काशीपुर। महनगर का बस अड्डा अब सिर्फ परिवहन का केंद्र नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक चेतना, महिला सम्मान और प्रशासनिक जिम्मेदारी की असल परीक्षा बन चुका है। यहां हर दिन जो अराजकता और भय का माहौल बनता जा रहा है, वह पूरे शहर के लिए एक गंभीर चेतावनी है। सवाल यह नहीं कि यह हालात कैसे बने, सवाल यह है कि क्या हम इसे यूं ही अराजकता के हवाले छोड़ देंगे? क्या हमारी बेटियां यूं ही डरते हुए स्कूल जाएंगी और महिलाएं असहज माहौल में सफर करेंगी? यह सिर्फ ट्रैफिक या अनुशासन का मुद्दा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सुरक्षा और सामाजिक मूल्य की रक्षा से जुड़ा है। अब समय चेतावनी देने का नहीं, जिम्मेदारी निभाने का है। प्रशासन को अब कड़े और ठोस कदम उठाने होंगे ताकि रोडवेज क्षेत्र को दोबारा सुरक्षित, मर्यादित और गरिमापूर्ण बनाया जा सके। यही सच्चा उत्तरदायित्व होगा।
काशीपुर शहर की परेशानियों में सबसे बड़ी समस्या इन दिनों रोडवेज बस अड्डे की है, जिसकी अनदेखी लगातार यात्रियों को भारी मुश्किलों में डाल रही है। वर्षों से क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी के कारण यह मुद्दा अब और भी गंभीर हो गया है। स्थिति यह है कि शहर में आने-जाने वाले यात्री रोडवेज बस पकड़ने के लिए जगह-जगह भटकने को मजबूर हैं और जनप्रतिनिधि इस पूरी समस्या पर मौन साधे बैठे हैं। शहर में कभी सरबरखेड़ा क्षेत्र में बस अड्डा बनाने की चर्चा होती है तो कभी कचनाल गोसाई क्षेत्र में, लेकिन आम नागरिक लगातार यह कह रहे हैं कि यह प्रयास बेकार साबित होंगे। उनका कहना है कि रोडवेज बस अड्डा शहर के बीच होना चाहिए ताकि हर दिशा में यात्रियों के लिए बस सुविधा आसानी से उपलब्ध हो सके। जब से आरओबी का निर्माण कार्य शुरू हुआ था तब से यह समस्या और गहरी हो गई है और अब तक यात्रियों की पीड़ा को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि नया बस अड्डा टांडा तिराहा क्षेत्र में सिंचाई विभाग के पुराने परिसर में ही बनाया जाना चाहिए। अधिकांश लोगों ने बातचीत में यही राय दी कि यही स्थान सबसे उपयुक्त है। यह भी सामने आया कि कचनाल गोसाई क्षेत्र में सूत मिल के पास बस अड्डा बनाने की योजना गलत साबित होगी क्योंकि वहां से न तो यात्रियों को सुविधा होगी और न ही वहां बसों का संचालन सुचारु ढंग से हो पाएगा। शहरवासी कहते हैं कि इस तरह का निर्णय केवल यात्रियों को और अधिक असुविधा में डालने वाला होगा। टांडा तिराहा क्षेत्र में बस अड्डा बनाने की मांग इसलिए भी सही मानी जा रही है क्योंकि यह स्थान शहर के बीचोंबीच है और यहां से विभिन्न दिशाओं में आसानी से बसें चलाई जा सकती हैं।
यात्रियों का दर्द इस बात से समझा जा सकता है कि रामनगर से दिल्ली जाने वाली बसें अब गुरुद्वारा बाईपास से होकर निकल जाती हैं और लोग टांडा तिराहा या डिजाइन सेंटर पर खड़े होकर घंटों इंतजार करने को विवश रहते हैं। कई बार यात्रियों को सड़क पर ही खड़ा रहना पड़ता है और बारिश हो या धूप, उन्हें कोई राहत नहीं मिलती। वहीं, जो स्थानीय रोडवेज बस स्टैंड पहले से मौजूद है, उसकी हालत पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। आरओबी बनने के बाद वहां बसों की आवाजाही भी लगभग रुक-सी गई है। काशीपुर डिपो की बसें अब बमुश्किल वहां पहुंच पाती हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि पुराने स्टैंड की उपयोगिता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। ऐसे में स्थानांतरण की मांग करना केवल औपचारिकता नहीं बल्कि शहरवासियों की वास्तविक जरूरत है।
बुजुर्ग नागरिकों का कहना है कि टांडा तिराहा सबसे सही विकल्प साबित हो सकता है क्योंकि यहां से सड़क मार्ग की कनेक्टिविटी अच्छी है और शहर के सभी हिस्सों से यात्री आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके अलावा यहां पहले से ही सिंचाई विभाग का पुराना भवन मौजूद है जिसे प्रशासन बहुउद्देशीय भवन के लिए चिह्नित कर चुका है और इसकी डीपीआर शासन को भेजी भी जा चुकी है। लेकिन जनता का मानना है कि इस जगह का इस्तेमाल बहुउद्देशीय भवन के लिए करने से अच्छा होगा कि यहां आधुनिक और सुलभ रोडवेज बस अड्डा बनाया जाए। क्योंकि यात्रियों के लिए बस अड्डा किसी भी शहर की धड़कन होता है और काशीपुर जैसे औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्र के लिए यह अत्यंत आवश्यक है।
काशीपुर के लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उनके निर्वाचित प्रतिनिधि इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं। आरओबी बनने के बाद से लगातार यात्रियों को परेशानी हो रही है, लेकिन न तो विधायक और न ही अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस दिशा में कोई ठोस पहल की है। लोगों का कहना है कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि वह इस मांग को गंभीरता से उठाएं और शासन-प्रशासन पर दबाव डालें कि नया रोडवेज बस अड्डा टांडा तिराहा क्षेत्र में ही बनाया जाए। बार-बार अखबारों और मीडिया के जरिए यह मांग उठाई गई है लेकिन अब तक समाधान नहीं हो सका है। इस लापरवाही के कारण हर दिन सैकड़ों यात्री सड़क पर धक्के खाने को मजबूर हो रहे हैं।
शहरवासियों का यह भी तर्क है कि यदि कचनाल गोसाई क्षेत्र में बस अड्डा बनाया जाता है तो वहां से बसें पकड़ना लोगों के लिए और अधिक कठिन हो जाएगा। वहां न तो उचित यातायात व्यवस्था है और न ही पर्याप्त जगह। ऐसे में बस अड्डा वहां शिफ्ट करना केवल समय और संसाधनों की बर्बादी होगी। जबकि टांडा तिराहा का क्षेत्र शहर की नब्ज है और यहां रोडवेज बस अड्डा बन जाने से शहर की ट्रैफिक समस्या भी कम होगी और यात्रियों को भी राहत मिलेगी। इसके अलावा यहां पर बस अड्डा बनने से आस-पास के बाजारों में भी रौनक बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।
जनता की यह लगातार मांग अब इस दिशा में संकेत दे रही है कि यदि उनकी आवाज़ को अनसुना किया गया तो आने वाले चुनावों में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। लोग अपने प्रतिनिधियों से जवाब चाहते हैं कि आखिर क्यों उनकी बुनियादी समस्या पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। रोडवेज बस अड्डे का निर्माण केवल यात्रियों की सुविधा का सवाल नहीं बल्कि यह शहर के विकास और पहचान से भी जुड़ा मुद्दा है। इसलिए लोगों का कहना है कि अब समय आ गया है जब इस विषय पर जल्द से जल्द निर्णय लिया जाए और टांडा तिराहा पर आधुनिक रोडवेज बस अड्डे का निर्माण कराया जाए ताकि काशीपुर शहर की धड़कन फिर से सामान्य हो सके और यात्रियों को बार-बार भटकने से मुक्ति मिले।



