पर्यवेक्षक के रूप में पहुंचे वरिष्ठ कांग्रेस नेता अनुपम शर्मा ने कार्यकर्ताओं के उत्साह, रोष और रणनीति को लेकर विस्तृत रूपरेखा का परीक्षण किया। बैठक में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने उन्हें तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि शहर से जोश के साथ कार्यकर्ता निकलेंगे और यह संख्या कांग्रेस की ताकत को प्रदर्शित करेगी। हालांकि बैठक में कुछ बड़े नेताओं की अनुपस्थिति ने एक बार फिर भीतर की हलचल को हवा दी, लेकिन अनुपम शर्मा ने इसे संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए किसी भी तरह की गुटबाजी की बात को सिरे से नकार दिया। उनका कहना था कि अनुपस्थित नेता संभवतः अपने स्तर पर वाहनों और कार्यकर्ताओं की व्यवस्था में जुटे होंगे, इसलिए किसी को भी अलग खेमे से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

रैली के उद्देश्य को लेकर कार्यकर्ताओं में जितना जोश है, उतना ही गुस्सा भी दिखाई दे रहा है। अनुपम शर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि 14 दिसंबर की इस रैली का मुख्य मकसद उस व्यवस्था का विरोध करना है, जिसे वे “वोट चोरी” की संज्ञा दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर में जनता की मर्जी को नज़रअंदाज़ कर मशीनों के माध्यम से ऐसी सत्ता बनाई जा रही है जो लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ है। उनका कहना था कि जनता जिसे चुनती है, जीत किसी और की घोषित हो जाती है, और यही व्यवस्था लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने बताया कि काशीपुर से लगभग साढ़े पाँच सौ कार्यकर्ता दिल्ली रैली में शामिल होंगे और यह भी दावा किया कि असली लड़ाई उस व्यवस्था के खिलाफ है जिसने चुनावी सिस्टम को हाईजैक कर लिया है और मीडिया इन गंभीर प्रश्नों को जनता तक पहुँचाने में विफल रहा है।
मीडिया से विस्तार से बातचीत करते हुए अनुपम शर्मा ने यह भी कहा कि कांग्रेस की यह रैली सिर्फ विरोध का आयोजन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा करने की दिशा में एक तगड़ा संदेश है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी द्वारा प्रस्तुत तथ्य और आंकड़े इस बात को साबित करते हैं कि चुनावी व्यवस्था में गंभीर छेड़छाड़ हुई है, लेकिन मुख्यधारा का मीडिया इसे दबाने में लगा है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस किसी भी तरह की समानांतर गतिविधि को नकारती नहीं है और संगठन का हर सदस्य स्वागत योग्य है। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि महानगर अध्यक्ष अलका पाल पिछले दिनों घर-घर जाकर रूठे हुए कांग्रेसियों को मनाने में लगी रही हैं, और अधिकतर कार्यकर्ताओं ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना था कि किसी भी बैठक में अनुपस्थिति का मतलब यह नहीं है कि वह नेता विरोध में है; बल्कि संभव है कि वह तैयारी में योगदान दे रहा हो।
दूसरी तरफ काशीपुर की नगर अध्यक्ष अलका पाल ने भी मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रहे “वोट चोर,़ गद्दी छोड़” अभियान को मजबूत करने के लिए 14 दिसंबर की रैली को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस कार्यालय में हुई महत्वपूर्ण बैठक में कार्यकर्ताओं ने भारी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराई और इस बैठक में यह फैसला लिया गया कि काशीपुर से कम से कम सौ गाड़ियाँ और कई बसें दिल्ली रवाना होंगी। उन्होंने दावा किया कि काशीपुर कांग्रेस इस बार अपनी संख्या शक्ति से दिल्ली को हिला देगी और भाजपा के उस षड्यंत्र का कड़ा जवाब देगी जिसे उन्होंने महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा और बिहार के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों से जोड़कर बताया।
अलका पाल ने आगे कहा कि उत्तराखंड में भाजपा की ट्रिपल इंजन सरकार जनता को सिर्फ निराश करने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से लेकर बड़े भाजपा नेता संसद में खुद अपनी ही सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने धामी सरकार पर उत्तराखंड की संपत्तियों के दोहन का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा अंदर से टूट चुकी है और जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है। उनका दावा था कि 2027 के चुनाव में जनता बदलाव चाहती है और यह बदलाव कांग्रेस के पक्ष में साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि काशीपुर से कांग्रेस विधायक बनने की पूरी संभावना है क्योंकि जनसमर्थन पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गया है।
बैठक के बाद तैयारियों को लेकर उत्साह चरम पर दिखा और कांग्रेस नेताओं का दावा है कि काशीपुर से पाँच सौ से भी अधिक कार्यकर्ता रैली में पहुँचेंगे और यह संख्या बढ़कर छह सौ भी पार कर सकती है। अलका पाल ने यह भी कहा कि केवल कार्यकर्ताओं की संख्या ही नहीं, बल्कि गाड़ियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है, जो यह संकेत देती है कि कांग्रेस काशीपुर इस रैली को ऐतिहासिक बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। उनका कहना था कि भाजपा के कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार, रोजगार संकट और महंगाई से जनता त्रस्त है और दिल्ली की इस रैली के माध्यम से कांग्रेस यह संदेश देना चाहती है कि अब वक्त बदलाव का है और यह बदलाव काशीपुर से लेकर पूरे उत्तराखंड तक दिखेगा।
काशीपुर की आज की गतिविधियों में एक और दिलचस्प और महत्वपूर्ण पहलू साफ़ तौर पर देखने में आया कि नवनिर्वाचित कांग्रेस महानगर अध्यक्ष के नेतृत्व में संगठन लगातार एकजुट होता हुआ दिखाई दे रहा है। इस बढ़ती एकता का अंदाज़ा सिर्फ माहौल से ही नहीं, बल्कि बैठक में उमड़ी भारी भीड़ से भी लगाया जा सकता है, जहाँ कांग्रेस के हर वर्ग—वरिष्ठ नेताओं से लेकर यूथ कांग्रेस और महिला कांग्रेस तक ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यकर्ताओं का जोश, नेताओं का सक्रिय सहयोग और संगठनात्मक अनुशासन यह संकेत दे रहा है कि कांग्रेस अब किसी भी आंतरिक मतभेद को पीछे छोड़कर एक मजबूत टीम की तरह मैदान में उतर चुकी है। समर्पित कार्यकर्ताओं की इतनी बड़ी संख्या का एक मंच पर एकत्र होना अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि काशीपुर कांग्रेस अब पहले से कहीं अधिक सक्रिय, संगठित और चुनावी मोर्चों के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रही है। यह एकजुटता आने वाले राजनीतिक अभियानों में कांग्रेस की शक्ति को कई गुना बढ़ाने का संकेत देती है।



